Jaipur: मिडिल ईस्ट संकट को लेकर पीएम मोदी ने आज लोकसभा में अपना संबोधन दिया. पीएम मोदी के संबोधन को राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने ‘देर से आए पर दुरुस्त नहीं आए’ करार दिया है. टीकाराम जूली ने तीखा हमला करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के युद्ध हालातों पर दिए गए संबोधन में पीएम मोदी ने अपने भाषण में ऐसी कोई ऐसी जानकारी साझा नहीं की जो पहले से सार्वजनिक नहीं थी और न ही उनके संबोधन से देश की जनता को एलपीजी की सुचारू आपूर्ति को लेकर कोई ठोस आश्वासन मिला है. इससे सिर्फ देशवासियों की चिंता बढ़ी है.
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टीकाराम जूली ने सरकार की नीतियों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार की ढुलमुल नीतियों का दुष्परिणाम आज देश भुगत रहा है, जिस सरकार के लिए देशवासी प्राथमिकता होने चाहिए थे वो अपनी नीतियों से आमजन को बड़े ऊर्जा संकट की तरफ धकेल रही है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की ढुलमुल नीतियों का दुष्परिणाम आज पूरा देश भुगत रहा है.
टीकाराम जूली ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि चाहे नोटबंदी की आपदा हो या कोरोना जैसी विभीषिका, देश की जनता को मोदी सरकार की संवेदनशीलता पर भरोसा था, लेकिन हर बार उनके हाथ केवल निराशा ही लगी है. टीकाराम जूली ने याद दिलाया कि राहुल गांधी ने जीएसटी से लेकर कोरोना संकट तक हर बार सरकार को समय रहते आगाह किया था, लेकिन अहंकार में डूबी मोदी सरकार ने उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया जबकि हर बार राहुल गांधी की बातें सही साबित हुई. उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि LPG संकट से प्रभावित होने वाले फैक्ट्री मजदूरों, किसानों और गरीबों को राहत देने के लिए उनके पास क्या योजना है?
टीकाराम जूली ने प्रधानमंत्री के कार्यकाल की विफलताओं को गिनाते हुए कहा कि मोदी जी का शासन ‘नोटबंदी’ जैसी आपदा के लिए याद किया जाएगा, जिसने छोटे उद्योगों, असंगठित क्षेत्र और आम आदमी की कमर तोड़ दी. पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब पूरा देश कोविड महामारी की भीषण त्रासदी से जूझ रहा था, तब प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेहमाननवाजी में व्यस्त थे, जबकि उस समय अनगिनत श्रमिक सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर थे, उनके पैरों के छाले पूरी दुनिया देख रही थी, लेकिन मोदी का दिल नहीं पसीजा. उन्होंने कहा कि आज भी कोरोना काल की कड़वी यादें देशवासियों को जेहन में है, जब ऑक्सीजन और बेड के लिए लोग परेशान हो रहे थे.
टीकाराम जूली ने राहुल गांधी के आरोपों को दोहराते हुए कहा कि पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी के समय भारत विश्व पटल पर अपनी शर्तों पर खड़ा था. उन्होंने याद दिलाया कि इंदिरा गांधी ने अमेरिकी दबाव को दरकिनार कर देश के हितों की रक्षा की थी, जबकि वर्तमान प्रधानमंत्री ने अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति खो रहा है ? टीकाराम जूली ने पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण संघर्षों में राजस्थान के युवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि खाड़ी युद्ध में राजस्थान के सपूतों की भी जान गई है, उन्होंने कहा कि अखबारों में प्रदेश के युवाओं की अलग-अलग स्थानों पर ड्रोन हमले में मौत का समाचार हाल ही में आया था. उन्होंने याद दिलाया कि देशभर के अनेक युवा रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते युद्धग्रस्त क्षेत्रों में फंसे हुए हैं और सरकार के प्रयास नाकाफी साबित हुए है.
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‘अहंकार में डूबी मोदी सरकार ने राहुल गांधी की चेतावनियों को किया नजरअंदाज’- जूली का PM पर हमला
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टीकाराम जूली ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि चाहे नोटबंदी की आपदा हो या कोरोना जैसी विभीषिका, देश की जनता को मोदी सरकार की संवेदनशीलता पर भरोसा था, लेकिन हर बार उनके हाथ केवल निराशा ही लगी है. टीकाराम जूली ने याद दिलाया कि राहुल गांधी ने जीएसटी से लेकर कोरोना संकट तक हर बार सरकार को समय रहते आगाह किया था, लेकिन अहंकार में डूबी मोदी सरकार ने उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया जबकि हर बार राहुल गांधी की बातें सही साबित हुई. उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि LPG संकट से प्रभावित होने वाले फैक्ट्री मजदूरों, किसानों और गरीबों को राहत देने के लिए उनके पास क्या योजना है?
टीकाराम जूली ने प्रधानमंत्री के कार्यकाल की विफलताओं को गिनाते हुए कहा कि मोदी जी का शासन ‘नोटबंदी’ जैसी आपदा के लिए याद किया जाएगा, जिसने छोटे उद्योगों, असंगठित क्षेत्र और आम आदमी की कमर तोड़ दी. पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब पूरा देश कोविड महामारी की भीषण त्रासदी से जूझ रहा था, तब प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेहमाननवाजी में व्यस्त थे, जबकि उस समय अनगिनत श्रमिक सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर थे, उनके पैरों के छाले पूरी दुनिया देख रही थी, लेकिन मोदी का दिल नहीं पसीजा. उन्होंने कहा कि आज भी कोरोना काल की कड़वी यादें देशवासियों को जेहन में है, जब ऑक्सीजन और बेड के लिए लोग परेशान हो रहे थे.
टीकाराम जूली ने राहुल गांधी के आरोपों को दोहराते हुए कहा कि पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी के समय भारत विश्व पटल पर अपनी शर्तों पर खड़ा था. उन्होंने याद दिलाया कि इंदिरा गांधी ने अमेरिकी दबाव को दरकिनार कर देश के हितों की रक्षा की थी, जबकि वर्तमान प्रधानमंत्री ने अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति खो रहा है ? टीकाराम जूली ने पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण संघर्षों में राजस्थान के युवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि खाड़ी युद्ध में राजस्थान के सपूतों की भी जान गई है, उन्होंने कहा कि अखबारों में प्रदेश के युवाओं की अलग-अलग स्थानों पर ड्रोन हमले में मौत का समाचार हाल ही में आया था. उन्होंने याद दिलाया कि देशभर के अनेक युवा रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते युद्धग्रस्त क्षेत्रों में फंसे हुए हैं और सरकार के प्रयास नाकाफी साबित हुए है.
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