राजस्थान: टोंक-सवाई माधोपुर सीट पर जातिगत समीकरणों में उलझे दोनों दल

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सियासत में जब चुनाव और टिकट की बात होती है तो पहले यहां न दावेदार देखा जाता है और न ही चेहरा. सबसे पहले देखा जाता है उस क्षेत्र का जातीय समीकरण, जिसके आधार पर किसी प्रत्याशी की जीत तय होती है. फिर शुरू होती है टिकट की जद्दोजहद, जहां वो नेता बाजी मार ले जाता है जो उस क्षेत्र की जातियों पर पकड़ मजबूत रखता हो. फिर चाहें वह दावेदार बाहरी ही क्यों न हो.

कुछ इसी ​तरह ​की स्थिति राजस्थान की टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट पर बनी हुई है. गुर्जर मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने यहां से सुखबीर सिंह जौनपुरिया पर दांव खेला है जबकि कांग्रेस ने एसटी मतदाताओं की अधिकता को ध्यान में रखते हुए नमोनारायण मीणा को मैदान में उतारा है. जौनपुनिया ने 2014 में इस सीट से फतह हासिल की थी जबकि नमोनारायण मीणा 2009 के चुनाव में यहां से विजयी हो चुके हैं.

आपको बता दें कि टोंक-सवाई माधोपुर सीट पर एससी के करीब तीन लाख 60 हजार और एसटी के 3 लाख मतदाता हैं. यहां 2.60 लाख गुर्जर, 1.95 लाख मुस्लिम, 1.45 लाख जाट, 1.35 लाख ब्राह्मण, 1.15 लाख महाजन, डेढ़ लाख माली और एक लाख राजपूत और दो लाख से अधिक बाकी जातियां हैं. दोनों उम्मीदवारों का पूरा चुनाव प्रचार इन जातियों को अपने-अपने पक्ष में लामबंद करने पर केंद्रित है.

चाहे जौनपुरिया हों या मीणा, दोनों उम्मीदवार जातियों को लामबंद करने में जुटे हैं. जौनपुरिया को उम्मीद है कि उन्हें वैश्य, ब्राह्मण, राजपूत और मूल ओबीसी के वोट तो एकमुश्त मिलेंगे ही. जौनपुरिया समर्थक साफतौर पर कहते हैं कि यदि 2014 के चुनाव की तरह इस बार भी गुर्जर वोट भी बीजेपी उम्मीदवार को मिल जाएं तो जीत तय है.

दरअसल, बीजेपी उम्मीदवार सुखबीर सिंह जौनपुरिया विधानसभा चुनाव में गुर्जरों के कांग्रेस की ओर रुख करने से परेशान हैं. आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव में सचिन पायटल के टोंक से चुनाव लड़ने का असर आस-पास की सीटों पर भी पड़ा. टोंक और सवाई माधोपुर की आठ विधानसभा सीटों में से बीजेपी सिर्फ मालपुरा सीट पर जीत दर्ज कर पाई. जबकि छह सीटों पर कांग्रेस और एक पर निर्दलीय ने कब्जा जमाया.

बीजेपी को यह डर सता रहा है कि विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी गुर्जर वोट कांग्रेस के पाले में जा सकते हैं. हालांकि पार्टी को यह भरोसा है कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाने की वजह से गुर्जर कांग्रेस से नाराज हैं और वे विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में मतदान नहीं करेंगे. अलबत्ता इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि आरक्षण मिलने के बाद गुर्जर समाज का बड़ा तबका गहलोत सरकार से खुश है.

बात कांग्रेस उम्मीदवार नमोनारायण मीना की करें तो उन्हें गुर्जरों के अलावा मीणा, मुस्लिम और एससी वोट मिलने की उम्मीद है. हालांकि कांग्रेस के कई स्थानीय नेता इस बात से खफा हैं कि एक सामान्य सीट पर एसटी उम्मीदवार को टिकट दिया गया. नमोनारायण मीणा के लिए राहत की बात यह है कि कोई स्थानीय नेता उनका खुलकर विरोध नहीं कर रहा.

दूसरी ओर बीजेपी उम्मीदवार सुखबीर सिंह जौनपुरिया भितरघात से जूझ रहे हैं. देवली-उनियारा में पूर्व विधायक राजेंद्र गुर्जर, गंगापुर सिटी में पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर और पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी ने सार्वजनिक तौर पर तो नाराजगी जाहिर नहीं की है, लेकिन वे चुनाव प्रचार में सक्रिय नजर नहीं आ रहे. मालपुरा विधायक कन्हैया लाल चौधरी भी जौनपुरिया से नाराज बताए जा रहे हैं.

