महाराष्ट्र में शिवसेना के तेवर पड़े नरम, फडणवीस बनेंगे 5 साल के लिए CM, तो भी फायदे में शिवसेना

Shiv Sena Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में शिवसेना नेता संजय राउत ने शनिवार को कहा, “शिवसेना ने गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ा और हम आखिरी समय तक गठबंधन धर्म का पालन करेंगे.” शिवसेना के इस बयान को भाजपा के प्रति उसके नरम रुख के रूप में देखा जा रहा है. इससे पहले शिवसेना द्वारा NCP और कांग्रेस के समर्थन से महाराष्ट्र में सरकार बनाने के दावों की बार-बार आ रही खबरों के बाद NCP अध्यक्ष शरद पवार ने एक बार फिर स्पष्ट करते हुए कहा कि जनता ने उनकी पार्टी से विपक्ष में बैठने के लिए कहा है और पार्टी ऐसा ही करेगी. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी शिवसेना को समर्थन देने से इनकार किया है. अब जानकारों की मानें तो शिवसेना ने स्थिति को भांपते हुए अपने तेवर नरम कर लिए हैं, और महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना (Shiv Sena Maharashtra) मिलकर सरकार बनाने जा रही है. जिसके तहत देवेन्द्र फडणवीस पूरे 5 साल के लिए मुख्यमंत्री रहेंगे और शिवसेना से एक उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा.

पॉलिटॉक्स के सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र में गुरुवार को हुई शिवसेना विधायक दल की बैठक के बाद ही यह स्थिति साफ नजर आ रही थी, जब शिवसेना ने वर्ली सीट से चुनाव जीतकर आए अपने राजकुमार आदित्य ठाकरे को न चुनकर बल्कि एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुना था. जबकि इस बैठक से पहले यही कयास लगाए जा रहे थे कि विधायक दल का नेता आदित्य ठाकरे को चुनाव जाएगा लेकिन एकनाथ शिंदे को चुनकर शिवसेना ने कमोबेश यह स्पष्ट कर ही दिया था कि शिवसेना को भी यह आभास है कि समझौता तो उसे बीजेपी से ही करना पड़ेगा.

यह भी पढ़ें: ‘महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन’ बयान पर भड़की शिवसेना, कहा – ‘राष्ट्रपति जेब में रखा है क्या?’

शिवसेना ने ऐसा क्यों किया, इस पर सूत्रों की मानें तो सबसे पहला कारण तो यह है कि शिवसेना ने आदित्य ठाकरे के राजनीति में न के बराबर अनुभव को देखते हुए ये कदम उठाया है. चुनाव परिणामों के बाद आदित्य को सीएम बनाने के लिए अड़ी शिवसेना (Shiv Sena Maharashtra) की जिद पर कई राजनीतिक विशेषज्ञों ने इस बात पर कड़ी टिप्पणी की थी क्या वाकई आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद का अनुभव रखते हैं? कहीं न कहीं शिवसेना को भी इस बात का अहसास हुआ की पद मिलने के बाद किसी भी कारण से अगर फ़जीति हो गई तो फिर महाराष्ट्र की राजनीति में दुबारा इतना बड़ा कद बनाना फिर मुश्किल ही होगा.

अब चूंकि आदित्य को लेकर शिवसेना बार-बार मुख्यमंत्री पद की घोषणा करती आ रही है तो उनको उपमुख्यमंत्री के रुप में कैसे स्वीकार कर सकती है. यहां तक कि मुम्बई में ‘मातोश्री‘ के बाहर और अन्य कई जगहों पर आदित्य ठाकरे के मुख्यमंत्री की बधाई वाले पोस्टर लगाकर शिवसेना (Shiv Sena Maharashtra) ने यह अच्छे से घोषित कर दिया था की आदित्य बनेंगे तो मुख्यमंत्री ही. ऐसे में एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुनकर शिवसेना इस स्थिति के लिए अपने आप को तैयार कर चुकी है की अगर उपमुख्यमंत्री पद लेना पड़ा तो आदित्य ठाकरे नहीं बल्कि एकनाथ शिंदे को आगे कर दिया जाएगा. बता दें, विधायक दल की बैठक में शिंदे के नेता चुने जाने के दूसरे ही दिन ‘मातोश्री’ के बाहर आदित्य ठाकरे के मुख्यमंत्री की बधाई वाला पोस्टर उतार दिया गया है.

