निकाय प्रमुखों के चुनाव पर उठे विरोध पर बोले धारीवाल- कोई नये नियम नहीं बनाए, 9 महीने पहले सार्वजनिक कर दी थी जानकारी

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान की गहलोत सरकार द्वारा स्थानीय निकायों में अध्यक्ष, सभापति और महापौर के चुनाव में हाईब्रिड फॉर्मूले को लागू करने के एक दिन बाद ही खुद गहलोत सरकार के मंत्री और विधायकों द्वारा इस फैसले के विरोध करने पर स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल (Dhariwal) ने कहा कि सवाल तो तब उठना चाहिए जब नए नियम बनाए हों, वर्ष 2009 में जो नियम थे वही इस बार लागू हैं. हमने नौ माह पहले ही इसकी जानकारी सार्वजनिक कर दी थी, लेकिन बहुत से लोगों ने नियम ही नहीं पढ़े, इसलिए अब वो चर्चा कर रहे हैं. बता दें, निकाय प्रमुखाें के चुनाव के तरीके में किए गए बदलाव … Read more

अब निकाय क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति बन सकेगा मेयर, सभापति और पालिकाध्यक्ष

Mayor Chairman

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा धारा 370 हटाये जाने के बाद बदले महौल से चिंतित राजस्थान की गहलोत सरकार ने दो दिन पहले नगर निकाय चुनाव पर यु-टर्न लेने के बाद अब इन चुनावाें काे लेकर एक अाैर बड़ा निर्णय लिया है. जिसके तहत अब पार्षद के चुनाव में हिस्सा लिए बिना अथवा यह चुनाव हारा हुअा प्रत्याशी भी मेयर (Mayor), सभापति (Chairman) या पालिकाध्यक्ष चुना जा सकेगा. गहलोत सरकार ने महापौर, सभापति और पालिकाध्यक्ष बनने के लिए पार्षद चुनाव लडऩे की अनिवार्यता समाप्त कर दी है. अब निकाय क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति दावेदारी कर सकेगा, लेकिन जिस वर्ग के लिए सीट आरक्षित होगी, उसी वर्ग का … Read more

वीडियो खबर: निकाय चुनाव पर कांग्रेस के यू टर्न पर BJP का हल्लाबोल

राजस्थान (Rajasthan) में गहलोत सरकार ने निकाय चुनाव से पहले यू-टर्न लेते हुए फैसला लिया कि अब पार्षद ही महापौर और निकाय प्रमुख का चुनाव करेंगे. इससे पहले प्रदेश सरकार ने प्रत्यक्ष चुनाव कराने का समर्थन किया था और इसे चुनावी घोषणा पत्र में शामिल ​भी किया था. अब BJP इस पर पलटवार कर रही है. पूर्व मंत्री और मालवीय नगर विधायक कालीचरण सर्राफ ने थूंककर चाटने वाला कदम बताया.

बेनीवाल की गहलोत को चुनौती- कांग्रेस दोनों उपचुनाव हारी तो वे इस्तीफा दें, जीती तो मैं दे दूंगा सांसद पद से इस्तीफा

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. झुंझुनू जिले की मंडावा विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी सुशीला सिंगडा के समर्थन में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए बेनीवाल ने कहा कि इस उपचुनाव में मंडावा व खींवसर दोनों सीट जीतकर मुख्यमंत्री गहलोत की विदाई कर देंगे. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत को ‘राजनीति का जादूगर’ कहा जाता है लेकिन भाजपा व रालोपा ने मिलकर जिस तरह उनके पुत्र वैभव गहलोत को लोकसभा चुनाव में हराया, उसी तरह इस उपचुनाव में कांग्रेस को हराकर ये खिताब गहलोत से छीन लेंगे.

वहीं मीडिया से बातचीत में बेनीवाल ने अशोक गहलोत को चुनौती देते हुए कहा कि वे इस बात की घोषणा करे कि कांग्रेस अगर दोनों उपचुनाव हारी तो गहलोत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे. बेनीवाल ने घोषणा करते हुए कहा कि खींवसर में रालोपा और मंडावा में बीजेपी नहीं जीती तो वे सांसद पद से इस्तीफा दे देंगे.

