वैभव गहलोत को आरसीए अध्यक्ष बनने से रोकने की नाकाम कोशिश!

वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) के राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन (Rajsamand District Cricket Association) के कोषाध्यक्ष चुने जाने के बाद उन्हें राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) अध्यक्ष बनाने के लिए दावपेच शुरू हो गए हैं. सीपी जोशी लंबे समय से आरसीए अध्यक्ष बने हुए हैं और अब वह पद छोड़ने वाले हैं. उनके हटने के बाद वैभव गहलोत को आरसीए अध्यक्ष (RCA President) बनाने की तैयारियां जोरों पर है. दावपेच शुरू हो गए हैं. आरसीए में दो गुट बने हुए हैं. एक गुट पूर्व आरसीए अध्यक्ष ललित मोदी का समर्थक है और दूसरा गुट सीपी जोशी के साथ है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने RCA से 7 सितंबर को प्रतिबंध हटाया … Read more

वीडियो-खबर: वैभव गहलोत का आरसीए अध्यक्ष बनना तय

वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (Rajasthan Cricket Association) का अध्यक्ष बनने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है. वैभव को राजसमन्द जिला क्रिकेट एसोसिएशन (Rajsamand District Cricket Association) से प्रवेश कराया गया है. वैभव को राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष चुना गया है. इसके बाद RCA में जोशी का इस महीने कार्यकाल समाप्त होने पर वैभव को RCA का अध्यक्ष बनाया जाएगा. वैभव के RCA अध्यक्ष बनने की राह में एकमात्र रोड़ा बने रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) को खींवसर से होने वाले विधानसभा उपचुनाव से सदन में पहुंचाने के कमिटमेंट के बाद अब वैभव के RCA अध्यक्ष बनने में कोई मुश्किल नहीं बची है.

वैभव गहलोत अब राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के बहाने बनेंगे RCA अध्यक्ष

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अब राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के बहाने RCA अध्यक्ष बनेंगे  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (AshokGehlot) के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) के राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) यानि आरसीए का अध्यक्ष बनने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है. वैभव राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) यानि आरसीए का अध्यक्ष बनने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है. वैभव राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के रास्ते होकर आरसीए का रास्ता तय करेंगे. Vaibhav Gehlot को राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष चुना गया है. Vaibhav Gehlot को राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष चुना गया है. ये पद करीब डेढ़ माह से खाली चल रहा था. यह पद 22 जुलाई को तत्कालीन कोषाध्यक्ष प्रदीप पालीवाल के निधन से खाली हो गया था.

गौरतलब है कि जोधपुर से लोकसभा चुनाव हारने के बाद से Vaibhav Gehlot Vaibhav-Gehlotक्रिकेट की राजनीति में आने का मौका तलाश रहे थे. वैभव को क्रिकेट की राजनीति में लाने के लिए सीपी जोशी ने पूरी मदद की. इससे पहले वैभव को जोधपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के थ्रू RCA में लाने के प्रयास किये गए. शायद इसीलिए सीपी जोशी के सुझाव पर ही जोधपुर जिला क्रिकेट संघ को भंग कर अंतरिम समिति बना दी गई. राज्य सरकार के सहकारिता विभाग ने इस बारे में आदेश भी जारी कर दिया था.

अंतरिम समिति के संयोजक भी राजस्थान रॉयल्स के उपाध्यक्ष राजीव खन्ना को बनाया गया था, जो जोधपुर के ही हैं और गहलोत परिवार के काफी निकट माने जाते हैं. Vaibhav Gehlot को पहले जोधपुर जिला क्रिकेट संघ में पदाधिकारी बनाया जाता, लेकिन हाइकोर्ट की रोक होने से अब वैभव गहलोत को राजसमन्द जिला क्रिकेट एसोसिएशन से प्रवेश कराया गया है. इसके बाद आरसीए में जोशी का इस महीने कार्यकाल समाप्त होने पर Vaibhav Gehlot को RCA का अध्यक्ष बनाया जाएगा.

