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विशेष रिपोर्ट

अनंत सिंह के जदयू से निकाले जाने के बाद 'मोकामा' में किस करवट बैठेगा ऊंट: क्या है इस सीट का राजनीतिक समीकरण?

25 अक्टूबर 2026
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अनंत सिंह के जदयू से निकाले जाने के बाद 'मोकामा' में किस करवट बैठेगा ऊंट: क्या है इस सीट का राजनीतिक समीकरण?

अनंत सिंह के निष्कासन के बाद बिहार में राजनीतिक हलचल तेज, मोकामा सीट पर उपचुनाव की आशंका, कड़क है यहां की माटी क्योंकि बाहुबल से तय होती है जीत की गारंटी

जदयू के विधायक अनंत कुमार सिंह को पार्टी से निष्काषित करने के बाद से बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो चली है. अनंत सिंह के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों और पार्टी के दिशा-निर्देशों की अवहेलना सहित विधान परिषद चुनाव (MLC) में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने के आरोप लगे हैं, जिसके चलते उनको 6 साल के लिए पार्टी से रवाना किया गया है. साथ ही विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की भी सिफारिश की गई है. अब मोकामा विस सीट पर उप चुनाव होने की संभावना बढ़ रही है.

मोकामा की माटी थोड़ी कड़क है. यह बीते दिनों की बात हो गई जब मोकामा विधानसभा भी आम चुनावी क्षेत्र की तरह अपना प्रतिनिधि चुना करता था. पिछले कई दशकों में यहां स्थितियां और राजनीतिक तौर तरीके दोनों बदले हैं. मोकामा की राजनीति जब गर्म हवा के साथ बही तो प्रारंभ में बाहुबली उम्मीदवारों की जीत तय किया करने लगे. अब मोकामा में केवल और केवल बाहुबली ही मैदान में जीत की नई परिभाषा गढ़ने लगे.

1972 से 1990 तक बाहुबलियों के दम पर जीत

1972 के विधानसभा चुनाव के साथ चुनाव में बाहुबलियों की उपयोगिता बढ़ गई. बाहुबली के प्रभाव सीमा वाले चिन्हित किए जाने लगे. चुनाव में पैसा, हथियार का इस्तेमाल होने लगा. 1972 से 1980 यानी 10 वर्ष तक कांग्रेस के बाहुबली कृष्णा शाही का वर्चस्व रहा. 1980 से 1990 तक श्यामसुंदर सिंह की दबंगई बरकरार रही. ये कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतते रहे. साल 1989 मोकामा क्षेत्र को पूर्णतः बाहुबलियों के हाथ करने के लिए जाना जाता है. यह वह समय था जब नीतीश कुमार बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से चुनाव में खड़े हुए थे. राजनीतिक गलियारों में तब नीतीश कुमार की जीत में दो बाहुबलियों के सहयोग की बड़ी चर्चा हुई. इनमे से एक थे दिलीप सिंह और दूसरे थे दुलारचंद यादव. दुलारचंद यादव और दिलीप सिंह को एक प्लेटफार्म पर लाने में लालू प्रसाद की प्रमुख भूमिका रही. बदले में नीतीश कुमार ने भी अपनी दोस्ती निभाई.

1990 का विधानसभा चुनाव और नीतीश कुमार

इस क्षेत्र के बदलाव की कहानी में 1990 का बहुत महत्व है. कहा जाता है कि दिलीप सिंह को मोकामा से उम्मीदवारी जनता दल से नीतीश कुमार ने सुनिश्चित कराई. फिर तो यह सिलसिला चल पड़ा. 1990 के विधान सभा चुनाव में जनता दल से दिलीप सिंह ने जीत हासिल की. 1995 में दिलीप सिंह फिर खड़े हुए और जीत भी दर्ज की. वर्ष 2000 के विधानसभा में यह सीट निर्दलीय चुनाव लड़ कर बाहुबली सूरजभान सिंह ने चुनाव जीत ली.

​बीते दो दशकों से अनंत सिंह का राज

2005 में दिलीप सिंह की मौत के बाद अनंत सिंह जदयू के टिकट पर चुनावी समर में उतरे और पहले ही चुनाव में धमाके की जीत के साथ बिहार विधानसभा पहुंचे. इसके बाद तो 2010 से 2015 जदयू के टिकट पर और 2015 से 2020 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय जीता. 2020 के विधानसभा चुनाव राजद के उम्मीदवार के रूप में जीता. उन्होंने चुनाव जीत तो लिया लेकिन एके 47 और हैंड ग्रेनेड रखने के जुर्म में उन्हें 10 वर्ष की सजा सुना दी गई और विधायकी भी रद्द हो गई.

इसके बाद 2022 में हुए उप चुनाव में राजद की नीलम देवी ने जीत दर्ज की लेकिन 2025 में हुए विस चुनाव में अनंत सिंह ने जदयू के टिकट पर फिर से ताल ठोकी और एक तरफा जीत हासिल कर बाहुबल का लोहा मनवाया. अनंत सिंह के बाहुबल का परिचय इसी बात से मिलता है कि पार्टी से निकाले जाने के बावजूद समर्थकों ने उनके निवास पर जमकर आतिशबाजी की. खुद अनंत सिंह स्वयं पर हुई कार्रवाई से बेफ्रिक दिखे.

अब मोकामा सीट पर उप चुनाव होगा या नहीं, फिलहाल तय नहीं हुआ है, लेकिन जो भी हो, यहां की चुनावी हवा हर बार की तरह गर्म ही रहेगी.

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