आदर्श घोटाला: आरोपी का वकील ही बना सरकार का रक्षक! टीकाराम जूली का सनसनीखेज खुलासा

आदर्श घोटाला: आरोपी और सरकार का वकील एक ही, BJP पर ‘डबल गेम’ का आरोप—टीकाराम जूली

Tikaram Jully Big allegation on Bhajanlal government: राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में प्रदेश की भाजपा सरकार की न्याय प्रक्रिया और नैतिकता पर तीखे प्रहार किए. कांग्रेस सनेता जूली ने बहुचर्चित आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले में सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) की भूमिका को लेकर सनसनीखेज खुलासे किए और सरकार को ‘कठघरे’ में खड़ा कर दिया.

‘आरोपी का वकील ही बना सरकार का वकील’
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने दस्तावेजों के साथ आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस केस की पैरवी कर रहे AAG शिवमंगल शर्मा और उनकी लॉ फर्म ‘ऑरा एंड कंपनी’ का इस घोटाले के आरोपियों के साथ गहरा संबंध है.

विवाद की जड़: इस घोटाले के सह-आरोपी सिद्धार्थ चौहान (जो फिलहाल भगोड़ा है) की पैरवी दिल्ली हाईकोर्ट में यही लॉ फर्म ‘ऑरा एंड कंपनी’ कर रही है.

डबल रोल का आरोप: टीकाराम जूली ने सवाल उठाया कि एक ही वकील दिल्ली में आरोपी को बचाने की जद्दोजहद कर रहा है और वही वकील सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार की ओर से पीड़ितों का पक्ष रखने का स्वांग रच रहा है. यह सीधे तौर पर ‘Conflict of Interest’ (हितों का टकराव) है.

22 लाख परिवारों की गाढ़ी कमाई पर ‘डाका’
कांग्रेस नेता जूली ने घोटाले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्ष 1999 से 2014 के बीच करीब 22 लाख मासूम लोगों से 15,000 करोड़ रुपये की ठगी की गई. लगभग 125 फर्जी (शैल) कंपनियों के माध्यम से गरीबों का पैसा मोदी परिवार और उनके करीबियों तक पहुँचाया गया. उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार एक वकील को ‘डबल रोल’ में रखकर पीड़ितों के साथ क्रूर मजाक कर रही है.

कानूनी मर्यादाओं का उल्लंघन
प्रेस वार्ता में टीकाराम जूली ने कानूनी पहलुओं पर जोर देते हुए कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया का नियम 33 स्पष्ट रूप से किसी भी वकील को विरोधी हितों वाले पक्षों के लिए कार्य करने से रोकता है. सुप्रीम कोर्ट ने भी ‘चंद्र प्रकाश त्यागी बनाम बनारसी दास’ मामले में व्यवस्था दी है कि जब वकील के पास दोनों पक्षों की गोपनीय जानकारियां हों, तो न्याय की निष्पक्षता खत्म हो जाती है.

सरकार से पूछे तीखे सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार से जवाब मांगते हुए पूछा है:

क्या अधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने नियुक्ति से पहले सरकार को बताया था कि वे घोटाले के सह-आरोपी के वकील हैं?

यदि सरकार को यह पता था, तो पीड़ितों के साथ यह ‘धोखा’ क्यों किया गया?

यदि जानकारी छिपाई गई, तो क्या सरकार उनके विरुद्ध प्रोफेशनल मिसकंडक्ट का मामला दर्ज करने का साहस दिखाएगी?

अंत में जूली ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो यह माना जाएगा कि 22 लाख निवेशकों के भविष्य को बर्बाद करने में सरकार की भी मिलीभगत है.