महाराष्ट्र में फडणवीस की जगह गडकरी या पाटिल बनें मुख्यमंत्री तो शिवसेना भी उपमुख्यमंत्री पर तैयार!

Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. पिछले लगभग 15 दिनों से महाराष्ट्र में चल रहे सियासी घमासान के बीच अब एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है. जानकारों की मानें तो शिवसेना अब महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री पद पर बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए तो राजी है लेकिन शिवसेना मुख्यमंत्री के रूप में देवेन्द्र फडणवीस को स्वीकार करने को तैयार नहीं है. देवेन्द्र फडणवीस की जगह शिवसेना नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) या चंद्रकांत पाटिल के नाम पर सहमत हो सकती है. हालांकि शिवसेना ने सार्वजनिक रूप से इस तरह की कोई बात अभी नही कही है लेकिन सूत्रों की मानें तो शिवसेना जल्द ही यह शर्त सार्वजनिक कर देगी. बता दें, … Read more

महाराष्ट्र: पॉलिटॉक्स की खबर पर लगेगी मुहर या फिर लगेगा राष्ट्रपति शासन, अगले 48 घण्टों में होगा फैसला

PoliTalks news Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में बुधवार को हुई एनसीपी प्रमुख शरद पवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अब पिक्चर पूरी तरह से साफ हो गयी है. अब महाराष्ट्र के सियासी दंगल में या तो पॉलिटॉक्स की खबर (PoliTalks news) पर मुहर लगेगी या फिर लगेगा राष्ट्रपति शासन. पॉलिटॉक्स ने 2 नवंबर को ही ”महाराष्ट्र में शिवसेना के तेवर पड़े नरम, फडणवीस बनेंगे 5 साल के लिए CM, तो भी फायदे में शिवसेना” शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी. खबर में पॉलिटॉक्स ने स्पष्ट तौर पर लिखा है कि महाराष्ट्र में किसी और की नहीं बल्कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार बनेगी और फडणवीस पांच साल के मुख्यमंत्री बनेंगे. बुधवार को एनसीपी प्रमुख … Read more

महाराष्ट्र की राजनीति ने याद दिलाई ‘चक दे इंडिया’ – ’70 घंटे हैं तुम्हारे पास, जी-भरकर खेलो’

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. ’70 मिनिट है तुम्हारे पास. जाओ और जी-भरकर खेलो’ शाहरुख खान की ‘चक दे इंडिया’ फ़िल्म का ये डायलॉग आज महाराष्ट्र में एकदम सटीक बैठ रहा है. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम को आए 12 दिन पूरे हो चुके है लेकिन प्रदेश में भाजपा और शिवसेना के बीच का फुटबॉल मैच खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा. ये दोनों एक दूसरे के गोल पोस्ट में गोल दागने की जी तोड़ कोशिश कर रहे है लेकिन हो नहीं पा रहा. अब शिवसेना ने मैच के गोलकीपर यानी शरद पवार से भी मैच फिक्सिंग यानी गठबंधन की गुजारिश की लेकिन इससे भी बात नहीं बनी. अब नियमों के … Read more

वीडियो खबर: क्या सच में लग जाएगा महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार के बयान पर शिवसेना भड़की हुई है और पलटवार करते हुए ‘सामना’ में लिखा, ‘शिवसेना ने कहा, ‘राष्ट्रपति की मुहरवाला रबर स्टैंप राज्य के बीजेपी ऑफिस में ही रखा हुआ है और बीजेपी शासन नहीं आया तो इस स्टैंप का प्रयोग करके महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन का आपातकाल लाद सकते हैं, इस धमकी का जनता ये अर्थ समझे क्या?

महाराष्ट्र में फडणवीस ने संघ प्रमुख भागवत से की मध्यस्थता की गुजारिश, एनसीपी ने बढ़ाई बीजेपी की मुश्किलें

Fadnavis and Bhagwat on Maharashtra CM

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र (Maharashtra) में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर बीजेपी-शिवसेना के बीच खींचतान अपने चरम पर है. इस बीच मंगलवार देर रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की. कयास लगाए जा रहे हैं कि फडणवीस ने मोहन भागवत से सरकार बनाने को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच मध्यस्थता करने की गुजारिश की है. इससे पहले सोमवार को देवेंद्र फडणवीस ने दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, महाराष्ट्र प्रभारी भूपेंद्र यादव और नितिन गडकरी से उन्होंने मुलाकात की थी. तब सूत्रों ने पॉलिटॉक्स की खबर पर भरोसा जताया था कि आखिर में बीजेपी-शिवसेना की सरकार बनेगी और मुख्यमंत्री बीजेपी का … Read more

