वीडियो खबर: हिन्दी दिवस पर अमित शाह का दमदार भाषण

हिन्दी दिवस (Hindi Diwas) के मौके पर देशवासियों को बधाई देते हुए देश के गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) ने एक राष्ट्र-एक भाषा के फॉर्मूले को अपनाने की बात कही. उन्होंने कहा कि ‘देश की एक भाषा हो’ इसी को याद रखते हुए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने राजभाषा की कल्पना की थी और इसके लिए हिंदी को स्वीकार किया. मौजूदा समय में जरूरत है कि देश की एक भाषा हो, जिसके कारण विदेशी भाषाओं को जगह न मिले.

‘मोदी का विदेशों में सम्मान कांग्रेस की देन’, हिन्दी दिवस पर बोले गहलोत

आज हिन्दी दिवस (Hindi Diwas) है. हिन्दी दिवस और राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी (Rajasthan Hindi Granth Academy) के 50 साल पूरे होने के अवसर पर प्रदेश की राजधानी जयपुर के बिड़ला सभागार में शनिवार को राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी का स्वर्ण जयंती समारोह (Golden Jubilee Celebrations) मनाया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने शिरकत की. विशेष गणमान्य अतिथियों में उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा, मंत्री सुभाष गर्ग ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इस अवसर पर राज्य के विभिन्न हिंदी ग्रंथ लेखकों और साहित्यकारों का सम्मान किया गया.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती वर्ष के बैनर तले मनाए जाने वाले इस अति विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक समय है. एक ओर गांधीजी की 150वी जयंती मनाई जा रही है वहीं दूसरी तरफ राजीव गांधी की 75वी जयंती मना रहे हैं जिन्होंने देश में कंप्यूटर और मोबाइल की नीव रखी. यह भी एक खुशी का अवसर है कि हिन्दी ग्रंथ अकादमी इस साल स्वर्ण जयंती मना रही है. उन्होंने कहा कि राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी लेखकों को प्रोत्साहित करने और सम्मान स्वरूप ऑनलाइन पेमेंट करने का काम कर रही है और आगे भी करती रहेगी.

हिन्दी दिवस पर मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि हमारे देश मे विभिन्न भाषाएं है. ये हमारी ताकत है. हिन्दी राष्ट्रभाषा के रूप में और अधिक विकसित होनी चाहिए, ऐसा मेरा मानना है. हिन्दी का देश की आजादी में भी अहम योगदान रहा जिसे महात्मा गांधी ने भी माना था. गहलोत ने आगे कहा कि जब मैं 20 साल पहले मुख्यमंत्री बना तो मैंने पत्रकार और साहित्यकार कोष शुरू किया. मेरी सोच थी कि लेखकों और कलाकारों को सम्मान मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि मेरा मानना है जितना काम हिन्दी को आगे बढ़ाने के लिए होने चाहिए, वे अभी तक हुए नहीं है जबकि इस भाषा के लिए अलग से विभाग भी बने हुए है. उन्होंने लेखकों से अपील की कि हिन्दी को आगे बढ़ाने में मदद कीजिए, सरकार आपके साथ है.

बड़ी खबर: मोदीजी ने ऐसा माहौल बनाया कि जैसे चार महीनों में ही हम मंगल पर पहुंच गए

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने हिन्दी के लिए एक आयोजन करने की कोशिश की जैसी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में होती है. अगर इस तरह का कार्यक्रम हिन्दी के लिए प्रदेश में हो तो मैं उसमें जरूर सहयोग करूंगा. साथ ही प्रदेश की जनता को विश्वास दिलाते हुए कहा है आपने मुझे तीसरी बार प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया, इसके लिए मैं आभारी हूं. मेरी कोशिश रहेगी जितना काम हो सके, मैं आपके लिए कर सकूं.

मोदी का विदेशों में सम्मान कांग्रेस की देन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आज मोदीजी का विदेशों में सम्मान होता है तो इसके पीछे हमारी 70 साल की मेहनत है. आज देश का जो मान सम्मान बढ़ा है, उसके पीछे 70 साल की मेहनत है. पाकिस्तान के खिलाफ हम सरकार के साथ है.