यह में यह देखना रोचक होगा कि जाति के जंजाल में उलझी राजनीति चुनाव में ​किसका बेड़ा पार करेगी और किसका बेड़ा गर्क. टोंक-सवाई माधोपुर के मतदाता मौन रहकर दोनों दलों के उम्मीदवारों के सियासी करतबों को देख रहे हैं. मतदान के दिन उसका मुखर होना उम्मीदवारों की तकदीर तय करेगा.

‘अगर विपक्ष को ‘अली’ पर विश्वास है तो हमें भी ‘बजरंग बली’ पर विश्वास है’

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देश में लोकसभा चुनाव का रण सज चुका है. बस इंतजार है तो युद्ध की शुरूआत यानि मतदान की. पहले चरण के लिए वोट 11 अप्रैल को पड़ेंगे. पहले चरण के मतदान के लिए आज शाम को चुनाव प्रभार का शोर भी थम चुका है. ऐसे में आज राजनेताओं के कुछ खास बयान आए जो दिनभर चर्चा में बने रहे. यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने फिर बार ‘हनुमानजी’ को लेकर बयान दिया. राजस्थान विधानसभा चुनाव में भी वह इस तरह का विवादित बयान दे चुके हैं. वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर ‘नोट के बदले वोट’ का आरोप लगाया. ‘अगर कांग्रेस सहित सपा-बसपा को ‘अली’ पर विश्वास है तो … Read more

देश में थमा ‘पहला’ चुनावी शोर, 11 को होगी वोटिंग

देश में 20 राज्यों की 91 सीटों पर होने वाले लोकसभा चुनाव के पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार आज शाम 5 बजे समाप्त हो गया है. मतदान 11 अप्रैल को होने हैं. इसके साथ ही 3 राज्यों में गुरूवार को विधानसभा चुनाव भी होने हैं जिनके लिए भी प्रचार कैम्पेन खत्म हो गया है. बता दें, आंध्रप्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिसा में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव भी होंगे. ओडिसा में 4 चरणों में औेर शेष राज्यों में पहले चरण में चुनाव प्रक्रिया संपन्न होगी. दूसरे चरण के चुनावों के लिए नामांकन की प्रक्रिया कल से शुरू हो रही है. बात करें आंध्रप्रदेश की तो यहां 25 सीटों … Read more

सूर्यनगरी में जुटे कांग्रेस के दिग्गज, वैभव गहलोत के समर्थन में जनसभा

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सूर्यनगरी जोधपुर आज कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का गढ़ बनी हुई है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, डिप्टी सीएम सचिन पायलट, प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, बीडी कल्ला, मानवेंद्र सिंह और चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के साथ कई कांग्रेसी नेता और दिव्या मदरेणा सहित कई विधायक यहां मौजूद हैं. मौका है वैभव गहलोत के नामांकन का. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र जोधपुर लोकसभा सीट से कांग्रेसी उम्मीदवार हैं और आज नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं. नामांकन के पहले एक जनसभा रखी गई है जहां सभी राजनेता वैभव गहलोत के पक्ष में जनता से वोट अपील कर रहे हैं. पावटा चौराहे स्थिति जनसभा को वैभव गहलोत खुद भी संबोधित करेंगे. जोधपुर कांग्रेस का … Read more

राजस्थान: राजनीति की दिशा तय करेंगे जोधपुर के चुनावी परिणाम

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देश में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां अहम चुनाव बता रही हैं. कांग्रेस इन चुनावों में लोकतंत्र और संविधान बचाने की दलील देते हुए भाजपा सरकार को हटाने का आह्वान कर रही है तो भाजपा मजबूत और सशक्त सरकार बनाने के नाम पर एक बार पुनः जनता से वोट मांग रही है. इन सबसे बीच जोधपुर सीट के चुनावी परिणाम राजस्थान की राजनीतिक की दिशा और दशा तय करने वाले साबित होंगे.

जोधपुर सीट से एक ओर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पुत्र वैभव गहलोत की राजनीतिक लॉन्चिंग की है तो दूसरी तरफ बीजेपी ने एक बार फिर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर दांव खेला है. कहने को तो यह मुकाबला गजेंद्र सिंह शेखावत और वैभव गहलोत के बीच है लेकिन वैभव के पीछे अशोक गहलोत खुद यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. इस वजह से खुद गहलोत की साख इस सीट के चुनावी परिणाम पर टिकी हुई है. इस हिसाब से जोधपुर सीट के चुनावी परिणाम प्रदेश की राजनीति के भविष्य के लिए काफी अहम साबित होंगे.

