सूखते पोखर में बैठी भैंस की तरह हो चुकी है कांग्रेस

गई भैंस पानी में और कहां जाएगी? कांग्रेस की यही हालत है. कांग्रेस के पास ऐसा कोई दमदार नेता नहीं बचा, जो पार्टी को संभाल सके. बेचारी सोनिया को ही बुढ़ापे में इतना बड़ा बोझ उठाना पड़ेगा. एक निष्प्राण हो रही पार्टी को सोनिया कैसे प्राणदान दे सकती हैं? सबकुछ उनका ही किया धरा मालूम पड़ता है. भुगतना भी उन्हें ही पड़ेगा. उन्हीं की वजह से कांग्रेस आज एक सूखते पोखर में बैठी हुई भैंस की तरह हो गई है. उसको सोनिया गांधी के अलावा कोई नहीं संभाल सकता. कांग्रेस की ऐसी हालत कैसे हुई? इस तरह के दुर्दिन क्यों आए? कांग्रेस अच्छी भली पार्टी थी. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान … Read more

कांग्रेस के पोस्टर्स में नेहरू-इंदिरा की जगह अब प्रियंका-रॉबर्ट वाड्रा

सोनिया गांधी के कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष बनने पर पार्टी मुख्यालय के बाहर बधाई वाले पोस्टर लगाये गए हैं. सामान्य दिखने वाले इन पोस्टर्स में गौर करने वाली दो प्रमुख बातें है. पहली बात ये कि इन पोस्टर्स में पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के साथ-साथ उनके पति रॉबर्ट वाड्रा की फोटो भी लगी हुई है और दूसरी बात ये कि आमतौर पर इससे पहले तक कांग्रेस के पोस्टरों पर जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी की तस्वीरें छपी रहती थीं. इन पोस्टर्स पर श्रीमती सोनिया गांधी जी को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अंतरिम अध्यक्ष बनाए जाने पर हार्दिक बधाई लिखा हुआ है. प्रमुख समाचार एजेंसी ANI ने यह पोस्टर्स दिखाए हैं.

गौरतलब है कि, लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. करीब दो महीने तक कांग्रेस अध्यक्षविहीन रही और पार्टी के कार्यकर्ता से लेकर विपक्षी दल भी आरोप लगाते थे कि जिस पार्टी का अध्यक्ष न हो वो लोगों की बातों को कैसे रखेगा. करीब ढाई महीने की कशमकश के बाद कांग्रेस को अध्यक्ष मिला लेकिन अंतरिम अध्यक्ष. सीडब्ल्यूसी की बैठक में कई नेताओं के नामों पर चर्चा हुई, लेकिन किसी भी नाम पर सब एक राय नहीं हो सके और कांग्रेस की सत्ता एक बार फिर गांधी परिवार के हाथों में आ गई. सीडब्लूसी में सर्वसम्मति से सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष चुना गया.

बात करें कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा की तो इससे पहले हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद शहर में उन्हें चुनाव लड़ने का आग्रह करते हुए पोस्टर लगे थे. इसके अलावा राजस्थान में प्रवर्तन निदेशालय(ED) के कार्यालय के बाहर भी पोस्टर लगे थे, जिसमें प्रियंका और राहुल के साथ-साथ वाड्रा की फोटो थी. ईडी उनसे बीकानेर जमीन घोटाले में पूछताछ कर रही थी, तभी ये पोस्टर लगे थे. ठीक इसी तरह के पोस्टर दिल्ली-एनसीआर में लगे थे. इसमें लिखा था कट्टर सोच नहीं, युवा सोच. इस पोस्टर में भी प्रियंका और राहुल के साथ वाड्रा की फोटो थी.

राजस्थान से राज्यसभा में कांग्रेस का खुलेगा खाता, मनमोहन सिंह होंगे सांसद

राजस्थान में मदनलाल सैनी के निधन के बाद खाली हुई राज्यसभा की सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने आज नामांकन दाखिल किया. राजस्थान से डॉ मनमोहन सिंह का राज्यसभा जाना तय हो गया है, क्योंकि भाजपा ने अपना उम्मीदवार उपचुनाव में उतारने से मना कर दिया है. ऐसे में मनमोहन सिंह का निर्विरोध चुना जाना तय है. देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने मंगलवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया. इसके लिए वे मंगलवार सुबह जयपुर पहुंचे. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उनका स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंचे. डॉ सिंह ने राजस्थान विधानसभा पहुंच कर अपना नामांकन दाखिल किया. इस अवसर … Read more

