राजस्थान लोकसभा: पहले चरण में 13 सीटों पर 153 नामांकन दाखिल, 27 निरस्त

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राजस्थान में लोकसभा चुनाव के पहले चरण की प्रक्रिया के बाद दूसरे चरण के लिए नामांकन शुरू हो गए हैं. पहले चरण में 13 और दूसरे चरण में प्रदेश की 12 सीटों पर मतदान होगा. पहले चरण के लिए प्रदेशभर में दाखिल नामांकन पत्रों की जांच पूरी हो चुकी है. निर्वाचन विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल 180 आवेदन में से 153 नामांकन जांच में वैध पाए गए. विभिन्न कमियां पाए जाने पर 27 नामांकन पत्र खारिज किए गए हैं. टोंक-सवाईमाधोपुर, उदयपुर एवं बांसवाड़ा सहित तीन निर्वाचन क्षेत्र ऐसे हैं जहां कोई भी रिजेक्शन पाया गया. यहां से कुल 24 नामांकन पत्र दाखिए किए गए थे. जालौर … Read more

जोधपुर सीट से जीत के लिए यह खास काम कर रहे हैं वैभव गहलोत

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कहते हैं कि किसी भी सफल पुरुष के पीछे किसी ने किसी महिला का हाथ जरूर होता है यह कहावत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर बिल्कुल सटीक बैठती है। यूं तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आज इस मुकाम तक पहुंचाने में प्रदेश की जनता का जितना हाथ है, उतना ही हाथ उनकी बड़ी बहन विमला का है।

बचपन से ही अशोक गहलोत अपनी बहन विमला के सानिध्य में पढ़ाई-लिखाई कर बड़े हुए और उन्हीं के यहां रहकर उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की। यही कारण है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले अपनी बड़ी बहन विमला का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ अब उनके पुत्र वैभव गहलोत भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने में लगे हैं। शायद वैभव गहलोत को इस बात का एहसास हुआ है कि उनके पिता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सफलता के पीछे उनकी बड़ी बहन विमला का आशीर्वाद ही है।

यही वजह रही कि जब वैभव गहलोत अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरूआत करने जा रहे थे तो सबसे पहले उन्होंने अपनी बुआ विमला का आशीर्वाद लेना उचित समझा। नामांकन दाखिल करने से पहले वैभव गहलोत सीधे अपनी बुआ विमला के घर पहुंचे और अपनी बुआ का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया. विमला देवी ने भी हमेशा की तरह अपने लाडले भतीजे को आशीर्वाद और स्नेह के साथ दुलारा. उसके बाद उन्होंने वैभव के हाथ पर रक्षा सूत्र बांधकर नेकी भी दी। यहां से आशीर्वाद लेने के बाद वैभव गहलोत सीधे ही नामांकन भरने पहुंचे।

आमतौर पर कोई भी प्रत्याशी नामांकन दाखिल करता है तो वह पहले भगवान के चरणों में सिर झुका कर और पूजा अर्चना कर अपना नामांकन दाखिल करता है लेकिन वैभव ने अपनी बुआ का आशीर्वाद लेकर राजनीतिक सफर की शुरुआत की है। जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने तो उस दौरान विमला ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि हर चुनाव में अशोक गहलोत मतदान के बाद सीधे उनके पास आते हैं और यहां से आशीर्वाद लेने के बाद ही जयपुर लौटते हैं।

2013 के चुनाव में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व्यस्तता के चलते मतदान करने के बाद अपनी बहन विमला से बिना मिले जयपुर निकल गए और चुनावी परिणाम से तो सभी वाकिफ हैं। इस चुनाव में कांग्रेस 50 सीटें भी नहीं निकाल पाई थी. इस बार जब 2018 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मतदान किया, उसके तुरंत बाद अपनी बहन के घर पहुंचे और उनसे आशीर्वाद लेकर जयपुर की ओर निकले। जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री पद पर बनने की घोषणा हुई तो विमला देवी ने कहा था कि पिछले चुनाव में व्यवस्थाओं के चलते अशोक गहलोत उनके पास नहीं आ सके थे जिसके चलते शायद वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए लेकिन इस बार वह उनके यहां आकर उनका आशीर्वाद लिया तो आज एक बार फिर वह मुख्यमंत्री बन रहे हैं।

अपने पिता अशोक गहलोत से प्रेरणा लेकर वैभव गहलोत ने भी आज इस परंपरा को जारी रखा है। अब देखना होगा कि हमेशा अपने भाई अशोक गहलोत के कलाई में रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें विपरीत परिस्थितियों में सफलता दिलाने वाली उनके बड़ी बहन विमला अपने भतीजे के लिए कितना लकी साबित होती है।

