जब वाजपेयी बिमार पड़े तो राजीव गांधी ने उन्हें ईलाज के लिए भेजा अमेरिका – पायलट

पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न राजीव गांधी की 75वीं जयंती मंगलवार को देशभर में मनायी गयी. कांग्रेस पार्टी द्वारा स्व.राजीव गांधी को याद कर विभिन्न कार्यक्रमों का देशभर में आयोजन किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर राजीव गांधी को श्रद्धांजलि दी. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी तथा राजस्थान सरकार ने राजीव गांधी जयंती का कार्यक्रम पूरे वर्ष आयोजित करने का निर्णय लिया है. इन कार्यक्रमों के तहत राजीव गांधी की युवाओं तथा देश की उन्नति के प्रति जो सोच व दृष्टिकोण था, उसे जनता के मध्य पहुंचाया जाएगा. इसके तहत प्रदेश में वर्षभर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होगा.

इसी क्रम में राजस्थान सरकार द्वारा राजीव गांधी जयंती के उपलक्ष में दो दिवसीय कार्यक्रम प्रदेश की राजधानी जयपुर के बिडला आडिटोरियम में आयोजित हुआ. समारोह के दूसरे दिन मंगलवार को सुबह जयपुर में ऊर्जा विभाग की ओर से अक्षय ऊर्जा दौड का आयोजन हुआ. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत रहे. ऊर्जा दौड को हरी झंडी दिखाने से पहले सीएम गहलोत ने दौड में हिस्सा ले रहे सभी प्रतिभागियों को ऊर्जा बचत करने की शपथ दिलाई. इस मौके पर मुख्य सचिव डीबी गुप्ता, राज्यमंत्री अशोक चांदना, मंत्री बीडी कल्ला, मुख्य सचेतक महेश जोशी, विधायक कृष्णा पूनियां और जयपुर महापौर विष्णु लाटा सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे.

पीसीसी में पुष्पांजली सभा
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर राजीव गांधी की स्मृति में पुष्पांजली कार्यक्रम का आयोजन रखा गया. साथ ही राजीव गांधी के जीवन से जुडी फोटो प्रदर्शनी का भी उदघाटन हुआ. इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ एवं डिप्टी सीएम सचिन पायलट, पूर्व पीसीसी चीफ डॉ. चंद्रभान, मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास, चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अर्चना शर्मा, वरिष्ट कांग्रेस नेता गिरिजा व्यास, कांग्रेसी विधायक, पीसीसी सदस्य सहित कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे.

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राजीव गांधी की बदौलत इंदिरा गांधी कैनाल का पानी प्रदेश में आया: गहलोत
जयंती समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राजीव गांधी अगर आज जिंदा होते तो 75 वर्ष के होते. उनके राज में ही मुझे मंत्री बनने का मौका मिला. गहलोत ने कहा कि राजीव गांधी ने 21वीं शताब्दी का सपना देखा, जिसमें आज हम खड़े हैं. नई पीढ़ी को ये मालूम नहीं कि राजीव गांधी के देश के लिए क्या किया. सबके हाथ में मोबाइल, गली-गली में कम्प्यूटर और एसटीडी बूथ सब उनकी ही सोच थी. आज सोशल मीडिया के नाम पर केवल देश को गुमराह करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है. एक घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक बाद राजीव गांधी जोधपुर आए. उनकी स्वागत स्पीच में मैने कहा कि जोधपुर को इंदिरा गांधी कैनाल का पानी मिलना चाहिए. स्पीच के बाद राजीव गांधी ने मुझे कहा कि मुझे याद दिलाना. मैने माथुर से बात कर ली है. कुछ दिन बाद गांधी प्रधानमंत्री बने और इस प्रोजेक्ट की मॉनेटरिंग पीएमओ से होने लगी. आज उन्हीं की बदौलत प्रदेश के कई जिले पानी पी रहे हैं. उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की रक्षा के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी जान दे दी लेकिन आज सैनिकों के पीछे छिपकर राजनीति हो रही है.