Vaibhav Gehlot के RCA अध्यक्ष बनने की राह में अगर कोई रोड़ा बन सकता है तो वो हैं नागौर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi). डूडी को RCA में सीपी जोशी के कट्टर दुश्मन नान्दु और उनकी टीम का पूरा सपोर्ट है जो कि चाहते हैं कि डूडी RCA अध्यक्ष के लिये चुनाव लड़ें. लेकिन जानकारों की मानें तो डूडी को खींवसर से होने वाले विधानसभा उपचुनाव से सदन में पहुंचाने के कमिटमेंट के बाद अब वैभव के RCA अध्यक्ष बनने में कोई रोड़ा नहीं बचा है.

जैसा कि लग रहा है, अगर Vaibhav Gehlot आरसीए अध्यक्ष बनते हैं तो फिर से RCA का नया अध्यक्ष फिर राजसमंद से ही होगा. फिलहाल ये पद प्रदेश विधानसभा स्पीकर और राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सीपी जोशी के पास है. हाल में बीबीसीआई ने RCA से बैन हटाया है. इसके बाद जोशी ने आरसीए अध्यक्ष पद छोड़ने की घोषणा कर दी है.

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चूंकि कि सी.पी. जोशी अब विधानसभा अध्यक्ष बन चुके हैं, ऐसे में उन्हें ये पद छोड़ना पड़ेगा. RCA को 12 सितम्बर तक चुनाव की घोषणा करनी है. 28 सितम्बर तक चुनाव करा लिए जाएंगे.

वहीं सोमवार देर शाम जेके स्टेडियम में हुई राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक में वैभव गहलोत को निर्विरोध कोषाध्यक्ष चुना गया. RCA के पर्यवेक्षक उदयपुर के महेंद्र शर्मा, जिला खेल अधिकारी चांद खां पठान और सहकारिता विभाग के उप पंजीयक की मौजूदगी में निर्वाचन प्रक्रिया हुई जिसमें 19 में से 16 सदस्यों के समर्थन से वैभव को कोषाध्यक्ष चुना गया. RCA के संयुक्त सचिव महेंद्र नाहर ने वैभव गहलोत को राजसमंद का कोषाध्यक्ष बनाए जाने की पुष्टि की.

पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले में कभी भी आ सकती SIT की रिपोर्ट, होगी कार्रवाई: गहलोत

राजस्थान (Rajasthan) की कानून व्यवस्था को लेकर आईजी एवं जिला पुलिस अधीक्षकों की दो दिवसीय कॉफ्रेंस (Confrense) बुधवार को प्रदेश पुलिस मुख्यालय (Police Headquarter) में शुरु हुई. इस कांफ्रेंस में गृहमंत्री का जिम्मा संभाल रहे प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने डीजीपी, आईजी, एसपी सहित गृह सचिव से प्रदेश की कानून व्यवस्था की जानकारी ली. पुलिस मुख्यालय पर आयोजित इस दो दिवसीय कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री गहलोत ने बुधवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि आज सभी से जिले वार चर्चा की हैं. कल सभी पुलिस अधिक्षकों से वन टु वन चर्चा की जायेगी. सीएम गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार की मंशा प्रदेश … Read more

गहलोत सरकार की शिकायत पहुंची हाईकमान तक, सोनिया ने दिये निर्देश

राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) में गुटबाजी अपने चरम पर है. सरकार और संगठन में चल रही खिंचतान अब जगजाहिर है. राजस्थान कांग्रेस में आपसी खींचतान की खबर हाईकमान को भी लग गई है. हाल ही में पार्टी के कई पदाधिकारियों व नेताओं ने संगठन महासचिव वेणुगोपाल के जरिये कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से सरकार के मंत्रियों की शिकायत की है. सोनिया गांधी ने अविनाश पांडे (Avinash Pandey) को वास्तविक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए है. राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बने 8 माह से अधिक का समय हो चुका है. सरकार के मुखिया अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) हैं और संगठन के मुखिया हैं सचिन पायलट (Sachin Pilot).

गौरतलब है कि राजस्थान में चुनाव के पहले से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चली तनातनी अभी तक मतलब सरकार बनने के बाद तक भी बदस्तूर जारी है. इसके अनेकों उदाहरण हैं जो कि कई मौकों पर साफ देखे गए हैं. फिर चाहे वो टिकट विरतण के समय की खींचतान हो या चुनाव जीतने के बाद कि मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए चली लम्बी तनातनी. या फिर पिछले 8 माह में सरकार या संगठन का कोई कार्यक्रम हो. ऐसा कोई अवसर नहीं गया होगा जहां पार्टी की अंदरूनी खींचतान को सबने महसूस नहीं किया हो.