चाहे मजबूरी में ही सही लेकिन बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने और उपमुख्यमंत्री पद पर समझौता करके भी शिवसेना महाराष्ट्र की जनता का दिल जीतने में कामयाब हो ही जाएगी. ऐसा करके शिवसेना जनता के बीच ये मैसेज देगी कि शिवसेना ने न केवल जनता के आदेश को सिर माथे लगाते हुए स्वीकार किया है बल्कि ‘प्राण जाये पर वचन न जाये’ कि रीत को निभाते हुए बीजेपी के साथ किये गए ‘गठबंधन के धर्म’ को ही निभाया है. इससे आगे आने वाले स्थानीय चुनावों में शिवसेना (Shiv Sena Maharashtra) को जनता की सहानुभूति भी आसानी से मिल सकेगी. महाराष्ट्र की जनता ने जो वोट दिया वो बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को दिया है, अगर शिवसेना कांग्रेस या एनसीपी के साथ जाती है तो इसका गठबंधन के वोटर्स पर गलत मैसेज जाता.

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में पवार से पंगा बीजेपी को पड़ा भारी, सरकार बनाने के सपने पर ये गठबंधन फेर सकता पानी

इसके अलावा उपमुख्यमंत्री पद पर स्वीकारोक्ति के साथ बीजेपी गठबंधन में सरकार बनाने से शिवसेना को भविष्य में एक फायदा और होने वाला है. अगले पांच सालों में आदित्य ठाकरे जो पहली बार राजनीति के खुले दंगल में उतरे हैं, उन्हें अपने दादा बाला साहेब ठाकरे और पिता उद्दव ठाकरे की तरह पर्दे के पीछे से सियासी रणनीति के चक्रव्हू को चलाने और भेदने का परिपक्व अनुभव भी हो जाएगा. ताकि अगली बार शिवसेना भाजपा के साथ नहीं बल्कि अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ सके, साथ ही अपनी पुरानी खानदानी प्रतिष्ठा को भी सहेज सके.

इसके विपरीत, शिवसेना हमेशा हिंदूत्व के मुद्दे पर चुनाव लड़ती आई है और अब केवल आदित्य को गद्दी दिलवाने के लिए ठाकरे परिवार अपने से विपरित धूरी वाली कांग्रेस के साथ गठजोड़ करती है तो आगामी चुनावों में और आदित्य के भविष्य के लिए भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

इस सब परिस्थितियों के बीच शनिवार को आया संजय राउत का बयान “शिवसेना ने गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ा और हम आखिरी समय तक गठबंधन धर्म का पालन करेंगे.” पॉलिटॉक्स की इस खबर पर मुहर लगाने जैसा है कि “महाराष्ट् में फडणवीस होंगे 5 साल के लिए CM, शिवसेना और बीजेपी से होंगे दो डिप्टी सीएम: सूत्र

‘महाराष्ट्र में लग सकता है राष्ट्रपति शासन’ बयान पर भड़की शिवसेना, कहा – ‘राष्ट्रपति जेब में रखा है क्या?’

Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार बनाने की कवायत पर भाजपा और शिवसेना में घमासान चल रहा है. इसी बीच भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार के ‘महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन’ वाले बयान पर शिवसेना ने भड़कते हुए अपने मुखपत्र ‘सामना’ में भाजपा की जमकर खिंचाई की. वहीं दूसरी ओर, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एनसीपी चीफ शरद पवार से फोन पर बात की. बताया जा रहा है कि ये वार्ता शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर प्रदेश में सरकार बनाने के बारे में थी. खबर ये भी आ रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने शरद पवार दिल्ली जा रहे हैं. इससे पहले शरद पवार ने साफ तौर पर कहा था कि वे जनाधार को स्वीकारते हुए विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे.

बता दें, भाजपा और शिवसेना में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर 50-50 फॉर्मूले को लेकर तनातनी चल रही है. इससे पहले शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र (Maharashtra) में मुख्यमंत्री उनकी पार्टी से ही होगा चाहे तो भाजपा लिखित में ले ले.