राज्यसभा उपचुनाव पर बोले सचिन पायलट

राजस्थान के उपमुख़्यमंत्री सचिन पायलट ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नामांकन भरे जाने पर खुशी जताई. राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष मदनलाल सैनी के निधन के चलते राजस्थान राज्यसभा की एक सीट खाली हुई है. बुधवार नामांकन की अंतिम तिथि है. बीजेपी ने अपना प्रत्याशी उतरने से इनकार कर दिया है. वैसे कांग्रेस के पास विधानसभा में 100 विधायक हैं. इसके साथ निर्दलीय, बसपा सहित अन्य 22 विधायकों का समर्थन भी मिला हुआ है. ऐसे में डॉ.मनमोहन सिंह का राज्यसभा में बिना विरोध के पहुंचना पहले से ही पक्का है. पॉलिटॉक्स ने अपनी पिछली खबरों में पहले ही यह कन्फर्म कर दिया था कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह का राज्यसभा में पहुंचना निश्चित है.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आज भरेंगे नामांकन, बसपा ने दिया समर्थन

PoliTalks news

देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह मंगलवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करेंगे. इसके लिए वे जयपुर पहुंच चुके हैं. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उनका स्वागत करने पहुंचे. राजस्थान में मदनलाल सैनी के निधन के बाद खाली हुई सीट से कांग्रेस मनमोहन सिंह को राज्यसभा भेजेगी.  डॉ.सिंह फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं हैं. कांग्रेस के पास अपने 100 विधायकों के अलावा निर्दलीय, बसपा और बीटीपी सहित 122 विधायकों का समर्थन हासिल है. बसपा सुप्रीमो मायावती राजस्थान विधानसभा में अपने विधायकों के जरिए डॉ.मनमोहन सिंह का समर्थन पहले ही कर चुकी है. माना जा रहा है कि मनमोहन सिंह के सामने बीजेपी अपना प्रत्याशी नहीं उतरेगी. ऐसे में … Read more

‘गांधी ने गांधी को दिया इस्तीफा, फिर से गांधी बना अध्यक्ष’

एक कहावत बड़ी मशहूर है ‘तीतर के दो आगे तीतर, तीतर के दो पीछे तीतर, बोलो कितने तीतर’. ऐसा ही कुछ कांग्रेस पार्टी में हो रहा है. सोनिया गांधी ने 16 दिसम्बर, 2017 को जब गांधी परिवार के युवराज राहुल गांधी की ताजपोशी की थी यानि उनको पार्टी की कमान संभलायी थी तब ये निश्चित था कि कांग्रेस केवल वंशवाद आगे बढ़ा रही है. ऐसे में तय था कि कांग्रेस की सियासत की बागड़ौर केवल गांधी परिवार के हाथों में रहेगी. लोकसभा चुनाव-2019 में मिली करारी हार के बाद नैतिकता के आधार पर जिम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया.

राहुल गांधी ने ये इस्तीफा यूपीए चैयरपर्सन सोनिया गांधी को सौंपा. यानि एक गांधी को. उसके बाद शुरू हुई नए अध्यक्ष की तलाश. राहुल गांधी ने साफ तौर पर कहा कि अब पार्टी की बागड़ौर किसी गैर गांधी को सौंपी जाए लेकिन अब हुआ पहले से भी बड़ा झोल और एक बार फिर अध्यक्ष बन गयी सोनिया गांधी. यानि गांधी के बाद फिर गांधी. ऐसे में सीधे तौर पर कहा जाए तो इस्तीफा लेने वाला भी गांधी, देने वाला भी गांधी और नया अध्यक्ष भी गांधी.

इससे पहले जिस व्यक्ति का नाम अध्यक्ष पद पर सबकी पसंद था और उसे सभी का समर्थन भी मिल रहा था, वो भी था एक गांधी यानि प्रियंका गांधी. वहीं जिस नाम का सबसे ज्यादा समर्थन किया जा रहा है, वो भी गांधी. सीधे तौर पर कहा जाए तो कांग्रेस में फिर से गांधियों का वंशवाद शुरू हो गया जो बड़ी मुश्किल से लाइन पर आने वाला था. राहुल गांधी के इस्तीफे और पार्टी कमान संभालने को प्रियंका के इनकार के बाद लगने लगा था कि अब कांग्रेस को जो नया अध्यक्ष मिलेगा, निश्चित तौर पर कोई गैर गांधी ही होगा. इस लिस्ट में अशोक गहलोत सबसे आगे रहे लेकिन उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया.