डिजिटल इंडिया की नींव राजीव गांधी ने रखी: पीसीसी सचिव
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव विवेक बंसल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमें स्व. गांधी पर गर्व होता है. उनको याद कर हमारा सीना चौड़ा हो जाता है. राजीव गांधी दूरदर्शी सोच के धनी थे. कंप्यूटर उनकी देन थी. डिजिटल इंडिया की नींव भी राजीव गांधी ने रखी. आज जो मोबाइल हमारे हाथ में है, वो भी राजीव गांधी की देन है.

जब वाजपेयी बिमार पड़े तो राजीव गांधी ने उन्हें अमेरिका भेजा: पायलट
डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा कि आज का समय राजीव गांधी के किए हुए कामों को याद करने का है. उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि सरकार ने सालभर तक राजीव गांधी की जयन्ती मनाने का निर्णय लिया है. पायलट ने बताया कि 1989 के चुनाव में सबसे ज्यादा बहुमत कांग्रेस को मिला. फिर भी राजीव विपक्ष में बैठे और कहा कि देश की जनता से हमें बहुमत नहीं मिला. इस हार के बाद राजीव गांधी देशभर में घूमे. उनका मानना था सत्ता आती-जाती है. जब अटल बिहारी वाजपेयी बीमार पड़े तो राजीव गांधी ने ही उन्हें ईलाज के लिए अमेरिका भेजा. वाजपेयी ने ऑन रिकॉर्ड कहा भी था कि अगर आज मैं जिंदा हूं तो राजीव गांधी की वजह से. डिप्टी सीएम ने कहा कि राजीव गांधी एक मिलनसार व्यक्तिव के धनी थे. एक बार जो उनसे मिल लेता था, उनको भूल नहीं पाता था. वो पूरी पार्टी को अपना परिवार मानते थे और सभी कार्यकर्ताओं से आत्मीयता से मिलते थे. देश में टेक्नोलॉजी की नींव भी उन्होंने ही रखी थी. सचिन पायलट ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं से एकजुट हो देशभर में कांग्रेस का प्रचार करने का आव्हान किया.

गहलोत और पायलट के बीच की खींचतान एक बार फिर उजागर

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की 75वीं जयंती मंगलवार को देश भर में मनायी गयी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी टवीट कर पूर्व पीएम स्व. राजीव गांधी को श्रद्धांजली दी. राजस्थान सरकार पूर्व प्रधानमंत्री की जयंती को पूरे साल भर मनायेगी. वहीं मंगलवार को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की 75 वी जयंती समारोह के मौके पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच की कड़वाहट एक बार फिर सामने आई.

राजस्थान में राजीव गांधी जयंती के मौके पर दो दिवसीय कार्यक्रम प्रदेश सरकार की तरफ बिड़ला सभागार में किया गया, जिसका उद्घाटन सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया. लेकिन सचिन पायलट इस कार्यक्रम में गैरहाजिर रहे. अगले दिन मंगलवार को संगठन की तरफ से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पुष्पांजलि का कार्यक्रम आयोजित हुआ, जो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने आयोजित किया था. इस कार्यक्रम में अशोक गहलोत भी पहुंचे.

हुआ यूं कि पीसीसी में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि एक बार स्व0 राजीव गांधी के जोधपुर दौरे के दौरान मैंने अपनी स्पीच में कहा जोधपुर को इंदिरा गांधी कैनाल का पानी मिलना चाहिए. मेरी स्पीच के बाद राजीव गांधी ने बोला मुझे याद दिलाना. फिर कुछ दिन बाद गांधी बने प्रधानमंत्री और इस प्रोजेक्ट की मोनेटरिंग पीएमओ से होने लगी और आज वो पानी प्रदेश के कई जिलों के लोग पी रहे हैं.

इसके बाद जब सचिन पायलट की बारी आई तो उन्होंने सीधे मंच से ही अशोक गहलोत पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्रीजी, जिस तरह राजीव गांधी ने आपकी बात मानी थी, उसी तरह से आप भी कभी-कभी विधायकों की बात मान लिया कीजिए. उन्होंने कहा कि राजीव गांधी भी संगठन को महत्व देते थे. उनके पास विशाल बहुमत था, फिर भी उन्होंने लोकतंत्र का सम्मान किया और विपक्ष में बैठना भी मंजूर किया. वह कार्यकर्ताओं को इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देते थे.

