बिहार चुनाव: ‘जाति बनाम जाति’ मॉडल पर लड़ा जा रहा चुनावी दंगल, 76 फीसदी सीटों पर एक ही जाति के प्रत्याशी

पहले चरण के चुनाव की 25 सीटों पर एक ही जाति के उम्मीदवार देंगे एक दूसरे को टक्कर, 20 सीटों पर दो से अधिक दलों के प्रत्याशी खेल रहे जाति बनाम जाति का खेल, थर्ड फ्रंट जाति के आधार पर दे रहा एनडीए और महागठंधन को कड़ी चुनौती

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Bihar Election 2020
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Politalks.News/Bihar. इस बार बिहार विधानसभा चुनाव ‘जाति बनाम जाति’ मॉडल पर लड़ा जा रहा है. विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा जारी की गई सूचियों और उम्मीदवारों के नामों को देखते हुए तो ऐसा कहना वाजिब है. यहां 76 फीसदी चुनावी सीटें ऐसी हैं जिन पर एक ही जाति के अलग अलग प्रत्याशी आपस में एक दूसरे को चुनौती दे रहे हैं. इनमें तीन बड़े गठबंधन के साथ अन्य निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल हैं. जिस तरह जातिगत राजनीति चल रही है, उसे देखकर तो ऐसा ही लग रहा है कि ये सभी विकास और अपने काम के दम पर नहीं बल्कि अपनी जाति को दिखाकर जनता को लुभाने का प्रत्यन्न करते नजर आएंगे.

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फिलहाल बात हो रही है बिहार में 28 अक्टूबर को होने वाले प्रथम चरण के विधानसभा चुनावों की. शुक्रवार को नामांकन का अंतिम दिन था. यहां चुनाव के पहले चरण में घोषित उम्मीदवारों की लिस्ट पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि 16 जिलों की 71 सीटों में से 76 फीसदी सीटों पर एक ही जाति के उम्मीदवार किसी न किसी गठबंधन से टकराते दिखेंगे. लोजपा ने जदयू की सीट-टू-सीट मार्किंग तो की ही है, जमालपुर, अमरपुर व सुल्तानगंज में महागठबंधन को भी जाति बनाम जाति में घेरा है.

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अंदरूनी तौर पर जाप एवं लोजपा के गठजोड़ और बसपा-रालोसपा के ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट ने जाति के आधार पर ऐसी चुनावी गोटी बिछाई है जो एनडीए और महागठबंधन के लिए भी परेशानी बन रही है. पप्पू यादव की जाप ने महागठबंधन तो रालोसपा-बसपा ने जदयू के जातीय समीकरण को कई सीटों पर साधा है. पहले चरण की 25 सीटें तो ऐसी हैं जहां एनडीए व महागठबंधन के प्रत्याशी एक ही जाति के हैं.

बेलहर-बाढ़ ऐसी सीटें हैं जहां चार प्रमुख दलों के प्रत्याशी एक जाति के हैं जबकि तारापुर, बरबीघा, संदेश, जगदीशपुर, शाहपुर, कुर्था, नवीनगर, झाझा व गोविंदपुर में तीन दलों के उम्मीदवार एक ही जाति बिरादरी के हैं. जगदीशपुर में केवल कुशवाहा जाति के उम्मीदवार आपस में एक दूसरे को चुनौती देते दिखेंगे. यहां जदयू, बसपा और लोजपा ने कुशवाहा को टिकट दिया है.

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बिहार की तारापुर विधानसभा सीट की बात करें तो महागठबंधन, जाप, लोजपा ने यादव उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है. वहीं एनडीए और रालोसपा ने कुशवाहा जाति के प्रत्याशियों पर दांव खेला है. इसी तरह बरबीघा वि.स. सीट पर एनडीए, महागठबंधन और लोजपा के सभी उम्मीदवार भूमिहार जाति के हैं. संदेश, गोविंदपुर, झाझा जैसी सीटों पर यादव उम्मीदवार एक दूसरे को चुनौती दे रहे हैं. जगदीशपुर एवं कुर्था में कुशवाहा, शाहपुर में ब्राह्मण और नवीनगर में राजपूत उम्मीदवार जाति बनाम जाति का खेल खेल रहे हैं.

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इसी तरह प्रदेश की 20 ऐसी विधानसभा सीटें हैं जहां दो दलों से ज्यादा उम्मीदवार एक ही जाति के हैं और एक दूसरे को चुनौती दे रहे हैं. रालोसपा ने अपने करीब 17 उम्मीदवार कुशवाहा जाति के चुनावी मैदान में उतारे हैं. रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी इसी जाति से आते हैं. इसी तरह धोरैया, बेलहर, मुंगेर, लखीसराय, बरबीघा, मोकामा, बाढ़, पालीगंज, विक्रम, संदेश, शाहपुर, बक्सर, रामगढ़, नोखा, कुर्था, ओबरा, नवीनगर, औरंगाबाद, बाराचट्‌टी, टिकारी, अतरी, वजीरगंज, हिसुआ, नवादा, वारसलीगंज सहित 25 सीटें ऐसी हैं जहां एनडीए और महागठबंधन ने जाति बनाम जाति का खेल खेला है.

बिहार विधानसभा चुनाव में थर्ड फ्रंट, लोजपा, जाप सहित अन्य स्थानीय पार्टियां भी जाति बनाम जाति का खेल बखूबी खेल रही है. इन सभी ने मिलकर करीब करीब हर सीट पर मुकाबला जाति के आधार पर त्रिकोणीय बना दिया है. हालांकि पलड़ा एनडीए और महागठबंधन का ही भारी है लेकिन जाति के आधार पर चुनावी रणनीति/राजनीति हमेशा से हिट रही है. ऐसे में इन पार्टियों की यह चुनावी रणनीति दोनों बड़े गठबंधनों के आधार को तोड़ती-मरोड़ती दिखेगी.

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