वीडियो खबर: सिंधिया ने कमलनाथ से की ये मांग

पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) से एक मांग की है. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रदेश के वे किसान जो प्राकृतिक आपदा एंव बाढ़ पीड़ित हैं, उन्हें शत प्रतिशत मुआवजा मिलना चाहिए. सिंधिया ने प्रदेश सरकार से मांग की कि कमलनाथ सरकार ऐसा फैसला लेते हुए किसान हित में कार्य करे.

चुनाव जीतने की बची-कुची उम्मीदों पर भी पानी फेरने में जुटीं कुमारी शैलजा

हरियाणा प्रदेश कांग्रेस (Haryana Congress) अध्यक्ष कुमारी शैलजा (Kumari Selja) ने विधानसभा चुनाव का टिकट चाहने वालों के सामने ऐसी अव्यावहारिक शर्तें रखी हैं, जिनसे हरियाणा में पहले ही सत्ता से बाहर हो चुकी कांग्रेस की परेशानियां और बढ़ जाएंगी. कांग्रेस के टिकट के लिए आवेदन करने वालों को यह घोषणा करनी होगी कि वे शराब नहीं पीते हैं और खादी पहनते हैं. इस समय हरियाणा में कांग्रेस के 14 विधायक हैं. अगर शैलजा की तरफ से लागू शर्तों का सख्ती से लागू किया गया तो इनमें से आठ-दस विधायकों को फिर से टिकट मिलना मुश्किल हो जाएगा. शैलजा ने एक ट्वीट के जरिए चुनाव लड़ने के लिए लागू मापदंडों … Read more

वीडियो खबर: कायम है सिंधिया महाराज का जलवा

एक दिन के दौरे पर इंदौर (Indore) पहुंचे कांग्रेस के दिग्गज नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने अपने राजनीतिक कौशल की सियासी चाल से मध्यप्रदेश की राजनीति को फिर से गरमा दिया. सिंधिया ने उनके प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले सुरेश पचौरी , दिग्विजयसिंह और कमलनाथ गुट के नेताओं से अलग-अलग उनके घर जाकर मुलाकात की और साथ ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं से वन टू वन मुलाकात कर एक तरह से शक्ति प्रदर्शन भी किया. जिसके बाद से मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के राजनीतिक गलियारों में भी हलचलें तेज हो गई.

वीडियो खबर: इंदौर में क्या बोल गए ज्योतिरादित्य सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने अपनी ही सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अगर अवैध खनन का कारोबार नहीं रुका तो वह आगे आने को मजबूर होंगे. उन्होंने रेत के अवैध खनन और कारोबार में लगे लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की.

सिंधिया ने इंदौर में दिखाया राजनीतिक कौशल, कार्यकर्ताओं में दिखा जबरदस्त क्रेज

कहते हैं सत्ता के लिए जो बन पड़े वो कम है, अपने एक दिन के दौरे पर इंदौर (Indore) पहुंचे कांग्रेस (Congress) के दिग्गज नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने अपने राजनीतिक कौशल की सियासी चाल से मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) की राजनीति को फिर से गरमा दिया. रविवार को इंदौर में सिंधिया ने उनके प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले सुरेश पचौरी (Suresh Pachouri), दिग्विजयसिंह (Digvijay Singh) और कमलनाथ (Kamalnath) गुट के नेताओं से अलग-अलग उनके घर जाकर मुलाकात की और साथ ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं से वन टू वन मुलाकात कर एक तरह से शक्ति प्रदर्शन भी किया. जिसके बाद से मध्यप्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भी हलचलें तेज हो गई.

मध्यप्रदेश कांग्रेस की पॉलिटिक्स में इन दिनों राजनीतिक रस्साकस्सी का दौर लगातार जारी है. इसी बीच इंदौर में रविवार को कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का मालवा की सियासत में एक अलग ही अंदाज देखने को मिला. एक दिन के दौरे पर इंदौर पहुंचे कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी अलग राजनीतिक चाल से सभी को चौंका दिया. कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल ज्योतिरादित्य सिंधिया का इंदौर पहुंचने पर कार्यकताओं ने जमकर स्वागत किया. सिंधिया ने इंदौर में पार्टी के तमाम खेमों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की.