वहीं अनुच्छेद 370 और अर्थव्यवस्था पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि देश का लोकतंत्र महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और मौलाना आजाद जैसे अनेक लोगों की देन है जिन्होंने 70 साल तक लोकतंत्र को मजबूत किया. आज मोदीजी प्रधानमंत्री बने उसके पीछे केवल लोकतंत्र है. मोदीजी इसरो में गए जिसकी स्थापना नेहरू जी ने की थी. आज जहां से उपग्रह छोड़े जा रहे है. ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री बनने के 4 महीने के अंदर ये उपग्रह छोड़े जा रहे हैं. इसके पीछे कई लोगों की मेहनत लगी हुई है.

अर्थव्यवस्था पर पलटवार करते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि मोदी राज में अर्थव्यवस्था की हालत खराब है. नौकरी मिलना दूर की कोड़ी बनता जा रहा है. जम्मू कश्मीर में 40 दिन से लोग घरों में बंद है जो गलत है. जो बोलता है उसको देशद्रोही कहा जाता है. अगर बोलना गलत है तो मैं देशद्रोही हूं. केंद्र सरकार का धर्म के नाम पर राजनीति करना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है.

वीडियो खबर: जन सूचना पोर्टल पर क्या बोले पायलट

राजस्थान (Rajasthan) के कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष (PCC President) और डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने जयपुर के बिड़ला सभागार में जन सूचना पोर्टल (Jan Soochna Portal) को लॉन्च करने के बाद लोकार्पण समारोह को संबोधित किया. इस पोर्टल पर सरकार के 13 विभागों की 23 योजनाओं की विस्तृत जानकारी मिलेगी. सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने अपने भाषण में कहा कि राजस्थान एक मात्र राज्य जहां दर्जनभर विभागों की जानकारी सीधी जनता के सामने है. अगर सरकार (Rajasthan Government) अच्छा काम करना चाहे तो सब कुछ संभव है.

वीडियो खबर: जन सूचना पोर्टल समारोह में क्या बोले गहलोत

प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने जयपुर के बिड़ला सभागार में जन सूचना पोर्टल (Jan Soochna Portal) को लॉन्च करने के बाद लोकार्पण समारोह को संबोधित किया. इस पोर्टल पर सरकार के 13 विभागों की 23 योजनाओं की विस्तृत जानकारी मिलेगी. इसके लिए राष्ट्रीय कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने वीडियो मैसेज के जरिए राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) और सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) को बधाई दी.

वीडियो खबर: इतना आसान नहीं है पायलट को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाना

राजस्थान (Rajasthan) में सचिन पायलट (Sachin Pilot) को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (Rajasthan PCC President) पद से हटवाने की मुहिम अब लगता है ठंडी पड़ गई है, क्योंकि कांग्रेस (Congress) हाईकमान की तरफ से इस तरह के प्रयासों को समर्थन नहीं दिया जा रहा है. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) फिलहाल राजस्थान में पार्टी संगठन में फेरबदल करने के पक्ष में नहीं हैं. इससे नेताओं के आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं, जिससे पार्टी को ही नुकसान होगा. सचिन पायलट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) होने के साथ ही उप मुख्यमंत्री पद भी संभाले हुए हैं.

वीडियो-खबर: तंवर को मनाना हुड्डा के लिए चुनौती से कम नहीं

हरियाणा (Haryana) के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ये भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) के राजनीतिक करियर की अंतिम पारी होने वाली है, इसलिए वे अपनी इस पारी को शानदार तरीके से खेलना चाहते हैं. इसी के चलते हुड्डा हरियाणा कांग्रेस में बदलाव और पार्टी से नाराज चल रहे नेताओं को मनाने में जुट गए हैं ताकि BJP का मुकाबला पूरे जोशो-खरोश के साथ किया जा सके. भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सबसे ज्यादा मुश्किलें हरियाणा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को मनाने में आएगी. हुड्डा और तंवर के बीच की अदावत किसी से छिपी नहीं है. अशोक तंवर राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं और पिछले 6 सालों से प्रदेश अध्यक्ष पद का दायित्व संभाले हुए थे.

देश की जनता की गर्दन काट रहा व्हीकल एक्ट: खाचरियावास

राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) में परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास (Pratap Singh Khachariwas) ने मोटर व्हीकल एक्ट (Moter Vehicle Act) का विरोध करते हुए इसे देश और प्रदेश की जनता के लिए आत्मघाती बताया है. खाचरियावास ने बताया कि मोदी सरकार का व्हीकल एक्ट देश की जनता की गर्दन काट रहा है. उन्होंने कहा कि हाल में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी (Nitin Gadkari) ने कहा था कि नियम सभी के लिए एक है और ये एक्ट सभी को मानना पड़ेगा. इसके बाद भी गुजरात सरकार (Gujrat Government) ने बात न मानते हुए जुर्माने की राशि को आधा कर दिया. अब राजस्थान सरकार जुर्माने की राशि को गुजरात सरकार से भी कम करेगी. खाचरियावास ने ये भी कहा कि मोदी सरकार के इस फैसले का सभी जगहों पर विरोध हो रहा है. ऐसे में केंद्र सरकार को ये एक्ट वापिस ले लेना चाहिए.