अशोक गहलोत यदि अपने सुपुत्र वैभव गहलोत को यहां से विजयश्री दिलवाने में सफल रहते हैं तो अशोक गहलोत का न केवल प्रदेश में बल्कि आलाकमान के सामने भी कद बढ़ेगा. साथ ही अपनी ही पार्टी के राजनीतिक विरोधियों के विरोध के स्वर भी धीमे होंगे. अब ऐसा नहीं होता है और वैभव को इस सीट से हार मिलती है तो अशोक गहलोत के राजनीतिक कैरियर में ठहराव आ सकता है. इस पराजय के बाद गहलोत के विरोधी इसे आलाकमान के सामने अशोक गहलोत की असफलता बताएंगे.

इस बार के विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर जिस तरह की कशमकश हुई थी, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अशोक गहलोत का चौथी बार मुख्यतंत्री दावेदार बनना मुमकिन नहीं होगा. पिछले लोकसभा चुनावों में मोदी लहर में बहते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत अपनी नैया को पार लगाने में सफल हुए थे. इस बार भी उनके टिकट को लेकर संशय के बादल थे लेकिन कुशल वाकपटुता और संघ के नजदीकी होने का लाभ उन्हें मिला और एक बार फिर वह जोधपुर लोकसभा सीट से मैदान में हैं.

अगर वैभव को पटखनी देकर शेखावत यहां से जीत दर्ज करते हैं तो निश्चित तौर पर न केवल बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने बल्कि प्रदेश में भी उनका राजनीतिक कद ऊंचा होगा. इसके बाद अगर केंद्र में मोदी की सरकार बनती है तो गजेंद्र सिंह को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल सकता है. साथ ही उन्हें प्रदेश का भावी प्रदेशाध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार भी माना जाएगा. वहीं अगर गजेंद्र सिंह यहां से पराजित होते हैं तो उनके राजनीतिक जीवन में ठहराव की स्थिति भी आ सकती है.

पिछले चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह विश्नोई का टिकट काटकर जब उन्हें उम्मीदवार बनाया गया था तो इसका कई जगह पर विरोध हुआ था. इस वजह से गजेंद्र के भविष्य के लिए उन्हें यहां से जीत दर्ज करना जरूरी होगा. यही वजह है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों के स्थानीय कार्यकर्ता और सभी विधायकों ने चुनावी प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. खासतौर पर कांग्रेस विधायकों को इस बात का एहसास है कि यदि वैभव यहां से ​जीत दर्ज करते हैं तो इसका सीधा लाभ उन्हें मिलेगा. वहीं गजेंद्र को विजयश्री दिलाकर बीजेपी नेता केन्द्रीय नेतृत्व के सामने क्षेत्र में अपनी राजनीतिक शक्ति का एहसास करा सकेंगे जो भविष्य में उनके लिए फायदे का सौदा साबित होगा.

तस्वीरों के साथ मंच से भी गायब हुए वरिष्ठ भाजपायी, अटल-आडवाणी-जोशी नदारद

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बीजेपी पर अकसर आरोप लगता है कि पार्टी वन मैन आर्मी है और इसके कमाण्डर हैं नरेंद्र मोदी. अगर देखा जाए तो यह बात गलत भी नहीं है. कुछ ऐसा ही देखने को मिला आज बीजेपी के दिल्ली मुख्यालय में, जहां पीएम नरेंद्र मोदी सहित पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह और अरूण जेटली ने भाजपा का चुनावी घोषणा पत्र जारी किया. यहां एक बात तो गौर करने लायक रही, वह थी कि संकल्प पत्र से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की फोटो नदारद थी. फ्रंट पेज पर नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगी थी. यहां तक की बीजेपी के भामाशाह लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी न तो मंच पर … Read more

