rahul gandhi
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एक बार फिर गांधी परिवार के पास ही कांग्रेस की कमान, सोनिया गांधी बनीं अंतरिम अध्यक्ष
शनिवार शाम को हुई कांग्रेस वर्किंग कमिटी की दूसरी बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया की यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया है. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेसी नेताओं के पांच पैनल के आधार पर ली गई राय में सोनिया गांधी का नाम ही अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर सामने आया. पहले तो सोनिया गांधी ने मना किया, लेकिन पार्टी नेताओं के आग्रह पर उन्होंने अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए हां कर दी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद और हरीश रावत ने बैठक ख़त्म होने के बाद जानकारी देते हुए कहा कि सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया … Read more
‘महिलाएं पुरुषों के स्वामित्व वाली संपत्ति नहीं हैं’
जब से जम्मू कश्मीर से धारा 370 और धारा 35ए समाप्त हुई है, नेताओं की कश्मीरी युवतियों को लेकर छिटाकशी थमने का नाम नहीं ले रही. हाल में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी कश्मीरी युवतियों को लेकर एक टिप्पणी की जिस पर जमकर बवाल हो रहा है. फतेहाबाद में गए थे खट्टरजी बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान पर चर्चा करने लेकिन टिप्पणी कर आए कश्मीर से बहू लाने की. यह भी पढ़ें: ये क्या बोल गए हरियाणा सीएम, राहुल गांधी ने कहा – आरएसएस के प्रशिक्षण का नतीजा इसके बाद नेताजी की इतनी फजीयत हुई कि उन्हें माफी तक मांगनी पड़ी. शादी-ब्याह पर टिप्पणी करने वाले खट्टरजी को … Read more
ये क्या बोल गए हरियाणा सीएम, राहुल गांधी ने कहा – आरएसएस के प्रशिक्षण का नतीजा
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कश्मीरी महिलाओं पर की गई टिप्पणी पर राहुल गांधी ने खट्टर के साथ ही आरएसएस पर भी निशाना साधा है. सोशल मीडिया पर एक ट्वीट पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘हरियाणा के सीएम खट्टर की कश्मीरी महिलाओं पर टिप्पणी घृणित है. उनका ये ट्वीट दर्शाता है कि कमजोर, असुरक्षित और दयनीय आदमी के लिए आरएसएस वर्षों के प्रशिक्षण क्या करता है. महिलाएं पुरुषों के स्वामित्व वाली संपत्ति नहीं हैं.’ Haryana CM, Khattar’s comment on Kashmiri women is despicable and shows what years of RSS training does to the mind of a weak, insecure and pathetic man. Women are not assets to … Read more
अध्यक्ष चयन प्रकिया से सोनिया-राहुल हुए अलग, पांच पैनल के नेता तय करेंगे नया अध्यक्ष
कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने अपने आप को अलग करते हुए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक छोड़ दी है. सोनिया गांधी ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष चुनने को लेकर मैं और राहुल परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं इसलिए हम इससे बाहर हैं. बैठक में पांच समूह बनाए गए हैं, जो अलग अलग क्षेत्रों के नेताओं से उनकी राय जानेंगे. फिलहाल कांग्रेस कार्य समिति की बैठक खत्म हो गई है. रात 8 बजे एक बार फिर कांग्रेस कार्य समिति की बैठक होगी. जानकारी यह भी मिल रही है कि अगर आज बात नतीजे तक नहीं पहुंची तो कल फिर सीडब्ल्यूसी … Read more
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक शुरू, अगले अध्यक्ष पर होगा विचार
करीब दो दशकों के बाद अब करीब-करीब यह तय होने वाला है कि कांग्रेस का अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर का कोई व्यक्ति बनेगा. राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद करीब दो महीने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है. शनिवार को हो रही कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में यह असमंजस की स्थिति समाप्त होने के आसार हैं. गौरतलब है कि 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद 25 मई को राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने उनसे अनुरोध किया था कि अध्यक्ष पद छोड़ने की जरूरत नहीं है. लेकिन राहुल गांधी ने जुलाई … Read more
कांग्रेस को अध्यक्ष की तत्काल आवश्यकता क्यों, क्या होनी चाहिए जरूरी योग्यताएं?
राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद से नेतृत्वहीन हुई कांग्रेस पार्टी को अपना नया अध्य्क्ष 10 अगस्त को होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मिलने की प्रबल सम्भावना है. इसके लिए पार्टी ने तैयारियां भी शुरू कर दी है. गौरतलब है कि लोकसभा में मिली करारी हार के बाद राहुल गांधी ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद राहुल गांधी को इस्तीफा वापस लेने के लिए कई बार मनाने के प्रयास किये गए लेकिन राहुल गांधी अपने रुख पर अडिग रहे और साथ में यह भी स्पष्ट कर दिया कि न तो वह और ना ही गांधी परिवार का कोई दूसरा सदस्य अब इस जिम्मेदारी को सम्भालेगा.