आपको बता दें कि देश के 4 राज्यों ने केंद्र सरकार के मोटर व्हीकल एक्ट को प्रदेश में लागू करने से मना कर दिया है. इनमें राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश और पं.बंगाल शामिल हैं. वहीं ट्रैफिक उल्लंघन के लिए जुर्माना कई गुना बढ़ाए जाने से लोगों को हो रही परेशानी के बीच गुजरात सरकार ने जुर्माने की राशि को कम करने का ऐलान किया. गुजरात में बीजेपी मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कई मामले में जुर्माने की राशि को घटा कर आधा कर दी. हालांकि कुछ नियमों में चालान की राशि नियमानुसार है लेकिन फिर भी सरकार के इस कदम से लोगों को निश्चित तौर पर राहत मिलेगी. हिमाचल सरकार ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राहत मांगी है.

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गौरतलब है कि नया मोटर वाहन संशोधन कानून एक सितम्बर से देशभर में लागू कर दिया गया है. इस एक्ट के अनुसार ट्रैफिक नियम (Traffic rules) तोड़ने पर जुर्माने की राशि को 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है. इनमें हैलमेट न पहनने पर जुर्माना एक हजार (जो पहले 100 रुपये था) और लाइसेंस या गाड़ी के पेपर न होने पर जुर्माना दो हजार (जो पहले 200 रुपये था) शामिल है.

जब से नया एक्ट देश में लागू हुआ है, चारों ओर हो हल्ला मचा हुआ है. कई जगहों से चालान के ऐसे मामले सामने आए हैं जो हैरान करने वाले हैं. राजधानी दिल्ली, गुरुग्राम सहित अन्य राज्यों में 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक चालान की राशि वसूले जाने की खबरे आ रही हैं. इनमें हरियाणा, दिल्ली एनसीआर और ओडिशा सबसे आगे हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अपना रूख स्पष्ट करते हुए कहा है कि सभी राज्यों को नए कानून का पालन करना ही होगा. केंद्र सरकार नए नियमों से जागरूकता बढ़ने का हवाला दे रही है.

वहीं दूसरी ओर, भारतीय युवा कांग्रेस ने बुधवार को मोटर व्हीकल अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के खिलाफ केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मुहिम पड़ी ठंडी

राजस्थान (Rajasthan) में सचिन पायलट (Sachin Pilot) को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Congress President) पद से हटवाने की मुहिम अब लगता है ठंडी पड़ गई है, क्योंकि कांग्रेस हाईकमान की तरफ से इस तरह के प्रयासों को समर्थन नहीं दिया जा रहा है. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) फिलहाल राजस्थान में पार्टी संगठन में फेरबदल करने के पक्ष में नहीं हैं. इससे नेताओं के आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं, जिससे पार्टी को ही नुकसान होगा.

सचिन पायलट (Sachin Pilot) प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ ही उप मुख्यमंत्री पद भी संभाले हुए हैं. पिछले दिनों सचिन पायलट के जन्मदिन से ठीक पहले गहलोत समर्थक मंत्री हरीश चौधरी (Harish Choudhary) ने मीडिया में एक व्यक्ति एक पद का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा था कि पार्टी में एक व्यक्ति एक पद का नियम लागू होना जरूरी है. हालांकि वह खुद गहलोत सरकार में मंत्री होने के साथ ही एआईसीसी सचिव होने के नाते पंजाब में कांग्रेस के प्रभारी बने हुए हैं. पायलट समर्थकों का कहना था कि जो व्यक्ति यह मुद्दा उठाता है, सबसे पहले उसे एक पद छोड़ना चाहिए.

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एक अखबार में एक कांग्रेस पदाधिकारी के हवाले से खबर छपी है कि एक व्यक्ति एक पद का मुद्दा गहलोत ने उठवाया था, क्योंकि वह सचिन पायलट (Sachin Pilot) से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. पहले राजीव गांधी की जयंती पर और हाल ही सचिन पायलट के जन्मदिन समारोह में भी पायलट और गहलोत में दूरियां स्पष्ट हो चुकी हैं. गहलोत सोनिया गांधी के नजदीक माने जाते हैं, जबकि सचिन पायलट की राहुल गांधी से मित्रता है. राहुल गांधी ने भले ही कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया हो और सोनिया ने बागडोर संभाल ली हो, लेकिन पार्टी में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का दखल बना हुआ है, इसलिए पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाना मुश्किल प्रतीत होता है.

सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने के बाद उम्मीद थी कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का महत्व बढ़ेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है. न तो राजस्थान में सचिन पायलट का कद कम हो रहा है और न ही मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य (Jyotiraditya Scindia) के समर्थकों के बगावती तेवरों में कमी आई है. राजस्थान में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले ही डांवाडोल हो रही है, ऊपर से गहलोत और पायलट की खींचतान से पार्टी संगठन भी लड़खड़ा रहा है. यह स्थिति कांग्रेस के लिए विकट है.

हाल ही अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) दिल्ली गए थे, तब सोनिया गांधी ने उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया. गहलोत राजस्थान में 13 सितंबर को कांग्रेस (Congress) की एक वेबसाइट लांच होने के मौके पर सोनिया गांधी को आमंत्रित करना चाहते थे. वह सोनिया गांधी से समय मिलने का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें निराश होकर जयपुर लौटना पड़ा. बताया जाता है कि सोनिया गांधी ने राजस्थान की यात्रा करने से इनकार कर दिया.

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समझा जाता है कि राजस्थान में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए गहलोत ने सोनिया के पास तीन नामों का पैनल भेजा है, जिनमें हरीश चौधरी (Harish Choudhary) का नाम भी शामिल है, जो खुद चुनाव हार गए थे. पार्टी पर भी उनकी मजबूत पकड़ नहीं है. हरीश चौधरी के अलावा लालचंद कटारिया और महेश जोशी के नाम भी पैनल में शामिल हैं. गहलोत के प्रस्ताव पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इससे यह स्पष्ट है की गहलोत प्रदेश में पार्टी पर भी अपना नियंत्रण चाहते हैं, जो पायलट के कारण संभव नहीं हो पा रहा है. पंचायत चुनाव नजदीक हैं और उम्मीदवार तय करने में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की अहम भूमिका रहती है.

गौरतलब है कि सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री होने के बावजूद सरकार चलाने की प्रक्रिया में सक्रिय नहीं हैं. सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में पायलट की कोई भूमिका नहीं रहती है. इसके अलावा गहलोत की तरफ से जारी होने वाले विज्ञापनों में सचिन पायलट का जिक्र नहीं होता है. इस परिस्थिति में गहलोत और पायलट की खींचतान कम होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं.

लॉ एंड ऑर्डर पर क्या बोले सचिन पायलट

राजस्थान (Rajasthan) के डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने प्रदेश की कानून व्यवस्था (Low and Order) के लचीलेपन पर कहा कि पिछले कुछ महीनों में कानून व्यवस्था शिथिल हुई है जिसपर ध्यान देने की जरूरत है. इसे गंभीरता से लेना चाहिए फिर चाहे वो धौलपुर की घटना हो या बहरोड की या फिर अलवर की. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस संबंध में कुछ कदम उठाए हैं ताकि इस तरह की कोई और वारदात न हो. सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने केंद्र सरकार के यातायात नियमों का पालन न करने वालों पर 10 गुना चालान राशि बढ़ाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा.

बगावत व भितरघात के बीच बागियों को मनाने रणक्षेत्र में उतरे हुड्डा

लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस अब तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल कर अपनी नींव गहरी करना चाह रही है. यही वजह है कि सत्ता की चाह में लगातार उक्त तीनों राज्यों में नेतृत्व में परिवर्तन हो रहे हैं. हरियाणा (Haryana) में भी आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. हरियाणा की सियासत में कांग्रेस की वापसी के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) को कमान सौंपी गयी है. उन्हें पार्टी चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष बनाया है. वहीं कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को प्रदेशाध्यक्ष का दायित्व सौंपा है. हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ये हुड्डा के राजनीतिक करियर की अंतिम पारी होने वाली है, इसलिए वे अपनी इस पारी को शानदार तरीके से खेलना चाहते हैं. इसी के चलते हुड्डा हरियाणा कांग्रेस (Haryana Congress) में बदलाव और पार्टी से नाराज चल रहे नेताओं को मनाने में जुट गए हैं ताकि BJP का मुकाबला पूरे जोशो-खरोश के साथ किया जा सके.