यह भी पढ़ें: राउत ने कहा ‘लिखकर ले लीजिए मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा’

इसी बीच BJP के नेता सुधीर मुनगंटीवार ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर राज्य में सात नवंबर तक नई सरकार नहीं बनती है तो महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है. मुनगंटीवार ने ये भी कहा, ‘सरकार गठन में मुख्य बाधा शिवसेना ने ढाई साल के लिए सीएम पद की मांग की है. हमने पहले ही देवेंद्र फड़णवीस को नामित कर दिया है. हम राज्य स्तर पर गतिरोध को तोड़ने के रास्ते तलाशने के लिए साथ बैठेंगे. अगर आवश्यक हुआ तो बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व हस्तक्षेप करेगा.’

भाजपा नेता के बयान पर शिवसेना भड़की हुई है और पलटवार करते हुए ‘सामना’ में लिखा, ‘शिवसेना ने कहा, ‘राष्ट्रपति की मुहरवाला रबर स्टैंप राज्य के बीजेपी ऑफिस में ही रखा हुआ है और बीजेपी शासन नहीं आया तो इस स्टैंप का प्रयोग करके महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन का आपातकाल लाद सकते हैं, इस धमकी का जनता ये अर्थ समझे क्या?

शिवसेना ने कहा, ‘महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की धमकी मत दो. कानून, संविधान और संसदीय लोकतंत्र की प्रथा और परंपरा हमें पता है. कानून और संविधान किसी का गुलाम नहीं. महाराष्ट्र में फिलहाल जो झमेला चल रहा है. उसकी चिंगारी हमने नहीं फेंकी है, जनता ये जानती है. सार्वजनिक जीवन में नैतिकता निचले पायदान पर पहुंच चुकी है.’

सामना में शिवसेना ने कहा, ‘लोकतंत्र में बहुमत का आंकड़ा हो या न हो, किसी और को सत्ता में नहीं आने देने वाले घमंड की हार हो चुकी है. यही लोग राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की चेतावनी दे रहे हैं. ऐसी धमकियों से महाराष्ट्र को फर्क नहीं पड़ता. राष्ट्रपति शासन लगाने की धमकी देनेवाले पहले सरकार बनाने का दावा तो पेश करें! फिर आगे देखेंगे. राष्ट्रपति संविधान की सर्वोच्च संस्था हैं. वे व्यक्ति नहीं बल्कि देश हैं.’

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में आक्रामक हुई भाजपा-शिवसेना की ‘दवाब पॉलिटिक्स’

इससे पहले शिवसेना राज्यसभा सांसद राउत ने दावा किया कि महाराष्ट्र (Maharashtra) का अगला मुख्यमंत्री शिवसेना से ही होगा. उन्होंने कहा कि भाजपा को कोई अल्टिमेटम नहीं दिया गया. वे बड़े लोग है. अगर शिवसेना कोई फैसला लेती है तो उसे महाराष्ट्र में स्थिर सरकार के गठन के लिए जरूरी संख्या बल मिल जाएगा. प्रदेश की जनता ने 50:50 फॉर्मूले के आधार पर सरकार बनाने के लिए जनाधार दिया था. इस पर महाराष्ट्र के लोगों के समक्ष सहमति बनी थी.

बता दें, हाल में हुए 288 सीटों वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. बीजेपी के पास 105 सीटें हैं जबकि शिवसेना के पास 56 विधायक हैं. एनसपी के 55 और कांग्रेस के 44 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. भाजपा-शिवसेना ने एलाइंस के तहत मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन परिणाम के बाद शिवसेना आधे समय के लिए मुख्यमंत्री बनाने की शर्त पर अड़ गयी. (Maharashtra)

हालांकि वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले से इस मांग से इनकार कर चुके हैं. उन्होंने शिवसेना को डिप्टी सीएम और मंत्रालय में 13 मंत्री पद का ऑफर दिया है जिसे शिवसेना ने मना कर दिया. ऐसे में कांग्रेस ने शिवसेना और एनसीपी को सरकार बनाने का ऑफर देते हुए सारे समीकरण और भी पेंचिदा बना दिए हैं. फिलहाल भाजपा का केंद्र नेतृत्व इस मामले में दखलअंदाजी से दूर है.