‘फडणवीस ऐसी जगह से लाइफलाइन लेने की कोशिश कर रहे हैं, जहां लोग खुद मास्क पहन रहे हैं’

Government in Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर जारी खींचतान अब सियासी और जुबानी जंग में बदलती जा रही है. शिवसेना और भाजपा के नेता एक दूसरे पर छीटाकशी से भी बाज नहीं आ रहे और न ही एक दूसरे के सामने झुक रहे हैं. किसी भी पार्टी को महाराष्ट्र में बहुमत नहीं मिल रहा है. अब सरकार बनाने का पूरा दोरोमदार शिवसेना और एनसीपी प्रमुख शरद पवार पर आ गया है. अगर शिवसेना अपने हितों को थोड़ा साइड में रख दे तो भाजपा के साथ सरकार बन जाएगी. वहीं अगर पवार हां कर दे तो विपक्ष मिलकर सरकार बनाएगा और भाजपा सबसे बड़ा दल होने के बाद भी विपक्ष … Read more

वीडियो खबर: महाराष्ट्र में शिवसेना के तेवर पड़े नरम

Shiv Sena Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र में गुरुवार को हुई शिवसेना विधायक दल की बैठक के बाद ही यह स्थिति साफ नजर आ रही थी, जब शिवसेना ने वर्ली सीट से चुनाव जीतकर आए अपने राजकुमार आदित्य ठाकरे को न चुनकर बल्कि एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुना था.

महाराष्ट्र में शिवसेना के तेवर पड़े नरम, फडणवीस बनेंगे 5 साल के लिए CM, तो भी फायदे में शिवसेना

Shiv Sena Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में शिवसेना नेता संजय राउत ने शनिवार को कहा, “शिवसेना ने गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ा और हम आखिरी समय तक गठबंधन धर्म का पालन करेंगे.” शिवसेना के इस बयान को भाजपा के प्रति उसके नरम रुख के रूप में देखा जा रहा है. इससे पहले शिवसेना द्वारा NCP और कांग्रेस के समर्थन से महाराष्ट्र में सरकार बनाने के दावों की बार-बार आ रही खबरों के बाद NCP अध्यक्ष शरद पवार ने एक बार फिर स्पष्ट करते हुए कहा कि जनता ने उनकी पार्टी से विपक्ष में बैठने के लिए कहा है और पार्टी ऐसा ही करेगी. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी शिवसेना को समर्थन देने से इनकार किया है. अब जानकारों की मानें तो शिवसेना ने स्थिति को भांपते हुए अपने तेवर नरम कर लिए हैं, और महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना (Shiv Sena Maharashtra) मिलकर सरकार बनाने जा रही है. जिसके तहत देवेन्द्र फडणवीस पूरे 5 साल के लिए मुख्यमंत्री रहेंगे और शिवसेना से एक उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा.

पॉलिटॉक्स के सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र में गुरुवार को हुई शिवसेना विधायक दल की बैठक के बाद ही यह स्थिति साफ नजर आ रही थी, जब शिवसेना ने वर्ली सीट से चुनाव जीतकर आए अपने राजकुमार आदित्य ठाकरे को न चुनकर बल्कि एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुना था. जबकि इस बैठक से पहले यही कयास लगाए जा रहे थे कि विधायक दल का नेता आदित्य ठाकरे को चुनाव जाएगा लेकिन एकनाथ शिंदे को चुनकर शिवसेना ने कमोबेश यह स्पष्ट कर ही दिया था कि शिवसेना को भी यह आभास है कि समझौता तो उसे बीजेपी से ही करना पड़ेगा.

