राजस्थान विधानसभा में हंगामे के बीच तीन विधेयक पारित

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राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच सरकार ने तीन विधेयक पारित करवा लिए. ये विधेयक हैं सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय एवं वितरण का नियमन) (राजस्थान) संशोधन विधेयक, राजस्थान मंत्री वेतन (संशोधन) विधेयक 2019 और राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक. सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय एवं वितरण का नियमन) (राजस्थान) संशोधन विधेयक स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने पेश किया. विधेयक पेश करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में हुक्का बार का संचालन पूरी तरह बंद हो चुका है. अब कहीं भी इसका संचालन करते हुए पाए … Read more

विधायकों के सेमीनार में मोदी को लेकर टिप्पणी पर हंगामा

जयपुर में गुरुवार एक अगस्त को विधायकों के लिए आयोजित एक सेमीनार में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली की प्रोफेसर जोया हसन के संबोधन से नाराज भाजपा विधायकों ने सेमीनार का बायकाट कर दिया. यह घटना सेमीनार के समापन सत्र में हुई. सेमीनार दिनभर चला. लेकिन समापन सत्र में भाजपा विधायक जेएनयू की प्रोफेसर जोया हसन की इस बात से बुरी तरह नाराज हो गए कि मोदी 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव विज्ञापनों के बल पर जीते हैं. इस पर सेमीनार में उपस्थित करीब 40 भाजपा विधायकों ने हंगामा किया और सभा कक्ष से बाहर निकल गए. प्रो. जोया हसन ने कहा कि वर्तमान में तीन केंद्रीय विचारधाराएं देखने … Read more

राजस्थान में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए लम्बा इंतजार

राजस्थान में मदन लाल सैनी के निधन के बाद उनकी जगह नए भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया है. इसका क्या कारण है, स्पष्ट नहीं हो पा रहा है. लगता है भाजपा एक बार फिर जातिगत समीकरणों में उलझ गई है. मदन लाल सैनी 2018 में जब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे, उस समय भी लंबी खींचतान चली थी. अब उनके निधन के बाद भी वैसी ही खींचतान शुरू होने के आसार दिख रहे हैं. इस पर अटकलों का बाजार गर्म है.

मदन लाल सैनी का निधन 24 जून को हुआ था. उसके बाद तय हुआ था कि जुलाई के दूसरे सप्ताह तक राजस्थान में नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कर दी जाएगी. लेकिन अब जुलाई का महीना निकल चुका है और अगस्त शुरू हो चुका है. इस मुद्दे पर जल्दी फैसला होने के कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं. एक बार फिर अध्यक्ष पद को लेकर गुटबाजी देखने को मिल सकती है.

बताया जाता है कि भाजपा संगठन के भीतर राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कई समीकरण तलाशे गए थे, लेकिन फैसला नहीं हो पाया. यह बात भी सामने आई कि जिस तर राज्यसभा में पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं को भेजा गया है, उसी तरह राजस्थान में भी जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर पार्टी के किसी वरिष्ठ कार्यकर्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए. लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया है. समय गुजरने के साथ ही पार्टी में जातिगत राजनीति हावी होने लगी और अब हालत यह है कि भाजपा जाट, ब्राह्मण, दलित के समीकरण में उलझकर रह गई है.

गौरतलब है कि भाजपा ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने में कोई देरी नहीं की, लेकिन राजस्थान में नियुक्ति इतनी आसान नजर नहीं आ रही है. बताया जाता है कि भाजपा के राजस्थान मूल के एक बड़े नेता, जो इन दिनों दिल्ली में सक्रिय हैं और अमित शाह के नजदीकी बताए जाते हैं, उनके पास प्रदेश भाजपा के विभिन्न गुट अपनी-अपनी पसंद के नाम पहुंचा रहे हैं. उक्त नेता की राय इस मुद्दे पर अभी तक स्पष्ट नहीं है.

राजस्थान में पिछले 20 साल का रिकॉर्ड है कि यहां प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति कभी आसान नहीं रही. 2018 में जब मदन लाल सैनी प्रदेश अध्यक्ष बने थे, उस समय भी जमकर खींचतान हुई थी. पार्टी हाईकमान की पसन्द के रूप में गजेन्द्र सिंह शेखावत का नाम सामने आया था, जिस पर वसुंधरा राजे को एतराज होने के कारण कई दिनों तक प्रदेश अध्यक्ष पद का फैसला नहीं हो पाया था.