राहुल गांधी के इस तटस्थ फैसले के बाद यह तो तय है कि कांग्रेस का नया अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर का होगा, लेकिन यह नहीं पता कौन होगा. गांधी परिवार से बाहर के किसी नेता को कांग्रेस अध्यक्ष बनने से पहले कई योग्यताओं को पूरा करना होगा, इसके बाद ही उसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर ताजपोशी हो पायेगी.
गांधी परिवार के प्रति वफादारीः
कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए नेहरू-गांधी परिवार के प्रति वफादारी पहली कसौटी है, जिस पर खरा उतरे बगैर किसी भी नेता को पार्टी की कमान नहीं मिल सकती है. कांग्रेस का अगला अध्यक्ष वही होगा जो गांधी परिवार के नजदीक होगा, हालांकि 30 साल के लंबे समय से गांधी परिवार का कोई भी सदस्य प्रधानमंत्री नहीं बना है. लेकिन 2004 से 2014 तक यानी 10 साल तक केंद्र में कांग्रेस-यूपीए की सरकार थी, गांधी परिवार के बाहर के मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे. लेकिन उस समय भी सत्ता की चाबी गांधी परिवार यानि सोनिया गांधी के पास ही रही. अब राहुल गांधी कांग्रेस संगठन को इसी तर्ज पर गांधी परिवार से मुक्त करना चाहते है. वो पार्टी की कमान अपने सबसे भरोसेमंद साथी के हाथों में सौंपना चाहते है ताकि जब भी वो चाहे पुनः कांग्रेस की कमान अपने हाथ में ले पायें.
राष्ट्रीय पहचानः
राहुल गांधी के विकल्प में कांग्रेस को ऐसे नेता की तलाश है, जिसकी पहचान राष्ट्रीय स्तर की हो. दरअसल कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है, जिसका राजनीतिक रुप से फैलाव उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक के सभी राज्यों में फैला हुआ है. इसी वजह से कांग्रेस ऐसे नेता को अध्यक्ष बनाएंगी जो देश के हर हिस्से में अपनी पहचान रखता हो.
हिंदी भाषी राज्य से हो तो बेस्ट:
कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के लिए सबसे जरुरी योग्यता यह है कि अध्यक्ष बनने वाले नेता की हिंदी भाषा पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए. इसके पीछे मकसद है कि वो उत्तर भारत के लोगों तक अपनी बातों को असानी से पहुंचा सके, जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अपनी बातों को समझने में सफल रहते हैं. ठीक उसी प्रकार वो भी अपनी बात जनता को समझाने में कामयाब रहे. कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा उम्मीद इन्हीं हिंदी भाषी राज्यों से थी, लेकिन यहां के नतीजे उसके अनुमान के बिल्कुल उलट आए.
संघर्षशील नेताः
सोनिया गांधी और राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए सड़क पर संघर्ष करते कम ही नजर आए हैं, हालांकि राहुल आखिर के दिनों में कई बार जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़क पर नजर आए. लेकिन सोनिया गांधी अपने कार्यकाल के दौरान एक बार भी ऐसा करती नजर नहीं आई. कांग्रेस लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के लिए इसको भी जिम्मेदार मानती है. इसीलिए वो इस बार ऐसे नेता को अध्यक्ष बनाने पर विचार कर रही है, जो सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरकर संघर्ष करें और सरकार को घेर सके.
गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, शशि थरूर, शत्रुघन सिन्हा समेत कुछ और कांग्रेस नेताओं ने प्रियंका गांधी के नाम को आगे बढ़ाया है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि अध्यक्ष पद के चुनाव में राजनीतिक फैसलों के साथ-साथ सामाजिक समीकरण का भी ध्यान रखा जाएगा. खैर, प्रियंका गांधी ने भी इस जिम्मेदारी को लेने से साफ मना कर दिया है.
पिछले लगभग 2 माह में कांग्रेस को नेतृत्व के अभाव में जो भारी नुकसान और फ़जीयत सहन करनी पड़ी है वो किसी से छुपी नहीं है. बात चाहे गोवा और कर्नाटक के घटनाक्रम की हो या लोकसभा या राज्यसभा बनी लाचारी की कांग्रेस को हर मोर्चे पर मात खानी पड़ी है. इसका सबसे बड़ा कारण पार्टी में एक मजबूत नेतृत्व का अभाव जिसके चलते पार्टी अब बिखरने लगी है.
