राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) निकम्मी बन गई है या अपराधियों को वारदात करने की छूट दे दी गई है. जयपुर (Jaipur) में एक अखबार वितरक की हत्या और पुलिस द्वारा पत्रकार की पिटाई का विवाद थमा भी नहीं था कि बहरोड़ पुलिस थाने से कुछ लोग अंधाधुंध गोलियां चलाकर एक दुर्दांत अपराधी को छुड़ा ले गए.
Rajendra Rathore
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जन तंत्र पर भारी गन तंत्र, उधर गहलोत और पायलट उलझे राजनीतिक रस्साकस्सी में
कहते हैं कि मजबूत सरकार विकास के पथ पर रहती है और मजबूर सरकार झगड़ों में उलझ कर विकास के पथ से भटक जाती है. कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है इन दिनों राजस्थान (Rajasthan) में, यहां सरकार में वर्चस्व की लड़ाई का खामियाजा प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था के रूप में देखने को मिल रहा है. मरुधरा में जनतंत्र (Public System) पर अपराधियों का गन तंत्र (Gun System) भारी पड़ रहा है. गुंडे-मवालियों के सामने खाकी लाचार और कमजोर नजर आ रही है. राजधानी में इंसाफ मांग रहे लोगों पर लाठी बरसाई जा रही है तो बहरोड़ में खुलेआम लॉक-अप में फायरिंग कर अपराधियों को छुड़ाया जा रहा है तो वहीं सीकर में सरेआम बंदूक की नोक पर बैंक को लूटा जा रहा हैं. आखिर क्या हो गया है अमन-चैन वाले प्रदेश राजस्थान को?
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) के बीच की तनातनी का संघर्ष अब सतह पर है. नौबत यहां तक आ गई है कि अब सरकार के दोनों सिपहसालार एक दूसरे के खुशियों के पल से भी कन्नी काटने लगे हैं. शनिवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सीएम सचिन पायलट के जन्मदिन के मौके पर मुख्यमंत्री पहले दिल्ली और बाद में जैसलमेर में घूम रहे थे. इस दौरान उन्हें प्रदेश में पिछले तीन दिन से बिगड़ी कानून व्यवस्था का ख्याल भी नहीं आया. इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जन्मदिन के मौके पर सचिन पायलट भी कुछ ऐसा ही कर चुके हैं. इससे दोनों के बीच का मनमुटाव फिर जगजाहिर हो चुका है.
पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट ने अपने जन्मदिन के अवसर पर शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की जिसमें वह नाकाम रहे और उनका यह प्रदर्शन फीका ही रहा. हालांकि पीसीसी से सभी जिलों में जनप्रतिनिधियों को जयपुर भीड़ लेकर आने का संदेश दिया गया था और उम्मीद थी 20,000 से ज्यादा भीड़ जुटाने की लेकिन जयपुर में 5000 नेता और कार्यकर्ता ही उपस्थित हुए. प्रदेश सरकार के छः मंत्रियों सहित करीब 12 विधायकों ने ही पीसीसी जाकर पायलट को बधाई दी जबकि कुछ नेताओं ने विवाद से बचते हुए बधाई देने के लिए पीसीसी के बजाय पायलट के घर को चुना. क्योंकि इस बात पर भी नजर रखी जा रही थी कि कौन-कौन से बड़े नेता पायलट को बधाई देने पहुँचते हैं. अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की खींचतान का सबसे बड़ा उदाहरण तो यही है, जनप्रतिनिधियों की सबसे बडी फांस की किसकी बोलें और किसकी नहीं. यही कारण रहा कि मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार पायलट के जन्मदिन की रौनक फिकी रही आखिर वर्तमान नेतृत्व से पंगा कौन ले?
सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम व पीसीसी चीफ सचिन पायलट के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई अब शायद अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. मुख्यमंत्री गहलोत जहां दिल्ली दरबार में प्रदेश में नया पीसीसी चीफ और एक डिप्टी सीएम और बनाने की अर्जी लगा चुके हैं तो वही गाहे-बगाहे पायलट खेमा भी सरकार की मुखालफत का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहा है. बहराल हम बात कर रहे हैं कि दोनों नेताओं की आपसी खिंचतान का सीधा खामियाजा प्रदेश की जनता को उठाना पड़ रहा है. वरना मुख्यमंत्री जी को इस बिगड़ी कानून व्यवस्था को संभालने के बजाय इस तरह पायलट के जन्मदिन पर राजधानी छोड़कर जाने की नौबत नहीं आती. जबकि दिल्ली या जैसलमेर में कोई ऐसा अतिआवश्यक काम भी नहीं था की जिसे टाला नहीं जा सकता था.
