बगावत व भितरघात के बीच बागियों को मनाने रणक्षेत्र में उतरे हुड्डा

लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस अब तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल कर अपनी नींव गहरी करना चाह रही है. यही वजह है कि सत्ता की चाह में लगातार उक्त तीनों राज्यों में नेतृत्व में परिवर्तन हो रहे हैं. हरियाणा (Haryana) में भी आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. हरियाणा की सियासत में कांग्रेस की वापसी के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) को कमान सौंपी गयी है. उन्हें पार्टी चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष बनाया है. वहीं कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को प्रदेशाध्यक्ष का दायित्व सौंपा है. हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ये हुड्डा के राजनीतिक करियर की अंतिम पारी होने वाली है, इसलिए वे अपनी इस पारी को शानदार तरीके से खेलना चाहते हैं. इसी के चलते हुड्डा हरियाणा कांग्रेस (Haryana Congress) में बदलाव और पार्टी से नाराज चल रहे नेताओं को मनाने में जुट गए हैं ताकि BJP का मुकाबला पूरे जोशो-खरोश के साथ किया जा सके.

बता दें कि हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा और नए सीएलपी लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को कार्यभार संभाला है. इस दौरान पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई नदारद रहे. तीनों नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा विरोधी गुट के माने जाते हैं और पार्टी में नए बदलाव से बेहद नाराज चल रहे हैं. अब इन सभी नेताओं की नाराजगी दूर करना हुड्डा के जिम्मे है.

हुड्डा ने कांग्रेस नेताओं की नाराजगी दूर करने का सिलसिला किरण चौधरी से शुरू किया. हुड्डा रविवार को दिल्ली स्थित किरण चौधरी (Kiran Choudhary) के घर पहुंचे. यहां उन्होंने किरण चौधरी और वहां मौजूद उनकी सुपुत्री एवं पूर्व सांसद श्रुति चौधरी (Shruti Chaudhary) से मुलाकात की. माना जा रहा है कि ये आपसी मुलाकात रंग लाई है और किरण चौधरी अब हुड्डा के समर्थन में आ खड़ी हुई है. अब कयास लगाए जा रहे हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा का अगला टार्गेट कुलदीप बिश्नोई (Kuldeep Bishnoi) होंगे जिनसे जल्दी मुलाकात की जा सकती है.

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बता दें, बिश्नोई से हुड्डा की अदावत काफी पुरानी है. लोकसभा चुनाव के दौरान बिश्नोई ने हुड्डा के नेतृत्व को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था. आपसी गुटबाजी का नतीजा भी सबके सामने है. यहां कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया था. इसके बावजूद हुड्डा बिश्नोई को अपनी तरफ लाने में कामयाब होंगे, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है.

पूर्व मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी मुश्किल हरियाणा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को मनाने की रहेगी. तंवर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के बेहद करीबी माने जाते हैं और पिछले 6 सालों से पद का दायित्व संभाले हुए थे. लोकसभा चुनाव (Loksabha Election-2019) में करारी हार के बाद उनका जाना तय लग रहा था लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इसके बाद सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने जैसे ही पार्टी की बागड़ौर फिर से संभाली, सबसे पहले उनका नंबर आया और उनकी जगह सोनिया की खास कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को भेजा गया.

अशोक तंवर (Ashok Tanwar)  पिछले 6 सालों से प्रदेश की बागड़ौर संभाल चुके हैं. ऐसे में उनकी प्रदेश के कुछ क्षेत्रों पर अच्छी पकड़ है. इस बात को हुड्डा भी भली भांति समझते हैं. ऐसे में तंवर की नाराजगी से पार्टी को नुकसान ही होगा इसलिए उन्हें फिर से एक सम्मानजनक पद मिलने की उम्मीद है.

हरियाणा में लंबे समय से कांग्रेस में आंतरिक कलह जगजाहिर है. प्रदेश में कई नेता एक दूसरे की टांग खींचने में लगे रहते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने प्रदेश के नेताओं में एकजुटता लाने का दायित्व किसी नए नेता को नहीं बल्कि अनुभवी भूपेन्द्र हुड्डा को सौंपी. कुमारी शैलजा उनका साथ देगी लेकिन कुल मिलाकर हुड्डा को फ्री हैंड काम करने का पूरा मौका दिया गया है.