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सचिन पायलट ने कहा कि राजीव गांधी संगठन को महत्वपूर्ण मानते थे और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति उनके मन में बहुत सम्मान था. मुख्यमंत्रीजी आप कार्यकर्ताओं और विधायकों की भी सुनिए. जब विधायक आपके पास काम लेकर जाएं तो आप डीपीआर बनाने की बात नहीं कहकर तुरंत उसकी घोषणा कर दिया कीजिए. राजीव गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि हमें पार्टी को दलालों से दूर रखना चाहिए. उन्होंने कहा, मुंबई अधिवेशन में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि हमारी पार्टी में भी अगर दलाल हैं तो उन्हें बाहर निकालना होगा. राजीव गांधी कहा करते थे कि हमेशा सरकार से ज्यादा संगठन को तवज्जो देनी चाहिए.

गौरतलब है कि राजस्थान में कांग्रेस के दो गुट बने हुए हैं और प्रदेश में सरकार बनने के बाद से ही दोनों में खींचतान चल रही है. एक गुट अशोक गहलोत का है और दूसरा गुट सचिन पायलट का. अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हैं और सचिन पायलट उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं. गहलोत जहां सत्ता संभाले हुए हैं, वहीं पायलट का संगठन पर नियंत्रण है. बातों-बातों में उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सरकार में संगठन को ज्यादा महत्व नहीं मिल रहा है.

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में सचिन पायलट का भाषण सुनने के बाद अशोक गहलोत का मूड ठीक नहीं दिखा और वह तत्काल वहां से चले गए. जिस तरह वे लोगों से बात करते हुए हंसते-मुस्कुराते गाड़ी तक जाते हैं, वैसा नहीं दिखा. उन्होंने किसी पत्रकार से भी बात नहीं की, सीधे चले गए, जबकि सचिन पायलट काफी देर तक संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते रहे.

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बता दें, प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की 75 वी जयंती पर पुष्पांजली कार्यक्रम और स्व. राजीव गांधी के जीवन से जुडी फोटो प्रदर्शनी का उदघाटन किया गया जिसमें मुख्यमंत्री के अलावा पीसीसी चीफ सचिन पायलट, पूर्व पीसीसी चीफ डॉ. चंद्रभान, मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास, रघु शर्मा, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अर्चना शर्मा, वरिष्ट कांग्रेस नेता गिरिजा व्यास सहित अनेकों विधायक एवं पीसीसी सदस्यों सहित कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे.

राजस्थान में मॉब लिंचिंग- पहलू खान बनाम हरीश जाटव

पूरे भारत में मणिपुर के बाद राजस्थान में मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाने वाली गहलोत सरकार के लिए यह परीक्षा का समय है. एक तरफ पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले के आरोपियों की रिहाई के बाद केस फिर से खोलने के लिए एसआईटी का गठन हो रहा है, जबकि हाल ही अलवर जिले में ही भीड़ की पिटाई से हुई एक युवक की मौत को पुलिस मॉब लिंचिंग नहीं मान रही है. इससे राजस्थान की गहलोत सरकार पर फिर से अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के आरोप लगने लगे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एक दैनिक अखबार से बातचीत में कहा है कि प्रदेश सरकार वर्ग विशेष के लिए काम कर … Read more

मनमोहन सिंह बने राजस्थान से राज्यसभा सांसद, कांग्रेस का खुला खाता

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह राजस्थान से राज्यसभा सांसद बन गए. उन्हें निर्विविरोध निर्वाचित किया गया. हवामहल विधायक महेश जोशी ने उनका सर्टिफिकेट प्राप्त किया. बीजेपी के प्रदेशअध्यक्ष मदनलाल सैनी के निधन के बाद ये सीट खाली हुई थी. डॉ.मनमोहन सिंह के राज्यसभा पहुंचते ही राजस्थान कांग्रेस का खाता भी खुल गया. राजस्थान से राज्यसभा में 10 सीटें हैं जिनमें से 9 पर बीजेपी के सांसद विराजमान है. गौरतलब है कि डॉ.मनमोहन सिंह दो बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं. उन्होंने 2004 से 2014 तक पीएम पद का निर्वाह किया है. प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें ट्वीट कर बधाई दी है. I congratulate former PM Dr #ManmohanSingh ji … Read more

अलवर जिले में एक और मॉब लिंचिंग, क्या करेगी गहलोत सरकार?