मायावती के ‘मुस्लिम बयान’ पर चुनाव आयोग सख्त, रिपोर्ट मांगी

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सहारनपुर के देवबंद में आयोजित महागठबंधन की चुनावी रैली में बसपा प्रमुख मायावती के ‘मुस्लिम बयान’ को लेकर चुनाव आयोग सख्त नजर आ रहा है. उन्होंने इस संबंध में जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है. चुनाव आयोग ने कहा है कि मायावती के इस बयान पर कई शिकायतें मिली थी, जिसके बाद आयोग ने यह कदम उठाया है. दरअसल देवबंद में सपा-बसपा-रालोद महागठबंधन की पहली चुनावी रैली में रविवार को मायावती ने मुस्लिम मतदाताओं का आह्वान करते हुए कहा था, ‘भाजपा को कांग्रेस नहीं हरा सकती. उसे सिर्फ महागठबंधन हरा सकता है. लिहाजा मुस्लिम मतदाता कांग्रेस को वोट देकर उसे ज़ाया करने के बजाय महागठबंधन प्रत्याशियों के पक्ष में एक तरफा मतदान करें.’ मायावती के इस बयान पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जेपीएस राठौर ने चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की है.

राठौड़ का कहना है कि मायावती द्वारा मुसलमानों से एक राजनीतिक दल को वोट न देने की अपील करना धार्मिक उन्माद फैलाने वाला है. साथ ही यह चुनाव आचार संहिता का खुला उल्लंघन भी है, लिहाजा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए. वहीं दूसरी ओर मायावती का ऐसा बयान ध्रुवीकरण को भी बढ़ावा दे सकता है जिसका नुकसान महागठबंधन को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उठाना पड़ सकता है क्योंकि मुस्लिमों से एकतरफा वोट की अपील पर हिंदू वोटरों पर इसका उल्टा असर हो सकता है.

इस चुनावी रैली में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, ‘हमारी सीमाएं सुरक्षित नहीं हैं. हमारे जवान मर रहे हैं बीजेपी की ज़िम्मेदारी है. ये महापरिवर्तन का चुनाव है. ये दूरियों को मिटाने का चुनाव है. हमें नफ़रत की दीवार गिरानी है. उन्होंने कहा कि जो कांग्रेस है वही बीजेपी है, जो बीजेपी है वही कांग्रेस है. कांग्रेस परिवर्तन नहीं चाहती वो अपनी पार्टी बनाना चाहती है. आपको देखना होगा कि कौन परिवर्तन लाएगा.’

राजस्थान: अजमेर में कई खेमों में बंटी कांग्रेस झुंझुनवाला के लिए बड़ी चुनौती

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अजमेर लोकसभा सीट के लिए भाजपा के भागीरथ चौधरी और कांग्रेस के रिजू झुंझुनवाला के बीच चुनावी दंगल तय हो गया है. उद्योगपति झुंझुनवाला के लिए राजनीति का क्षेत्र बिल्कुल नया है. टिकट की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने जयपुर में रिजू झुंझुनवाला का परिचय अजमेर जिले के कांग्रेसी नेताओं से कराया और उसके साथ ही कांग्रेस उम्मीदवार की चुनावी प्रचार की रेलगाड़ी पटरी पर गति पकड़ने लगी. अजमेर आते ही झुंझुनवाला सबसे पहले पुष्कर गए और बाद में दरगाह पर हाजिरी दी. इस दौरान कांग्रेस के सभी प्रमुख नेता उनके साथ नजर आए.

झुंझुनवाला के अजमेर आने से पहले ही कई प्रोफशनल टीमों ने अजमेर पहुंचकर सोशल साइट सहित अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से उनके चुनावी प्रचार के काम का शुरू कर दिया. इन सबके बीच अजमेर जिले में कई खेमों में बंटी कांग्रेस झुंझुनवाला के लिए खासी समस्या साबित हो रही है. चूंकि झुंझुनवाला राजनीति में नए चावल हैं इसलिए उनके साथ कोई विवाद या नेताओं का पूर्वाग्रह नहीं जुड़ा हुआ है लेकिन जिले के नेताओं के बीच खींचतान और वर्चस्व को लेकर विवाद जगजाहिर है. इतना ही नहीं, झुंझुनवाला के लिए कांग्रेस आलाकमान से भी कमजोर प्रत्याशी होने की शिकायत कर उम्मीदवार बदलने का प्रस्ताव रखा है.

उल्लेखनीय है कि नेताओं की गुटबाजी के चलते पिछले लोकसभा के उपचुनाव में अजमेर सीट पार्टी के खाते में आने के बावजूद, कुछ महीनों बाद हुए विधासभा चुनावों में जिले की आठ में से कांग्रेस को केवल दो सीटों से संतोष करना पड़ा था. इन स्थितियों से निबटने के लिए झुंझुनवाला के चुनाव की कमान पूर्व मंत्री बीना काक ने खुद संभाल रखी है. पूर्व मंत्री बीना काक झुंझुनवाला की करीबी रिश्तेदार हैं. टिकट की घोषणा के तुरंत बाद से काक ने अजमेर में डेरा डाल लिया. बीनाकाक जिले के सभी कांग्रेस नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर उनके क्षेत्रों की राजनीतिक स्थितियों को समझने में जुटी हुई हैं. इसके साथ जिले के प्रभारी मंत्री प्रमोद जैन भाया और मंत्री रघु शर्मा भी लगातार जिले के नेताओं से संपर्क में हैं.