यह भी पढ़ें:- मध्यप्रदेश में भाजपा के सहयोग से ज्योतिरादित्य सिंधिया बन सकते हैं मुख्यमंत्री!

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इंदौर पहुंचते ही अलग-अलग गुटों के नेताओं के घर पर जाकर मुलाकात की. एयरपोर्ट से सबसे पहले सिंधिया सीधे सुरेश पचौरी के गुट से आने वाले विधायक संजय शुक्ला के घर पहुंचे और करीब एक घंटे तक सिंधिया ने संजय शुक्ला के साथ चर्चा की. ना सिर्फ चर्चा की बल्कि इस दौरान सिंधिया ने नाश्ता भी किया. इसके बाद सिंधिया इंदौर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत शशिन्द्र जलधारी के घर वालों से मिलने उनके घर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया.

इसके बाद सिंधिया यहां से सीधे एमएलए विशाल पटेल से मिलने उनके घर पहुंचे. विशाल पटेल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के काफी करीबी माने जाते हैं, ऐेसे में सिंधिया और विशाल पटेल की मुलाकात भी जमकर चर्चाओं में रही. मुलाकात का दौर यहीं खत्म नहीं हुआ बल्कि सिंधिया ने इसके बाद इंदौर से सांसद का चुनाव लड़ चुके पंकज संघवी और मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी कहे जाने वाले इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल से भी घर जाकर मुलाकात की.

इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि इंदौर मेरा घर है और मालवा से मेरा खास लगाव है. मध्य प्रदेश और देश में कांग्रेस संगठन को पुनर्जीवित करना बहुत जरूरी है. हांलाकि अलग-अलग गुटों के नेताओं से मिलने के पीछे की वजह क्या थी, इसका सिंधिया ने जवाब नहीं दिया. सिंधिया ने कहा कि इंदौर से उनका अलग लगाव है ऐसे में वे कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने और उनकी समस्याओं को सुनने के लिए पहुंचे हैं. लोगों की परेशानी और उनकी आवाज़ को शासन, प्रशासन और सरकार तक हम पहुंचाएंगे.

इसके बाद बारी आई सिंधिया के शक्ति प्रदर्शन की, इंदौर के रंगून गार्डन में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने करीब दो घंटे तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं से सिलसिलेवार मुलाकात की. इसके लिये बनाए गए विशाल पंडाल में सिंधिया की तस्वीरों के अलावा, उनके दिवंगत पिता माधवराव सिंधिया और सूबे के मुख्यमंत्री कमलनाथ के पोस्टर प्रमुखता से लगाये गये थे. सिंधिया से मुलाकात के लिए समर्थकों और नेताओं का जमावड़ा लगा. खास बात तो यह थी कि इंदौर ही नहीं मालवा और निमाड़ के कई सिंधिया समर्थक भी इस कार्यक्रम में मुलाकात के लिए बेताब नजर आए.

यह भी पढ़ें:- ज्योतिरादित्य बनेंगे मुख्यमंत्री! पिता की भूल सुधारेंगे सिंधिया?

इस दौरान सिंधिया ने मंच पर ही एक-एक कार्यकर्ता से वन टू वन मुलाकात शुरू की. सिंधिया जब मंच पर मौजूद थे तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी स्टेज पर चढ़ने की होड़ लग गई, मंच पर चढ़ने के लिए कार्यकर्ता बेकाबू हो गए और हंगामा शुरू कर दिया. देखते ही देखते बात कुर्सियां उछालने तक जा पहुंची. कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियां उछालनी शुरू कर दीं. ज्योतिरादित्य सिंधिया कार्यकर्ताओं की इस हरकत से नाराज हो कर मंच से उतर गए और कार्यक्रम से चले गए.

बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं से ज्योतिरादित्य सिंधिया की इस मुलाकात को राजनीतिक के जानकार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल सिंधिया के शक्ति प्रदर्शन के तौर देख रहे हैं. कार्यक्रम के बाद सिंधिया ने संवाददाताओं से कहा, “मैंने करीब 3,000 कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आज सीधी मुलाकात की, अपना खून-पसीना बहाकर सूबे में कांग्रेस की सरकार बनवाने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं की आन-बान-शान कायम रखना मेरा फर्ज है. केवल मध्यप्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में कांग्रेस संगठन को फिर से जीवित करना अति महत्वपूर्ण है. इस काम के लिये सभी कांग्रेस नेताओं ने संकल्प लिया है.” वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर दावेदारी के सवाल पर सिंधिया ने कहा,‘‘पार्टी आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, वह उन्हें स्वीकार होगा.’’