राजस्थान सरकार ने मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाया है. यह लागू होने के बाद मॉब लिंचिंग में दोषी पाए जाने वालों को सख्त सजा का प्रावधान है. इस कानून के बनते ही सबसे पहले पहलू खान की मौत के छह आरोपियों को अदालत ने बेकसूर मानते गए छोड़ दिया. पहलू खान जयपुर से मवेशी खरीदकर अपने घर हरियाणा जा रहा था. रास्ते में अलवर जिले में उस पर भीड़ ने हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई. गहलोत सरकार ने अदालत के फैसले के खिलाफ बड़ी अदालत में अपील करने की बात कही है और पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले की दुबारा से जांच करने के निर्देश दिए है. … Read more

पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले में पिछली वसुंधरा सरकार की भूमिका की होगी जांच- गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए बहुचर्चित पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले में पिछली वसुंधरा राजे सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए पिछली सरकार की भूमिका की जांच करवाने की बात कही. तो उधर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा है कि एक तरफ गहलोत सरकार पहलू खान मामले की दोबारा जांच करा रही है वहीं, दूसरी तरफ अलवर के ही हरीश जाटव मॉब लिंचिंग मामले में एक्शन नहीं ले रही है. सीएम अशोक गहलोत ने रविवार को अपने वर्तमान कार्यकाल में पहली बार सीएम आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. सीएम गहलोत ने पत्रकारों से वार्ता शुरू करते हुए कहा कि जो बजट हमने … Read more

बाढ़ग्रस्त हिंडौली में राहत कार्यों में हाथ बंटाने पानी में उतरे चांदना

राजस्थान सरकार में युवा मामले एवं खेल मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल, रोजगार, परिवहन राज्यमंत्री अशोक चांदना शुक्रवार को अपने विधानसभा क्षेत्र बूंदी के हिंडौली पहुंचे. यहां भारी बारिश से कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात है. ​भीषण बाढ़ग्रस्त हालातों को देखते हुए खेल मंत्री खुद कमर तक के पानी में उतर गए और राहत कार्यों में हाथ बटाने लगे. गौरतलब है कि भारी बारिश के कारण बूंदी के हिंडौली तहसील में बाढ़ के से हालात हैं. गहलोत सरकार में खेल एवं युवा मामले मंत्री अशोक चांदना बाढ़ राहत कार्यों का निरीक्षण करने शुक्रवार को हिंडौली पहुंचे. वहां के हालात देख चांदना रूक न पाए और कमर तक के पानी में … Read more

पहलू खान पर मायावती ने साधा गहलोत पर निशाना, प्रियंका ने बताया चौकानें वाला फैसला

अलवर के बहरोड़ में मॉब लिंचिंग का शिकार हुए पहलू खान और हाल में आए अलवर कोर्ट के फैसले पर अब राजनीति शुरू हो गयी है. पहलू खान मामले में एडीजे कोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी 6 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. मॉब लिंचिंग को लेकर राज्य में किसी कोर्ट का पहला फैसला है. अब इस मामले में बसपा सुप्रीमो मायावती ने राजस्थान की गहलोत सरकार पर निशाना साधा है. वहीं प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे को उछाला है. यह भी पढ़ें: पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले में सभी आरोपी बरी, अलवर जिला कोर्ट ने सुनाया फैसला सोशल मीडिया पर मायावती ने लिखा, … Read more

स्वतंत्रता दिवस पर पायलट ने किया स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान

देश भर में 73वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया. पूरे देश में झंडारोहण के साथ-साथ विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित हुए. स्वतंत्रता दिवस के इस पावन पर्व पर आज जयपुर स्थित इंदिरा गांधी भवन स्थित राजस्थान प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर झंडारोहण किया गया प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान किया गया. 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने प्रात: 7:30 बजे प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर ध्वजारोहण किया. इस अवसर पर उपस्थित कांग्रेस जनों को संबोधित करते हुए पायलट ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करते हुए समाज के कमजोर, पिछड़े व गरीब वर्ग का कल्याण करना … Read more