प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के बाद असंतुष्टों को साधने में जुटे हुड्डा अच्छी तरह से जानते हैं कि असंतुष्ट और बागी नेता आगामी चुनाव में उनकी रणनीति और समीकरण दोनों का खेल बिगाड़ सकते हैं. वहीं सोनिया गांधी भी इस बात को बखूबी समझ रही है कि कांग्रेसी नेताओं की बगावत व भितरघात पार्टी को चुनावी रण में और कमजोर करेगी. ऐसे में उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा को कमान संभलाकर कोई गलती नहीं की.

अब हुड्डा केंद्र की ओर से मिले इस अवसर को कितना और कैसे भुना पाते हैं, आगामी चंद महीने में पता चल ही जाएगा. अगर हुड्डा अपनी इस कोशिश में सफल होते हैं और पार्टी को सत्ता में आने का मौका मिलता है तो हुड्डा के हाथों में फिर से प्रदेश की कमान आ सकती है. लेकिन अगर वे असफल साबित होते हैं तो भविष्य में उन्हें कोई बड़ा दायित्व मिलेगा, इसकी संभावना कम ही दिखती है.

बीजेपी ने जारी किया- ‘राजस्थान में अपराध टाइम्स – गहलोत का राज, अपराधियों की मौज’

राजस्थान (Rajasthan) में बिगडती कानून व्यवस्था (Law-&-Order) को लेकर प्रदेश भाजपा (BJP) का गहलोत सरकार (Gehlot Government) पर हल्ला बोल जारी है. इसी कडी में मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष गुलाब चन्द कटारिया (Gulab Chand Katariya) ने प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर बीजेपी की आईटी सेल द्वारा प्रकाशित “अपराध टाइम्स” अखबार का विमोचन किया. जिसका शीर्षक है – “राजस्थान में अपराध टाइम्स – गहलोत का राज, अपराधियों की मौज (Crime Times in Rajasthan – Gehlot’s Government, fun of criminals)“.

राजस्थान में इन दिनों अपराध तंत्र पुलिस तंत्र पर हावी होता दिखाई दे रहा है. प्रदेश में इन दिनों अपराध का बोलबाला है और अपराधियों के हौसले बुलंद है. प्रदेश में बढ़ते गैंगरेप जैसे संगीन अपराध हों या प्रदेश का बिगडा साम्प्रदायिक सौहार्द, मामूली बातों पर दंगे, झगडा, आगजनी, लूट, हत्या अब प्रदेश में आम बात हो गयी है. इसी को लेकर आज प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश में बिगडती कानून व्यवस्था की स्थिती को प्रकाशित करते हुए “अपराध टाइम्स” नामक अखबार का विमोचन किया गया. जिसमें प्रदेश में हो रहे अपराध से जुड़ी सभी बड़ी खबरों को प्रकाशित किया गया है.

प्रदेश में बढ़ा अपराधों का ग्राफ:

प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने प़त्रकार वार्ता में प्रदेश के लाॅ-एंड-आॅर्डर को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री का संयुक्त जिम्मा संभाल रहे अशोक गहलोत पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान कटारिया ने कहा कि केवल जुलाई 2018 के साथ 2019 की तुलना करें तो अपराधों का ग्राफ 54 प्रतिशत बढ़ा है वहीं अगर जनवरी से जुलाई तक सभी 7 महीने के आंकड़े जोड़ें तो 32 प्रतिशत इजाफा आईपीसी के अपराधों में हुआ है. वहीं जुलाई 2018 से 2019 के जुलाई तक के आंकड़ों को जोड़ें तो प्रदेश में 31 फ़ीसदी अपराध बढ़े हैं.

महिला अपराधों में स्थिति भयावह:

नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने पत्रकारों को बताया कि प्रदेश में महिला अपराधों के मामले में तो स्थिति और भी ज्यादा भयावह है. जुलाई 2018 के मुकाबले 2019 में 87 प्रतिशत महिला अपराधों में इजाफा हुआ है. वहीं एसटी के अपराधों के मामलों की बात करें तो अपराधों की बढ़ोतरी में हद ही पार हो गई है, जुलाई 2018 के मुकाबले 2019 में एसटी के खिलाफ 123 प्रतिशत अपराध बढ़े हैं.