प्रदेश के मुखिया अशोक गहलोत के पास गृह विभाग भी है ऐसे में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी भी गहलोत के ही कंधों पर है लेकिन पिछले 3 महीने और ख़ासकर गतसप्ताह में प्रदेश में हुए अपराध और उनके तरीकों पर नजर डाले तो पुलिस लाचार और नाकाम नजर आती है. मुख्यमंत्री गहलोत जहां राजधानी में पुलिस अधिकारियों को कानून व्यवस्था का पाठ पढ़ा रहे थे तो उसी वक़्त अलवर में बदमाश उसकी बखिया उधेड़ने का प्लान बना रहे थे. प्रदेश के इतिहास में शायद पहली बार हुई बहरोड़ थाने में फायरिंग कर अपराधी को छुड़ाने की घटना के बाद गहलोत के कंट्रोल वाली पुलिस की कलई खुल गई है. मुख्यमंत्री के चहेते डीजीपी अपराध पर अंकुश लगाने में अब तक विफल साबित हुए हैं. ऐसे में राजनीतिक स्थिरता का फायदा अब अपराधी उठा रहे हैं और आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है.
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अचानक बदले समीकरण
सोनिया गांधी के अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में सत्ता के केंद्र बदल गए. सोनिया के विश्वस्त माने जाने वाले अशोक गहलोत को मानो अभय दान मिल गया हो. राहुल गांधी जहां युवा नेतृत्व की बात करते थे तो ऐसे में सचिन पायलट आत्मविश्वास के साथ रेस में खुद को बरकरार रखे हुए थे. इसी कारण गहलोत खेमे में थोड़ा भय भी था कि कहीं किसी दिन नेतृत्व परिवर्तन का फरमान न आ जाये. लेकिन सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद तो गहलोत खेमा अधिक पॉवरफुल हो गया है. इसीलिए पहले जो नेता और कार्यकर्ता सचिन पायलट का खुल कर समर्थन करते थे यहां तक कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाये जाने की खुलकर पैरवी करते थे उनमें से कुछ एक को छोड़कर ज्यादातर उनके जन्मदिन के मौके पर भी कन्नी काटते नजर आये.
बेनीवाल ने मुख्यमंत्री गहलोत को दी चेतावनी
नागौर सांसद (Nagaur MP) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के मुखिया हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने राजस्थान के मुख्यमंत्री (Rajasthan CM) अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की सरकार को जंगलराज बताते हुए पुलिस प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने अलवर में बढ़ते अपराधिक ग्राफ पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा. उन्होंने हाईकोर्ट के पूर्व मुख्यमंत्रियों के घर खाली कराने के फैसले पर राजस्थान सरकार की चुप्पी को गहलोत-वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) की मिली भगत बताते हुए कहा कि वे इसके लिए आंदोलन करते हुए गहलोत के आवास का घेराव करेंगे.
राजस्थान में कानून-व्यवस्था की हालत, गहलोत सरकार फेल
राजस्थान (Rajasthan) में क्या हो रहा है? पुलिस निकम्मी बन गई है या अपराधियों को वारदात करने की छूट दे दी गई है. जयपुर में एक अखबार वितरक की हत्या के मामले में पुलिस को जो सांप्रदायिक पक्ष दिखा, वह चौंकाने वाला रहा. पुलिस ने हत्यारे के खिलाफ सख्ती करने की बजाय उससे सहानुभूति दिखाई, जिससे लोग भड़क गए. पुलिस ने उलटे प्रदर्शऩ करने वालों पर लाठियां भांजी. रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को खदेड़ा. फोटो खींच रहे फोटोग्राफर को पीट दिया. पुलिस की ज्यादती सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. यह विवाद थमा भी नहीं था कि शुक्रवार सुबह अलवर जिले के बहरोड़ पुलिस थाने (Behror Police Station) से कुछ लोग अंधाधुंध गोलियां चलाकर, पुलिस को धमकाकर एक दुर्दांत अपराधी को छुड़ा ले गए.