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शिवसेना ने ऐसा क्यों किया, इस पर सूत्रों की मानें तो सबसे पहला कारण तो यह है कि शिवसेना ने आदित्य ठाकरे के राजनीति में न के बराबर अनुभव को देखते हुए ये कदम उठाया है. चुनाव परिणामों के बाद आदित्य को सीएम बनाने के लिए अड़ी शिवसेना (Shiv Sena Maharashtra) की जिद पर कई राजनीतिक विशेषज्ञों ने इस बात पर कड़ी टिप्पणी की थी क्या वाकई आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद का अनुभव रखते हैं? कहीं न कहीं शिवसेना को भी इस बात का अहसास हुआ की पद मिलने के बाद किसी भी कारण से अगर फ़जीति हो गई तो फिर महाराष्ट्र की राजनीति में दुबारा इतना बड़ा कद बनाना फिर मुश्किल ही होगा.

अब चूंकि आदित्य को लेकर शिवसेना बार-बार मुख्यमंत्री पद की घोषणा करती आ रही है तो उनको उपमुख्यमंत्री के रुप में कैसे स्वीकार कर सकती है. यहां तक कि मुम्बई में ‘मातोश्री‘ के बाहर और अन्य कई जगहों पर आदित्य ठाकरे के मुख्यमंत्री की बधाई वाले पोस्टर लगाकर शिवसेना (Shiv Sena Maharashtra) ने यह अच्छे से घोषित कर दिया था की आदित्य बनेंगे तो मुख्यमंत्री ही. ऐसे में एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुनकर शिवसेना इस स्थिति के लिए अपने आप को तैयार कर चुकी है की अगर उपमुख्यमंत्री पद लेना पड़ा तो आदित्य ठाकरे नहीं बल्कि एकनाथ शिंदे को आगे कर दिया जाएगा. बता दें, विधायक दल की बैठक में शिंदे के नेता चुने जाने के दूसरे ही दिन ‘मातोश्री’ के बाहर आदित्य ठाकरे के मुख्यमंत्री की बधाई वाला पोस्टर उतार दिया गया है.

चाहे मजबूरी में ही सही लेकिन बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने और उपमुख्यमंत्री पद पर समझौता करके भी शिवसेना महाराष्ट्र की जनता का दिल जीतने में कामयाब हो ही जाएगी. ऐसा करके शिवसेना जनता के बीच ये मैसेज देगी कि शिवसेना ने न केवल जनता के आदेश को सिर माथे लगाते हुए स्वीकार किया है बल्कि ‘प्राण जाये पर वचन न जाये’ कि रीत को निभाते हुए बीजेपी के साथ किये गए ‘गठबंधन के धर्म’ को ही निभाया है. इससे आगे आने वाले स्थानीय चुनावों में शिवसेना (Shiv Sena Maharashtra) को जनता की सहानुभूति भी आसानी से मिल सकेगी. महाराष्ट्र की जनता ने जो वोट दिया वो बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को दिया है, अगर शिवसेना कांग्रेस या एनसीपी के साथ जाती है तो इसका गठबंधन के वोटर्स पर गलत मैसेज जाता.

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इसके अलावा उपमुख्यमंत्री पद पर स्वीकारोक्ति के साथ बीजेपी गठबंधन में सरकार बनाने से शिवसेना को भविष्य में एक फायदा और होने वाला है. अगले पांच सालों में आदित्य ठाकरे जो पहली बार राजनीति के खुले दंगल में उतरे हैं, उन्हें अपने दादा बाला साहेब ठाकरे और पिता उद्दव ठाकरे की तरह पर्दे के पीछे से सियासी रणनीति के चक्रव्हू को चलाने और भेदने का परिपक्व अनुभव भी हो जाएगा. ताकि अगली बार शिवसेना भाजपा के साथ नहीं बल्कि अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ सके, साथ ही अपनी पुरानी खानदानी प्रतिष्ठा को भी सहेज सके.

इसके विपरीत, शिवसेना हमेशा हिंदूत्व के मुद्दे पर चुनाव लड़ती आई है और अब केवल आदित्य को गद्दी दिलवाने के लिए ठाकरे परिवार अपने से विपरित धूरी वाली कांग्रेस के साथ गठजोड़ करती है तो आगामी चुनावों में और आदित्य के भविष्य के लिए भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

इस सब परिस्थितियों के बीच शनिवार को आया संजय राउत का बयान “शिवसेना ने गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ा और हम आखिरी समय तक गठबंधन धर्म का पालन करेंगे.” पॉलिटॉक्स की इस खबर पर मुहर लगाने जैसा है कि “महाराष्ट् में फडणवीस होंगे 5 साल के लिए CM, शिवसेना और बीजेपी से होंगे दो डिप्टी सीएम: सूत्र