जाजड़ा ने क्यों मारा निर्मल को थप्पड़, कहा- गाली का जवाब गाली और हथियार का जवाब मिलेगा हथियार से

निर्मल और उसके समर्थक केंद्रीय मंत्री को काले झंडे दिखाकर स्याही फेंकना चाहते थे, मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की, इसके बाद विवाद बढ़ गया और हाथापाई की नौबत आ गई- अरविंद जाजड़ा, अगर मैं काली स्याही झंडे लेकर गया था तो क्या उन्हें मंत्री जी ने कहा था कि तू जाकर इसे ठोक?- निर्मल चौधरी

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Arvind Jajda v/s Nirmal Chowdhary. हाल ही में बीते सोमवार को जयपुर में महारानी कॉलेज के छात्रसंघ कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में खुलकर हुई जूतम पैजार और मंच पर हुई मारपीट के बाद से प्रदेश की छात्र राजनीति में गरमाई छाई हुई है. दोनों पक्षों के बीच एक दूसरे के खिलाफ जुबानी जंग जारी है. इसी कड़ी में राजस्थान छात्र संघ महासचिव अरविंद जाजड़ा ने मीडिया में बयान देते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष निर्मल चौधरी पर उकसाने और उसके समर्थकों की ओर से गाली-गलौच करने का आरोप लगाया है. बता दें जयपुर के महारानी कॉलेज में छात्रसंघ कार्यालय उद्घाटन कार्यक्रम में निर्मल चौधरी को महासचिव अरविंद जाजड़ा ने कसकर थप्पड़ जड़ दिया था. इसके बाद मंच पर ही दोनों छात्र नेताओं के समर्थक आपस में जोरदार तरीके से भीड़ भिड़. इस दौरान मंच पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह भी शेखावत मुख्य अतिथि के रुप में मौजूद थे.

महासचिव अरविंद जाजड़ा ने कहा कि थप्पड़ यूं ही नहीं लगते हैं. पहले निर्मल ने उकसाया और उसके कार्यकर्ताओं ने गाली-गलौच की थी. वो कार्यक्रम बिगाड़ने की मंशा से ही कॉलेज में आए थे. अरविंद ने कहा कि वो खुद निर्मल चौधरी के साथ आए थे और लड़कों को मंच पर जाने से रोक रहे थे. अरविंद ने आरोप लगाया कि मंच पर निर्मल के साथ हिस्ट्रीशीटर तक पहुंचे थे. अरविंद ने कहा कि निर्मल वहां मंच को नाथी का बाड़ा समझकर घुस गया था. नाथी का बाड़ा कांग्रेस में है, यहां ऐसा नहीं चलता. गाली-गलौच करने पर जवाब तो मिलेगा ही. अरविंद ने कहा कि उन्हें निर्मल पर हाथ उठाने का कोई खेद नहीं है. वो एबीवीपी के कार्यकर्ता हैं और स्वामी विवेकानंद को फॉलो करते हैं. लेकिन निर्मल शिक्षकों को आंखें निकालने की धमकी देता है. प्रोफेसर से लेकर पुलिस प्रशासन तक हर एक से असभ्य तरीके से बात करना, निर्मल की फितरत है.

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वहीं महारानी कॉलेज की छात्रसंघ संयुक्त सचिव शहनाज बानो ने मीडिया को बताया कि अरविंद जाजड़ा ने 3 दिन पहले ही निर्मल चौधरी को पीटने की चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर निर्मल स्टेज पर चढ़ गया तो मैं उसके जूते मारूंगा. वहीं इस पर अरविंद जाजड़ा का कहना है कि निर्मल और उसके समर्थक केंद्रीय मंत्री को काले झंडे दिखाकर स्याही फेंकना चाहते थे. मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की, इसके बाद विवाद बढ़ गया और हाथापाई की नौबत आ गई थी. वहीं, इस पूरे मामले पर निर्मल चौधरी ने भी अपना पक्ष रखा है. निर्मल का कहना है कि अगर मैं काली स्याही झंडे लेकर गया था तो क्या उन्हें मंत्री जी ने कहा था कि तू जाकर इसे ठोक? अगर मैं गुंडा बदमाश हूं, तो आपको यह अधिकार किसने दिया कि आप मेरे साथ लड़ाई झगड़ा करें. वह भी एक सार्वजनिक मंच पर, क्या उन्हें कानून पर भरोसा नहीं है.

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इस पर अरविंद जाजड़ा ने कहा कि ये कोई प्री प्लान नहीं था. यदि ऐसा कोई प्लान होता तो मंच पर 100 लोगों को लेकर जाते. अरविंद ने कहा कि मैं लॉ का स्टूडेंट हूं और हर काम कानून और संविधान के दायरे में रहकर ही करता हूं. निर्मल राजस्थान यूनिवर्सिटी का छात्रसंघ अध्यक्ष है, लेकिन उसका कोई कैडर नहीं रहा. वह हिस्ट्रीशीटर और गुंडों के पांव में धोक देता है. 15-15 गाड़ियों का काफिला लेकर लोगों में खौफ पैदा करना चाहता है. यह राजस्थान यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष को शोभा नहीं देता. मैं निर्मल से डरने वाला नहीं हूं. अगर वह गाली गलौज करेगा तो गाली गलोज से उसको जवाब दूंगा. अगर वह शांतिप्रिय बात करेगा तो शांतिप्रिय तरीके से उससे बात कर लूंगा. वहीं अगर उसने हथियार उठाए तो मैं भी हथियार से ही उसका जवाब दूंगा, इसका कोई दूसरा ऑप्शन नहीं होगा.

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वहीं एबीवीपी के इकाई अध्यक्ष भरत भूषण ने कहा कि अरविंद और निर्मल को बीच टकराव करीब 1 महीने से चल रहा था. निर्मल ने अरविंद के कार्यालय के कांच भी तोड़े थे. निर्मल के कार्यकर्ताओं ने जनता स्टोर पर छात्राओं के साथ बदतमीजी भी की. आए दिन गुरुजन के साथ गलत व्यवहार का वीडियो सामने आता रहता है. जबकि अरविंद विद्यार्थी परिषद का कार्यकर्ता है जो स्वामी विवेकानंद को मानता है और कानून की पढ़ाई कर रहा है. यही नहीं भरत ने आगे कहा कि निर्मल के साथ जो लोग स्टेज साझा कर रहे थे, उनमें एक लाल कोठी क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है और एक झालाना क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है. भरत भूषण ने कहा कि ये तमाचा पुलिस और विश्वविद्यालय के गुरुजनों के सम्मान में पड़ा है. इससे वो निर्मल से नार्मल हो गया. रील बनाने के चक्कर में उसकी रेल बन गई.

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