जयपुर पुलिस (Jaipur Police) का रवैया अजीबो गरीब रहा. एक व्यक्ति ने अखबार वितरक को कुल्हाड़ी से काट दिया और पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती करवा कर रहा कि वह मानसिक रूप से विक्षिप्त है. क्या मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति को हत्या करने का हक मिला हुआ है? मुख्यमंत्री गहलोत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक करते हैं, जिसकी खबरें अखबारों में छपती रहती हैं. इससे यह लगता है कि मुख्यमंत्री को प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ी फिक्र है. गहलोत पुलिस अफसरों को सीख भी देते होंगे कि पुलिस को क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए? क्या उनकी सीख यह है कि दुर्दांत अपराधी को थाने से भागने देना चाहिए, या अखबार वितरक को कुल्हाड़ी से काट देने वाले के खिलाफ तत्काल प्रभाव से हत्या का मामला दर्ज नहीं करना चाहिए?
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राजस्थान में कानून-व्यवस्था की स्थिति विकट है. मुख्यमंत्री गहलोत राज्य के गृहमंत्री भी हैं और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर बुरी तरह फेल साबित हो रहे हैं. जयपुर की घटना पुलिस की आम आदमी के खिलाफ बर्बरता का उदाहरण पेश करती है, जबकि बहरोड़ की घटना पुलिस के नाकारापन की मिसाल है. किसी की हत्या होने पर उसके परिजन जब न्याय की मांग करते हैं तो पुलिस लाठी चलाती है, उनके साथ अमानवीय व्यवहार करती है और जब एक थाने से कुछ लोग अपराधी को छुड़ाने पहुंचते हैं तो उसके सामने समर्पण की मुद्रा में आ जाती है. क्या लोग पुलिस पर भरोसा कर सकते हैं?
बहरोड़ (Behror) का घटनाक्रम इस प्रकार है. शुक्रवार तड़के करीब 3.20 बजे पुलिस ने एक गाड़ी की तलाशी ली तो उसमें सवार तीन लोग भागने लगे. एक पुलिस की पकड़ में आ गया. वह हरियाणा का कुख्यात अपराधी विक्रम गुर्जर उर्फ पपला था. उसने पुलिस को अपना गलत नाम बताया. खुद को प्रॉपर्टी कारोबारी साहिल के रूप में पेश किया. पुलिस ने सुबह पांच बजे बाद उसे थाने लाकर हवालात में बंद कर दिया. शुक्रवार सुबह करीब 8.20 बजे थाने के सामने तीन गाड़ियां रुकी उनमें करीब 15 लोग सवार थे. सात-आठ थाने में घुसे और गोलियां चलानी शुरू कर दी.
अचानक हुए इस हमले से थाने में मौजूद तमाम पुलिस कर्मी बचने की कोशिश करते दिखे. कुछ यहां-वहां छिपे, कुछ दीवार लांघकर भागे. थाना अधिकारी सुगन सिंह अपने कक्ष में बैठे थे. हमला होने पर वह पिछले दरवाजे से निकल गए. कक्ष के दरवाजे पर काली फिल्म लगी होने से वह हमलावरों को नहीं दिखे. हमलावर चिल्ला रहे थे, जो भी दिखे, गोली से उड़ा दो. कुछ ही देर में वे पपला को हवालात से छुड़ा ले गए. पपला को छुड़ा कर ले जाने में उन्हें सात मिनट से ज्यादा समय नहीं लगा. एके-47 से फायरिंग करते हुए अपराधी को थाने से छुड़ा ले जाने का यह राजस्थान में पहला मामला है.
पपलू हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के खेतली गांव का रहने वाला है. महेन्द्रगढ़ पुलिस उसे 8 सितंबर, 2017 को अदालत में पेशी के लिए ले जा रही थी, तब उसके साथी उसे छुड़ा ले गए थे. तब भी पपला के साथियों ने पुलिस पर फायरिंग की थी और चार पुलिस कर्मियों को गोली लगी थी. उसके बाद से वह फरार थी. हरियाणा के मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची में उसका नाम शामिल है. उस पर पांच लाख रुपए का इनाम है. वह अनायास ही राजस्थान पुलिस की पकड़ में आ गया था, लेकिन गलत नाम बताने से पुलिस गफलत में रही. पुलिस ने उसके पास से 31.90 लाख रुपए नकद बरामद किए थे.
क्या पुलिस अधिकारी लालच में आ गए थे? खबर है कि पुलिस अधिकारी ज्यादा रकम ऐंठने के लिए सौदेबाजी में लगे रहे. पपला ने छोड़ने के बदले 35 लाख रुपए देने की बात कही थी. इस पर पुलिस अधिकारियों ने पपला को साथियों से संपर्क करने के लिए अपना मोबाइल फोन दे दिया. पपला को अपने साथियों से संपर्क करने का मौका मिल गया. उसके बाद जो हुआ, वह सबके सामने है. पुलिस ने रोजनामचे में साहिल उस्मान के नाम से रिपोर्ट लिखी थी.
