राजस्थान में एक साल बढ़ेगा पंचायत सहायकों का कार्यकाल

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राजस्थान में पंचायत सहायकों का कार्यकाल एक साल बढ़ाया जाएगा. यह जानकारी प्रदेश के डिप्टी सीएम और ग्रामीण विकास व पंचायती राज मंत्री सचिन पायलट ने विधानसभा में दी. उन्होंने बताया कि पंचायत सहायकों के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जा चुकी है. वित्तीय स्वीकृति प्राप्त होते ही कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया जाएगा. राज्य में शीघ्र ही मनरेगा कार्यों के सामाजिक अंकेक्षण के लिए एक स्वतंत्र समाज SSAAT का गठन होगा। जो मनरेगा कार्यों का सामाजिक लेखा-जोखा करेगा, यह ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग से स्वतंत्र होगा तथा इसका उद्देश्य सामाजिक ऑडिट प्रक्रिया को मजबूत एवं गहरा करना होगा। pic.twitter.com/vKtJ5GRt6p — … Read more

जयपुर का परकोटा विश्व विरासत में शामिल, PM मोदी और CM गहलोत ने दी बधाई

293 साल पुराना जयपुर संस्कृति और वीरता से जुड़ा शहर है जो हमेशा से ही पर्यटकों का पसंदीदा पर्यटन स्थल रहा है. आज इस शहर की चमक और भी बढ़ गई है. जयपुर शहर को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट में दर्ज किया है. दरअसल, राजस्थान की राजधानी गुलाबी नगरी जयपुर के परकोटे को यूनेस्को ने ‘विश्व धरोहर’ की सूची में शामिल किया है. इस समिति की बाकू में चल रही बैठक में यह निर्णय लिया गया है. २१ में से १६ देशों ने इस फैसले का समर्थन किया है. यूनेस्को ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. बता दें, जयपुर देश का दूसरा ऐसा सिटी है जो विश्व धरोहर … Read more

‘युवा कप्तान या ग्रैंड ओल्ड पार्टी’ के फेर में फंसी कांग्रेस

राहुल गांधी के इस्तीफा सार्वजनिक करने के बाद भी लगता है जैसे कांग्रेस के कप्तान पर अभी तक सबकी एकमत राय नहीं बन पा रही है. राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद नए कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर अब तक अशोक गहलोत, मल्लिकार्जुन खड़गे, सुशील कुमार शिंदे, के.सी.वेणुगोपाल और मोतीलाल वोरा के नाम सामने आ चुके हैं.  लेकिन इनमे से किसी के भी नाम पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने मुहर नहीं लगाई है. कांग्रेस की नाव का नया खेवनहार कौन होगा, इसपर बहस चल ही रही थी कि एक नया बखेड़ा और खड़ा हो गया है.

पंजाब के मुख़्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक बयान देकर सभी की नींदे उड़ा दी है. कैप्टन ने कहा है कि ‘राहुल गांधी का पद छोड़ने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है. अब कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में एक गतिशील युवा नेता की उम्मीद है. CWC से आग्रह है कि युवा भारत की युवा आबादी के लिए युवा नेता की जरूरत पर ध्यान दें.’ कैप्टन ने यह बयान सोशल मीडिया पर शेयर किया है.

अमरिंदर सिंह ने यह भी कहा है कि देश की बहुसंख्यक युवा आबादी के मद्देनजर कांग्रेस वर्किंग कमिटी को राहुल गांधी के विकल्प के तौर पर नई पीढ़ी के ऐसे नेता को कमान सौंपनी चाहिए, जो अपनी देशव्यापी पहचान और जमीन से जुड़ाव के जरिए लोगों को उत्साहित कर सके. यही नहीं, अमरिंदर ने बुजुर्ग नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि समय आ गया है कि पुराने लोग नए लोगों को रास्ता दें. वरना कांग्रेस मौजूदा चुनौतियों का सामना नहीं कर पाएगी.

अब इस मामले पर फिर से एक बहस छिड़ गई है. कैप्टन अमरिंदर सिंह का बयान इसलिए भी अहम है, क्योंकि पहली बार पार्टी के किसी नेता ने अगले कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर विचार रखा है. अब इस बात को गफलत में इसलिए भी नहीं रखा जा सकता क्योंकि सोशल मीडिया पर बयान आने के बाद उनके विचार सभी के पास पहुँच गए है. ऐसे में उनकी मांग को अनदेखा भी नहीं किया जा सकता.

