केरल में सामने आए दस्तावेज पर मचा सियासी बवाल, निर्वाचन अधिकारी ने दी ‘क्लेरिकल एरर’ की सफाई
पांच राज्यों में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक दस्तावेज को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है. चुनाव आयोग की ओर से राजनीतिक दलों को भेजे गए एक दस्तावेज पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सील होने का मामला सामने आया है, जिसे लेकर विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं.
यह मुद्दा तब तूल पकड़ गया जब CPI (M) केरल इकाई ने उक्त दस्तावेज को सोशल मीडिया पर साझा किया और इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता के लिए चिंताजनक बताया. पार्टी का आरोप है कि आयोग द्वारा भेजे गए पत्र के साथ संलग्न एफिडेविट पर BJP की सील होना महज संयोग नहीं माना जा सकता और यह संस्थागत निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.
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हालांकि, इस मामले पर केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने स्पष्टीकरण देते हुए इसे ‘क्लेरिकल एरर’ बताया है. उनके अनुसार, BJP केरल यूनिट द्वारा वर्ष 2019 की गाइडलाइन की एक प्रति उपलब्ध कराई गई थी, जिस पर पहले से ही पार्टी की सील लगी हुई थी. यही प्रति अनजाने में अन्य राजनीतिक दलों को भी भेज दी गई.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आगे बताया कि जैसे ही इस त्रुटि की जानकारी मिली, 21 मार्च को संबंधित दस्तावेज को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया और इस संबंध में सभी राजनीतिक दलों एवं संबंधित अधिकारियों को सूचित कर दिया गया.
फिलहाल, इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और विपक्ष जहां इसे गंभीर मामला बता रहा है, वहीं निर्वाचन अधिकारियों की ओर से इसे एक मानवीय त्रुटि बताया जा रहा है.