उपचुनावों में गहलोत को हरा छीन लेंगे ‘राजनीति के जादूगर’ का खिताब: हनुमान बेनीवाल

Hanuman Beniwal

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. झुंझुनू जिले की मंडावा विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी सुशीला सिंगडा के समर्थन में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने एक बार फिर अशोक गहलोत पर जमकर चलाए जुबानी तीर चलाए. बेनीवाल ने कहा कि इस उपचुनाव में मंडावा व खींवसर दोनों सीट जीतकर मुख्यमंत्री गहलोत की विदाई कर देंगे. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत को ‘राजनीति का जादूगर’ कहा जाता है लेकिन भाजपा व रालोपा ने मिलकर जिस तरह उनके पुत्र वैभव गहलोत को लोकसभा चुनाव में हराया, उसी तरह इस उपचुनाव में कांग्रेस को हराकर ये खिताब गहलोत से छीन लेंगे. इस चुनावी … Read more

वीडियो खबर: निकाय चुनावों पर क्या बोले यूडीएच मिनिस्टर शांति धारीवाल

राजस्थान (Rajasthan) में गहलोत सरकार ने निकाय चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण फैसले पर यू-टर्न लेते हुए नया फैसला लिया कि अब पार्षद ही करेंगे महापौर और निकाय प्रमुख का चुनाव. गहलोत केबिनेट (Gehlot Cabinet) की एक अहम बैठक में ये फैसला लिया गया.

वीडियो खबर: कांग्रेस में फूट की बात करने वाले पहले अपना घर संभालें- गहलोत

राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने जोधपुर में BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा हमारी पार्टी में फूट की बात करते हैं लेकिन उन्हें पहले अपना घर संभालना चाहिए. भाजपा में फूट से सतीश पूनिया (Satish Poonia) के पदभार ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) ने शिरकत तक नहीं की. उनका समारोह में न आना क्या संकेत करता है? उपचुनाव के बारे में गहलोत ने कहा कि पूरी कांग्रेस एकजूट है और हम उपचुनाव हर हाल में जीतेंगे.

गहलोत केबिनेट का फैसला, अब जनता नहीं पार्षद ही चुनेंगे मेयर

राजस्थान में मीसाबंदी पेंशन योजना बंद, भाजपा ने बताया तानाशाही निर्णय

Misabandi

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान की गहलोत सरकार (Gehlot Government) ने भी आपातकाल के दौरान जेल में बंद रहे मीसा बंदियों की पेंशन योजना (Misabandi Pension Scheme) सहित अन्य सुविधाएं बंद कर दी हैं. पिछली वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) सरकार ने मीसा व डीआरआई बंदियों को ‘लोकतंत्र रक्षक’ का नाम देते हुए उन्हें पेंशन, निशुल्क चिकित्सा, निशुल्क बस सुविधा सहित कई अन्य तरह की सुविधाएं प्रदान की थी. सोमवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री गहलोत (Ashok Gehlot) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की अहम बैठक में रोक लगा दी. प्रदेश सरकार के इस कदम को बीजेपी ने औछी मानसिकता का उदाहरण बताते हुए तानाशाही निर्णय बताया. मीसा बंदियों की … Read more

गहलोत केबिनेट का फैसला- पार्षद ही चुनेंगे महापौर, बीजेपी ने बताया- थूंककर चाटने वाला कदम

Gehlot Cabinet

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में गहलोत सरकार ने निकाय चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण फैसले पर यू-टर्न लेते हुए नया फैसला लिया कि अब पार्षद ही करेंगे महापौर और निकाय प्रमुख का चुनाव. सोमवार को हुई गहलोत केबिनेट (Gehlot Cabinet) की एक अहम बैठक में ये फैसला लिया गया. सीएम गहलोत के पिछले कार्यकाल में बने महापौर के प्रत्यक्ष चुनाव के कानून को पिछ्ली वसुंधरा राजे सरकार ने सत्ता में आने के बाद खत्म कर दिया था मगर राज्य में एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद गहलोत सरकार दोबारा विधानसभा में यह कानून ले आई थी. इसी साल यह कानून बनाया गया था जिसके तहत मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाएगा. वहीं बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने गहलोत सरकार के इस फैसले पर कहा कि निकाय चुनाव में हार के डर से सरकार ने यू-टर्न लिया है. पूर्व मंत्री और मालवीय नगर विधायक कालीचरण सर्राफ ने बताया थूंककर चाटने वाला कदम.

