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विशेष रिपोर्ट

पंजाब में फिर साथ आएंगे बीजेपी-अकाली? पीएम मोदी-बादल की मुलाकात से सियासी अटकलें तेज क्यों?

08 अगस्त 2026
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पंजाब में फिर साथ आएंगे बीजेपी-अकाली? पीएम मोदी-बादल की मुलाकात से सियासी अटकलें तेज  क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद गठबंधन की चर्चाओं ने पकड़ा जोर, दोनों दलों ने फिलहाल नहीं खोले पत्ते


Punjab Politics: पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच एक बार फिर संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसकी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच हुई हालिया मुलाकात है. संसद भवन में हुई इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि वर्षों पुराने सहयोगी आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले फिर एक मंच पर आ सकते हैं.

सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात, किसानों से जुड़े मुद्दों और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई. हालांकि, बैठक के बाद किसी भी पक्ष की ओर से गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. बावजूद इसके, मुलाकात ने राज्य की सियासत का तापमान बढ़ा दिया है.

बीजेपी और अकाली दल करीब ढाई दशक तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अहम सहयोगी रहे. प्रकाश सिंह बादल इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. हालांकि 2020 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया. इसके बाद दोनों दलों ने पंजाब विधानसभा और लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़े. 2022 विधानसभा चुनाव में अकाली को सिर्फ तीन और बीजेपी को महज दो सीटें मिली जबकि लोकसभा चुनाव में अकाली दल को केवल एक सीट मिली. बीजेपी के हाथ खाली रह गए. 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिरोमणी अकाली दल और बीजेपी दोनों को राज्य में एक दूसरे की जरूरत है. ऐसे में पंजाब में बदलते राजनीतिक समीकरण और चुनावी चुनौतियों को देखते हुए दोनों दल एक बार फिर साथ आने की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं. खासकर ऐसे समय में जब राज्य में बहुकोणीय मुकाबला है और विपक्षी दल अपनी-अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं.

हालांकि, गठबंधन की राह आसान नहीं मानी जा रही. कृषि कानूनों का मुद्दा, किसान संगठनों का रुख और दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे जैसे कई सवाल अभी भी अहम हैं. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि हालिया मुलाकात केवल एक औपचारिक शिष्टाचार थी या फिर पंजाब की राजनीति में किसी नए समीकरण की शुरुआत. हालांकि बीजेपी और अकाली एक बार फिर से साथ आते हैं तो राज्य की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी मुकाबला बेहद दिलचस्प होगा.

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