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की आहट के बीच अपने-अपने नेता को अध्यक्ष बनवाने के लिए गुटबाजी तेज हो गई है. राजधानी भोपाल से लेकर दिल्ली तक रस्साकस्सी चल रही है. ऐसे में मध्यप्रदेश कांग्रेस के दिग्गज सुरेश पचौरी, दिग्विजय सिंह और कमलनाथ गुट से जुड़े नेताओं से उनके घर जाकर अलग-अलग मुलाकात करने का सिंधिया का ये खास अंदाज राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा. पचौरी गुट से ताल्लुक रखने वाले विधायक संजय शुक्ला के घर सिंधिया पहुंचे तो उनका जोरदार स्वागत किया गया. हालांकि बाद में संजय शुक्ला सफाई देते नजर आए और कहा कि उनको (सिंधिया) को बुलाया नहीं था वो उनकी मां की तबीयत पूछने घर पहुंचे थे. सिंधिया पार्टी के बड़े लीडर हैं ऐसे में वो घर आए तो उनका स्वागत किया गया.

यह भी पढ़ें:- जन तंत्र पर भारी गन तंत्र, उधर गहलोत और पायलट उलझे राजनीतिक रस्साकस्सी में

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया की इंदौर में हुई इस लंच डिप्लोमेसी को लेकर बीजेपी ने भी पलटवार कर दिया है. बीजेपी के सांसद शंकर लालवानी का कहना है कि सिंधिया ये सब पीसीसी चीफ की कुर्सी पाने के लिए कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी और प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के आगे कांग्रेस में किसी की नहीं चलती, ये बात सिंधिया को भी समझनी चाहिए.

गौरतलब है कि कमलनाथ को राज्य विधानसभा चुनाव से करीब सात महीने पहले अप्रैल 2018 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था. अभी हाल ही में कमलनाथ ने दिल्ली में अपने एक बयान में कहा था कि मुख्यमंत्री बनने के ठीक बाद उन्होंने पार्टी आलाकमान के समक्ष प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की थी. बहरहाल, मध्य प्रदेश कांग्रेस में सत्ता और संगठन के बीच जो खींचतान चल रही है उसके बाद सिंधिया की इस लंच डिप्लोमेसी के कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं. अब आने वाले दिनों में सिंधिया का ये खास अंदाज कौन से राजनीतिक समीकरणों को जन्म देता है यह देखना दिलचस्प होगा.

वीडियो खबर: इतना आसान नहीं है पायलट को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाना

राजस्थान (Rajasthan) में सचिन पायलट (Sachin Pilot) को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (Rajasthan PCC President) पद से हटवाने की मुहिम अब लगता है ठंडी पड़ गई है, क्योंकि कांग्रेस (Congress) हाईकमान की तरफ से इस तरह के प्रयासों को समर्थन नहीं दिया जा रहा है. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) फिलहाल राजस्थान में पार्टी संगठन में फेरबदल करने के पक्ष में नहीं हैं. इससे नेताओं के आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं, जिससे पार्टी को ही नुकसान होगा. सचिन पायलट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) होने के साथ ही उप मुख्यमंत्री पद भी संभाले हुए हैं.

वीडियो खबर: चिदंबरम और शिवकुमार के बाद अब कमलनाथ का नंबर!

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ (KamalNath) के सामने परेशानियां बढ़ने वाली हैं. कांग्रेस नेता चिदंबरम को जेल भेजने के बाद अब गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने अपना ध्यान कमलनाथ (KamalNath) की तरफ केंद्रित कर दिया है. मुख्य लक्ष्य कमलनाथ (KamalNath) की सरकार को अस्थिर करना है. रणनीति तैयार हो चुकी है. कमलनाथ (KamalNath) के भांजे रतुल पुरी आगस्ता वेस्टलैंड मामले में पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं.