सीएम अशोक गहलोत से अपील:

कटारिया ने मुख्यमंत्री के साथ गृहमंत्री का भी जिम्मा संभाल रहे अशोक गहलोत से अपील करते हुए कहा कि सीएम गहलोत को पुलिस की साख गिरने से बचाना चाहिए, जो भी लोग पुलिस को बदनाम करने की कोशिश कर रहे है, उनके खिलाफ सख्ती से काम करना चाहिए, इसमें प्रदेश की पूरी जनता, राजनीतिक दल सरकार के साथ होंगे.

बहरोड की घटना थी सुनियोजित:

बहरोड थाने पर फायरिंग कर पुलिस कस्टडी में बंद अपराधि को छुडा ले जाने के मामले पर कटारिया ने कहा कि इस घटना से सारी हदें पार हो गयी. यह केस सुनियोजित था, पुलिस की मिलीभगत से ये सब हुआ. पुलिस ने अपराधियों पर एक भी गोली नहीं चलाई यह एक बडा सवाल है. आगे कटारिया ने कहा कि पुलिस अधिकारी के सामने सिपाही कह रहा है कि उसे हथियार चलाना नहीं आता, इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या होगी?, थानेदार कहता है कि उनकी रिवॉल्वर अचानक जाम हो गई, यह कहना भी शर्मनाक है, इससे पुलिस की छवि खराब होती है.

कार्रवाई से मिला संताष:

बहरोड थाने के पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर करने और डिप्टी व एसएचओ को सस्पेंड करने तथा दो हैडकांस्टेबल को नौकरी से बर्खास्त करने की कार्रवाई पर कटारिया नें कहा कि पहली बार इस कार्रवाई से कुछ संतोष मिला है. आगे कटारिया ने कहा कि इस मामले पर कल ही मेरी डीजी से बात हुई थी मैनें उनसे इस मामले पर कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया था.

पुलिस पर जताया भरोसा:

गुलाब चन्द कटारिया ने आगे कहा कि हमारी पुलिस निकम्मी नहीं है, लेकिन कई बार अधिकारी समय पर एक्शन नहीं करते है. इससे अपराध में बढ़ोतरी होती है और अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं. इसके साथ ही कटारिया ने कहा कि प्रदेश में अपराध हमेशा होते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से जो बेतहाशा बढ़ोतरी हुई, वह चिंताजनक और सवाल उठाने लायक है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सलाह:

कटारिया ने पत्रकार वार्ता के दौरान सीएम अशोक गहलोत को सलाह देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी गृहमंत्री का जिम्मा भी संभाल रहे हैं ऐसे में समय अभाव के कारण कानून व्यवस्था पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते इसलिए उन्हें अपने एक सहयोगी को कानून व्यवस्था का जिम्मा दे देना चाहिए ताकि प्रदेश में कानून पर नियंत्रण रखा जा सके.

13 नंबर बंगले पर कटारिया का कूटनीतिक जवाब:

पूर्व मुख्यमंत्रीयों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं को हटाये जाने के हाइकोर्ट के फैसले पर पत्रकारों ने कटारिया से सवाल करते हुए पूछा कि क्या पूर्व सीएम वसंधरा राजे 13 नंबर बंगला खाली करेगी ? इस पर कूटनीतिक जवाब देते हुए कटारिया ने कहा कि जिसे बंगला खाली करवाना है उनसे पूछो मुझे तो खाली करवाना है नहीं. कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए, इस मामले में सरकार ही ढीली पड रही है तो मैं क्या करूँ. कटारिया के इस जवाब में उनके मन में छिपी उनकी मंशा को राजनीति के विशेषज्ञ समझ सकते हैं.

भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा का जयपुर में जनसंपर्क

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की 7 सितंबर से 9 सितंबर पुष्कर में आयोजित बैठक में हिस्सा लेने बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) मंगलवार सुबह राजधानी के वैशाली नगर में भाजपा के जनसंपर्क अभियान के तहत जनसंपर्क किया. इस अभियान में जेपी नड्डा (JP Nadda) ने सेवानिवृत जनरल विश्वंभर सिंह, जनरल मांधाता सिंह, जनरल एस.पी.एस.कलेवा, जनरल पीएस राठौड़, कर्नल बीडी सिंह, मेजर घनश्याम सिंह से मुलाकात कर उनका शॉल ओढ़ाकर व पुष्प गुच्छ भेंटकर सम्मान किया. सेवानिवृत सैनिकों के इस सम्मान समारोह में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया (Gulab Chand Kataria), पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी (Ashok Parnami), पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी (Arun Chaturvedi) और … Read more

