काले धन के कुबेर होंगे बेनकाब, स्विस बैंक के खातेधारकों की जानकारी मिली सरकार को

काला धन यानि ब्लैक मनी (Black Money) के खिलाफ लड़ाई में भारतीय सरकार (Indian Government) को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. स्विट्जरलैंड ने स्विस बैंक (Swiss Bank) में जमा भारतीय खातेधारकों की जानकारी केन्द्र सरकार को सौंप दी है. इसके बाद भारत में काले धन के कुबेर पूरी तरह से बेनकाब होंगे. हालांकि अभी पहले दौर की जानकारी ही दी गई है. स्विट्जरलैंड के टैक्स विभाग के अनुसार, इसके बाद भारत सरकार को अगली जानकारी 2020 में सौंपी जाएगी. बता दें, भारत कुछ चुनिंदा देशों में से एक है जिन्हें ये जानकारी मिल रही है. यह सूचना भारत को स्विटजरलैंड सरकार (Switzerland Government) ने ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ इन्फॉर्मेशन (AEOI) की नई व्यवस्था के तहत पहली बार दी है.

स्विट्जरलैंड के संघीय कर प्रशासन (FTA) ने भारत सहित 75 देशों के साथ बैंक खातों के ब्योरे साझा किए हैं. सभी देशों को कुल मिलाकर 31 लाख खातों का डेटा दिया गया है जो रडार पर हैं. इनमें भारत से भी कई धन कुबेरों के खाते शामिल हैं. ब्योरों में खाताधारक का नाम, राष्ट्रीयता और खाते में मौजूद रकम जैसी जानकारियां है. 2018 के आंकड़ों के अनुसार, भारतीयों के 6757 करोड़ रुपये स्विस बैंकों में जमा हैं. हालांकि, इसमें से कितना काला धन है और कितना वैध, इसकी जानकारी स्विस बैंकों की ओर से नहीं दी गई.

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माना जा रहा है कि स्विट्जरलैंड में दुनियाभर के 75 देशों के करीब 31 लाख खाते हैं स्विस बैंकों के जरिए जो जानकारी मिली है, उस पर सरकारी सूत्रों का कहना है कि जो जानकारी मिली है, उसमें सभी खाते गैरकानूनी नहीं हैं. सरकारी एजेंसियां अब इस मामले में जांच शुरू करेंगी जिसमें खाताधारकों के नाम, उनके खाते की जानकारी को बटोरा जाएगा और कानून के हिसाब से एक्शन लिया जाएगा. इन जानकारियों में बैंक खाते में जमा राशि से लेकर धनराशि ट्रांसफर करने के ब्योरे के साथ ही आय का भी पुख्ता विवरण मिला है. इसमें सिक्योरिटीज और अन्य संपत्तियों में निवेश आदि शामिल हैं.

सूत्रों ने बताया कि इन सूचनाओं के आधार पर भारत बेहिसाबी धन रखने वाले लोगों के खिलाफ अभियोजन का ठोस मामला बना सकता है. इस सूची में ज्यादातर उद्योगपतियों के नाम हैं. इनमें प्रवासी भारतीय (एनआरआई) भी शामिल हैं जो दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों, अमेरिका और ब्रिटेन के साथ कुछ अफ्रीकी और दक्षिण अमेरिकी देशों में बस चुके हैं. इसके अलावा, 100 ऐसे मामले उन भारतीयों के हैं जिनके खाते बहुत पुराने हैं लेकिन कार्रवाई से बचने के लिए इन सभी ने 2018 से पहले ही इन खातों को बंद कर दिया. ये खाते वाहन, कल पुर्जा, रसायन, वस्त्र, रीयल एस्टेट, हीरा एवं आभूषण और इस्पात आदि करोबार से जुड़े कारोबारियों के बताए जा रहे हैं. स्विस बैंकों से प्राप्त जानकारियों के विश्लेषण में उन सूचनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जो राजनीतिक संपर्क रखने वाले लोगों से संबंधित है.