वीडियो-खबर: तंवर को मनाना हुड्डा के लिए चुनौती से कम नहीं

हरियाणा (Haryana) के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ये भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) के राजनीतिक करियर की अंतिम पारी होने वाली है, इसलिए वे अपनी इस पारी को शानदार तरीके से खेलना चाहते हैं. इसी के चलते हुड्डा हरियाणा कांग्रेस में बदलाव और पार्टी से नाराज चल रहे नेताओं को मनाने में जुट गए हैं ताकि BJP का मुकाबला पूरे जोशो-खरोश के साथ किया जा सके. भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सबसे ज्यादा मुश्किलें हरियाणा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को मनाने में आएगी. हुड्डा और तंवर के बीच की अदावत किसी से छिपी नहीं है. अशोक तंवर राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं और पिछले 6 सालों से प्रदेश अध्यक्ष पद का दायित्व संभाले हुए थे.

देश की जनता की गर्दन काट रहा व्हीकल एक्ट: खाचरियावास

राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) में परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास (Pratap Singh Khachariwas) ने मोटर व्हीकल एक्ट (Moter Vehicle Act) का विरोध करते हुए इसे देश और प्रदेश की जनता के लिए आत्मघाती बताया है. खाचरियावास ने बताया कि मोदी सरकार का व्हीकल एक्ट देश की जनता की गर्दन काट रहा है. उन्होंने कहा कि हाल में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी (Nitin Gadkari) ने कहा था कि नियम सभी के लिए एक है और ये एक्ट सभी को मानना पड़ेगा. इसके बाद भी गुजरात सरकार (Gujrat Government) ने बात न मानते हुए जुर्माने की राशि को आधा कर दिया. अब राजस्थान सरकार जुर्माने की राशि को गुजरात सरकार से भी कम करेगी. खाचरियावास ने ये भी कहा कि मोदी सरकार के इस फैसले का सभी जगहों पर विरोध हो रहा है. ऐसे में केंद्र सरकार को ये एक्ट वापिस ले लेना चाहिए.

आपको बता दें कि देश के 4 राज्यों ने केंद्र सरकार के मोटर व्हीकल एक्ट को प्रदेश में लागू करने से मना कर दिया है. इनमें राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश और पं.बंगाल शामिल हैं. वहीं ट्रैफिक उल्लंघन के लिए जुर्माना कई गुना बढ़ाए जाने से लोगों को हो रही परेशानी के बीच गुजरात सरकार ने जुर्माने की राशि को कम करने का ऐलान किया. गुजरात में बीजेपी मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कई मामले में जुर्माने की राशि को घटा कर आधा कर दी. हालांकि कुछ नियमों में चालान की राशि नियमानुसार है लेकिन फिर भी सरकार के इस कदम से लोगों को निश्चित तौर पर राहत मिलेगी. हिमाचल सरकार ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राहत मांगी है.

बड़ी खबर: वैभव गहलोत अब राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के बहाने बनेंगे RCA अध्यक्ष

गौरतलब है कि नया मोटर वाहन संशोधन कानून एक सितम्बर से देशभर में लागू कर दिया गया है. इस एक्ट के अनुसार ट्रैफिक नियम (Traffic rules) तोड़ने पर जुर्माने की राशि को 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है. इनमें हैलमेट न पहनने पर जुर्माना एक हजार (जो पहले 100 रुपये था) और लाइसेंस या गाड़ी के पेपर न होने पर जुर्माना दो हजार (जो पहले 200 रुपये था) शामिल है.

जब से नया एक्ट देश में लागू हुआ है, चारों ओर हो हल्ला मचा हुआ है. कई जगहों से चालान के ऐसे मामले सामने आए हैं जो हैरान करने वाले हैं. राजधानी दिल्ली, गुरुग्राम सहित अन्य राज्यों में 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक चालान की राशि वसूले जाने की खबरे आ रही हैं. इनमें हरियाणा, दिल्ली एनसीआर और ओडिशा सबसे आगे हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अपना रूख स्पष्ट करते हुए कहा है कि सभी राज्यों को नए कानून का पालन करना ही होगा. केंद्र सरकार नए नियमों से जागरूकता बढ़ने का हवाला दे रही है.