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सूत्रों ने बताया राजस्थान (Rajasthan) में कांग्रेस का शासन आने के बाद से ही कांग्रेस का आम कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि पार्टी के पदाधिकारी भी सार्वजनिक तौर पर मंत्रियों के नहीं मिलने और काम नहीं करने को लेकर नाराज चल रहे थे. स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायत किये जाने के बावजूद मंत्रियों का रवैया नहीं बदला तो पार्टी के कुछ नाराज पदाधिकारियों ने सरकार और मंत्रियों की आलाकमान से जुड़े नेताओं और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिलकर शिकायत की. वेणुगोपाल ने इसकी जानकारी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को दी.

बता दें, राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने के बाद कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि मंत्रियों के दरवाजे कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा खुले रहेंगे. जबकि प्रदेश में सरकार बनने के 8 माह बाद भी बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं की सरकार से नाराजगी अब कांग्रेस के आलाकमान को भी बहुत खल रही है. सोनिया गांधी ने इस संबंध में पार्टी के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे से वास्तविक रिपोर्ट मांगी है.

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पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के मुलाकात कर उन्हें भी यह रिपोर्ट दी थी कि सरकार के मंत्री न तो जिलों में जाते है और यदि जाते भी हैं तो सरकारी या निजी कार्यक्रम के बाद वापस आ जाते हैं. ये मंत्री कांग्रेस कार्यालय जाना तो दूर वहां के नेताओं से भी नहीं मिलते हैं. यही वजह थी कि हाल ही में राजीव गांधी के 75वें जन्मोत्सव के दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से कार्यकर्ता को तवज्जो देने और मंत्रियों को जिले में जाने, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलने के साथ ही उनकी समस्याएं दूर करने की बात कही थी.

सचिन पायलट ने कहा था कि राजीव गांधी संगठन को महत्वपूर्ण मानते थे और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति उनके मन में बहुत सम्मान था. मुख्यमंत्रीजी आप कार्यकर्ताओं और विधायकों की सुनिए. जब कार्यकर्ता और विधायक आपके पास काम लेकर जाएं तो आप डीपीआर बनाने की बात नहीं कहकर तुरंत उसकी घोषणा कर दिया कीजिए. राजीव गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था कि राजीव गांधी कहा करते थे कि हमेशा सरकार से ज्यादा संगठन को तवज्जो देनी चाहिए. अब यह बात भी आलाकमान के पास पहुंची है कि सरकार न तो प्रदेश कांग्रेस को तवज्जो दे रही है और ना ही कार्यकर्ताओं को.

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प्रदेश में सरकार ने अभी अपने एक वर्ष का कार्यकाल भी पूरा नहीं किया है और सरकार के प्रति इतनी जल्दी कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी से अब पार्टी हाईकमान भी चिंता में है. हाईकमान कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की शिकायतों को इसलिए भी सही मान रहा है कि यदि सरकार का कामकाज अच्छा होता और कार्यकर्ता तथा जनता खुश होती तो लोकसभा चुनावों में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर करारी हार का मुंह नहीं देखना पड़ता. इसीलिए अब सोनिया गांधी ने प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे से स्थिति की वास्तविक रिपोर्ट तैयार करने को कहा है. जिससे कार्यकर्ताओं और आम जनता से दूरी बनाने वाले मंत्रियों के बारे में तथ्यात्मक रिपोर्ट सामने आ सके और उसी के अनुसार उन ओर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सके.

राजस्थान: बीकानेर में हार-जीत से तय होगा तीन दिग्गजों का राजनीतिक भविष्य

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बीकानेर संसदीय सीट पर लगातार तीन बार से हार का सामना कर रही कांग्रेस इस बार भाजपा प्रत्याशी अर्जुन मेघवाल के विरोध को देखकर उम्मीद कर रही है कि इस बार वो उन्हें की जीत की हैट्रिक नहीं देगी. कांग्रेस नेताओं को लगता है कि केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल के खिलाफ माहौल है, जिसका उसे फायदा मिलना तय है.

