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चुनाव स्पेशल: क्या कहता है हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव का सियासी समीकरण?

01 नवंबर 2022
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चुनाव स्पेशल: क्या कहता है हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव का सियासी समीकरण?

Politalks.News/HimachalPradesh. हिमाचल प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है. हिमाचल विधानसभा चुनाव 12 नवंबर को होने हैं. चुनावी उम्मीदवारों के भाग्य के पत्ते 8 दिसंबर को खुलेंगे. वर्तमान सरकार का कार्यकाल 8 जनवरी, 2023 को समाप्त हो रहा है. हिमाचल के चुनावी समीकरणों पर नजर डालें तो हिमाचल प्रदेश में 68 विधानसभा सीट हैं. बहुमत के लिए 35 विस सीट की जरूरत है. प्रदेश में कुल 55 लाख 92 हजार 828 मतदाता हैं. इनमें से 28 लाख 54 हजार 945 पुरुष और 27 लाख 37 हजार 845 महिला मतदाता हैं. 38 ट्रांसजेंडर भी इसमें शामिल हैं. आपको बता दें कि वर्तमान में मुख्यमंत्री जयराम सिंह ठाकुर की सरकार में बीजेपी … Read more

Politalks.News/HimachalPradesh. हिमाचल प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है. हिमाचल विधानसभा चुनाव 12 नवंबर को होने हैं. चुनावी उम्मीदवारों के भाग्य के पत्ते 8 दिसंबर को खुलेंगे. वर्तमान सरकार का कार्यकाल 8 जनवरी, 2023 को समाप्त हो रहा है. हिमाचल के चुनावी समीकरणों पर नजर डालें तो हिमाचल प्रदेश में 68 विधानसभा सीट हैं. बहुमत के लिए 35 विस सीट की जरूरत है. प्रदेश में कुल 55 लाख 92 हजार 828 मतदाता हैं. इनमें से 28 लाख 54 हजार 945 पुरुष और 27 लाख 37 हजार 845 महिला मतदाता हैं. 38 ट्रांसजेंडर भी इसमें शामिल हैं.

आपको बता दें कि वर्तमान में मुख्यमंत्री जयराम सिंह ठाकुर की सरकार में बीजेपी के 45 विधायक मौजूद हैं. कांग्रेस के 22 और सीपीआईएम का एक विधायक विधानसभा में है. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 44 और कांग्रेस ने 21 सीटें अपने नाम की. सीपीआईएम का एक और दो निर्दलीय विधायक जीत कर विधानसभा में पहुंचे थे. इस चुनाव में एनडीए को 48.8 प्रतिशत और यूपीए को 41.7 प्रतिशत वोट हासिल हुए. सीपीआईएम को 1.5 प्रतिशत, बसपा को 0.5 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए. हिमाचल लोकहित पार्टी (HLP) ने भी इस चुनाव में हिस्सा लिया लेकिन इस पार्टी को बसपा से भी कम वोट मिले.

इस चुनाव में बीजेपी के मुख्यमंत्री चेहरा प्रेम कुमार धूमल को सुजानपुर विस सीट पर हार मिली. इसके बाद बीजेपी के दिग्गज नेता और सेराज सीट से जीत हासिल करने वाले जयराम ठाकुर को सत्ता की कुर्सी सौंपी गई. जयराम ठाकुर पहली बार हिमाचल के मुख्यमंत्री बने. साल 2021 में हिमाचल प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में सभी सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया. हिमाचल की फतेहपुर विस सीट पर कांग्रेस के भवानी सिंह पठानिया ने जीत हासिल की. उसने बीजेपी के बलदेव ठाकुर को 5897 से हराया. अर्की विस सीट पर कांग्रेस के संजय अवस्थी ने बीजेपी के रतन सिंह पाल को 3227 वोट और जुब्बल—कोटखाई विस सीट पर कांग्रेस के रोहित ठाकुर ने बीजेपी के नीलम सरायक को मात दी. इन तीन में से दो सीटें बीजेपी के कब्जे में थी.

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इसी के साथ मंडी लोकसभा सीट पर भी दिवंगत मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने बीजेपी के खुशाल ठाकुर को हराया. इस सीट पर बीजेपी के राम स्वरूप शर्मा ने 2019 में 4 लाख से अधिक वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी को हराया था. साल 2012 विधानसभा चुनावों की बात करें तो कांग्रेस ने 36 सीटों पर जीत हासिल कर सत्ता पर कब्जा जमाया था. वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री बने. बीजेपी ने 26 तो निर्दलीय प्रत्याशियों ने 6 सीटों पर जीत हासिल की.

वर्तमान में हिमाचल में दलबदल का खेल चल रहा है. बीजेपी ने 11 मौजूदा विधायकों का टिकट काट दूसरों को थमाया है जिससे 20 नेता बागी होकर निर्दलीय चुनावी जंग में भाग्य आजमा रहे हैं. कांग्रेस के वर्तमान विधायक राकेश चौधरी के साथ कांग्रेस के पूर्व विधायक लखविंदर राणा ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी ज्वॉइन कर ली है. राकेश चौधरी को बीजेपी ने टिकट थमाया. वहीं नलगढ़ सीट पर कांग्रेस से आए लखविंदर को टिकट दिया जिसके बाद बीजेपी के पूर्व विधायक केएल ठाकुर ने निर्दलीय पर्चा दाखिल किया है. बीजेपी के मीडिया सह प्रभारी प्रवीण शर्मा मंडी विधानसभा सीट से निर्दलीय भाग्य आजमा रहे हैं. कांग्रेस से आए राकेश चौधरी को टिकट देने से नाराज बीजेपी के मौजूद विधायक विशाल नेहरिया ने भी पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.

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इधर, उठापटक का दौर बीजेपी के साथ अन्य पार्टियों में भी चल रहा है. वरिष्ठ नेता अनूप केसरी और निक्की सिंह परियाल आम आदमी पार्टी को जोर का झटका देते हुए भाजपा में शामिल हो गए. वहीं पूर्व मंत्री एवं कांगड़ा जिले की शाहपुर सीट से विधायक मेजर विजय सिंह मनकोरिया और गगरेट से पूर्व विधायक राकेश कालिका भी बीजेपी में शामिल हो गए. कालिया अपनी जगह चैतन्य शर्मा को टिकट देने से नाराज थे.

हालांकि टिकट बांटने एवं पर्चे दाखिल करने का दौर समाप्त हो चुका है और प्रचार का दौर शुरु है. कुछ नाराज नेताओं को अन्य पार्टियों ने शरण देते हुए अपनी तरफ से टिकट दिया है तो कुछ निर्दलीय भाग्य आजमा रहे हैं. लेकिन, टिकट कटने के बाद नाराजगी न पचा सकने वालों का पार्टी बदलने का दौर अभी भी बदस्तूर जारी है.

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