पलवल विधानसभा सीट पर इस बार करण सिंह दलाल को करना पड़ सकता है हार का सामना

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 (Haryana Assembly Election) – पलवल (Pawal) विधानसभा सीट हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनावों (Assembly Election) की तिथि की घोषणा अभी नहीं हुई है, ऐसी संभावना है की हरियाणा में नवंबर माह में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. इसके मद्देनजर विभिन्न दलों ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. संभावित प्रत्याशियों ने जनसंपर्क अभियान छेड़ दिया है, प्रचार साधनों के माध्यम से वे उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. आज हम आपको हमारी खास रिपोर्ट में हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 में हरियाणा के पलवल जिले की पलवल (Palwal) विधानसभा सीट के जमीनी हालात से रुबरु करवाएंगे. हरियाणा के पलवल (Palwal) जिले के अंदर तीन विधानसभा सीटें आती … Read more

फेल हुआ गहलोत का कानून प्रबंधन

राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) निकम्मी बन गई है या अपराधियों को वारदात करने की छूट दे दी गई है. जयपुर (Jaipur) में एक अखबार वितरक की हत्या और पुलिस द्वारा पत्रकार की पिटाई का विवाद थमा भी नहीं था कि बहरोड़ पुलिस थाने से कुछ लोग अंधाधुंध गोलियां चलाकर एक दुर्दांत अपराधी को छुड़ा ले गए.

जन तंत्र पर भारी गन तंत्र, उधर गहलोत और पायलट उलझे राजनीतिक रस्साकस्सी में

कहते हैं कि मजबूत सरकार विकास के पथ पर रहती है और मजबूर सरकार झगड़ों में उलझ कर विकास के पथ से भटक जाती है. कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है इन दिनों राजस्थान (Rajasthan) में, यहां सरकार में वर्चस्व की लड़ाई का खामियाजा प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था के रूप में देखने को मिल रहा है. मरुधरा में जनतंत्र (Public System) पर अपराधियों का गन तंत्र (Gun System) भारी पड़ रहा है. गुंडे-मवालियों के सामने खाकी लाचार और कमजोर नजर आ रही है. राजधानी में इंसाफ मांग रहे लोगों पर लाठी बरसाई जा रही है तो बहरोड़ में खुलेआम लॉक-अप में फायरिंग कर अपराधियों को छुड़ाया जा रहा है तो वहीं सीकर में सरेआम बंदूक की नोक पर बैंक को लूटा जा रहा हैं. आखिर क्या हो गया है अमन-चैन वाले प्रदेश राजस्थान को?

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) के बीच की तनातनी का संघर्ष अब सतह पर है. नौबत यहां तक आ गई है कि अब सरकार के दोनों सिपहसालार एक दूसरे के खुशियों के पल से भी कन्नी काटने लगे हैं. शनिवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सीएम सचिन पायलट के जन्मदिन के मौके पर मुख्यमंत्री पहले दिल्ली और बाद में जैसलमेर में घूम रहे थे. इस दौरान उन्हें प्रदेश में पिछले तीन दिन से बिगड़ी कानून व्यवस्था का ख्याल भी नहीं आया. इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जन्मदिन के मौके पर सचिन पायलट भी कुछ ऐसा ही कर चुके हैं. इससे दोनों के बीच का मनमुटाव फिर जगजाहिर हो चुका है.

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पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट ने अपने जन्मदिन के अवसर पर शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की जिसमें वह नाकाम रहे और उनका यह प्रदर्शन फीका ही रहा. हालांकि पीसीसी से सभी जिलों में जनप्रतिनिधियों को जयपुर भीड़ लेकर आने का संदेश दिया गया था और उम्मीद थी 20,000 से ज्यादा भीड़ जुटाने की लेकिन जयपुर में 5000 नेता और कार्यकर्ता ही उपस्थित हुए. प्रदेश सरकार के छः मंत्रियों सहित करीब 12 विधायकों ने ही पीसीसी जाकर पायलट को बधाई दी जबकि कुछ नेताओं ने विवाद से बचते हुए बधाई देने के लिए पीसीसी के बजाय पायलट के घर को चुना. क्योंकि इस बात पर भी नजर रखी जा रही थी कि कौन-कौन से बड़े नेता पायलट को बधाई देने पहुँचते हैं. अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की खींचतान का सबसे बड़ा उदाहरण तो यही है, जनप्रतिनिधियों की सबसे बडी फांस की किसकी बोलें और किसकी नहीं. यही कारण रहा कि मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार पायलट के जन्मदिन की रौनक फिकी रही आखिर वर्तमान नेतृत्व से पंगा कौन ले?

सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम व पीसीसी चीफ सचिन पायलट के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई अब शायद अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. मुख्यमंत्री गहलोत जहां दिल्ली दरबार में प्रदेश में नया पीसीसी चीफ और एक डिप्टी सीएम और बनाने की अर्जी लगा चुके हैं तो वही गाहे-बगाहे पायलट खेमा भी सरकार की मुखालफत का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहा है. बहराल हम बात कर रहे हैं कि दोनों नेताओं की आपसी खिंचतान का सीधा खामियाजा प्रदेश की जनता को उठाना पड़ रहा है. वरना मुख्यमंत्री जी को इस बिगड़ी कानून व्यवस्था को संभालने के बजाय इस तरह पायलट के जन्मदिन पर राजधानी छोड़कर जाने की नौबत नहीं आती. जबकि दिल्ली या जैसलमेर में कोई ऐसा अतिआवश्यक काम भी नहीं था की जिसे टाला नहीं जा सकता था.

प्रदेश के मुखिया अशोक गहलोत के पास गृह विभाग भी है ऐसे में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी भी गहलोत के ही कंधों पर है लेकिन पिछले 3 महीने और ख़ासकर गतसप्ताह में प्रदेश में हुए अपराध और उनके तरीकों पर नजर डाले तो पुलिस लाचार और नाकाम नजर आती है. मुख्यमंत्री गहलोत जहां राजधानी में पुलिस अधिकारियों को कानून व्यवस्था का पाठ पढ़ा रहे थे तो उसी वक़्त अलवर में बदमाश उसकी बखिया उधेड़ने का प्लान बना रहे थे. प्रदेश के इतिहास में शायद पहली बार हुई बहरोड़ थाने में फायरिंग कर अपराधी को छुड़ाने की घटना के बाद गहलोत के कंट्रोल वाली पुलिस की कलई खुल गई है. मुख्यमंत्री के चहेते डीजीपी अपराध पर अंकुश लगाने में अब तक विफल साबित हुए हैं. ऐसे में राजनीतिक स्थिरता का फायदा अब अपराधी उठा रहे हैं और आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है.

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अचानक बदले समीकरण

सोनिया गांधी के अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में सत्ता के केंद्र बदल गए. सोनिया के विश्वस्त माने जाने वाले अशोक गहलोत को मानो अभय दान मिल गया हो. राहुल गांधी जहां युवा नेतृत्व की बात करते थे तो ऐसे में सचिन पायलट आत्मविश्वास के साथ रेस में खुद को बरकरार रखे हुए थे. इसी कारण गहलोत खेमे में थोड़ा भय भी था कि कहीं किसी दिन नेतृत्व परिवर्तन का फरमान न आ जाये. लेकिन सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद तो गहलोत खेमा अधिक पॉवरफुल हो गया है. इसीलिए पहले जो नेता और कार्यकर्ता सचिन पायलट का खुल कर समर्थन करते थे यहां तक कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाये जाने की खुलकर पैरवी करते थे उनमें से कुछ एक को छोड़कर ज्यादातर उनके जन्मदिन के मौके पर भी कन्नी काटते नजर आये.

बेनीवाल ने मुख्यमंत्री गहलोत को दी चेतावनी

नागौर सांसद (Nagaur MP) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के मुखिया हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने राजस्थान के मुख्यमंत्री (Rajasthan CM) अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की सरकार को जंगलराज बताते हुए पुलिस प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने अलवर में बढ़ते अपराधिक ग्राफ पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा. उन्होंने हाईकोर्ट के पूर्व मुख्यमंत्रियों के घर खाली कराने के फैसले पर राजस्थान सरकार की चुप्पी को गहलोत-वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) की मिली भगत बताते हुए कहा कि वे इसके लिए आंदोलन करते हुए गहलोत के आवास का घेराव करेंगे.

