राज्य सभा चुनाव के वोटिंग के समय राजद के एक विधायक गायब रहे, सवाल ये कि आरजेडी अपने इस विधायक के खिलाफ कार्रवाई कब करेगी, इस पर पार्टी चुप क्यों है?
Bihar Politics: बिहार में राज्यसभा की 5 पांचों सीटों पर चुनावों के नतीजों ने न सिर्फ महागठबंधन का गणित बिगाड़ दिया है, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर एक बड़ा संवैधानिक संकट भी खड़ा कर दिया है. यहां विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव निशाने पर आ गए हैं. दरअसल 16 मार्च को हुई वोटिंग के दौरान राजद के फैसल रहमान के अलावा कांग्रेस के तीन विधायकों ने भी मतदान नहीं किया. विधायक रहमान ने सफाई दी कि उनकी मां दिल्ली में बीमार हैं और उनके लिए मां से बढ़कर कुछ नहीं है. हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे ‘भीतरघात’ माना जा रहा है. इसके बावजूद तेजस्वी इस ‘गद्दारी’ को सहने के लिए मजबूर हैं.
वजह है कि रहमान पर कार्रवाई से तेजस्वी की कुर्सी भी जा सकती है. अगर तेजस्वी यादव फ़ैसल रहमान को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाल देते हैं, जिससे उनकी सदस्यता रद्द हो जाएगी तो RJD के MLA की संख्या घटकर 24 रह जाएगी. ऐसे में, तेजस्वी यादव से नेता प्रतिपक्ष (LoP) का आधिकारिक दर्जा और उससे जुड़े विशेषाधिकार छीन लिए जाएंगे. अब समस्या ये है कि जिस विधायक की वजह से उनके प्रत्याशी को हार मिली, उसके खिलाफ वे कोई सख्त कार्रवाई भी नहीं कर सकते.
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हालांकि, वर्ष 2010 में जब राजद को विधानसभा में सिर्फ 22 सीटें मिली थीं, तब नीतीश कुमार की सहमति से अब्दुल बारी सिद्दीकी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया गया था. लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह कहना मुश्किल है कि सत्ता पक्ष राजद को ऐसा कोई लाभ देगा. यदि नेता प्रतिपक्ष का दर्जा जाता है, तो तेजस्वी यादव से कैबिनेट मंत्री का दर्जा और सरकारी आवास भी वापस लिया जा सकता है.
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मसले पर फिलहाल राजद ने चुप्पी साधी हुई है लेकिन बीजेपी ने तेजस्वी पर निशाने साधने शुरू कर दिए हैं. भाजपा ने तेजस्वी को सीधी चुनौती देते हुए कहा है कि अगर उनमें हिम्मत है, तो वे बागी विधायक पर कार्रवाई करके दिखाएं.
बीजेपी प्रवक्ता नीरज कुमार ने एक वीडियो बयान जारी करते हुए तेजस्वी यादव पर जोरदार हमला बोला. बीजेपी नेता ने कहा, ‘अगर आपमें जरा भी हिम्मत और दम है तो बागी विधायक फैसल रहमान को पार्टी से निकालकर दिखाएं. लेकिन आप भी अच्छी तरह जानते हैं कि आप ऐसा नहीं कर सकते. आपके पास ऐसा करने की ताकत नहीं है. विधानसभा में आपके पास मुट्ठी भर MLA ही हैं. यहां आपकी मनमानी चलने का कोई चांस नहीं है. बिहार की जनता ऐसे बेबस और नाकाबिल नेता को देखना नहीं चाहती.’
नीरज कुमार का तंज उनकी व्यक्तिगत सोच है लेकिन सच ये भी है कि तेजस्वी का हाल ‘शोले के ठाकुर’ के जैसा हो गया है. वो न तो सवाल उठा पा रहे हैं, न ही कार्रवाई कर पा रहे हैं. कार्रवाई करें तो कुर्सी जाए और न करें तो पार्टी के नेताओं का विश्वास. उपर से अन्य नेताओं का निशाना भी बन रहे हैं. भारी उधेड़बुन की स्थिति बन गयी है तेजस्वी यादव के समक्ष. अब बड़ा सवाल ये है कि तेजस्वी इस भारी दुविधा से किस तरह से बाहर निकल पाते हैं.
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