वहीं दूसरी ओर, भारतीय युवा कांग्रेस ने बुधवार को मोटर व्हीकल अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के खिलाफ केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

कमलनाथ पर जोरदार तरीके से शिकंजा कसने की तैयारी

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री (Madha Pradesh CM) कमलनाथ (Kamalnath) के सामने परेशानियां बढ़ने वाली हैं. कांग्रेस नेता चिदंबरम (Chidambaram) को जेल भेजने के बाद अब गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने अपना ध्यान कमलनाथ की तरफ केंद्रित कर दिया है. मुख्य लक्ष्य कमलनाथ (Kamalnath) की सरकार को अस्थिर करना है. इसलिए सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साधने की रणनीति तैयार हो चुकी है. इसके तहत कमलनाथ (Kamalnath) के खिलाफ 1984 के दंगों से संबंधित मामले फिर से खोले जाएंगे. सूत्रों के मुताबिक अमित शाह ने पुराने मामले खोलने की मंजूरी दे दी है. कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी आगस्ता वेस्टलैंड मामले में पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं.

गौरतलब है कि 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में सिख विरोधी दंगे हुए थे. उस समय कांग्रेस नेता सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर सहित अनेक कांग्रेस नेताओं के खिलाफ भीड़ को उकसाने के आरोप लगे थे. उनमें कमलनाथ का नाम भी शामिल है. कमलनाथ ने हमेशा इस बात से इनकार किया है कि उनकी दंगों में कोई भूमिका थी. जब कांग्रेस ने कमलनाथ को मप्र में मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया था, तब यह मामला उभरकर आया था. जिस दिन कमलनाथ (Kamalnath) ने भोपाल में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, उस दिन मध्य प्रदेश और पंजाब में उनके खिलाफ प्रदर्शन हुए थे.

सिख विरोधी दंगों के मामलों की सुनवाई के दौरान गवाहों ने कहा था कि जब दंगे हो रहे थे, उस समय दिल्ली के रकाबगंज गुरुद्वारे के बाहर कमलनाथ दंगाई भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे. उनकी मौजूदगी में दो सिखों की हत्या हुई थी. दंगों की जांच कर रहे नानावटी आयोग ने कमलनाथ को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था. उस समय आयोग ने दो गवाहों की सुनवाई की थी. इनमें इंडियन एक्सप्रेस के तत्कालीन संवाददाता संजय सूरी भी शामिल थे. उन्होंने कहा था कि मौके पर कमलनाथ मौजूद थे. कमलनाथ ने माना कि वह वहां मौजूद थे, लेकिन भीड़ को शांत करने का प्रयास कर रहे थे. पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट सिख विरोधी दंगों में 88 लोगों को दोषी मान चुकी है.

यह भी पढ़ें: मध्यप्रदेश में अमित शाह के सहयोग से ज्योतिरादित्य सिंधिया बन सकते हैं मुख्यमंत्री!

गौतरलब है कि मोदी 2.0 में गृहमंत्री बनने के बाद अमित शाह अपने अलग ही मूड में है. पहले ही सत्र में जम्मूकश्मीर पुनर्गठन, तीन तलाक और UAPA जैसे एक के बाद एक बड़े बिल पास करवाए. अभी जम्मूकश्मीर के नजरबंद नेता बाहर भी नहीं आये की उससे पहले अपनी पुरानी अदावत का हिसाब चुकता करते हुए शाह ने चिदम्बरम को जेल भिजवाया. उसके बाद नम्बर आया डीके शिवकुमार का, अभी शिवकुमार ED की हिरासत में हैं. कयास लगाए जा रहा थे कि अब अगला नम्बर शायद उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत का होगा, लेकिन अमित शाह ने 1984 के दंगों से संबंधित पुराने मामले फिर से खोलने की मंजूरी देकर सबको चौंका दिया. शायद अमित शाह पहले वर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ को हटाने के मूड में हैं, इसके बाद निवर्तमान मुख्यमंत्री रावत पर ध्यान देंगे.

भाजपा की सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने कमलनाथ (Kamalnath) के खिलाफ मामला फिर से खोलने की मंजूरी का स्वागत करते हुए इसे सिखों की जीत बताया है. अकाली नेताओं का कहना है कि जिन मुकदमों को गलत तरीके से बंद कर दिया गया था, उन्हें फिर से खोलना स्वागत योग्य है. कमलनाथ को उनके किए की सजा मिलनी चाहिए.