राजस्थान में कानून-व्यवस्था की हालत, गहलोत सरकार फेल

राजस्थान (Rajasthan) में क्या हो रहा है? पुलिस निकम्मी बन गई है या अपराधियों को वारदात करने की छूट दे दी गई है. जयपुर में एक अखबार वितरक की हत्या के मामले में पुलिस को जो सांप्रदायिक पक्ष दिखा, वह चौंकाने वाला रहा. पुलिस ने हत्यारे के खिलाफ सख्ती करने की बजाय उससे सहानुभूति दिखाई, जिससे लोग भड़क गए. पुलिस ने उलटे प्रदर्शऩ करने वालों पर लाठियां भांजी. रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को खदेड़ा. फोटो खींच रहे फोटोग्राफर को पीट दिया. पुलिस की ज्यादती सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. यह विवाद थमा भी नहीं था कि शुक्रवार सुबह अलवर जिले के बहरोड़ पुलिस थाने (Behror Police Station) से कुछ लोग अंधाधुंध गोलियां चलाकर, पुलिस को धमकाकर एक दुर्दांत अपराधी को छुड़ा ले गए.

जयपुर पुलिस (Jaipur Police) का रवैया अजीबो गरीब रहा. एक व्यक्ति ने अखबार वितरक को कुल्हाड़ी से काट दिया और पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती करवा कर रहा कि वह मानसिक रूप से विक्षिप्त है. क्या मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति को हत्या करने का हक मिला हुआ है? मुख्यमंत्री गहलोत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक करते हैं, जिसकी खबरें अखबारों में छपती रहती हैं. इससे यह लगता है कि मुख्यमंत्री को प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ी फिक्र है. गहलोत पुलिस अफसरों को सीख भी देते होंगे कि पुलिस को क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए? क्या उनकी सीख यह है कि दुर्दांत अपराधी को थाने से भागने देना चाहिए, या अखबार वितरक को कुल्हाड़ी से काट देने वाले के खिलाफ तत्काल प्रभाव से हत्या का मामला दर्ज नहीं करना चाहिए?

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राजस्थान में कानून-व्यवस्था की स्थिति विकट है. मुख्यमंत्री गहलोत राज्य के गृहमंत्री भी हैं और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर बुरी तरह फेल साबित हो रहे हैं. जयपुर की घटना पुलिस की आम आदमी के खिलाफ बर्बरता का उदाहरण पेश करती है, जबकि बहरोड़ की घटना पुलिस के नाकारापन की मिसाल है. किसी की हत्या होने पर उसके परिजन जब न्याय की मांग करते हैं तो पुलिस लाठी चलाती है, उनके साथ अमानवीय व्यवहार करती है और जब एक थाने से कुछ लोग अपराधी को छुड़ाने पहुंचते हैं तो उसके सामने समर्पण की मुद्रा में आ जाती है. क्या लोग पुलिस पर भरोसा कर सकते हैं?

बहरोड़ (Behror) का घटनाक्रम इस प्रकार है. शुक्रवार तड़के करीब 3.20 बजे पुलिस ने एक गाड़ी की तलाशी ली तो उसमें सवार तीन लोग भागने लगे. एक पुलिस की पकड़ में आ गया. वह हरियाणा का कुख्यात अपराधी विक्रम गुर्जर उर्फ पपला था. उसने पुलिस को अपना गलत नाम बताया. खुद को प्रॉपर्टी कारोबारी साहिल के रूप में पेश किया. पुलिस ने सुबह पांच बजे बाद उसे थाने लाकर हवालात में बंद कर दिया. शुक्रवार सुबह करीब 8.20 बजे थाने के सामने तीन गाड़ियां रुकी उनमें करीब 15 लोग सवार थे. सात-आठ थाने में घुसे और गोलियां चलानी शुरू कर दी.

अचानक हुए इस हमले से थाने में मौजूद तमाम पुलिस कर्मी बचने की कोशिश करते दिखे. कुछ यहां-वहां छिपे, कुछ दीवार लांघकर भागे. थाना अधिकारी सुगन सिंह अपने कक्ष में बैठे थे. हमला होने पर वह पिछले दरवाजे से निकल गए. कक्ष के दरवाजे पर काली फिल्म लगी होने से वह हमलावरों को नहीं दिखे. हमलावर चिल्ला रहे थे, जो भी दिखे, गोली से उड़ा दो. कुछ ही देर में वे पपला को हवालात से छुड़ा ले गए. पपला को छुड़ा कर ले जाने में उन्हें सात मिनट से ज्यादा समय नहीं लगा. एके-47 से फायरिंग करते हुए अपराधी को थाने से छुड़ा ले जाने का यह राजस्थान में पहला मामला है.