अब जीत हार तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना तय है कि ये चुनाव निश्चित रूप से अर्जुन मेघवाल के राजनीतिक भविष्य को भी तय करेंगे. 10 साल पहले प्रशासन से राजनीति में आए अर्जुन केंद्र की भाजपा की सरकार में मोदी के खास मंत्रियों में शामिल हैं. राजस्थान की भाजपा की राजनीति में अर्जुन को मोदी और शाह के प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों में माना जाता है.

अर्जुन मेघवाल चुनाव लड़ रहे हैं इसलिए उनके भविष्य से चुनाव सीधा जुड़ा हुआ है, उनके अलावा दो और नेता ऐसे हैं जिनका राजनीतिक भविष्य भी कहीं ना कहीं इस चुनाव परिणाम से जुड़ा हुआ है. इनमें पहला नाम है देवी सिंह भाटी. दरअसल, अर्जुन मेघवाल को टिकट देने से पहले ही विरोध को लेकर मुखर हुए भाटी ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया था. वे लगातार बीकानेर संसदीय क्षेत्र में अर्जुन के विरोध में प्रचार कर उनको हराने के लिए पसीना बहा रहे हैं.

कांग्रेस में जाने से साफ इंकार करने वाले देवी सिंह भाटी अर्जुन को हराने के लिए कांग्रेस को वोट देने की बात कहने से भी नहीं चूक रहे हैं. उनकी खुली बगावत को देखते हुए भाजपा नेतृत्व ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. भाटी बीकानेर लोकसभा क्षेत्र में लगातार सुबह से लेकर शाम तक अलग-अलग जगहों पर नुक्कड़ सभाएं कर अर्जुन को हराने के लिए लोगों को लामबंद कर सक्रियता दिखा रहे हैं.

जिस तरह से देवी सिंह भाटी विरोध के प्रचार में हैं, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह चुनाव एक तरह से अर्जुन वर्सेज भाटी हो गया है. ऐसे में बीकानेर का चुनाव परिणाम भाटी के सियासती कद को तय करेगा. वो भी ऐसे समय में जब वे खुद लगातार दो बार कोलायत विधानसभा में वे सफल नहीं हुए हैं.

गौरतलब है कि 1980 से 2013 तक देवी सिंह भाटी कोलायत के विधायक रहे हैं, लेकिन इसके बाद 2013 में हुए चुनावों में भाटी चुनाव हार गए थे और 2018 के चुनाव में खुद भाटी ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर अपनी पुत्रवधु पूनम कंवर को मैदान में उतारा मगर वे भी चुनाव हार गईं. जिसके बाद अब भाटी के लिए यह चुनाव खुद की राजनीतिक जमीन को वापिस ऊपजाऊ करने का जरिया है, क्योंकि ये चुनाव का परिणाम जिले में उनके रुतबे को साफ करेगा.

देवी सिंह भाटी के बाद दूसरा नाम रामेश्वर डूडी का है. पिछली विधानसभा में कांग्रेस के 21 विधायकों में पहली बार विधायक बनकर शामिल हुए डूडी को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था और पांच साल तक नेता प्रतिपक्ष रहे डूडी की विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण में भी अहम भूमिका रही, लेकिन इन चुनावों में खुद डूडी अपनी परंपरागत सीट नोखा से चुनाव हार गए.

बीकानेर जिले में जाट मतदाताओं की संख्या और उन पर रामेश्वर डूडी के प्रभाव को देखते हुए आलाकमान ने लोकसभा चुनाव में खाजूवाला विधायक और गोविंद मेघवाल की पुत्री सरिता चौहान को टिकट देने की बजाय डूडी की पसंद के रूप में मदन मेघवाल को टिकट दिया है. ऐसे में खुद डूडी पर भी इस बात की जिम्मेदारी है कि मदन मेघवाल चुनाव जीतें.

लोकसभा चुनाव में रामेश्वर डूडी की सक्रियता बीकानेर के इतर प्रदेश के अन्य हिस्सों में देखने को मिली है, लेकिन जिस तरह से डूडी ने मदन मेघवाल को टिकट दिलाने में भूमिका निभाई उसके बाद आने वाला परिणाम निश्चित रूप से प्रदेश की कांग्रेस राजनीति में डूडी के राजनीतिक कद को तय करेगा.