कैप्टन के ये विचार इसलिए भी अहम है क्योंकि अमरिंदर सिंह कांग्रेस सत्ताधारी राज्यों मे पहले ऐसे CM थे जिन्होंने न केवल खुद के दम पर विधानसभा चुनाव जीता बल्कि लोकसभा चुनाव में साफ तौर पर कहा था कि अगर पंजाब में उनका नेतृत्व फेल होता है तो वो पद से इस्तीफा दे देंगे. उनके इस बयान के बाद राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में हुई शर्मनाक हार के बाद यहां के मुख्यमंत्रियों को कमान सपने हाथों से जाती हुई दिख रही थी. हालांकि ऐसा कुछ हुआ नहीं.

अभी तक नए कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर जितने भी नाम सामने आये हैं, वे सभी नाम ‘ग्रैंड ओल्ड पार्टी’ कांग्रेस के नाम जैसे ही है. मोतीलाल वोरा (90) साल के है. अशोक गहलोत (68), मल्लिकार्जुन खड़गे (76) और सुशील कुमार शिंदे (77) कोई भी युवा नहीं है. अगला नाम है के.सी.वेणुगोपाल जो 56 साल के है और काफी हद तक इस जिम्मेदारी को वहन करने की काबिलियत भी रखते है लेकिन युवा तो ये भी नहीं है.

अब कैप्टन के इस बयान ने सवाल तो खड़ा कर ही दिया कि अगर उनकी बात पर गौर किया जाए तो आखिर कांग्रेस के पास युवा नेताओं के तौर पर कौन से चेहरे हैं? इनमें सबसे पहले राजस्थान के डिप्टी CM के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और पार्टी के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम आता है. उनके पास पश्चिमी यूपी का प्रभार है. मुकुल वासनिक के रूप में कांग्रेस एक और महासचिव को इस सूची में शामिल किया जा सकता है.

जहां तक प्रियंका गांधी का सवाल है तो वो इस रेस में इसलिए नहीं हैं क्योंकि राहुल गांधी चाहते हैं कि उनके बाद पार्टी अध्यक्ष गांधी परिवार के बाहर का नेता बने. ऐसे में देश के राजनैतिक पटल पर 60 साल तक एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस की पतवार युवा कप्तान या ग्रैंड ओल्ड पार्टी के भंवर में एकबार फिर फंसते हुए नजर आ रही है.

राजनीतिक नियुक्तियों की आलाकमान तक पहुंची शिकायत, प्रियंका करेंगी निपटारा

राजस्थान में राजनीतिक नियुक्तियों और सरकार में संगठन के लोगों को तवज्जों नहीं देने का मसला कांग्रेस आलाकमान तक पहुंच गया है. बताया जा रहा है कि विदेश से लौटते ही पीसीसी चीफ और डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने आलाकमान से इसकी शिकायत की है. पायलट ने राहुल गांधी से कहा कि संगठन के लोगों को सरकार में दरकिनार किया जा रहा है.

पायलट ने यह पीड़ा भी जाहिर की है कि बिना संगठन की सलाह से नियुक्तियां की जा रही है. ऐसे में अब राजनीतिक नियुक्तियों का काम पूरी तरह से बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी ने अपने हाथ में ले लिया है. इससे पहले कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मंत्रीमंडल फेरबदल और नियुक्तियों के लिए फ्री हैंड देने की अटकलों की खबरें चली थी. इससे साफ है कि राजस्थान में आला नेताओं में अब भी विवाद बरकरार है.

विधानसभा सत्र के बाद होनी है राजनीतिक नियुक्तियां
सूत्रों के मुताबिक सीएम अशोक गहलोत ने राजनीतिक नियुक्तियां का काम लगभग निपटा लिया था. जिन नेताओं को नियुक्तियां देनी थी उनके नामों की लिस्ट भी वो दिल्ली में आलाकमान को दे आए हैं. लेकिन राहुल गांधी के इस्तीफा प्रकरण और विधानसभा सत्र के चलते नियुक्तियों का काम अगस्त तक अटक गया. बताया जा रहा है कि नियुक्तियों में सिफारिश अपने ही लोगों की गई है.

पीसीसी चीफ सचिन पायलट को जैसे ही इसकी भनक लगी, उन्होंने आलाकमान से अपनी आपत्ति दर्ज कराई. सामने आ रहा है कि पायलट संगठन के लोगों को मौका नहीं देने और सलाह नहीं लेने तक की शिकायत की है. अगर इस खबर में दम है तो फिर नियुक्तियों में अब और ज्यादा देरी हो सकती है.

प्रियंका गांधी ने लिया नियुक्तियों का काम अपने हाथ में
बताया जा रहा है कि नियुक्तियों को लेकर आ रही विवाद की खबरों के बीच प्रियंका गांधी ने कमान संभाल ली है. क्योंकि राहुल गांधी पार्टी की किसी गतिविधियों के काम को अपने हाथ में लेने से साफ मना कर चुके हैं. ऐसे में अब राजस्थान में तमाम राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर प्रियंका गांधी ही अंतिम फैसला लेगी.