पपलू हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के खेतली गांव का रहने वाला है. महेन्द्रगढ़ पुलिस उसे 8 सितंबर, 2017 को अदालत में पेशी के लिए ले जा रही थी, तब उसके साथी उसे छुड़ा ले गए थे. तब भी पपला के साथियों ने पुलिस पर फायरिंग की थी और चार पुलिस कर्मियों को गोली लगी थी. उसके बाद से वह फरार थी. हरियाणा के मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची में उसका नाम शामिल है. उस पर पांच लाख रुपए का इनाम है. वह अनायास ही राजस्थान पुलिस की पकड़ में आ गया था, लेकिन गलत नाम बताने से पुलिस गफलत में रही. पुलिस ने उसके पास से 31.90 लाख रुपए नकद बरामद किए थे.

क्या पुलिस अधिकारी लालच में आ गए थे? खबर है कि पुलिस अधिकारी ज्यादा रकम ऐंठने के लिए सौदेबाजी में लगे रहे. पपला ने छोड़ने के बदले 35 लाख रुपए देने की बात कही थी. इस पर पुलिस अधिकारियों ने पपला को साथियों से संपर्क करने के लिए अपना मोबाइल फोन दे दिया. पपला को अपने साथियों से संपर्क करने का मौका मिल गया. उसके बाद जो हुआ, वह सबके सामने है. पुलिस ने रोजनामचे में साहिल उस्मान के नाम से रिपोर्ट लिखी थी.

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पपला को छुड़ाकर भागे लोगों ने अपनी कार रास्ते में छोड़कर एक पिकअप गाड़ी लूटी. उसके बाद उसे भी छोड़कर एक और अन्य गाड़ी पर कब्जा किया, फिर हरियाणा सीमा पर उस गाड़ी को भी वहीं छेड़कर खेतों से पैदल भाग निकले. हमले के बाद हतप्रभ पुलिस ने पीछा किया, लेकिन कोई भी पकड़ में नहीं आया. पुलिस को दोष नहीं दिया जा सकता. पुलिस भले ही अपराधियों को पकड़ न सके, लेकिन पीछा तो करती ही है. बच्चों में चोर-पुलिस का खेल ऐसे ही लोकप्रिय नहीं हुआ है.

बहरहाल डीजीपी भूपेन्द्र सिंह (DGP Bhupendra Singh) बहरोड पहुंचे हुए हैं. भारी पुलिस बल भेजा गया है. घटना की एसआईटी से जांच की घोषणा हो चुकी है. सांप निकल गया, लकीर पीटने का काम हो रहा है. मुख्यमंत्री गहलोत की तरफ से इस घटना पर प्रतिक्रिया नहीं आई है. यह राजस्थान में कानून-व्यवस्था की तस्वीर है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) ने बहरोड़ की घटना पर गहलोत सरकार को कठघरे में खड़ा किया है. उन्होंने ट्वीट किया है कि इस घटना से प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लग गया है. विधानसभा में भाजपा विधायक दल के उपनेता राजेन्द्र राठौड़ (Rajendra Rathore) ने कहा कि प्रदेश में अराजकता की स्थिति है. राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) और विधायक कालीचरण सराफ (Kalicharan Saraf) ने मुख्यमंत्री गहलोत से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की है.

‘गिरते हैं शहसवार मैदान-ए-जंग में, वह तिफ्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले’

भारत (India) का मिशन मून ‘चंद्रयान-2’ (Chandrayaan-2) सफलता से बस चंद सैकेंड दूर रह गया. चंद्रमा की सतह पर उतरने से चंद मिनटों पहले चंद्रयान-2 का का लैंडर विक्रम का संपर्क इसरो से टूट गया. उस वक्त लैंडर चांद की सतह से करीब 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था. हालांकि इससे भारतीय अपेकक्षाओं को धक्का लगा है. विक्रम को ढूंढने की कोशिशें जारी हैं. इसके बाद से पूरे देश के लोग इसरो वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ा रहे हैं. बॉलीवुड से लेकर राजनीति से जुड़ी हस्तियां भी इसरो वैज्ञानिकों की सोशल मीडिया पर हौसला अफजाही कर रहे हैं. इसमें बसपा सुप्रीमो मायावती का ट्वीट सबसे ज्यादा चर्चा में है. शेरो-शायरी अंदाज … Read more