राजस्थान: दूसरे चरण के मतदान के लिए आज से नामांकन

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राजस्थान में दूसरे चरण के मतदान के लिए नामांकन प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है. अधिसूचना जारी होने के बाद प्रदेश में नोमिनेशन शुरू हुआ. दूसरे चरण के लिए 12 लोकसभा सीटों के लिए नामांकन होगा. प्रत्याशी अपना नामांकन 18 अप्रैल तक दाखिल करा सकते हैं. इस सप्ताह के आखिर में तीन छुट्टियां होने से नामांकन के लिए 6 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है. दूसरे चरण के मतदान 6 मई को होंगे. दूसरे चरण में श्रीगंगानगर, बीकानेर, चूरू, झुंझुनू, सीकर, जयपुर, अलवर, भरतपुर, करौली-धोलपुर, दौसा व नागौर में वोटिंग होगी. राजस्थान में कुल 25 सीटों पर लोकसभा चुनाव होंगे. पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया पहले ही … Read more

राजस्थान: टोंक-सवाई माधोपुर सीट पर जातिगत समीकरणों में उलझे दोनों दल

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सियासत में जब चुनाव और टिकट की बात होती है तो पहले यहां न दावेदार देखा जाता है और न ही चेहरा. सबसे पहले देखा जाता है उस क्षेत्र का जातीय समीकरण, जिसके आधार पर किसी प्रत्याशी की जीत तय होती है. फिर शुरू होती है टिकट की जद्दोजहद, जहां वो नेता बाजी मार ले जाता है जो उस क्षेत्र की जातियों पर पकड़ मजबूत रखता हो. फिर चाहें वह दावेदार बाहरी ही क्यों न हो.

कुछ इसी ​तरह ​की स्थिति राजस्थान की टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट पर बनी हुई है. गुर्जर मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने यहां से सुखबीर सिंह जौनपुरिया पर दांव खेला है जबकि कांग्रेस ने एसटी मतदाताओं की अधिकता को ध्यान में रखते हुए नमोनारायण मीणा को मैदान में उतारा है. जौनपुनिया ने 2014 में इस सीट से फतह हासिल की थी जबकि नमोनारायण मीणा 2009 के चुनाव में यहां से विजयी हो चुके हैं.

आपको बता दें कि टोंक-सवाई माधोपुर सीट पर एससी के करीब तीन लाख 60 हजार और एसटी के 3 लाख मतदाता हैं. यहां 2.60 लाख गुर्जर, 1.95 लाख मुस्लिम, 1.45 लाख जाट, 1.35 लाख ब्राह्मण, 1.15 लाख महाजन, डेढ़ लाख माली और एक लाख राजपूत और दो लाख से अधिक बाकी जातियां हैं. दोनों उम्मीदवारों का पूरा चुनाव प्रचार इन जातियों को अपने-अपने पक्ष में लामबंद करने पर केंद्रित है.

चाहे जौनपुरिया हों या मीणा, दोनों उम्मीदवार जातियों को लामबंद करने में जुटे हैं. जौनपुरिया को उम्मीद है कि उन्हें वैश्य, ब्राह्मण, राजपूत और मूल ओबीसी के वोट तो एकमुश्त मिलेंगे ही. जौनपुरिया समर्थक साफतौर पर कहते हैं कि यदि 2014 के चुनाव की तरह इस बार भी गुर्जर वोट भी बीजेपी उम्मीदवार को मिल जाएं तो जीत तय है.

दरअसल, बीजेपी उम्मीदवार सुखबीर सिंह जौनपुरिया विधानसभा चुनाव में गुर्जरों के कांग्रेस की ओर रुख करने से परेशान हैं. आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव में सचिन पायटल के टोंक से चुनाव लड़ने का असर आस-पास की सीटों पर भी पड़ा. टोंक और सवाई माधोपुर की आठ विधानसभा सीटों में से बीजेपी सिर्फ मालपुरा सीट पर जीत दर्ज कर पाई. जबकि छह सीटों पर कांग्रेस और एक पर निर्दलीय ने कब्जा जमाया.

बीजेपी को यह डर सता रहा है कि विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी गुर्जर वोट कांग्रेस के पाले में जा सकते हैं. हालांकि पार्टी को यह भरोसा है कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाने की वजह से गुर्जर कांग्रेस से नाराज हैं और वे विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में मतदान नहीं करेंगे. अलबत्ता इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि आरक्षण मिलने के बाद गुर्जर समाज का बड़ा तबका गहलोत सरकार से खुश है.