महाराष्ट्र में सरकार बनाने के दावों पर बढ़ी तल्खी, राउत ने कहा ‘लिखकर ले लीजिए मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा’

Sanjay Raut ShivSena

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के डिप्टी सीएम देने की हामी भरने और गुरुवार को आदित्य ठाकरे की जगह एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद यहां सब कुछ ठीक होते दिखने लगा था, लेकिन अब लगने लगा है कि स्थितियां पहले से कहीं ज्यादा उलझने लगी हैं. भाजपा-शिवसेना गठबंधन में 50-50 फॉर्मूले पर मचे दंगल के बीच पार्टी प्रवक्ता संजय राउत (Sanjay Raut) ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि लिखकर ले लीजिए, मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा. राउत ने ये भी कहा कि जिनके पास बहुमत नहीं है, वे सरकार बनाने की ना सोचें. बात यहीं थम जाती तो बात कुछ और … Read more

वीडियो खबर: अजीत पवार का उपमुख्यमंत्री बनना लगभग तय, महाराष्ट्र पॉलिटिक्स में अहम किरदार है अजीत का

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाविकास अघाड़ी गठबंधन की सरकार के फॉर्म्युले में इकलौते उपमुख्यमंत्री का पद एनसीपी के खाते में आया है. ऐसे में यह देखना काफी दिलचस्प है कि अजित पवार मंत्रिमंडल में शामिल होते हैं या नहीं और मंत्रिमंडल में शामिल होते हैं तो क्या उपमुख्यमंत्री का पद उनके पास फिर आएगा? वैसे सूत्रों की मानें तो अजित पवार उपमुख्यमंत्री के रूप में कैबिनेट का हिस्सा बनने जा रहे हैं अगर ऐसा नहीं होने वाला होता तो एनसीपी से कोई ओर गुरुवार को उद्वव ठाकरे की शपथ के बाद ही उपमुख्यमंत्री की शपथ ले चुका होता. वैसे भी अजीत पवार के राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उपमुख्यमंत्री से कम पर अजीत मानेंगे ऐसा कहना मुश्किल है

महाराष्ट्र में शुरू हुआ ‘ठाकरे राज’, 6 अन्य नेताओं ने भी ली मंत्री पद की शपथ

वीडियो खबर: सरकार बनाने के लिए भाजपा को ‘राम’ का वास्ता

Maharashtra Shiv Sena BJP

महाराष्ट्र में राजनीतिक दंगल के बीच अब सरकार बनाने के लिए शिवसेना (Shiv Sena) भाजपा को राम का वास्ता दे रही है. शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने एक बयान जारी करते हुए बताया कि गठबंधन का धर्म निभाना जरूरी है. ऐसे में हमें ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद क्यों नहीं मिलना चाहिए.

हरियाणा-महाराष्ट्र की तर्ज पर स्थानीय मुद्दों को भुनाने की तैयारी में केजरीवाल

Arvind Kejriwal

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले माना जा रहा था कि दोनों राज्यों में भाजपा ‘क्लिन स्वीप‘ करेगी लेकिन हुआ उलटा. कांग्रेस ने ऐसी पलटी मारी कि भाजपा को बहुमत के लाले पड़ गए. खुद कांग्रेस आलाकमान को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि ऐसा कुछ भी हो सकता है. दरअसल, हरियाणा और महाराष्ट्र में कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की गैर मौजूदगी के बावजूद स्थानीय नेताओं ने जनता के सामने केवल लोकल मुद्दों को उठाया और भुनाया. उन्होंने अपने चुनावी भाषण में केवल और केवल लोकल इश्यूज को सामने रखा और परिणाम आज सबके सामने है. एक समय मृतप्राय हो चुकी कांग्रेस ने दोनों राज्यों में भाजपा की हालत पतली कर दी. अब इसी रणनीति को अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों में अपनाने की तैयारी में हैं और केजरीवाल ने इसकी शुरुआत भी कर दी है.