गहलोत सरकार को भारी पड़ेगा बिजली महंगी करने का फैसला

राजस्थान में गहलोत सरकार ने राज्य की मध्यमवर्गीय जनता पर बिजली की दरों का बोझ बढ़ाने का फैसला अगर कर ही लिया है तो उसे इसके राजनीतिक परिणामों का भी अनुमान कर लेना चाहिए. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पूरी तरह बहुमत भी नहीं मिला था. किसी तरह उसकी सरकार बन गई है तो उसे जनता का समर्थन समाप्त करने वाले काम नहीं करने चाहिए. दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने मध्यम वर्ग को बिजली में राहत देकर प्रशंसनीय कार्य किया है, जिसका लाभ उसे दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिलेगा. ऐसे में पड़ौसी राज्य राजस्थान की गहलोत सरकार के बारे में जनता क्या सोचेगी?

राजस्थान में कोई भी सरकार रही हो, मध्यम वर्गीय जनता को महंगाई के भार से दबाने में उसने कोई कंजूसी नहीं की है. अन्य राज्यों की सरकारें राजस्थान सरकार से प्रेरणा ले सकती है कि आम लोगों की जेब से ज्यादा पैसा किस तरह निकाला जाए. यहां पहले बिजली वितरण का काम बिजली बोर्ड संभालता था. उसके बाद नई नीतियां बनीं. निजी कंपनियां बिजली उत्पादन करने लगीं तो बिजली वितरण का ढांचा भी सरकार को बदलना पड़ा. 2000 में राज्य में जयपुर, अजमेर और जोधपुर में तीन विद्युत वितरण निगम कंपनी की तर्ज पर बना दिए, जिन्हें डिस्कॉम कहा जाता है.

राजस्थान के तीनों डिस्कॉम की कार्यप्रणाली में राज्यहित कम, मुनाफाखोरी ज्यादा है. राजस्थान में 2000 में जो बिजली दरें थीं, उनमें डिस्कॉम 16 साल में 99 फीसदी बढ़ोतरी कर चुके हैं. शायद राज्य सरकार यह समझती है कि राजस्थान में कमाने खाने वाले लोग ज्यादा हैं, जीवन चलाने के लिए इतना अतिरिक्त पैसा तो जेब से निकाल ही सकते हैं. इस तरह सरकार खामोशी से आवाम की जरूरियात का फायदा उठाने पर तुली हुई है. शायद इसलिए कि विधानसभा चुनाव चार साल बाद होंगे.

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दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने मध्यमवर्गीय जनता का बोझ कम करने का सराहनीय प्रयास किया है, क्योंकि अगले साल ही दिल्ली विधानसभा चुनाव होंगे. पिछले विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की पार्टी को छप्परफाड़ बहुमत मिला था, जिससे दिल्ली के पूरे राजनीतिक समीकरण बदल गए थे. राजस्थान में हालांकि कोई नई पार्टी नहीं है, लेकिन गहलोत सरकार से लोगों को उम्मीदें रहती हैं. लेकिन उनके सरकार चलाने में कुछ ऐसा होता है कि जनता उनसे नाराज हो जाती है और सरकार बदल देती है. गहलोत के मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस ने दो बार विधानसभा चुनाव हारे. अब गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं. लोगों ने उन पर फिर से भरोसा किया है. उनकी सरकार ने काम संभालते ही सबसे पहले पेट्रोल-डीजल महंगा किया, और अब विधानसभा का पहला सत्र संपन्न होने के बाद बिजली महंगी होने की चर्चा जोर पकड़ रही है.

केजरीवाल सरकार ने इस बात को समझा कि मध्यमवर्गीय लोगों के लिए बिजली कितनी जरूरी है. पिछले साल उनकी सरकार ने बिजली की दरें बढ़ाई थी. जनता की परेशानियों को देखते हुए अब उन्होंने एक झटके में बिजली के बिलों में बड़ी राहत देते हुए दिल्ली के मध्यमवर्गीय परिवारों का दिल जीत लिया है. गहलोत के बारे में लोग क्या सोचेंगे? आजकल मध्यमवर्गीय परिवारों का जीवन बिजली से ही चलता है. ईंधन उपलब्ध नहीं होने पर हीटर विकल्प होता है. पंखा, टीवी, लाइटें, फ्रीज जैसे सामान हर घर में देखे जा सकते हैं. इन सबके लिए बिजली जरूरी है. बिजली महंगी होने से अनिवार्य रूप से आर्थिक बार बढ़ जाता है.