बड़ी खबर: रामेश्वर डूडी अब सोनिया और राहुल गांधी से मिलकर बताएंगे RCA चुनाव की हकीकत

गहलोत मंत्रिमंडल की बैठक (Gehlot Cabinet) में पिछली सरकार के निकाय चुनावों में अप्रत्यक्ष प्रणाली को जारी रखते हुए बैठक में अप्रत्यक्ष प्रणाली से निकाय चुनाव (Nikay Chunav) कराने पर सहमति बनी है. इससे पहले 2009 में राजस्थान की गहलोत सरकार ने प्रत्यक्ष निकाय चुनाव आयोजित कराए थे जिसे वसुंधरा सरकार ने बदल दिया था. मगर राज्य में एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद गहलोत सरकार दोबारा विधानसभा में यह कानून ले आई थी. प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री धारीवाल ने बताया कि अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव इसलिए भी जारी रखा गया है ताकि अगर किसी वार्ड में साम्प्रदायिक माहौल बिगड़े तो वो केवल एक ही इलाके में बिगड़े, उससे आगे न बढ़े. इसी प्रकार किसी एक वार्ड में कोई समस्या होती है तो वो अन्य वार्डो में न फैले. धारीवाल ने इसे लोकतांत्रिक पद्धति बताया.

यूडीएच मिनिस्टर शांति धारीवाल (Shanti Dhariwal) ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि पार्षद और पूर्व पार्षदों से चर्चा कर नवंबर में होने वाले नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम के चुनावों को अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने का फैसला मंत्रीमंडल की बैठक में लिया गया. धारीवाल ने बताया कि मौजूदा समय में विपक्ष द्वारा जनता के बीच भय, आक्रोश, असहिष्णुता और साम्प्रदायिक माहौल पैदा किया जा रहा है, उन परिस्थितियों में प्रत्यक्ष चुनाव कराना कतैई सही नहीं है.

उन्होंने कहा कि हमने वर्तमान और पूर्व पाषदों के साथ उन संभावित लोगों से भी बात की जो पार्षद का चुनाव लड़ने वाले हैं, उन सभी ने एक स्वर में निकाय चुनावों में अप्रत्यक्ष प्रणाली का समर्थन किया. उक्त का कहना है कि प्रत्यक्ष प्रणाली द्वारा जीतकर आने वाले व्यक्ति के सामने पार्षद अपने आपको कमजोर महसूस करते हैं. दोनों के बीच तालमेल की कमी भी रहती है. ऐसे में अगर बहुमत ज्यादा हो लेकिन जीतकर आया प्रमुख व्यक्ति दूसरी पार्टी का हो तो विकास का मुद्दा गौण हो जाता है.

बड़ी खबर: गुजरात में शराबबंदी को लेकर उठे विवाद के बाद अशोक गहलोत का ट्विटर वार

सरकार के इस फैसले पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार केवल डर और तबादलों की आड में निकाय चुनावों में जीत का ख्वाब देख रही है जो मुंगेरीलाल के हसीन सपने से ज्यादा कुछ भी नहीं. पूनिया ने कहा कि कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में ये साफ-साफ लिखा है कि सरकार में आने के बाद निकाय चुनाव प्रत्यक्ष पद्धति से कराए जाएंगे लेकिन सरकार ने निकाय चुनाव में हार के डर से यु-टर्न लेकर प्रदेश की जनता को ठगा है.

वहीं पूर्ववर्ती सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे कालीचरण सर्राफ ने भी निकाय चुनाव में अप्रत्यक्ष प्रणाली पर गहलोत सरकार पर जमकर निशाना साधा. सर्राफ़ ने कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने के बाद सरकार ने विपक्ष के विरोध के बावजूद बिल को विधानसभा में पास कराया था. (Gehlot Cabinet) अब अपने ही लिए गए फैसले पर यू टर्न लेना न सिर्फ जनता को धोखा देना है, बल्कि ये एक थूक कर चाटने जैसा कदम है.