बात कांग्रेस उम्मीदवार नमोनारायण मीना की करें तो उन्हें गुर्जरों के अलावा मीणा, मुस्लिम और एससी वोट मिलने की उम्मीद है. हालांकि कांग्रेस के कई स्थानीय नेता इस बात से खफा हैं कि एक सामान्य सीट पर एसटी उम्मीदवार को टिकट दिया गया. नमोनारायण मीणा के लिए राहत की बात यह है कि कोई स्थानीय नेता उनका खुलकर विरोध नहीं कर रहा.

दूसरी ओर बीजेपी उम्मीदवार सुखबीर सिंह जौनपुरिया भितरघात से जूझ रहे हैं. देवली-उनियारा में पूर्व विधायक राजेंद्र गुर्जर, गंगापुर सिटी में पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर और पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी ने सार्वजनिक तौर पर तो नाराजगी जाहिर नहीं की है, लेकिन वे चुनाव प्रचार में सक्रिय नजर नहीं आ रहे. मालपुरा विधायक कन्हैया लाल चौधरी भी जौनपुरिया से नाराज बताए जा रहे हैं.

यह में यह देखना रोचक होगा कि जाति के जंजाल में उलझी राजनीति चुनाव में ​किसका बेड़ा पार करेगी और किसका बेड़ा गर्क. टोंक-सवाई माधोपुर के मतदाता मौन रहकर दोनों दलों के उम्मीदवारों के सियासी करतबों को देख रहे हैं. मतदान के दिन उसका मुखर होना उम्मीदवारों की तकदीर तय करेगा.

दिल्ली में वैभव गहलोत की जीत की जमानत मैं देकर आया हूं- पायलट

राजस्थान की सबसे ‘हॉट सीट’ बन चुकी जोधपुर में कांग्रेस उम्मीदवार वैभव गहलोत ने नामांकन दाखिल किया. इसके बाद आयोजित सभा में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बड़ी बात कही. अपने संबोधन में पायलट ने कहा कि वैभव गहलोत की जीत की जमानत दिल्ली में मैं देकर आया हूं.

पायलट ने कहा, ‘आप अशोक गहलोत को अच्छी तरह जानते हैं. दिल्ली में जब टिकट वितरण को लेकर चर्चा चल र​ही कि कौन जोधपुर से जीत सकता है तो अशोक गहलोत कुछ नहीं बोले वैभव गहलोत को लेकर. वैभव गहलोत की जीत की जमानत दिल्ली में मैं देकर आया हूं. पांडे जी इस बात के गवाह हैं.’ पायलट के इस बयान का राजनीति के जानकार अपने-अपने ढंग से अर्थ निकाल रहे हैं.

जोधपुर के पावटा चौराहे पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी राजनीति की शुरुआत का जिक्र करते हुए अब तक के सफर का उल्लेख किया. उन्होंने पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार और मोदी सरकार पर जोधपुर की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए तंज कसे. वैभव गहलोत ने भी अपने भाषण में इन्हीं आरोपों को दोहराया. सभा को प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने भी संबोधित किया.

सभा में पूरे प्रदेश के बड़े कांग्रेसी नेता मौजूद रहे. आपको बता दें ​कि जोधपुर में वैभव गहलोत का मुकाबला बीजेपी के गजेंद्र सिंह शेखावत से है. चुनाव प्रचार के दौरान वैभव अपने पिता की मजबूत छवि को चुनावों में भुनाने में जुटे हैं जबकि गजेंद्र सिंह शेखावत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं.

सूर्यनगरी में जुटे कांग्रेस के दिग्गज, वैभव गहलोत के समर्थन में जनसभा

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सूर्यनगरी जोधपुर आज कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का गढ़ बनी हुई है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, डिप्टी सीएम सचिन पायलट, प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, बीडी कल्ला, मानवेंद्र सिंह और चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के साथ कई कांग्रेसी नेता और दिव्या मदरेणा सहित कई विधायक यहां मौजूद हैं. मौका है वैभव गहलोत के नामांकन का. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र जोधपुर लोकसभा सीट से कांग्रेसी उम्मीदवार हैं और आज नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं. नामांकन के पहले एक जनसभा रखी गई है जहां सभी राजनेता वैभव गहलोत के पक्ष में जनता से वोट अपील कर रहे हैं. पावटा चौराहे स्थिति जनसभा को वैभव गहलोत खुद भी संबोधित करेंगे. जोधपुर कांग्रेस का … Read more