वर्तमान में कांग्रेस के सबसे संकटपूर्ण दौर में जबकि अभी गांधी परिवार का नेतृत्व होते हुए ही जब पार्टी के कई नेता सरेआम पार्टी विचारधारा से अपनी असहमति जता रहे हैं, तब गांधी परिवार से बाहर के नये नेतृत्व के लिए भविष्य की चुनौती कितनी गंभीर होगी इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. बहरहाल, आने वाले महीनों में चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस कम से कम अपना नया अंतरिम अध्यक्ष तो चुन ही लेगी.
बता दें, बीजेपी ने आगामी महीनों में होने आगामी महीनों में होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनाव की तैयारी का बिगुल बजा दिया है. बीजेपी के चाणक्य राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है.
प्रियंका को राजस्थान से राज्यसभा में भेजने की मांग
राजस्थान में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन लाल सैनी के निधन से खाली राज्यसभा सीट पर 26 अगस्त को उपचुनाव होगा, जिसके लिए नामांकन भरने की आखिरी तारीख 14 अगस्त है. पहले यह भाजपा की सीट थी, लेकिन अब राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस का बहुमत होने से यह सीट कांग्रेस को मिलना लगभग तय है. राजस्थान की सीट पर किसको उम्मीदवार बनाया जाए, इस पर कांग्रेस हाईकमान विचार कर रहा है. इस बीच राजस्थान से इस सीट पर प्रियंका गांधी को सांसद बनाकर राज्यसभा भेजने की अटकलें लगाई जा रही है.
पूर्व में इस सीट पर कांग्रेस की तरफ से डॉ. मनमोहन सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी. मनमोहन सिंह असम से राज्यसभा सांसद थे. उनका कार्यकाल जून में समाप्त हो चुका है. मनमोहन सिंह को तमिलनाडु से राज्यसभा में भेजने की तैयारी चल रही थी, लेकिन वहां कांग्रेस की सहयोगी पार्टी द्रमुक ने खाली राज्यसभा सीट पर वाइको को चुने जाने का वादा कर लिया था, इसलिए मनमोहन सिंह को तमिलनाडु से राज्यसभा में नहीं भेजा जा सका. तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक और द्रमुक ने राज्यसभा की तीन-तीन सीटें जीती हैं.
राजस्थान की राज्यसभा सीट पर उम्मीदवार के चयन की कवायद के बीच कांग्रेस विधायक खिलाड़ीलाल बैरवा ने कहा है कि प्रियंका गांधी वाड्रा को राजस्थान से राज्यसभा सदस्य बनाया जाना चाहिए. प्रियंका गांधी को राज्यसभा में भेजने के साथ ही उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद से जो परिस्थितियां बनी हैं, उसमें कांग्रेस कार्यकर्ता परेशान हैं.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में ख़िलाड़ीलाल बैरवा ने कहा कि वह नेक इंसान हैं, लेकिन आज के हालात को ध्यान में रखते हुए प्रियंका गांधी का कद बढ़ाया जाना जरूरी है. प्रियंका के राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय होने से पार्टी को मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा. राजस्थान से प्रियंका गांधी का रिश्ता बनेगा, जिससे पार्टी के अंदरूनी मतभेदों पर भी विराम लगेगा.
चुनाव आयोग ने गुरुवार एक अगस्त को राजस्थान और उत्तर प्रदेश की एक-एक खाली राज्यसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है. राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस का बहुमत होने से वह इस सीट को आसानी से जीतने की स्थिति में है, क्योंकि 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा में वर्तमान में 198 सदस्य हैं जिसमें कांग्रेस के पास 100 सदस्य है तथा एक लोक दल, 11 निर्दलीय सदस्यों के समर्थन के साथ बसपा के 6 सदस्यों का समर्थन भी है, इस तरह उपचुनाव में यह सीट कांग्रेस की तय है. प्रियंका गांधी या मनमोहन सिंह या फिर कोई ओर, राज्यसभा में उनका कार्यकाल तीन अप्रैल 2024 तक रहेगा. चुनाव के लिए सात अगस्त को अधिसूचना जारी होने वाली है.
राज्यसभा सीट पर नामांकन की आखिरी तारीख 14 अगस्त होगी, 19 अगस्त तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे. उप्र की एक सीट पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर के इस्तीफे से खाली हुई है. वह सपा छोड़कर भाजपा में चले गए हैं. पूरी संभावना है कि नीरज शेखर भाजपा के कोटे से राज्यसभा में पहुंच जाएं.