दिल्ली के डिस्कॉम ने दो किलोवाट तक बिजली की दरें 125 रुपए से घटाकर 20 रुपए प्रति किलोवाट कर दी है. 1200 यूनिट से ज्यादा खपत होने पर दरें प्रति यूनिट चार आने बढ़ाकर 7.75 से बढ़ाकर आठ रुपए प्रति यूनिट कर दी है, जिससे संपन्न लोगों पर ही थोड़ा भार बढ़ेगा, जो ज्यादा बिजली खर्च करते हैं. दो से पांच किलोवाट की खपत पर बिजली शुल्क 140 से घटाकर 50 रुपए प्रति यूनिट कर दिया गया है. पांच से 15 किलोवाट के कनेक्शन पर प्रति किलोवाट शुल्क 175 से घटाकर सौ रुपए कर दिया है. 15 से 25 किलोवाट के लिए कोई बदलाव नहीं है.

दिल्ली में चलने वाले ई-रिक्शा और विद्युत वाहनों को चार्ज करने के लिए स्टेशनों पर भी बिजली की दरें घटा दी गई हैं. एलटी लेवल पर चार्ज 5.5 से घटाकर 4.5 रुपए यूनिट और एचटी लेवल पर चार्ज पांच से घटाकर चार रुपए कर दिया गया है. दिल्ली में बिजली की ये दरें एक अगस्त से लागू हो गई हैं. इधर राजस्थान में लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि बिजली की खपत कैसे कम करें, क्योंकि वह जीवन चलाने के लिए जरूरी है. राजस्थान के तीनों डिस्कॉम के अधिकारियों को दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) के प्रमुख आरएस चौहान से प्रेरणा लेनी चाहिए और संभव हो सके उनसे मिलकर यह सीखना चाहिए कि लोगों पर बिजली की दरों का भार कम कैसे किया जा सकता है.

आजकल की राजनीति मध्यमवर्गीय लोगों की भावना से चलती है. दिल्ली के लोगों के मन में केजरीवाल बैठ चुके हैं. राजस्थान के लोगों को अब तक ऐसा कोई नेता नहीं मिला, जो उनके मन में सम्मानजनक जगह बना सके. पद का सम्मान होता है. पद पर बैठे व्यक्ति का बाद में भी उसी के अनुरूप सम्मान हो तो बात बनती है. गहलोत को राजस्थान के कई लोग पसंद करते हैं. उनकी सरकार के महंगाई बढ़ाने वाले फैसलों से उन्हें नापसंद करने वालों की तादाद बढ़ेगी. महंगाई के जमाने में आर्थिक राहत बहुत बड़ी बात होती है. विधानसभा में गहलोत सरकार ने मंत्रियों, विधायकों के वेतन-भत्ते तुरत-फुरत बढ़वा लिए. राजस्थान की आम जनता ने क्या गुनाह किया है?

बहरहाल बिजली की दरें बढ़ाने का फैसला गहलोत पर बहुत भारी पड़ने वाला है. इससे गहलोत सरकार के खिलाफ जनभावना बनेगी और कांग्रेस में पहले से ही दो गुट बने हुए हैं. सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री पद संभाले हुए हैं. जनता में सरकार का विरोध बढ़ने पर नेतृत्व परिवर्तन से भी इनकार नहीं किया जा सकता.

मध्यमवर्गीय लोग जैसे तैसे जीवन यापन कर रहे हैं. बाजार में भयंकर मंदी की आहट है. आमदनी और खर्च का संतुलन बिगड़ रहा है. ऐसे में बिजली जैसे जरूरी साधन का महंगा होना किसे पसंद आएगा? सरकार कितने ही तर्क दे कि ऐसा है, वैसा है, इसलिए जरूरी है, लेकिन वह लोगों के गले उतरने वाला नहीं है. सरकार अपना राजस्व बढ़ाने के लिए बिजली, पानी, ईंधन को महंगा करने के अलावा और कोई भी उपाय कर सकती है. लोगों को जबरन परेशान करने में सरकार का क्या लाभ है?