बड़ी खबर: BJP ने बदले अपने सुर, शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने का फिर किया दावा

जैसाकि हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में देखा गया, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गड़करी सहित अन्य सभी भाजपा नेताओं ने राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर चुनावी सभाएं की. यहां उन्होंने केवल अनुच्छेद 370, अयोध्या, कश्मीर, एनआरसी और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर जनता से वोट अपील की. यहां तक की मनोहर लाल खट्टर और देवेंद्र फडणवीस के साथ अन्य स्थानीय नेता भी इसी विचारधारा के साथ जनता के बीच गए लेकिन कांग्रेस की बुर्जुग रणनीतिकारों की राजनीति यहां भाजपा के दिग्गजों पर भारी पड़ गयी. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एंव एनसीपी प्रमुख शरद पवार राष्ट्रीय नहीं बल्कि पानी, नौकरी, सड़क, प्रदेश का विकास और अन्य स्थानीय मुद्दों पर जनता से वोट अपील करते नजर आए.

अब दिल्ली के मुख्यमंत्री (Delhi CM) अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने महिलाओं को मंगलवार से दिल्ली परिवहन निगम (DTC) और कलस्टर बसों में ‘मुफ्त यात्रा’ का तोहफा देते हुए इसी रणनीति पर काम शुरू किया. यह व्यवस्था अगले साल मार्च तक के लिए अमल में रहेगी. महिला सुरक्षा को देखते हुए बसों में 13 हजार मार्शल भी तैनात रहेंगे जिसकी भर्ती पहले ही की जा चुकी है. सरकार के इस फैसले का फायदा दिल्ली की उन तमाम महिलाओं को होगा जो प्रतिदिन बस में सफर करती हैं. अनुमान है कि डीटीसी और कलस्टर बसों में यात्रा करने वाले कुल यात्रियों में एक तिहाई महिलाएं होती हैं. इस तरह महिलाओं और उनकी सुरक्षा को लेकर दिल्ली सरकार का ये एक अहम फैसला साबित हो सकता है.

यह भी पढ़ें: क्या मनोज तिवारी को मुख्यमंत्री बनने देंगे गौतम गम्भीर?

महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा के लिए गुलाबी रंग का एकल यात्रा का पास लेना होगा जो बस संवाहक से मिल सकेगा. पास के लिए कोई भुगतान नहीं करना होगा. ये पास दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में चलने वाली डीटीसी की एसी और नॉन एसी बसों के अलावा कलस्टर बसों में भी मान्य होगा. फ्री सफर के लिए महिला का दिल्ली निवासी होना जरूरी नहीं है. डीटीसी को इस घाटे से उबारने के लिए दिल्ली सरकार इस पास के एवज में 10 रुपये प्रति पास का भुगतान करेगी. योजना के तहत 10 लाख गुलाबी पास जारी किए जाएंगे.

इससे पहले केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) ने राजधानी में बिजली की दरों को कम करने के साथ फ्री वाईफाई की सुविधा भी प्रदान की थी. सरकारी स्कूलों में 12वीं तक की शिक्षा, उसके बाद शिक्षित युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के लिए सरकारी दरों पर ट्रेनिंग सेंटर और बेहद कम दरों पर रोजगार ऋण की सुविधा भी केजरीवाल सरकार प्रदान कर चुकी है. इनके अलावा, अन्य स्थानीय मुद्दों पर भी आम आदमी पार्टी सरकार की पूरी नजर है और संभावना यही जताई जा रही है कि आगामी चुनावों में केजरीवाल इन्हीं मुद्दों के सहारे चुनावी मैदान में उतरेगी.

यह भी पढ़ें: कुलगाम में आतंकी हमला दुनिया के सामने भारत की छवि बिगाड़ने की कोशिश मात्र है!

दूसरी ओर, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवाड़ी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और जाहिर सी बात है कि वो वहीं रटे रटाये भाषण बोलेंगे जो बीजेपी के आलाकमान या मोदी व शाह कहेंगे. मोदी-शाह की जोड़ी पिछले कुछ चुनाव केवल नेशनल इश्यूज पर ही लड़ते आयी है और जिनमें उन्हें कामयाबी भी मिली. लोकसभा में शानदार प्रदर्शन इसका उम्दा उदाहरण है लेकिन उसके कुछ महीनों बाद हरियाणा और महाराष्ट्र में केंद्र की सत्ताधारी भाजपा की प्रदेश इकाईयों का जो हश्र हुआ है, उससे उनकी रणनीति में अब बदलाव होना पक्का है.