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पपला को छुड़ाकर भागे लोगों ने अपनी कार रास्ते में छोड़कर एक पिकअप गाड़ी लूटी. उसके बाद उसे भी छोड़कर एक और अन्य गाड़ी पर कब्जा किया, फिर हरियाणा सीमा पर उस गाड़ी को भी वहीं छेड़कर खेतों से पैदल भाग निकले. हमले के बाद हतप्रभ पुलिस ने पीछा किया, लेकिन कोई भी पकड़ में नहीं आया. पुलिस को दोष नहीं दिया जा सकता. पुलिस भले ही अपराधियों को पकड़ न सके, लेकिन पीछा तो करती ही है. बच्चों में चोर-पुलिस का खेल ऐसे ही लोकप्रिय नहीं हुआ है.
बहरहाल डीजीपी भूपेन्द्र सिंह (DGP Bhupendra Singh) बहरोड पहुंचे हुए हैं. भारी पुलिस बल भेजा गया है. घटना की एसआईटी से जांच की घोषणा हो चुकी है. सांप निकल गया, लकीर पीटने का काम हो रहा है. मुख्यमंत्री गहलोत की तरफ से इस घटना पर प्रतिक्रिया नहीं आई है. यह राजस्थान में कानून-व्यवस्था की तस्वीर है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) ने बहरोड़ की घटना पर गहलोत सरकार को कठघरे में खड़ा किया है. उन्होंने ट्वीट किया है कि इस घटना से प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लग गया है. विधानसभा में भाजपा विधायक दल के उपनेता राजेन्द्र राठौड़ (Rajendra Rathore) ने कहा कि प्रदेश में अराजकता की स्थिति है. राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) और विधायक कालीचरण सराफ (Kalicharan Saraf) ने मुख्यमंत्री गहलोत से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की है.
प्रदेश में अपराध का बोलबाला, अपराधियों के हौसले हैं बुलन्द
गहलोत सरकार में अपराध का बोलबाला बढ़ता जा रहा है. वहीं अपराधियों के हौसले बुलन्द हैं. जयपुर के खो-नागोरियन में न्यूजपेपर हॉकर की हत्या और अलवर में बढ़ता अपराध का ग्राफ इस बात को साबित करते हैं.
किरोड़ी मीणा ने नैतिकता के आधार पर मांगा गहलोत से इस्तीफा
BJP के राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीणा (Kirodi Lal Meena) ने प्रदेश में बढ़ती अपराधिक घटनाओं पर राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) से नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की है.
राजधानी नहीं महफूज़, अखबार के पैसे मांगने पर युवक की निर्मम हत्या, राजनीति शुरू
राजस्थान (Rajasthan) प्रदेश में कानून व्यवस्था (Law & order) की स्थिति दिनोंदिन भयावह होती जा रही है. पिछले एक महीने में ही कई अन्य अपराधों (Crime) के अलावा राजधानी जयपुर (Jaipur) में तीन बार और गंगापुर सिटी में एक साम्प्रदायिक उन्माद की गम्भीर स्थिति बनी. ये हालत तो तब हैं जब गृह विभाग (Home Department) की जिम्मेदारी खुद प्रदेश के मुखिया अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के पास है. एक तरफ सरकार (Government) जहां राज्य में अच्छा शासन देने के दावे के साथ राजधानी जयपुर में प्रदेश के आला पुलिस अधिकारियों (Police Officers) के साथ दो दिवसीय संवाद कर रही है तो वहीं को राजधानी के जयपुर के खोह-नागोरियान थाना क्षेत्र … Read more
पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले में कभी भी आ सकती SIT की रिपोर्ट, होगी कार्रवाई: गहलोत
राजस्थान (Rajasthan) की कानून व्यवस्था को लेकर आईजी एवं जिला पुलिस अधीक्षकों की दो दिवसीय कॉफ्रेंस (Confrense) बुधवार को प्रदेश पुलिस मुख्यालय (Police Headquarter) में शुरु हुई. इस कांफ्रेंस में गृहमंत्री का जिम्मा संभाल रहे प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने डीजीपी, आईजी, एसपी सहित गृह सचिव से प्रदेश की कानून व्यवस्था की जानकारी ली. पुलिस मुख्यालय पर आयोजित इस दो दिवसीय कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री गहलोत ने बुधवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि आज सभी से जिले वार चर्चा की हैं. कल सभी पुलिस अधिक्षकों से वन टु वन चर्चा की जायेगी. सीएम गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार की मंशा प्रदेश … Read more
गहलोत सरकार अपने ही मंत्रियों पर नहीं कर पा रही है नियंत्रण – राठौड़
प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर निकाय चुनाव प्रबंधन कार्यशाला को संबोधित करते हुए राजेंद्र राठौड़ (Rajendra Rathore) ने गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजस्थान सरकार में गुटबाजी चरम पर है. अशोक गहलोत ( Ashok Gehlot) सरकार अपने ही मंत्रियों पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है. निकाय चुनाव की पूर्व तैयारी को लेकर आयोजित इस चुनाव प्रबंधन कार्यशाला में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई एवं चुनाव की रणनीति पर मंथन हुआ.
भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने राजस्थान में आगामी निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर बुधवार को प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर निकाय चुनाव प्रबंधन कार्यशाला को संबोधित किया. निकाय चुनाव की पूर्व तैयारी को लेकर आयोजित इस चुनाव प्रबंधन कार्यशाला में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई एवं चुनाव की रणनीति पर मंथन हुआ. कार्यशाला में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सदस्यता अभियान के बाद प्रदेश में भाजपा परिवार संगठन की दृष्टि से करोडपति हो गया है. आने वाले निकाय चुनाव को भारतीय जनता पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता सिर पर कफन बांधकर एकजुट होकर चुनाव लडेगा.
इस कार्यशाला में प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष अल्का सिंह, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता व विधायक सतीश पूनियां, विधायक अनिता भदेल, वासुदेव देवनानी सहित पार्टी के पदाधिकारी एवं चुनावी जिला संगठन प्रभारी व बूथ प्रबंधन प्रभारी मौजूद रहे.
कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करें कार्यकर्ता: राठौड़
राठौड ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर भी चर्चा छेड़ते हुए कहा कि प्रदेश से अनुच्छेद 370 हटाये जाने से देश का आम नागरिक खुश है. जनता को खुशी है कि लोकसभा चुनाव में उन्होनें जिस पार्टी को वोट दिया, वो देश के लिए अच्छा काम कर रही है. आगामी निकाय चुनाव में भी प्रदेश की जनता भारतीय जनता पार्टी को वोट देगी. इसके लिए पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करे. उन्होंने कार्यकर्ताओं से आव्हान किया कि निकाय चुनाव के समय सरकार की विफलताओें को जनता के सामने रखें एवं केंद्र सरकार द्वारा देशहित में किये जा रहे कार्यों को से उन्हें मुखाबित कराएं. राठौड़ ने कार्यकर्ताओं से मतदाता सूचियों पर भी नजर बनाए रखने को कहा.
गहलोत सरकार पर साधा निशाना
कार्यशाला के बाद राजेन्द्र राठौड़ ने पत्रकारों से वार्ता कर गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजस्थान सरकार में गुटबाजी चरम पर है. ‘एक व्यक्ति एक पद’ के नाम पर जो बहस इन दिनों छिड़ी हुई है, उसमें मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री खेमा एक दूसरे के ऊपर ताल ठोंक रहे हैं. गहलोत सरकार अपने ही मंत्रियों पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है. प्रदेश में अपराधों का ग्राफ दिनों दिन बढ़ रहा है फिर चाहे वो यौन उत्पीडन के मामले हों या दलितों पर हत्याचार. महिला उत्पीड़न के मामले में राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. इन सब पर लगाम लगाने के बजाय मुख्यमंत्री एसपी और आईजी से संवाद कर रहे हैं.
हाईकोर्ट के फैसले पर कहा ‘अध्ययन नहीं किया’
पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास और अन्य सुविधाओं पर आये हाईकोर्ट के फैसले पर राठौड ने गहलोत सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस राजस्थान के महत्वपूर्ण व्यक्तियों में पूर्व मुख्यमंत्री इस तरह की सुविधा लेते रहे है. कांग्रेस सरकार के समय में बरकतुल्लाह खान साहब की पत्नी उशी खान सहित जगन्नाथ पहाड़िया को भी विशेष रूप से मकान आवंटन हुए. अन्य सुविधाएं बढ़ाने का काम भी गहलोत सरकार ने अपने पहले कार्यकाल से शुरू कर दिया था. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सरकारी आवास को खाली करने के पत्रकारों के सवाल पर राठौड ने कहा, ‘हाईकोर्ट के निर्णय का अध्ययन अभी तक मैंने नहीं किया है. फैसले को पूरी तरह पढ़ने के बाद सारी बात सामने आ पायेगी. न्यायालय के निर्णय की पालना हर एक व्यक्ति करता है. हम भी करते है.’