जिले के मतदाताओं की जातिगत स्थिति पर नजर डालें तो जिले में सर्वाधिक मतदाता जाट समुदाय से हैं. इसके बाद राजपूत और रावणा राजपूत, मुस्लिम, ब्राह्मण सहित अन्य जातियां हैं. बीजेपी ने लगातार तीसरी बार जाट उम्मीदवार को मैदान में उतारा है. इससे पहले भाजपा ने 2014 में कांग्रेस के सचिन पायलट के सामने जाट नेता सांवरलाल जाट को चुनावी मैदान में उतारा था, जिन्होंने पायलट को बड़े वोट अंतर से पटखनी दी थी. कार्यकाल के दौरान सांवरलाल के निधन और उसके बाद हुए उपचुनावों में बीजेपी ने सांवरलाल के पुत्र रामस्वरूप लांबा को चुनावी मैदान में उतारा. हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी रघु शर्मा के सामने लांबा को हार का सामना करना पड़ा था.

लेकिन लोकसभा की तब और अब की राजनीतिक स्थिति बिलकुल ही अलग है. उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की नीतियों के खिलाफ लोगों ने मतदान किया और बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक माने जाने वाला राजपूत और ब्राह्मण अलग-अलग कारणों से छिटक गए. परंपरागत जनाधार सरकने का खामियाजा बीजेपी को उठाना पड़ और रघु शर्मा ने जिले की आठ विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल कर भाजपा से अजमेर लोकसभा सीट छीन ली.

इस बार लोकसभा चुनाव में एक बार फिर नए सिरे से राजनीतिक समीकरण बनने शुरू हो गए हैं. कांग्रेस प्रत्याशी रिजु झुंझुनवाला वैश्य समाज से है. वैश्य समाज भाजपा का परंपरागत वोट बैंक है. ऐसे में कांग्रेस के रणनीतिकार झुंझुनवाला के नाम पर वैश्य समाज में सेंध लगाने के काम में जुट गए है. कांग्रेस नेता मुस्लिम, एससी-एसटी वर्ग सहित पिछले चुनाव में कांग्रेस का साथ देने वाले राजपूत और ब्राह्मण समाज को भी साध रहे हैं.

झारखंड: चुनावी मौसम में ब्यूरोक्रेट्स परेशान, विपक्ष से साध रहे संपर्क

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झारखंड के ब्यूरोक्रेट्स के बारे में कहावत है कि वे नेताओं के भी नेता हैं. यहां के कई आईएएस और आईपीएस राज्य में सरकार बनाने के खेल में भी शामिल रहे हैं. इसके बदले नेताओं द्वारा उन्हें मलाईदार विभाग में तैनाती मिलती रही है लेकिन लगता है इस चुनावी मौसम में राज्य के ब्यूरोक्रेट्स के ग्रह-नक्षत्रों की चाल ठीक नहीं है. मुख्यमंत्री रघुवर दास के आंखों का तारा माने जाने वाले भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अनुराग गुप्ता को चुनाव आयोग ने राज्य से तड़ीपार कर दिया है. आयोग ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि अपर पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता को नई दिल्ली भवन स्थित झारखंड भवन … Read more

‘आडवाणी जी को स्टेज से लात मारकर उतार दिया’

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लोकसभा चुनाव में अब चंद दिन रह गए हैं. ऐसे में आरोप-प्रत्यारोपों का दौर तेज होता जा रहा है. आज बीजेपी के 39वें स्थापना दिवस पर राहुल गांधी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आड़वाणी के कंधे का सहारा लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साध दिया. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ​तुरंत राहुल गांधी को इसका काउंटर एटैक कर जवाब दिया. वहीं पीएम मोदी का कांग्रेस सिक्यूरिटी वाला बयान भी दिनभर छाया रहा. शत्रुध्न सिंहा का बीजेपी फाउंडेशन डे पर विश करना चर्चा में रहा. ‘आडवाणी जी को स्टेज से लात मारकर उतार दिया’ — राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हरिद्वार में एक जनसभा को … Read more