सम्राट चौधरी नहीं मोदी-शाह का ये करीबी बनेगा बिहार का मुख्यमंत्री!

पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के करीबी हैं सिन्हा, आरएसएस के साथ साथ और मोदी-शाह का भरोसा कुर्सी के फासले को पाटने में रहेंगे मददगार

Bihar Politics: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की राज्यसभा में एंट्री कंफर्म हो चुकी है. उन्होंने उच्च सदन के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया है. अब बिहार की राजनीति में जो सबसे बड़ा सवाल सामने आया है, वो है: नीतीश के बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? दो दशक से सत्ता पर काबिज नीतीश के राज्यसभा जाने को बिगड़ते स्वास्थ्य एवं ढलती आयु का हवाला दिया जा रहा है. हालांकि ये राजनीति है और यहां कुछ भी स्थायी नहीं. बिहार की सत्ता की कुर्सी के लिए सम्राट चौधरी सहित कई नाम दौड़ में बताए जा रहे हैं लेकिन विजय कुमार सिन्हा इस दौड़ में सबसे आगे हैं और उन्हें भारतीय जनता पार्टी की ओर से बिहार का नया मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से निकले विजय सिन्हा वर्तमान में बिहार के डिप्टी सीएम भी हैं. विजय सिन्हा को अक्सर RSS की विचारधारा के प्रति पूरी तरह समर्पित नेता के रूप में देखा जाता है. वह न केवल संघ के विचारों से प्रभावित हैं, बल्कि उन्होंने एक स्वयंसेवक के रूप में अपना सार्वजनिक जीवन शुरू किया था. इन्होंने संघ के रास्ते बीजेपी की राजनीति में एंट्री की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के करीबी भी माने जाते हैं.

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बिहार की राजनीति में उनकी पहचान एक ‘प्रखर हिंदुत्ववादी’ नेता की रही है, जो संघ के मूल्यों को अपनी राजनीति का आधार मानते हैं. उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत संघ और उसके छात्र संगठन ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के कार्यकर्ता के रूप में की और वर्तमान में राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक प्रमुख चेहरा बने हुए हैं.

एक प्रशासनिक अनुभवी के रूप में अपनी स्पष्ट छवि बना चुके विजय सिन्हा 2010 से लगातार लखीसराय विधानसभा से चुनाव जीतते आ रहे हैं. उन्होंने नीतीश सरकार में मंत्री से लेकर स्पीकर की भूमिका में अपनी छाप छोड़ी है. नीतीश ने जब बीजेपी का साथ छोड़ा, तब विधानसभा में इन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया गया. इसके बाद दो बार से लगातार ये भी डिप्टी सीएम के पद पर हैं.

विजय सिन्हा का सबसे नैरेटिव है कि ये भूमिहार जाति से आते हैं, जिनकी आबादी बिहार में फिलहाल 2.87 फीसदी है. इसके विपरीत प्रदेश की राजनीति बीते 35 सालों से पिछड़ा की है. चूंकि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के रूप में बीजेपी का यह प्रयोग सफल रहा है. ऐसे में पार्टी इस तरह का रिस्क लेने से चूकेगी नहीं.

वहीं बिहार में OBC को साधने के लिए सम्राट चौधरी को आगे किया जा रहा है लेकिन बेहद आक्रामक शैली और पार्टी बदल रणनीति उनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा है. बीजेपी में आने से पहले सम्राट राजद और जदयू में रह चुके हैं और उनके नाम पर कमोबेश बीजेपी में ही विरोधाभास की स्थिति है. जब वे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे तब कई दिग्गज नेताओं ने उन्हें आयातित भाजपाई बताया था. वर्तमान में सम्राट बिहार के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री भी हैं.

चूंकि सम्राट चौधरी के पास सरकार चलाने से लेकर संगठन चलाने तक का अनुभव है और सरकार के साथ-साथ वे विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं. इसके बावजूद उनकी बेहद आक्रामक छवि एक मुख्यमंत्री के तौर पर ठीक नहीं बैठती. ऐसे में विजय कुमार सिन्हा बीजेपी के लिए एक परफेक्ट चॉइस साबित हो रहे हैं. आरएसएस के साथ साथ और मोदी-शाह का भरोसा उनके और कुर्सी के बीच का फासला पाटने में मददगार रह सकते हैं.