एक समय था, जब राजस्थान में भाजपा के एकछत्र नेता भैरोंसिंह शेखावत हुआ करते थे. 2002-03 में जब वसुंधरा राजे को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाया गया था, उस समय भी भारी विरोध हुआ था. उसके बाद से प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के समय विरोध की परंपरा बन गई है. ओम माथुर हौं या अरुण चतुर्वेदी या फिर गुलाब चंद कटारिया, हर बार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पर नियुक्ति को लेकर घमासान होता रहा है.

2018 में राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की बात चली थी, तब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गुट आमने-सामने हो गए थे. जिसके चलते कई महीने प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो पाई थी. आखिरकार बीच का रास्ता निकालते हुए आम राय से मदन लाल सैनी को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. उनके निधन के बाद एक बार फिर नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर खींचतान शुरू होने के आसार बन गए हैं.

बताया जाता है कि संघ से जुड़ा खेमा आमेर के विधायक सतीश पूनिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहता है. संगठन का कामकाज देख रहे चंद्रशेखर भी पूनिया के पक्ष में बताए जाते हैं. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चाहती हैं कि भाजपा के राज्यसभा सांसद नारायण पंचारिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए. पंचारिया के नाम पर सहमति हो सकती है, क्योंकि वह भी मदन लाल सैनी की तरह पार्टी में निर्विवाद नेता हैं.

एक संभावना यह भी है कि जयपुर ग्रामीण से सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है. अमित शाह उनके पक्ष में बताए जाते हैं, इसीलिए इस बार उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है. चूरू के विधायक राजेन्द्र राठौड़ का नाम भी चल रहा है, लेकिन उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने की संभावना इसलिए कम है, क्योंकि वह जनता दल छोड़कर भाजपा में आए हैं. राज्यवर्धन सिंह राठौड़ नए भाजपा नेता हैं, इसलिए उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने की संभावना भी कम ही है. बताया जाता है कि भाजपा संघ की पृष्ठभूमि के किसी व्यक्ति को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहत है.

भाजपा का एक खेमा राजसमंद की विधायक दीया कुमारी का नाम आगे कर रहा है. इस खेमे के नेताओं का मानना है कि जयपुर राजघराने से जुड़ी दीया कुमारी वसुंधरा राजे को चुनौती दे सकती है. बहरहाल यह सिर्फ कयास है. मदन लाल सैनी को जब प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, तब राजनीतिक परिस्थितियां अलग थीं. राजस्थान में भाजपा सरकार थी और वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थीं. अब सत्ता में कांग्रेस है और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हैं. युवा नेता सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री हैं. पायलट के पास लंबे समय से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी है.

कई भाजपा नेता मानते हैं कि सचिन पायलट का मुकाबला करने के लिए युवा नेता को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की बागडोर सौंपी जानी चाहिए. इस परिस्थिति में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है. लेकिन वसुंधरा राजे का खेमा इसे मंजूर करेगा, इसमें संदेह है. इन परिस्थितियों में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जो नाम चल रहे हैं, उनके अलावा भी किसी नेता की नियुक्ति हो सकती है, क्योंकि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ज्यादातर चौंकाने वाले फैसले ही करते हैं.

पायलट बने विधायक दल के कप्तान

बुधवार को राजधानी के सवाईमान सिंह स्टेडियम स्थित राजस्थान क्रिकेट एकेडमी के मैदान पर सुबह का नजारा कुछ अलग सा था. अकसर खुले मंच या विधानसभा में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने वाले सभी दलों के दिग्गज विधायक और मंत्री यहां एक साथ क्रिकेट खेलते दिखे. कुछ मंत्री-विधायक मैच की कमेन्ट्री करते नजर आए तो कुछ अपने साथी विधायकों की हौसला अफजाही करते और एक दूसरे के साथ ठहाके लगाते हुए नजर आये. दरअसल बुधवार सुबह राजस्थान क्रिकेट एकेडमी के मैदान पर एक विशेष क्रिकेट मैच खेला गया. यह मैच राजस्थान विधानसभा अधिकारी/ कर्मचारी स्टाफ और सदन के भीतर बैठने वाले विधायकों के बीच खेला गया. विधायकों की टीम डिप्टी … Read more

धारीवाल ने नरेन्द्र मोदी को बताया सफाईकर्मियों को पीड़ा पहुंचाने वाली पुस्तक का लेखक, सदन में हंगामा

राजस्थान विधानसभा में बुधवार को मंत्री शान्ति धारीवाल के एक बोल पर जोरदार हंगामा हो गया. जिसके चलते विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी को सदन की कार्यवाही को गुरुवार तक के लिए स्थगित करना पड़ा. स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के एक बोल पर बुधवार को विधानसभा में दोनों पक्षो के बीच जोरदार हंगामा हो गया. दरअसल मंत्री शान्ति धारीवाल ने नगर आयोजना व प्रादेशिक विकास की अनुदान मांगों पर जवाब देते हुए कहा कि सफाईकर्मियों के लिए पूर्ववर्त्ती सरकारों ने कुछ नहीं किया. कुछ पुस्तकों में सफाईकर्मियों के किये पीड़ादायक शब्दों का प्रयोग किया गया है. मंत्री धारीवाल ने एक पुस्तक का हवाला देते हुए सदन में कहा कि एक … Read more

