भाजपा सरकार केवल ‘कागजी घोड़े’ दौड़ा रही, जनता को गुमराह करना बंद करे: टीकाराम जूली

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यमुना जल समझौते पर घमासान: ‘DPR में उलझी रही सरकार’, जूली का आरोप

Rajasthan Politics: राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आयोजित हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘तथ्यों से परे’ और ‘भ्रामक’ करार दिया है. जूली ने कहा कि सरकार अपनी उपलब्धियों के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि हकीकत में वे केवल कांग्रेस सरकार के विजन और मेहनत का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं.

रिफाइनरी और मेट्रो कांग्रेस की देन, भाजपा ने किया अटकाने का ‘पाप’
प्रेस को संबोधित करते हुए श्री जूली ने स्पष्ट किया कि जयपुर मेट्रो और पचपदरा रिफाइनरी जैसे ऐतिहासिक प्रोजेक्ट कांग्रेस की दूरगामी सोच का परिणाम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि: पचपदरा रिफाइनरी: कांग्रेस ने पश्चिमी राजस्थान की तकदीर बदलने के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू किया, लेकिन भाजपा ने राजनीतिक द्वेष के कारण इसे वर्षों तक लटकाए रखा. इससे न केवल प्रोजेक्ट की लागत बढ़ी, बल्कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलने में भी देरी हुई.

जयपुर मेट्रो: राजस्थान में आधुनिक परिवहन के युग की शुरुआत कांग्रेस ने की थी, जिसका श्रेय आज भाजपा लेने का प्रयास कर रही है.

यमुना जल समझौता: ‘आधा कार्यकाल खत्म, फिर भी धरातल पर शून्य’
यमुना जल समझौते पर सरकार के दावों को आड़े हाथों लेते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि भाजपा सरकार केवल ‘DPR-DPR’ का खेल खेल रही है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार का आधा कार्यकाल बीत चुका है, लेकिन यमुना की एक बूंद पानी लाने के लिए आज तक कोई ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं हो सकी है. भाजपा केवल अगले चुनावों की भूमिका बनाने के लिए कागजी घोड़े दौड़ा रही है.

बिगड़ती कानून व्यवस्था पर घेरा: ‘पिंक सिटी का सिर नीचा हुआ’
प्रदेश की कानून व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए जूली ने गृह राज्यमंत्री पर तीखे प्रहार किए. उन्होंने जयपुर में वायरल हुए छेड़छाड़ और मारपीट के वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि राजधानी में अपराधियों का खौफ खत्म हो चुका है. कांग्रेस नेता जूली ने कहा कि गुलाबी नगरी में जापानी पर्यटक के साथ हुई अभद्रता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान की छवि को धूमिल किया है.. जब मुख्यमंत्री और गृह राज्यमंत्री की नाक के नीचे राजधानी में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो दूर-दराज के गांवों का हाल क्या होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.