दो दशक से सत्ता की धुरी नीतीश कुमार दे रहे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, उच्च सदन में बैठेंगे, बिहार में दो घर दूर लालू-राबड़ी आवास, अब होगी ‘चाय पर चर्चा’
Bihar Politics: बिहार में दो दशक से सत्ता की धुरी बने ‘सुशासन बाबू’ नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य की शपथ ग्रहण कर चुके हैं. आगामी 15 अप्रैल को बिहार में सरकार बदलना और नया मुख्यमंत्री मिलना तय है. इसी के साथ बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है. अब नीतीश 1 अणे मार्ग से 7 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में शिफ्ट हो रहे हैं. हालांकि इस आवास का आवास का इस्तेमाल अब तक नीतीश सीएम ऑफिस के तौर पर कर रहे थे. इस आवास से नीतीश का खास मोह है. खैर..जो भी हो लेकिन खास बात ये है कि ये आवास राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव और पूर्व सीएम राबरी देवी के सरकारी आवास के निकट है. यानि दूसरे शब्दों में कहा जाए तो अब नीतीश कुमार बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के पड़ौसी बनने जा रहे हैं.
नीतीश ने 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद की शपथ ली थी. अब नीतीश 14 अप्रैल को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और अगले ही दिन बिहार में नई सरकार बन जाएगी. नीतीश दिल्ली तो जा रहे हैं, लेकिन बिहार में अपना ठिकाना नहीं छोड़ेंगे. नीतीश ने अपनी देखरेख में ही इस बंगले को बनवाया था लेकिन विपक्ष के दो सरकारी आवास रखने का आरोप के बाद इसे मुख्य सचिव के नाम अलॉट किया गया था.
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वैसे तो ये एक सामान्य सरकारी प्रक्रिया है, लेकिन इसे सियासी गलियारों में एक सियासी संभावना के तौर पर भी देखा जा रहा है. नीतीश के सरकारी आवास से राबड़ी आवास बस दो घर आगे है. दोनों बंगलों के बीच की दूरी करीब 200 मीटर होगी. ऐसे में लालू और नीतीश के बीच सियासी खिचड़ी पकने की संभावनाओं से इनकार तो नहीं किया जा सकता.
ये तो तय है कि नीतीश अपनी मर्जी से सीएम पद का मोह नहीं छोड़ रहे हैं. अंदर ही अंदर नीतीश भी चाहते हैं कि उनके सुपुत्र निशांत उनकी जगह सीएम बने, क्योंकि अब निशांत की जदयू के कर्ताधर्ता होंगे. हालांकि निशांत को प्रदेश का डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा चल रही है. वहीं नीतीश की पार्टी (85) बीजेपी (89) से केवल 4 सीट पीछे है. ऐसे में नीतीश पर केवल सीएम पद से इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है.
वहीं लालू प्रदेश की राजनीति को अपने पक्ष में करने में माहिर हैं. बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद वो लालू ही थे, जिन्होंने नीतीश को अपने साथ मिलाया और मिड सत्र में जदयू-राजद सरकार बनायी. कम सीटे होने के बावजूद उन्होंने नीतीश को सत्ता की बागड़ौर सौंपी. लालू भी अपने लाल तेजस्वी को फलते फूलते देखना चाहते हैं कि राजनीति से दूर हो रहे लालू के लिए यह निकट भविष्य में साकार होते नहीं दिख रहा. ऐसा तभी संभव है जब नीतीश से हाथ मिला लिया जाए.अब नीतीश और लालू पड़ौसी बन ही गए हैं और दोनों के बीच इस तरह के गैर राजनैतिक संवाद होना लाजमी है. खैर देखना होगा कि इस तरह के संयाग बिहार की राजनीति में बन भी पाते हैं या फिर नहीं.