पिछली भाजपा सरकार ने राजस्थान में खोला था तबादला उद्योगः राजकुमार शर्मा

राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को कांग्रेस विधायक राजकुमार शर्मा ने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नया तबादला उद्योग खोल दिया था. पिछली सरकार ने संस्कृत और संस्कृति पर कोई ध्यान नहीं दिया. शिक्षा नीति के माध्यम से प्रदेश के छात्रों को अच्छी और गुणवत्ता पूर्ण मिल सके, इस पर पिछली सरकार ने बिलकुल ध्यान नहीं दिया.

विधानसभा में शुक्रवार को शिक्षा, कला और संस्कृति विभाग की अनुदान मांगों पर बहस हो रही थी. इसमें पक्ष-विपक्ष के विधायकों ने भाग लिया. बहस के दौरान राजेन्द्र गुढ़ा और चंद्रभान आक्या की बेवजह टोकाटाकी के कारण गर्मागर्मी भी हुई. सीपी जोशी की गैरहाजिरी में सभापति का दायित्व राजेन्द्र पारीक निभा रहे थे. उन्होंने दोनों विधायकों की जमकर खिंचाई की.

पारीक ने कहा, आप सब पैसे वाले हैं, आपके बच्चे सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ते. लेकिन उन परिवारों की सोचिए, जो बिना सुख-सुविधाओं वाले इन स्कूलों में जाने के लिए मजबूर हैं. जो सरकारी स्कूलों में सुबह से लेकर शाम तक दरी पर बैठकर घर आ जाते हैं. स्कूल में जाकर झाड़ू लगाते हैं. वहां न चपरासी है न शिक्षक. आप सब क्या चाहते हैं? क्या वे बच्चे वैसे ही रहें? हम सब आखिर किस बात की सेवा का संकल्प लेकर आए हैं, जब शिक्षा जैसे अहम मुद्दे पर ही गंभीर नहीं हैं? उन गरीब परिवारों से पीड़ा पूछिए, जो मजबूरी के कारण अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने भेजते हैं. क्योंकि सरकारी स्कूलों के हाल खराब हैं. अगर हम सब बैठकर सारगर्भित चर्चा कर लेंगे, कोई अच्छा सुझाव दे देंगे, सारी व्यवस्थाएं सुधार लेंगे, इसमें किसी को कोई एतराज है क्या?

चंद्रभान आक्या चित्तौड़गढ़ के विधायक हैं. वह आवेश में आकर सभापति को संबोधित करने लगे थे. सभापति ने उनसे कहा था कि यूट्यूब पर जनता आपको लाइव देख रही है. टोकाटाकी न करें. ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला सहित कई कांग्रेस विधायकों ने चंद्रभान आक्या के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि विधायक सभापति से माफी मांगें या सभापति उनके खिलाफ कार्रवाई करें. हालांकि राजेन्द्र पारीक ने कोई कार्रवाई नहीं की. उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, राजकुमार शर्मा और सुरेश मोदी कुछ बोलना चाहते थे, लेकिन पारीक ने उन्हें बैठा दिया.

निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने बहस में भाग लेते हुए कि शिक्षा विभाग इतना बड़ा और महत्वपूर्ण है, लेकिन इस विभाग के मंत्री कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त नहीं. पिछली सरकार में भी और इस सरकार में भी यह विभाग राज्यमंत्री के सुपुर्द है. उन्होंने शिक्षा विभाग में कैबिनेट मंत्री नियुक्त करने की मांग की. भाजपा विधायक किरण माहेश्वरी ने राज्य के 26 में से 11 विश्वविद्यालयों में कुलपति नहीं होने का मुद्दा उठाया.

विधायक जगदीश चंद्र ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने पंचायत स्तर पर आदर्श स्कूल खोलने की घोषणा की थी, जिस पर कोई अमल नहीं हुआ. बलवान पूनिया ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा का बजट बढ़ाया जाना चाहिए और शिक्षकों के तबादलों की स्थायी नीति बननी चाहिए. बहस में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, वासुदेव देवनानी, बाबूलाल, रामनिवास गवाडिया, पब्बाराम, धर्मनारायण जोशी और अमित चाचाण ने भी भाग लिया. शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद डोटासरा ने बहस का जवाब दिया.