राजधानी दिल्ली में पिछले साढ़े चार सालों में केजरीवाल सरकार के समय जो कुछ भी हुआ, उससे स्थानीय जनता खुश दिखाई दे रही है. यहां तक की उनके विवादित ऑड-ईवन सिस्टम को भी कई लोगों की सराहना मिली लेकिन विपक्ष के दवाब के चलते वो कामयाब न हो सका. अब देखना ये होगा कि केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के साथ देश के अधिकांश राज्यों को जीतने वाली भाजपा दिल्ली में भगुवा पताका फहरा पाती है या फिर केजरीवाल की पार्टी उनके सपनों पर झाडू फेरने में कामयाब होती है.

महाराष्ट्र: BJP ने बदले अपने सुर, शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने का फिर किया दावा

Devendra Fadnavis

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) को भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. बुधवार को हुई विधायक दल की बैठक के बाद अब स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में भाजपा में भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ही होंगे. विधायक दल के नेता बनते ही फडणवीस ने अपने सुर नरम करते हुए कहा कि जनता अफवाहों पर ध्यान न दें, भाजपा शिवसेना के साथ मिलकर ही सरकार बनाएगी. फडणवीस ने कहा कि 2014 और 2019 में हमने फ्रंटफुट पर चुनाव लड़ा और जीता भी. जो भी अफवाहें हैं, उनपर ध्यान नहीं देना चाहिए. शिवसेना (Shiv Sena) की कुछ डिमांड हैं, उन्हें सुलझा … Read more

वीडियो खबर: तेल थोड़ा कम पड़ गया

Maharashtra Shiv Sena BJP

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम आते ही शिवसेना आक्रमक हो गयी है. भाजपा ने 101 और शिवसेना ने 60 सीटों पर कब्जा जमाया. इसके बाद ​शिवसेना प्रमुख उद्दव ठाकरे और पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने तीखे तेवर अपनाते हुए स्पष्ट तौर पर सरकार में 50-50 की भागीदारी की मांग की. इसके बाद शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ (Saamana) में एक लेख के जरिए बीजेपी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को घेरने की कोशिश की. इस लेख में शीर्षक लिखा ”तेल लगाए पहलवान बन अखाड़े में कूदे थे सीएम पर बूढ़े शरद पवार ने दिया पटक”.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 से जुड़ी कुछ रौचक और दिलचस्प जानकारी

Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. बीते गुरुवार को महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए गए, जिसमें महाराष्ट्र में भाजपा को 105 सीटों पर जीत मिली, शिवसेना को 56 सीटों पर, एनसीपी को 54 सीटों पर तो कांग्रेस को 44 सीटों पर जीत मिली. महाराष्ट्र में चुनाव परिणामों के बाद आये नतीजों का विश्लेषण करने पर कुछ रौचक और दिलचस्प जानकारी सामने आई है. दिल्ली की एक गैर लाभकारी संस्था पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने महाराष्ट्र में चुने गए विधायकों के प्रोफाइल के आंकडों का विश्लेषण किया है. जिसके तहत पिछले विधानसभा की तुलना में, कुछ दिलचस्प तथ्यों के खुलासे इस रिसर्च में सामने आये है. पीआरएस के रिर्सच के अनुसार सभी … Read more

वीडियो खबर: महाराष्ट्र में कोई दुष्यंत चौटाला नहीं है, जिसके पिता जेल में हैं, विकल्प हमारे पास भी है

Sharad Pawar-Congress-BJP in Haryana and Maharashtra Election 2019

शिवसेना ने अपने तेवर तीखे करते हुए हरियाणा में दुष्यंत चौटाला का उदाहरण देते हुए कहा, ‘महाराष्ट्र में कोई दुष्यंत नहीं है जिसके पिता जेल में है. हमारे पास भी विकल्प है.’ गौरतलब है कि हरियाणा में जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने प्रदेश भाजपा को समर्थन देते हुए खट्टर सरकार बनाने में अहम रोल निभाया. शपथ ग्रहण वाले दिन पिछले 6 साल से जेल में बंद दुष्यंत चौटाला के पिता अजय सिंह चौटाला को मिली बेल को उनके भाजपा से हाथ मिलाने की शर्त के तौर पर देखा जा रहा है….