अर्जुन सिंह की जीवनी | Arjun Singh Biography in Hindi

Arjun Singh Biography in Hindi – इस लेख में हम आपको अर्जुन सिंह की जीवनी, शिक्षा, परिवार, बच्चों और राजनीतिक करियर के बारे में बताएंगे.

Arjun Singh Latest News – अर्जुन सिंह बंगाल भाजपा का बड़ा चेहरा हैं. सिंह चार बार के विधायक और एक बार के लोकसभा सांसद हैं. जमीन से जुड़ी राजनीति करके आगे बढ़ने वाले सिंह, तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर 2001 से लगातार चार बार भाटपाड़ा से विधायक चुने जा चुके है. 2019 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली, फिर भाजपा के टिकट पर वे बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए. अब एक बार वे फिर से चुनावी संग्राम में शामिल है. भाजपा ने उन्हे 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में नोआपारा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. इस लेख में हम आपको अर्जुन सिंह की जीवनी (Arjun Singh Biography in Hindi) के बारें में जानकारी देने वाले है.

अर्जुन सिंह की जीवनी (Arjun Singh Biography in Hindi)

पूरा नामअर्जुन सिंह
उम्र64 साल
जन्म तारीख2 अप्रैल 1962
जन्म स्थानपश्चिम बंगाल
शिक्षा12वीं
कॉलेजजगतदल हाई स्कूल (एचएस)
वर्तमान पदसांसद
व्यवसायराजनीतिक
राजनीतिक दलभाजपा
वैवाहिक स्थितिविवाहित
पिता का नाम
माता का नाम
पत्नी का नाम
बेटें का नाम
बेटी का नाम
स्थाई पता
वर्तमान पता
फोन नंबर
ईमेल

अर्जुन सिंह का जन्म और परिवार (Arjun Singh Birth & Family)

अर्जुन सिंह का जन्म 2 अप्रैल 1962 को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में हुआ था. उनके पिता का नाम स्वर्गीय सत्यनारायण सिंह है, जो कांग्रेस के एक सक्रिय राजनीतिज्ञ और भाटपाड़ा से तीन बार के विधायक थे.

सिंह विवाहित है और चुनाव में दिए गए हलफनामें के अनुसार उनकी पत्नी गृहणी है. उनके बेटे का नाम पवन कुमार सिंह है, जो पश्चिम बंगाल भाजपा के एक सक्रिय नेता हैं. वह भाटपाड़ा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं. अर्जुन सिंह धर्म से हिन्दू है और जाति से वे राजपूत है. उनपर 93 आपराधिक मामलें दर्ज है.

अर्जुन सिंह की शिक्षा (Arjun Singh Education)

अर्जुन सिंह ने वर्ष 1980 में जगतदल हाई स्कूल (एचएस) से 12वीं की.

अर्जुन सिंह का राजनीतिक करियर (Arjun Singh Political Career)

पेशे से जुट व्यवसायी रहे, अर्जुन सिंह की राजनीतिक यात्रा नब्बे के दशक के शुरुआत में हुई. वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए. वर्ष 1995 में उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में भाटपाड़ा नगरपालिका से चुनाव लड़ा और जीतकर पार्षद बने. बाद में, वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और 2001 में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में भाटपाड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा. वे अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सीपीआई (एम) के रामप्रसाद कुंडू को हराकर पहली बार विधायक बने.

2004 के आम चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें बैरकपुर लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया, लेकिन वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के तारित बरन टॉपदार से हार गए. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में 2001 से लगातार चार बार भाटपारा विधानसभा सीट जीती. सिंह बंगाल के नेता अवश्य है, पर इनका परिवार उत्तर प्रदेश व बिहार से जुड़े रहे है, लेकिन इनकी पहले की पीढ़ी बंगाल में जाकर बस गई इसलिए उन्होंने बंगाल से ही अपनी राजनीति शुरू की. अब यही कारण रहा कि बंगाली के साथ-साथ उनकी पकड़ हिंदी-भाषी में भी रही है और इसका सीधा-सीधा फायदा पार्टियां भी उठाती रही है, जिनसे वे जुड़े रहे है. वे पार्टियां भी उन्हें बंगाली और हिंदी-भाषी के बीच सेतु की तरह प्रयोग में लाते है. इसी कड़ी में टीएमसी ने उन्हें तृणमूल कांग्रेस का हिंदी विंग का अध्यक्ष नियुक्त किया था. वे तृणमूल कांग्रेस के उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब के राज्य प्रभारी और भाटपारा नगर पालिका के अध्यक्ष भी रह चुके है.

17वीं लोकसभा चुनाव में टीएमसी से टिकट मांगने पर पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिससे नाराज होकर ठीक चुनाव से पहले, मार्च 2019 में वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए और 2019 के लोकसभा चुनाव में बैरकपुर संसदीय सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, जिसमें उनकी जीत हुई. इस जीत के साथ ही उन्होंने पहली बार राज्य की राजनीति से आगे बढ़कर केंद्र की राजनीति में कदम रखा.  मई 2022 में, उन्होंने बैरकपुर में जूट मिलों के बंद होने का मुद्दा उठाया और इसके बाद उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए केंद्रीय कपडा मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की.

उनके अनुसार, बैठक का परिणाम उनकी अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा, इसके बाद वे 22 मई को तृणमूल कांग्रेस में पुनः शामिल हो गए. लेकिन 18वीं लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, 15 मार्च 2024 को एक बार फिर वे भाजपा में तब शामिल हो गए जब टीएमसी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाने से इंकार किया. हालांकि इस बार उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा. उन्हें टीएमसी के पार्थ भौमिक ने लगभग पैसठ हजार वोटो के अंतराल से पराजित किया. लोकसभा चुनाव में मिली पराजय के बाद वे एक बार फिर से चुनाव का सामना कर रहे है. 2026 में हो रहे पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें नोआपारा विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है.

अर्जुन सिंह की संपत्ति (Arjun Singh Property)

2024 में लोकसभा चुनाव में दाखिल किये गए घोषणापत्र के अनुसार अर्जुन सिंह की कुल संपत्ति 2.74 करोड़ रूपये हैं, जबकि उनपर 1.18 करोड़ रूपये का कर्ज हैं.

इस लेख में हमने आपको अर्जुन सिंह की जीवनी (Arjun Singh Biography in Hindi) के बारे में जानकारी दी है. अगर आपका कोई सुझाव है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं.