वैभव गहलोत अब राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के बहाने बनेंगे RCA अध्यक्ष

PoliTalks news

अब राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के बहाने RCA अध्यक्ष बनेंगे  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (AshokGehlot) के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) के राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) यानि आरसीए का अध्यक्ष बनने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है. वैभव राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) यानि आरसीए का अध्यक्ष बनने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है. वैभव राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के रास्ते होकर आरसीए का रास्ता तय करेंगे. Vaibhav Gehlot को राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष चुना गया है. Vaibhav Gehlot को राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष चुना गया है. ये पद करीब डेढ़ माह से खाली चल रहा था. यह पद 22 जुलाई को तत्कालीन कोषाध्यक्ष प्रदीप पालीवाल के निधन से खाली हो गया था.

गौरतलब है कि जोधपुर से लोकसभा चुनाव हारने के बाद से Vaibhav Gehlot Vaibhav-Gehlotक्रिकेट की राजनीति में आने का मौका तलाश रहे थे. वैभव को क्रिकेट की राजनीति में लाने के लिए सीपी जोशी ने पूरी मदद की. इससे पहले वैभव को जोधपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के थ्रू RCA में लाने के प्रयास किये गए. शायद इसीलिए सीपी जोशी के सुझाव पर ही जोधपुर जिला क्रिकेट संघ को भंग कर अंतरिम समिति बना दी गई. राज्य सरकार के सहकारिता विभाग ने इस बारे में आदेश भी जारी कर दिया था.

अंतरिम समिति के संयोजक भी राजस्थान रॉयल्स के उपाध्यक्ष राजीव खन्ना को बनाया गया था, जो जोधपुर के ही हैं और गहलोत परिवार के काफी निकट माने जाते हैं. Vaibhav Gehlot को पहले जोधपुर जिला क्रिकेट संघ में पदाधिकारी बनाया जाता, लेकिन हाइकोर्ट की रोक होने से अब वैभव गहलोत को राजसमन्द जिला क्रिकेट एसोसिएशन से प्रवेश कराया गया है. इसके बाद आरसीए में जोशी का इस महीने कार्यकाल समाप्त होने पर Vaibhav Gehlot को RCA का अध्यक्ष बनाया जाएगा.

Vaibhav Gehlot के RCA अध्यक्ष बनने की राह में अगर कोई रोड़ा बन सकता है तो वो हैं नागौर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi). डूडी को RCA में सीपी जोशी के कट्टर दुश्मन नान्दु और उनकी टीम का पूरा सपोर्ट है जो कि चाहते हैं कि डूडी RCA अध्यक्ष के लिये चुनाव लड़ें. लेकिन जानकारों की मानें तो डूडी को खींवसर से होने वाले विधानसभा उपचुनाव से सदन में पहुंचाने के कमिटमेंट के बाद अब वैभव के RCA अध्यक्ष बनने में कोई रोड़ा नहीं बचा है.

जैसा कि लग रहा है, अगर Vaibhav Gehlot आरसीए अध्यक्ष बनते हैं तो फिर से RCA का नया अध्यक्ष फिर राजसमंद से ही होगा. फिलहाल ये पद प्रदेश विधानसभा स्पीकर और राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सीपी जोशी के पास है. हाल में बीबीसीआई ने RCA से बैन हटाया है. इसके बाद जोशी ने आरसीए अध्यक्ष पद छोड़ने की घोषणा कर दी है.

यह भी पढ़ें: RCA तो सिर्फ बहाना, कहीं ओर ही है निशाना

चूंकि कि सी.पी. जोशी अब विधानसभा अध्यक्ष बन चुके हैं, ऐसे में उन्हें ये पद छोड़ना पड़ेगा. RCA को 12 सितम्बर तक चुनाव की घोषणा करनी है. 28 सितम्बर तक चुनाव करा लिए जाएंगे.

वहीं सोमवार देर शाम जेके स्टेडियम में हुई राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक में वैभव गहलोत को निर्विरोध कोषाध्यक्ष चुना गया. RCA के पर्यवेक्षक उदयपुर के महेंद्र शर्मा, जिला खेल अधिकारी चांद खां पठान और सहकारिता विभाग के उप पंजीयक की मौजूदगी में निर्वाचन प्रक्रिया हुई जिसमें 19 में से 16 सदस्यों के समर्थन से वैभव को कोषाध्यक्ष चुना गया. RCA के संयुक्त सचिव महेंद्र नाहर ने वैभव गहलोत को राजसमंद का कोषाध्यक्ष बनाए जाने की पुष्टि की.

बगावत व भितरघात के बीच बागियों को मनाने रणक्षेत्र में उतरे हुड्डा

लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस अब तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल कर अपनी नींव गहरी करना चाह रही है. यही वजह है कि सत्ता की चाह में लगातार उक्त तीनों राज्यों में नेतृत्व में परिवर्तन हो रहे हैं. हरियाणा (Haryana) में भी आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. हरियाणा की सियासत में कांग्रेस की वापसी के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) को कमान सौंपी गयी है. उन्हें पार्टी चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष बनाया है. वहीं कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को प्रदेशाध्यक्ष का दायित्व सौंपा है. हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ये हुड्डा के राजनीतिक करियर की अंतिम पारी होने वाली है, इसलिए वे अपनी इस पारी को शानदार तरीके से खेलना चाहते हैं. इसी के चलते हुड्डा हरियाणा कांग्रेस (Haryana Congress) में बदलाव और पार्टी से नाराज चल रहे नेताओं को मनाने में जुट गए हैं ताकि BJP का मुकाबला पूरे जोशो-खरोश के साथ किया जा सके.

बता दें कि हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा और नए सीएलपी लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को कार्यभार संभाला है. इस दौरान पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई नदारद रहे. तीनों नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा विरोधी गुट के माने जाते हैं और पार्टी में नए बदलाव से बेहद नाराज चल रहे हैं. अब इन सभी नेताओं की नाराजगी दूर करना हुड्डा के जिम्मे है.

हुड्डा ने कांग्रेस नेताओं की नाराजगी दूर करने का सिलसिला किरण चौधरी से शुरू किया. हुड्डा रविवार को दिल्ली स्थित किरण चौधरी (Kiran Choudhary) के घर पहुंचे. यहां उन्होंने किरण चौधरी और वहां मौजूद उनकी सुपुत्री एवं पूर्व सांसद श्रुति चौधरी (Shruti Chaudhary) से मुलाकात की. माना जा रहा है कि ये आपसी मुलाकात रंग लाई है और किरण चौधरी अब हुड्डा के समर्थन में आ खड़ी हुई है. अब कयास लगाए जा रहे हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा का अगला टार्गेट कुलदीप बिश्नोई (Kuldeep Bishnoi) होंगे जिनसे जल्दी मुलाकात की जा सकती है.

बड़ी खबर: आखिर पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा क्यों नहीं बन पाये प्रदेश अध्यक्ष?

बता दें, बिश्नोई से हुड्डा की अदावत काफी पुरानी है. लोकसभा चुनाव के दौरान बिश्नोई ने हुड्डा के नेतृत्व को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था. आपसी गुटबाजी का नतीजा भी सबके सामने है. यहां कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया था. इसके बावजूद हुड्डा बिश्नोई को अपनी तरफ लाने में कामयाब होंगे, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है.

पूर्व मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी मुश्किल हरियाणा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को मनाने की रहेगी. तंवर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के बेहद करीबी माने जाते हैं और पिछले 6 सालों से पद का दायित्व संभाले हुए थे. लोकसभा चुनाव (Loksabha Election-2019) में करारी हार के बाद उनका जाना तय लग रहा था लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इसके बाद सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने जैसे ही पार्टी की बागड़ौर फिर से संभाली, सबसे पहले उनका नंबर आया और उनकी जगह सोनिया की खास कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को भेजा गया.

अशोक तंवर (Ashok Tanwar)  पिछले 6 सालों से प्रदेश की बागड़ौर संभाल चुके हैं. ऐसे में उनकी प्रदेश के कुछ क्षेत्रों पर अच्छी पकड़ है. इस बात को हुड्डा भी भली भांति समझते हैं. ऐसे में तंवर की नाराजगी से पार्टी को नुकसान ही होगा इसलिए उन्हें फिर से एक सम्मानजनक पद मिलने की उम्मीद है.

हरियाणा में लंबे समय से कांग्रेस में आंतरिक कलह जगजाहिर है. प्रदेश में कई नेता एक दूसरे की टांग खींचने में लगे रहते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने प्रदेश के नेताओं में एकजुटता लाने का दायित्व किसी नए नेता को नहीं बल्कि अनुभवी भूपेन्द्र हुड्डा को सौंपी. कुमारी शैलजा उनका साथ देगी लेकिन कुल मिलाकर हुड्डा को फ्री हैंड काम करने का पूरा मौका दिया गया है.

प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के बाद असंतुष्टों को साधने में जुटे हुड्डा अच्छी तरह से जानते हैं कि असंतुष्ट और बागी नेता आगामी चुनाव में उनकी रणनीति और समीकरण दोनों का खेल बिगाड़ सकते हैं. वहीं सोनिया गांधी भी इस बात को बखूबी समझ रही है कि कांग्रेसी नेताओं की बगावत व भितरघात पार्टी को चुनावी रण में और कमजोर करेगी. ऐसे में उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा को कमान संभलाकर कोई गलती नहीं की.

अब हुड्डा केंद्र की ओर से मिले इस अवसर को कितना और कैसे भुना पाते हैं, आगामी चंद महीने में पता चल ही जाएगा. अगर हुड्डा अपनी इस कोशिश में सफल होते हैं और पार्टी को सत्ता में आने का मौका मिलता है तो हुड्डा के हाथों में फिर से प्रदेश की कमान आ सकती है. लेकिन अगर वे असफल साबित होते हैं तो भविष्य में उन्हें कोई बड़ा दायित्व मिलेगा, इसकी संभावना कम ही दिखती है.

पलवल विधानसभा सीट पर इस बार करण सिंह दलाल को करना पड़ सकता है हार का सामना

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 (Haryana Assembly Election) – पलवल (Pawal) विधानसभा सीट हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनावों (Assembly Election) की तिथि की घोषणा अभी नहीं हुई है, ऐसी संभावना है की हरियाणा में नवंबर माह में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. इसके मद्देनजर विभिन्न दलों ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. संभावित प्रत्याशियों ने जनसंपर्क अभियान छेड़ दिया है, प्रचार साधनों के माध्यम से वे उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. आज हम आपको हमारी खास रिपोर्ट में हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 में हरियाणा के पलवल जिले की पलवल (Palwal) विधानसभा सीट के जमीनी हालात से रुबरु करवाएंगे. हरियाणा के पलवल (Palwal) जिले के अंदर तीन विधानसभा सीटें आती … Read more

बेनीवाल ने मुख्यमंत्री गहलोत को दी चेतावनी

नागौर सांसद (Nagaur MP) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के मुखिया हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने राजस्थान के मुख्यमंत्री (Rajasthan CM) अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की सरकार को जंगलराज बताते हुए पुलिस प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने अलवर में बढ़ते अपराधिक ग्राफ पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा. उन्होंने हाईकोर्ट के पूर्व मुख्यमंत्रियों के घर खाली कराने के फैसले पर राजस्थान सरकार की चुप्पी को गहलोत-वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) की मिली भगत बताते हुए कहा कि वे इसके लिए आंदोलन करते हुए गहलोत के आवास का घेराव करेंगे.

बेरी सीट पर रघुवीर कादयान की सल्तनत को चुनौती दे पाएंगे मनोहर लाल खट्टर?

हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव (Assembly Election-2019) की घोषणा चुनाव आयोग की तरफ से जल्द की जा सकती है. संभावना जताई जा रही है कि चुनाव आयोग अक्टूबर और नवंबर के महीने में हरियाणा में विधानसभा चुनाव करवा सकता है. पॉलिटॉक्स न्यूज ने हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर एक विशेष कार्यक्रम शुरु किया है. जिसमें हम आपको रोज एक नए विधानसभा क्षेत्र की ग्राउंड रिर्पोट (Ground Report) से अवगत करवाते है. आज हम आपको हरियाणा की बेरी विधानसभा सीट (Beri Assembly Constituency) के जमीनी हालात से रुबरु करवाएंगे.

बेरी विधानसभा क्षेत्र झज्जर जिले के अन्तर्गत आता है, लेकिन बेरी विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा क्षेत्र रोहतक लगता है. विधानसभा क्षेत्र पर पिछले काफी समय से कांग्रेस का एक-क्षत्र राज है. कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता और भूपेन्द्र हुड्डा के खास सिपहसालार चौधरी रघुवीर सिंह कादयान (Choudhary Raghuveer Singh Kadayan) पिछले चार चुनाव से यहां लगातार अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखने में कामयाब रहे हैं.

राजनीतिक इतिहासः
हरियाणा गठन के साथ ही बेरी विधानसभा भी अस्तित्व में आई. बेरी विधानसभा सीट से सर्वप्रथम 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रताप सिंह दौलुता विधायक चुने गए थे. 1968 के चुनाव में पार्टी ने प्रताप सिंह की जगह रण सिंह को प्रत्याशी बनाया और रण सिंह ने प्रताप सिंह को मात दी. साल 1972 में प्रताप सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में जीत हासिल की. 1977, 80 के विधानसभा चुनाव में यहां से जनता पार्टी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की.

साल 1987 में लोकदल उम्मीदवार के रुप में रघुवीर सिंह कादयान ने जीत हासिल की, लेकिन कादयान जीत के इस सिलसिले को बरकरार नहीं रख पाये और 1991 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ओमप्रकाश से हार बैठे. 1996 के चुनाव में बाजी वीरेन्द्र ने मारी. साल 2000 को विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने रघुवीर कादयान को उम्मीदवार बनाया. बेरी की जनता ने इस बार रघुवीर को निराश नहीं किया और रघुवीर बड़े अंतर से चुनाव जीतने में कामयाब हुए.

साल 2000 में शुरु हुआ रघुवीर कादयान की जीत का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है. साल 2014 के चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस विरोधी लहर होने के बावजूद भी रघुवीर कादयान चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे. उन्होंने इंडियन नेशलन लोकदल के चतर सिंह को लगभग 4500 मतों से मात दी थी.

सामाजिक समीकरणः
बेरी विधानसभा सीट रोहतक लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आता है. बेरी विधानसभा सीट में जाट समाज बहुतायात में है. जाट वोटर्स के कारण ही रघुवीर लगातार चुनाव जीतने में कामयाब हो रहे हैं. 2019 के विधानसभा चुनाव में कादयान को इनेलो के कमजोर होने का भी फायदा मिलेगा. इस चुनाव में रघुवीर कादयान को जाट वोट एकमुश्त मिलने का अनुमान है, जैसा लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से जाट समाज का समर्थन दीपेन्द्र हुड्डा को एकतरफा मिला था.

2019 विधानसभा चुनावः
विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम पार्टियों ने प्रत्याशी चयन की प्रकिया शुरु कर दी है. पार्टियों के वरिष्ठ नेता इलाकों में अपने मजबूत उम्मीदवारों की तलाश में लग गए है. कांग्रेस के सामने प्रत्याशी चयन में कोई समस्या नहीं है. तंवर के हटने के बाद पार्टी पर पुरा नियंत्रण भूपेन्द्र हुड्डा का होगा इसलिए टिकट एक बार फिर रघुवीर कादयान को मिलना तय है. रघुवीर कादयान, हुड्डा के करीबी है, तो इसलिए भी उनके टिकट पर कोई संशय नहीं है.

बीजेपी की तरफ से बेरी विधानसभा सीट को लेकर दावेदारों की सूची काफी लंबी है. इन दावेदारों में विक्रम सिंह कादयान, प्रदीप अहलावत, शिव कुमार रंगीला प्रमुख दावेदार है. जजपा की तरफ से उपेन्द्र कादयान का टिकट लगभग पक्का है. इनेलो इस बार प्रमोद राठी पर दांव लगाने का मन बना चुकी हैं.

जीत की संभावनाः
रघुवीर कादयान के लिए इस बार का चुनाव पिछले चुनावों की तरह आसान नहीं होने वाला है. हमारे इस तर्क के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रदेश कांग्रेस के अंदर मची भारी गुटबाजी है. कादयान हुड्डा गुट के नेता हैं तो दुसरे गुट के नेता उन्हें चुनाव में कमजोर करने के पुरे प्रयास करेगें. जिसका नुकसान सीधा-सीधा रघुवीर सिंह कादयान को चुनाव में होगा. 2019 में बीजेपी और कांग्रेस के मध्य रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा यह तय है.

मैं मध्य प्रदेश का सुपर सीएम नहीं हूं: दिग्विजय सिंह

Digvijay Singh on Mohan bhagwat

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने इन आरोपों का जोरदार शब्दों में खंडन किया है कि वह मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh ) में सुपर सीएम के रूप में काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कमलनाथ (Kamalnath) अपने आप में मजबूत नेता हैं और उन्हें किसी सुपर सीएम की जरूरत नहीं है. दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उन पर आरोप कि वह गैर जरूरी तरीके से सरकार के काम में रुकावटें पैदा करते रहते हैं. दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh)  ने कहा कि मध्य प्रदेश में कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिला है. वे सरकार … Read more

तीन राज्यों में चुनाव जीतने के लिए भाजपा की मजबूत तैयारी

देश में तीन राज्यों हरियाणा (Haryana), झारखंड (Jharkhand) और महाराष्ट्र (Maharastra) में विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2019) होने वाले हैं. भाजपा की तैयारियां जोरों पर है जबकि विपक्ष लड़ाई से पहले ही हारने की स्थिति में दिख रहा है. चुनाव आयोग ने इन राज्यों में चुनाव का कार्यक्रम अभी घोषित नहीं किया है. लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा ने अपने चुनाव अभियान का पहला चरण करीब-करीब पूरा कर लिया है. विपक्षी पार्टियां अभी सीटों के तालमेल में ही उलझी हुई हैं और किस नेता के नाम पर चुनाव लड़ा जाएगा, यह तय नहीं है.

हरियाणा में भाजपा के चुनाव अभियान के तहत बड़े नेताओं के दौरे शुरू हो चुके हैं. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दो रैलियां कर चुके हैं. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रोहतक में विजय संकल्प रैली कर रहे हैं. इस तरह भाजपा का चुनाव अभियान पूरी गति से आगे बढ़ रहा है, वहीं प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस स्थानीय नेताओं के आपसी मतभेदों को दूर करने में जुटी हुई है. हाल की कांग्रेस ने नेताओं के आपसी विवाद थामने के लिए कुमारी शैलजा को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और भूपेन्द्र सिंह हुड्डा (Bhupendra Singh Hooda) को विधायक दल नेता बना दिया है. चुनाव अभियान समिति के प्रमुख भी हुड्डा ही रहेंगे.

इसके बावजूद यह पूरी तरह तय नहीं है कि कांग्रेस के भीतरी मतभेद, विवाद आसानी से हल हो पाएंगे. हरियाणा में सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस कभी भी किसी भी मुद्दे पर भाजपा सरकार को न तो घेर पाई है और न ही चुनौती दे पाई है. एक स्थानीय कांग्रेस नेता का कहना है कि इतने सालों से चल रहे झगड़े एकदम से खत्म होना मुश्किल है.

हरियाणा में राजनीतिक रूप से मजबूत चौटाला परिवार (Chautala Family) में भी फूट पड़ी हुई है. इसको देखते हुए विधानसभा चुनाव में इनेलो अपनी मौजूदगी दिखा पाएगी, इसमें संदेह है. अजय चौटाला (Ajay Chautala) ने अपनी अलग जननायक जनता पार्टी (JJP) बना ली है. उनकी पार्टी का बसपा से तालमेल हो चुका है. उनका दावा है कि इस बार हरियाणा में चारकोणी मुकाबला होगा. भाजपा, कांग्रेस, इनेलो और जेपीपी के बीच टक्कर होगी.

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस अपनी महाजनादेश यात्रा पूरी कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ राज्य के हर क्षेत्र के लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की. दूसरी तरफ महाराष्ट्र का मुख्य विपक्षी गठबंधन कांग्रेस और राकांपा आपसी झगड़ों में उलझा हुआ है. दोनों ही पार्टियों के प्रमुख नेताओं में पार्टी छोड़ने का रुझान बढ़ता जा रहा है. पिछले लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद दोनों ही पार्टियों में उत्साह की कमी नजर आ रही है.

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदल दिया है, लेकिन पार्टी नेताओं के अंदरूनी मतभेद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं. दोनों ही पार्टियां प्रकाश अंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीएस) से तालमेल करना चाहती हैं. लोकसभा चुनाव में वीबीएस के कारण दोनों पार्टियां कम से कम आठ सीटों पर नुकसान उठा चुकी हैं. कांग्रेस के सामने वीबीएस ने शर्त रखी है कि वह राकांपा को गठबंधन से अलग करे. यह शर्त मानना कांग्रेस के लिए मुश्किल है.

महाराष्ट्र में एक हद तक राज ठाकरे (Raj Thackeray) की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MANS) का भी असर है. लोकसभा चुनाव में राज ठाकरे ने मोदी सरकार के खिलाफ प्रचार किया था. विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर मनसे के उम्मीदवार भी चुनाव लड़ेंगे. कांग्रेस और राकांपा, दोनों पार्टियां अभी राज ठाकरे से गठबंधन के बारे में कोई फैसला नहीं ले पाई है.

झारखंड की राजधानी रांची में 12 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी की रैली का कार्यक्रम तय हो चुका है. विपक्षी खेमे को अब तक कांग्रेस के साथ बैठक का इंतजार है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha) के नेता हेमंत सोरेन अपने स्तर पर 26 अगस्त को साहेबगंज से राज्य में बदलाव यात्रा शुरू कर चुके हैं. वह पूरे राज्य का दौरा करने के बाद 19 सितंबर को रांची में बड़ी रैली को संबोधित करेंगे. कांग्रेस अभी तक अपने अंदरूनी झगड़ों में उलझी हुई है. पार्टी को एकजुट करने के लिए कांग्रेस ने झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार को हटाकर उनकी जगह रामेश्वर उरांव (Rameshwar Oraon) को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है. लेकिन इसका उलटा असर हो रहा है. कांग्रेस के कई विधायक भाजपा में जाने की योजना बना रहे हैं.

इस तरह तीनों राज्यों में साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी अभी से काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है. एक तरफ तीनों राज्यों में जहां कांग्रेस या अन्य विपक्षी पार्टियों के नेता बीजेपी में शामिल हो रहे हैं और जो बचे हुए हैं वो आपसी खींचतान के चलते एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी लोकसभा में मिले भारी बहुमत और उसके बाद के ताबड़तोड़ लिए गए जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (Jammu Kashmir Reorganization) जैसे कई बिलों को लागू करवाने के बाद आत्मविश्वास से लबरेज है.

आखिर किसने रची रामेश्वर डूडी के खिलाफ हत्या की साजिश?

बीकानेर (Bikaner) के पूर्व सांसद और कांग्रेस के कद्दावर नेता रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi ) के खिलाफ हत्या की साजिश रचने का मामला सामने आया है. हरियाणा की सिरसा पुलिस (Sirsa Police) ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर इस साजिश का खुलासा किया. इनमें से एक आरोपी बीकानेर (राजस्थान) का रहने वाला है. उसने कबूल किया है कि रंजिश के चलते उसने डूडी की हत्या की योजना बनाई.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी ने मीडिया से बातचीत में इसे पॉलिटिकल रंजिश का रंग देते हुए हत्या की साजिश रचने की बात कही. इस संबंध में रामेश्वर डूडी मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) के आवास पर पहुंच कर खुद की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की. उन्होंने सरकार से प्रोडक्शन वारंट के जरिए दोनों आरोपियों को राजस्थान लाकर पूछताछ करने की मांग भी की है ताकि साजिश के पीछे किसका हाथ है, इसका खुलासा हो सके. वर्तमान में रामेश्वर डूडी की सुरक्षा में दो पीएसओ तैनात हैं.

यह भी पढ़ें: RCA तो सिर्फ बहाना, कहीं ओर ही है निशाना

इससे पहले गत रात मामला सामने आने पर सीएम गहलोत ने डूडी से फोन पर बातचीत की और घटना की जानकारी ली. वहीं बीकानेर रेंज के डीआईजी जोसमोहन ने बताया कि आरोपियों को लाने के लिए एक टीम सिरसा भेजी जा चुकी है.

दोनों स्टेट गैंग के सदस्य, एक बीकानेर निवासी
इस मामले में सिरसा डीएसपी राजेश चेची ने जानकारी देते हुए बताया कि रविवार इससे पहले हरियाणा की सिरसा सीआईए पुलिस ने रविवार को ऐलनाबाद क्षेत्र के मिठीसुरेरां गांव में गश्त के दौरान स्टेट गैंग के 2 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. इनमें से एक बीकानेर के सांवतसर निवासी श्याम सुंदर बिश्नोई (Shyam Sundar Bisnoi) और दूसरा हरियाणा के अटेला का रहने वाला देवेंद्र सिंह उर्फ बेड़ा उर्फ देव है. दोनों के पास से दो अवैध पिस्तौल, आठ कारतूस और एक बाइक बरामद हुई है. दोनों आरोपी हार्डकोर क्रिमिनल्स है. इन अपराधियों पर हत्या और लूटपाट सहित कई मामले दर्ज हैं.

रंजिश के चलते रची हत्या की योजना
पुलिस की पूछताछ में श्याम सुंदर ने बताया कि पिछले साल उसके खिलाफ बीकानेर में एक लड़की के अपहरण व दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था जिसमें डूडी ने लड़की पक्ष की पैरवी की थी. इस मामले में बिश्नोई को सजा भी हुई. इसी के चलते उसने डूडी की हत्या की साजिश रची. श्याम सुंदर ने बताया कि उसने डूडी के घर, उनके घूमने आने-जाने का समय, सुरक्षा गार्ड सहित अन्य जानकारियां जुटा ली थी. वह कथित तौर पर पटना जेल में बंद किसी बदमाश से 6 पिस्तौल और साढ़े पांच सौ कारतूस लेने जाने वाला था. इसके लिए उसने 3.60 लाख रुपये का भुगतान किया है. इस काम में देवेंद्र उसकी मदद कर रहा था.

बीकानेर जेल से जुड़े हैं साजिश के तार
जैसा श्याम सुंदर ने बताया, डूडी की हत्या की साजिश बीकानेर जेल में ही रची गयी. बीकानेर के चर्चित रामकिशन सियाग हत्याकांड में जेल में बंद शंकरलाल जाट और अजीत बडबर की श्याम सुंदर से वहीं मुलाकात हुई थी. इस तीनों ने मिलकर डूडी की साजिश रचने को अंजाम दिया. शंकर और अजीत ने ही श्याम सुंदर को हथियार और कारतूस दिलाने का जिम्मा लिया था.

यह भी पढ़ें: पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी को मुख्यधारा में लाने को लेकर सक्रिय हुए समर्थक

आदतन अपराधी हैं श्याम सुंदर और देवेंद्र
श्याम सुंदर और देवेंद्र दोनों आदतन अपराधी हैं. श्याम सुंदर के खिलाफ राजस्थान (Rajasthan) और हरियाणा (Haryana) में छह केस दर्ज हैं. हाल में 2 जून को उसने झुंझुनूं के खेतड़ी में साथियों के साथ मिलकर वासी बनवास संदीप सैनी की घर में घुसकर हत्या कर दी थी. पुलिस को उनकी तलाश है. इसके अलावा, बीकानेर के जेएनवीसी, नापासर, नोखा और कोटगेट पुलिस थानों में रेप, चोरी, आम्र्स एक्ट के मुकदमे दर्ज हैं. देवेंद्र आपराधिक प्रवृति का है. उसके खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज हैं.

जयपुर में देर रात फिर से अशांति, तनाव के बीच घायलों के हालचाल जानने पहुंचे परनामी

जयपुर (Jaipur) के मोती डूंगरी रोड स्थित लोधों के मोहल्ले में बीती रात करीब 11 बजे दो पक्षों में हुई भाटा जंग के चलते तनाव की स्थिति पैदा हो गयी. विवाद का कारण गली में बाइक खड़ी करने को लेकर बताया जा रहा है. विवाद के बाद सोमवार सुबह बीजेपी नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी (Ashok Parnami) घटनास्थल पर पहुंचे और मौका मुआयना किया. यहां उन्होंने लोगों से घटना की जानकारी ली और घायलों की कुशलक्षेम पूछी. इस मौके पर परनामी ने कहा कि जयपुर एक शांतिप्रिय शहर है लेकिन कुछ दिनों से राजनैतिक संरक्षण प्राप्त उपद्रवियों को ने बेखौफ राजधानी का चैन और अमन खराब कर रखा … Read more

‘जब राज नहीं होता तो जूते के जोर से काम कराना हमें आता है’- सर्राफ, भाजपा विधायक, पूर्व शिक्षामंत्री

राजस्थान (Rajasthan) के भाजपा विधायक (BJP MLA) और पूर्व शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ (Kalicharan Saraf) ने एक विवादित बयान देते हुए कहा कि, ‘जब राज होता है तो कलम की ताकत से काम होता है, जब राज नहीं होता तो हमें जूते के जोर पर काम कराना आता है‘. इस पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस (PCC) प्रवक्ता अर्चना शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा की, ‘सर्राफ ने इस तरह का बयान देकर मर्यादित भाषा का हनन करते हुए उनकी औंछी मानसिकता का उदाहरण दिया है.’ वहीं मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि, ‘कालीचरण सर्राफ का यह बयान अलोकतांत्रिक है’.

दरअसल गुरूवार सुबह पूर्व शिक्षा मंत्री एवं राजधानी जयपुर के मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक कालीचरण सर्राफ जयपुर के करतारपुरा फाटक के पास नाले में हो रहे कटाव, अतिक्रमण सहित अन्य मांगो के लिए धरना दे रहे थे धरना खत्म होने के बाद सर्राफ जब पत्रकारों से रूबरू हुए तो उन्होंने कहा- “जब राज होता है तो कलम की ताकत से काम होता है, जब राज नहीं होता तो जूते के जोर पर काम होते है, हमें जूते के जोर पर काम कराना आता है” सर्राफ का यह बयान धरना स्थल पर चर्चा का विषय बन गया और इसके बाद शुरू हुआ राजनीतिक बयानबाजी का सिलसिला.

पूर्व शिक्षामंत्री सर्राफ के इस अमर्यादित बयान पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रवक्ता अर्चना शर्मा (Archana Sharma) ने एक प्रेस नोट और एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि, ‘सर्राफ ने धरने के दौरान जिस भाषा का इस्तेमाल किया है वह उनकी औंछी मानसिकता का एक उदाहरण है.’ आगे उन्होंने कहा कि, ‘जब कालीचरण सर्राफ मंत्री थे तब उन्होंने अपनी कलम का इस्तेमाल भ्रष्टाचार व अपराध को संस्थागत करने के लिये किया था, यही कारण है कि जनता ने उनको नकार दिया. आगे उन्होंने कहा कि राजनीति के लम्बे अनुभव के बावजूद इस तरह के विवादित बयानों से स्पष्ट होता है कि उन्हें जनभावनाओं से कोई सरोकार नहीं है. सुर्खियों में बने रहने के लिये वे किसी भी हद तक जा सकते हैं.’

कालीचरण सर्राफ के द्वारा दिये गये धरने के पर अर्चना शर्मा ने कहा कि सर्राफ ने जिस क्षेत्र में धरना दिया वहॉं उनके मंत्री रहते हुए नाले में बहकर एक युवक की मौत हो गयी थी. तब सर्राफ ने इस पुरे मामले की सुध तक नहीं ली थी. आगे शर्मा ने सर्राफ पर आरोप लगाते हुए कहा कि सर्राफ जब मंत्री थे उस समय उनके एक समर्थक ने व्यापारी को सरेआम गोली मारी थी जिससे जाहिर होता है सर्राफ भ्रष्टाचार को ही पनपाने के माहिर नहीं हैं अपितु अपराधियों के भी संरक्षक है. कालीचरण सर्राफ द्वारा दिया गया धरना अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के लिये रचा गया प्रपंच मात्र है.

वहीं भाजपा विधायक सर्राफ के विवादित बयान पर राजस्थान की कांग्रेस सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी (Mahesh Joshi) ने पलटवार करते हुए कहा- ‘कालीचरण सराफ एक वरिष्ठ नेता हैं, उनका यह बयान अलोकतांत्रिक है, सर्राफ को उनकी पार्टी सीरियस नहीं लेती, भाजपा में उनकी स्वीकार्यता का अभाव है इसलिए सर्राफ की जुबान बार बार फिसलती रहती है.’

आपकों बता दें कि कालीचरण सर्राफ व अर्चना शर्मा दोनों एक ही विधानसभा क्षेत्र से अपनी राजनैतिक ताल ठोकते आये हैं. सर्राफ के सामने अचर्ना शर्मा को पिछले दो विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पडा है. कालीचरण सर्राफ भाजपा के वरिष्ट नेता हैं और मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से लगातार 7वीं बार विधायक चुने गये हैं, सर्राफ पूर्व में राजे सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी नेताओं में से एक माने जाते है.