वसुंधराजी कहती थी-गहलोत सड़कों पर घूमकर भीख मांग रहा है: गहलोत

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आखिरकार अपने बेटे वैभव गहलोत को प्रदेश की सक्रिय राजनीति में प्रवेश कराने के लिए जोधपुर आ ही गए. उन्होंने वैभव की लोकसभा सीट और अपनी कर्मस्थली में वैभव के लिए शहर की जनता के आशीर्वाद के साथ वोट भी मांगे. इस दौरान उन्होंने प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुन्धरा राजे पर भी निशाना साधा. वसुंधराजी कहती थी ‘गहलोत सड़कों पर घूमकर भीख मांग रहा है।’ मैंने कहा कि वसुंधराजी, मुझे गर्व हो रहा है कि मैं लोगों के बीच जा रहा हूं. यह भी पढ़ें: जोधपुर में गर्माया ‘स्थानीय’ का मुद्दा, एक-दूसरे पर बाहरी होने का तंज जोधपुर से मेरा … Read more

राजस्थान: जोधपुर में गर्माया ‘स्थानीय’ का मुद्दा, एक-दूसरे पर बाहरी होने का तंज

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देश में होने वाले आम चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों का अपना महत्व होता ही है लेकिन राजस्थान की सबसे हॉट सीट जोधपुर में राष्ट्रीय मुद्दों के साथ ही इस बार स्थानीय होने का मुद्दा काफी गर्मा रहा है. हालांकि इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे वैभव गहलोत और बीजेपी के गजेंद्र सिंह शेखावत दोनों ही प्रत्याशियों की जन्मभूमि जोधपुर नहीं है. इसके बावजूद दोनों अपने आप को स्थानीय बताने के लिए अलग-अलग दलीलें पेश कर रहे हैं. जोधपुर लोकसभा सीट से बीजेपी ने वर्तमान सांसद और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह को फिर एक बार मैदान में उतारा है वहीं कांग्रेस ने जातिगत समीकरणों को दरकिनार करते हुए प्रदेश मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे को चुनावी मैदान में उतारा है.

एक अप्रैल को जब वैभव गहलोत जोधपुर आए तो बीजेपी प्रत्याशी गजेंद्र सिंह शेखावत ने तंज कसते हुए कहा कि प्रवासी (बाहरी) का जोधपुर में स्वागत है. शेखावत की ओर से वैभव गहलोत को बाहरी बताए जाने के बाद कांग्रेसी कार्यकर्ता भी आक्रामक नजर आ रहे हैं. इसके बाद तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गजेंद्र सिंह को ही बाहरी प्रत्याशी बताना शुरू कर दिया है. वैसे देखा जाए तो वैभव और गजेंद्र सिंह दोनों की जन्मभूमि जोधपुर नहीं है.

बात करें गजेंद्र सिंह शेखावत की तो वह मूल रूप से सीकर जिले के मेहरोली से हैं. उनका जन्म जैसलमेर में हुआ था. उनके स्कूली शिक्षा बीकानेर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में हुई थी. कॉलेज शिक्षा जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में हुई और यही से उन्होंने छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ते हुए अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की. छात्रसंघ अध्यक्ष चुने जाने के बाद शेखावत ने जोधपुर संभाग के अलग-अलग जिलों में संगठनात्मक दृष्टि से काम किया और इसी को आधार बनाते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत अपने आप को जोधपुर का साबित कर रहे हैं.

बात की जाए वैभव गहलोत की तो उनका जन्म जयपुर में हुआ. स्कूल शिक्षा दिल्ली तो उच्च शिक्षा पूना में हुई. वैभव लंबे समय से जयपुर में ही रह रहे हैं लेकिन 2003 के बाद से सभी विधानसभा, लोकसभा और नगर निगम के चुनावों में वैभव गहलोत जोधपुर की राजनीति में सक्रिय नजर आए. खुद वैभव भी अपने हर संबोधन में खुद को जोधपुर का बेटा बताते हुए कहते हैं कि उनके दादा बाबू लक्ष्मणसिंह में जोधपुर की सेवा की और उसके बाद उनके पिता अशोक गहलोत पिछले 40 वर्षों से जोधपुर की जनता के बीच रहकर कार्य कर रहे हैं. गजेंद्र सिंह के तंज का जवाब देते हुए वैभव गहलोत कहते हैं कि उन्हें प्रवासी बताने वाले पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखें कि वह स्वयं कहां से आए हैं.

खैर, कौन प्रवासी है, यह मुद्दा तो चुनावी है लेकिन इस बार जोधपुर में दोनों ही पार्टियों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा है. यह सीट अशोक गहलोत के होने से कांग्रेसी गढ़ है और वैभव खुद अपने पिता के नाम पर वोट मांग रहे हैं. वहीं गजेंद्र सिंह को भी इस बात का अहसास है और वें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ रहे हैं. दोनों एक-एक वोट को अपने पक्ष में करने के लिए दमखम लगा रहे हैं. ज्यो-ज्यो चुनाव की तारीख नजदीक आती जाएगी, जबानी हमले तो तेज होंगे ही लेकिन प्रवासी और स्थानीय का यह मुद्दा अपनी गर्माहट बनाए रखेगा.