बता दें कि हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा और नए सीएलपी लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को कार्यभार संभाला है. इस दौरान पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई नदारद रहे. तीनों नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा विरोधी गुट के माने जाते हैं और पार्टी में नए बदलाव से बेहद नाराज चल रहे हैं. अब इन सभी नेताओं की नाराजगी दूर करना हुड्डा के जिम्मे है.

हुड्डा ने कांग्रेस नेताओं की नाराजगी दूर करने का सिलसिला किरण चौधरी से शुरू किया. हुड्डा रविवार को दिल्ली स्थित किरण चौधरी (Kiran Choudhary) के घर पहुंचे. यहां उन्होंने किरण चौधरी और वहां मौजूद उनकी सुपुत्री एवं पूर्व सांसद श्रुति चौधरी (Shruti Chaudhary) से मुलाकात की. माना जा रहा है कि ये आपसी मुलाकात रंग लाई है और किरण चौधरी अब हुड्डा के समर्थन में आ खड़ी हुई है. अब कयास लगाए जा रहे हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा का अगला टार्गेट कुलदीप बिश्नोई (Kuldeep Bishnoi) होंगे जिनसे जल्दी मुलाकात की जा सकती है.

बड़ी खबर: आखिर पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा क्यों नहीं बन पाये प्रदेश अध्यक्ष?

बता दें, बिश्नोई से हुड्डा की अदावत काफी पुरानी है. लोकसभा चुनाव के दौरान बिश्नोई ने हुड्डा के नेतृत्व को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था. आपसी गुटबाजी का नतीजा भी सबके सामने है. यहां कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया था. इसके बावजूद हुड्डा बिश्नोई को अपनी तरफ लाने में कामयाब होंगे, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है.

पूर्व मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी मुश्किल हरियाणा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को मनाने की रहेगी. तंवर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के बेहद करीबी माने जाते हैं और पिछले 6 सालों से पद का दायित्व संभाले हुए थे. लोकसभा चुनाव (Loksabha Election-2019) में करारी हार के बाद उनका जाना तय लग रहा था लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इसके बाद सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने जैसे ही पार्टी की बागड़ौर फिर से संभाली, सबसे पहले उनका नंबर आया और उनकी जगह सोनिया की खास कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को भेजा गया.

अशोक तंवर (Ashok Tanwar)  पिछले 6 सालों से प्रदेश की बागड़ौर संभाल चुके हैं. ऐसे में उनकी प्रदेश के कुछ क्षेत्रों पर अच्छी पकड़ है. इस बात को हुड्डा भी भली भांति समझते हैं. ऐसे में तंवर की नाराजगी से पार्टी को नुकसान ही होगा इसलिए उन्हें फिर से एक सम्मानजनक पद मिलने की उम्मीद है.

हरियाणा में लंबे समय से कांग्रेस में आंतरिक कलह जगजाहिर है. प्रदेश में कई नेता एक दूसरे की टांग खींचने में लगे रहते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने प्रदेश के नेताओं में एकजुटता लाने का दायित्व किसी नए नेता को नहीं बल्कि अनुभवी भूपेन्द्र हुड्डा को सौंपी. कुमारी शैलजा उनका साथ देगी लेकिन कुल मिलाकर हुड्डा को फ्री हैंड काम करने का पूरा मौका दिया गया है.

प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के बाद असंतुष्टों को साधने में जुटे हुड्डा अच्छी तरह से जानते हैं कि असंतुष्ट और बागी नेता आगामी चुनाव में उनकी रणनीति और समीकरण दोनों का खेल बिगाड़ सकते हैं. वहीं सोनिया गांधी भी इस बात को बखूबी समझ रही है कि कांग्रेसी नेताओं की बगावत व भितरघात पार्टी को चुनावी रण में और कमजोर करेगी. ऐसे में उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा को कमान संभलाकर कोई गलती नहीं की.

अब हुड्डा केंद्र की ओर से मिले इस अवसर को कितना और कैसे भुना पाते हैं, आगामी चंद महीने में पता चल ही जाएगा. अगर हुड्डा अपनी इस कोशिश में सफल होते हैं और पार्टी को सत्ता में आने का मौका मिलता है तो हुड्डा के हाथों में फिर से प्रदेश की कमान आ सकती है. लेकिन अगर वे असफल साबित होते हैं तो भविष्य में उन्हें कोई बड़ा दायित्व मिलेगा, इसकी संभावना कम ही दिखती है.