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वजह रही कि राजनीति के जादूगर गहलोत को साफ तौर पर पता था कि वे कांग्रेस अध्यक्ष भले ही बन जाएं लेकिन पर्दे के पीछे और महत्वपूर्ण फैसलों में कलम केवल राहुल-सोनिया-प्रियंका यानि गांधी परिवार की ही चलेगी. ऐसे में उन्होंने बड़ा पद लेने की जगह राजस्थान की राजनीति में ही ध्यान देना उचित समझा. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह का भी यही सोचना है. अपनी बेबाकी के लिए जाने जाने वाले अमरिन्दर के हितों का टकराव सीधे गांधी परिवार से होगा, इसलिए उन्होंने अपना नाम कभी आगे ही नहीं आने दिया. इसके दूसरी ओर, उन्होंने प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनाने का विकल्प भी सुझा दिया.

कांग्रेस अध्यक्ष के नए नाम की इस लिस्ट में मुकुल वासनिक, सुशील शिंदे और मलिकार्जुन खडगे का नाम भी शामिल था लेकिन 5 ग्रुप की बैठक के बावजूद इनमें से किसी का नाम तय न हो सका. वहीं इस लिस्ट में युवाओं के तौर पर राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट और पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी था लेकिन सीनियर्स के अनुभव के सामने न तो युवाओं की रणनीति काम आयी और न ही उनकी युवा सोच.

अगर सीड्ब्ल्यूसी की एक ही दिन में दो बैठकों के बाद भी अगर कोई निष्कर्ष न निकलता तो पार्टी फिर से विपक्ष के निशाने पर आ जाती. शायद इसी डर से सोनिया गांधी को नए अध्यक्ष के चुनाव होने तक अंतरिम अध्यक्ष का दायित्व सौंप दिया. अब गौर करने वाली बात ये है कि चाहे कांग्रेस के नेता ये सोचकर खुश हो रहे हो कि चलो अब कुछ समय के लिए पार्टी के नए कप्तान की चिंता खत्म हुई लेकिन यह समस्या केवल टली है और वो भी कुछ समय के लिए. ज्यादा से ज्यादा चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने तक सोनिया अंतरिम अध्यक्ष का पद संभाल सकती हैं. उसके बाद से कांग्रेस की ये नोटंकी फिर से शुरू होगी और फिर से शुरू होगा गांधी बनाम गांधी का खेल.

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अब ये खेल कितना लंबा चलेगा, ये तो समय भी बताएगा लेकिन जो भी हुआ या जो होने वाला है, उससे एक बात तो एकदम साफ है कि गांधी परिवार के लोगों से पार्टी की बागड़ौर इतनी आसानी से नहीं फिसलने वाली. अगर जरा सी फिसल भी गयी जैसे कि राहुल गांधी के साथ हुआ है तो कांग्रेस के सिपेसालार फिर से इसे किसी न किसी गांधी के हाथों में थमा देंगे, फिर चाहें वो प्रियंका गांधी हो या सोनिया गांधी या फिर से राहुल गांधी.

बजट सत्र के बाद ईवीएम का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी

संसद के बजट सत्र का समापन होने के बाद कांग्रेस इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों की बैठक बुला सकती है. पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों की करारी हार के कारणों की तलाश में ईवीएम की भूमिका पर भी उंगली उठ रही है. कई लोग मानते हैं कि ईवीएम में गड़बड़ी की जा सकती है. 2019 के लोकसभा चुनाव में ईवीएम के जरिए मतदान हुआ और भाजपा ने 303 सीटों पर जीत हासिल की. लोकसभा चुनाव में बीजेपी इस अपार सफलता पर कई लोगों को आश्चर्य है. विपक्षी पार्टियां कई तरह की शंकाएं कर रही है. इसके मद्देनजर अगले चुनावों में कांग्रेस मतपत्रों के … Read more

कांग्रेस में असमंजस के आठ हफ्ते, अनौपचारिक बैठकें जारी

राहुल गांधी को इस्तीफा दिए आठ हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन उनकी जगह अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त करने के लिए आम राय नहीं बन पाई है. गांधी परिवार की तरफ से भी कोई संकेत नहीं मिल रहा है कि किसे अंतरिम अध्यक्ष बनाया जाए. कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों के बीच अनौपचारिक बैठकें चल रही हैं. इसमें नए अध्यक्ष का चुनाव होने तक अंतरिम अध्यक्ष के साथ ही एक संचालन समिति गठित करने पर भी विचार हो रहा है. इसके बाद कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी. फिलहाल कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक टल रही है. सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी 4-5 दिन दिल्ली से बाहर रहेंगे, इसलिए कम से कम … Read more