इसकी भनक लगते ही राजस्थान के कांग्रेस नेताओं ने अब प्रियंका गांधी के यहां सिफारिश भी कराना शुरु कर दिया है. पायलट की आपत्ति में दम इसलिए भी लग रहा है क्योंकि हाल ही में कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को नियुक्तियों के लिए आलाकमान का फ्री हैंड मिलने की खबरें सामने आई थी.

आखिर अशोक गहलोत के खिलाफ कौन करा रहा है मीडिया में खबरें प्लांट

पार्टी से ज्यादा गहलोत ने पुत्र मोह को तवज्जो दी. कांग्रेस पार्टी के हत्यारे तो इस बैठक में बैठे है और वैभव गहलोत की हार की जिम्मेदारी तो पायलट लें. ये वो मीडिया की पिछले दिनों सुर्खियां थी जिससे लोग गहलोत के सीएम पद से रवानगी के कयास लगाने लग गए थे. परिणाम के बाद लगातार गहलोत के खिलाफ ये खबरें मीडिया में आ रही है. ऐसे में गहलोत समर्थकों का दावा है कि उनके खिलाफ खबरें प्लांट करने की सुनियोजित साजिश को अंजाम दिया जा रहा है .

ताजा विवाद गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के रुप में सामने आया है. खबर आई कि अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा रहा है और प्रदेश की कमान उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को सौंपी जाएगी. लेकिन जानकारों की माने तो इस खबर में जरा भी दम नहीं है. क्योंकि गहलोत और उनके समर्थकों को पूर्ण भरोसा है कि वो पांच साल सीएम रहेंगे और कहीं नहीं जाने वाले.

गहलोत ने हाल ही में बीकानेर हाऊस का दौरा करके औऱ सीएम हाऊस में शिफ्ट होकर साफ इसके संकेत भी दे चुके हैं. हालांकि यह जरुर है कि प्लांटेड न्यूज से गहलोत परेशान जरुर है. उन्हें यह भी पता है कि ये खबरे कौन प्लांट करा रहा है.

इससे पहले  गहलोत का एक निजी चैनल को दिए गए इंटरव्यू से भी जमकर बवाल मच गया था. गहलोत के चैनल पर बोले गए कुछ शब्दों को लेकर हैडलाइंस बना दी थी. वैभव गहलोत की हार की जिम्मेदारी वाले बयान के एक अंश को तवज्जो देते हुए खबरें प्लांट हो गई. जबकी इंटरव्यू में गहलोत हार की सामूहिक जिम्मेदारी होने का दावा साफ कर रहे थे.

ताज्जुब की बात है कि गहलोत के खिलाफ सूत्रो के हवाले से पहले एक मीडिया संस्थान खबर चलाता है. बाद में मीडिया संस्थान लपकते हुए उसमें तड़का लगाते हुए जान डालने की कोशिशें करते है. नाराज राहुल गांधी की अशोक गहलोत से नहीं मिलने की खबरें लगातार 20 दिन सुर्खियों में रही. परेशान गहलोत को जन्मदिन के दिन राहुल गांधी से मिलकर न चाहते हुए भी खबरों का खंडन करवाना पड़ा.

अशोक गहलोत संदेश और मैसेज की सियासत करते है. जैसी खबरें चल रही है, उनसे बेखबर गहलोत फिलहाल बजट तैयार करने और विधानसभा सत्र की तैयारी में जुटे हुए हैं. गहलोत को पता है कि खबरें पूरे पांच साल शायद ऐसी ही चलती रहेगी लेकिन उनकी सेहत औऱ सियासत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला. लिहाजा गहलोत चिर-परिचित अपने अंदाज में मंद्ध मंंद्ध मुस्कराते हुए ऐसी खबरों को पढ रहे है.

 

राजस्थान: विधानसभा सत्र के बाद होगी राजनीतिक नियुक्तियां और मंत्रीमंडल में फेरबदल

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विधानसभा सत्र के चलते और राहुल गांधी के इस्तीफे का पटाक्षेप नहीं होने के कारण राजस्थान सरकार के मंत्रीमंडल में किसी भी तरह के फेरबदल की अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है. साथ ही राजनीतिक नियुक्तियों पर भी ब्रेक लग गए है. अब विधानसभा सत्र के बाद अगस्त या फिर दिवाली से पहले यह फेरबदल और नियुक्तियां होना तय है. हालांकि दिल्ली से लेकर जयपुर तक इसके लिए लॉबिंग जारी है. सूत्रों के मुताबिक, प्रियंका गांधी ने यह दोनों अहम काम फिलहाल अपने हाथ में लिए हैं. मंत्रीमंडल फेरबदल-विस्तार और निुयक्तियों में बसपा और निर्दलीय विधायकों को भी मौका मिलना तय है. अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस कोटे … Read more