‘इंदिरा इज इंडिया से वैभव इज कांग्रेस तक पहुंची देश की सबसे पुरानी पार्टी’

लोकसभा चुनाव के एलान के साथ ही नेताओं ने एक-दूसरे पर जुबानी हमले तेज कर दिए हैं. सोमवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी प्रवक्ता व आमेर विधायक सतीश पूनिया ने वैभव गहलोत को कांग्रेस का पर्याय बताने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि पहले तो कांग्रेस के लोग इंदिरा इज इंडिया का नारा लगते थे. फिर राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाला हर उम्मीदवार राहुल गांधी है. पूनिया ने कहा कि यहां तक तो ठीक था मगर अब तो हर प्रत्याशी वैभव गहलोत का रुप होगा. गौरतलब है कि रविवार को सिरोही … Read more

खर्चे के खौफ से बीजेपी ने की राजस्थान में पीएम मोदी की सभाओं में कटौती!

आगामी लोकसभा चुनाव में राजस्थान बीजेपी नेतृत्व पिछली बार की तरह इस बार भी 25 सीटें जीतने का दावा कर रहा है, लेकिन इसके लिए तैयारी में कई झोल दिखाई दे रहे हैं. यह जानते हुए कि चुनाव में मोदी ही पार्टी का प्रमुख चेहरा हैं, स्थानीय नेता उनकी सभाओं से कतरा रहे हैं. गौरतलब है कि मोदी ने पिछले दिनों टोंक और चुरू में सभाएं की थीं. उनका तीन और सभाएं करने का कार्यक्रम तय था, लेकिन ये हो नहीं पाईं. पार्टी सूत्रों के अनुसार इसके पीछे सभाओं में होने वाले खर्च था. आमतौर पर इस प्रकार की सभाओं के खर्च की रकम का इंतजाम पार्टी फंड से होता … Read more

अटल बिहारी वाजपेयी का 50 साल पहले संसद में दिया भाषण फिर चर्चा में क्यों है?

ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआईसी) के सालाना सम्मेलन में विशेष अतिथि के तौर पर भारत की शिरकत को मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है. ओआईसी के संस्थापक सदस्यों में शामिल पाकिस्तान के बहिष्कार के बावजूद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सम्मेलन में न केवल भाग लिया, ब​ल्कि मंच से आतंकवाद को पालने-पोसने वालों को भी कोसा. हालांकि उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया. अपने संबोधन में स्वराज ने कहा, ‘आतंकवाद के खतरे को सिर्फ सैन्य, खुफिया या कूटनीतिक तरीकों से नहीं हराया जा सकता, बल्कि इसे हमारे मूल्यों की मजबूती और धर्म के संदेश से जीता जा सकता है. यह सभ्यता और संस्कृति … Read more

कांग्रेस के किन दो नेताओं ने रची अशोक चांदना को मंत्री पद से हटाने की साजिश?

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में राज्यमंत्री अशोक चांदना की कुर्सी पर आया संकट टल गया है. जयपुर विद्युत वितरण निगम के अभियंता जेपी मीणा की शिकायत पर बूंदी जिले की नैनवां थाना पुलिस ने चांदना के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने करने का मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस के अनुसार चांदना के खिलाफ धारा 332, 353, 504 व एससी-एसटी एक्ट की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है. मामले की जांच सीआईडीसीबी जयपुर को भेजी गई है.

मामला दर्ज होने के बाद मंत्री चांदना के खिलाफ जयपुर विद्युत वितरण निगम के कर्मचारियों और मीणा समाज की ओर से जारी आंदोलन थम गया है. गौरतलब है कि युवा मामले एवं खेल राज्यमंत्री अशोक चांदना ने हिंडौली में जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों की शिकायत पर 5 फरवरी को काछौला फीडर के हेल्पर मुकेश सैनी को सस्पैंड करने को कहा था. मंत्री के कहने पर अभियंता जेपी मीणा ने सैनी को इसी दिन सस्पैंड कर दिया, लेकिन 12 फरवरी को मुख्य अभियंता क्षेमराज मीणा के आदेश के बाद अभियंता मीणा ने हेल्पर को काछौला के पास हरना फीडर पर लगा दिया.

अशोक चांदना जब 18 फरवरी को इलाके में पहुंचे तो ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि आपके कहने पर जो हेल्पर सस्पैंड हुआ उसे अभियंता जेपी मीणा ने आठ दिन बाद ही काछौला के पास हरना फीडर पर लगा दिया तो मंत्री भन्ना गए. उन्होंने तुरंत जयपुर विद्युत वितरण निगम के आला अधिकारियों और अभियंता मीणा को तलब किया. मीणा की मानें तो रात 9 बजे उनकी मंत्री से नैनवां हाईवे पर मुलाकात हुई जहां उन्होंने आते ही पूछा कि एसई कौन है‌? एक्सईएन कौन है? मैंने कहा कि मैं एक्सईएन हूं. इस पर मंत्री ने यह कहते हुए थप्पड़ जड़ दिया कि तूने उस कर्मचारी को वापस क्यों लगाया, गिरेबान पकड़कर जातिसूचक गालियां देने लगे.

इस घटना का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो बवाल मच गया. जयपुर विद्युत वितरण निगम के कर्मचारियों ने तो मंत्री चांदना के खिलाफ कार्रवाई करने और मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग को लेकर आंदोलन किया ही मीणा समाज भी लामबंद हो गया. शुरूआत में सरकार ने इस आंदोलन को दरकिनार किया, लेकिन तूल प​कड़ने पर कान खड़े हुए. सरकार के हरकत में आने की भनक लगते ही मंत्री चांदना अपनी कुर्सी बचाने के लिए सक्रिय हो गए. उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे से मिलकर अपना पक्ष रखा.

इस दौरान अशोक चांदना कई बार मीडिया के सामने आए. चांदना में हर बार यह दोहराया कि उन्होंने ना तो अभियंता जेपी मीणा के साथ मारपीट की और ना ही उन्हें गालियां दीं. वायरल ऑडियो में आवाज भी उनकी नहीं है. चांदना ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची जा रही है. उन्होंने अभियंता मीणा के साथ मारपीट और गालीबाजी की या नहीं, इसका खुलासा तो जांच में होगा, लेकिन यह रहस्य बरकरार है कि आखिरकार अशोक चांदना के खिलाफ साजिश रची किसने. कौन है इसका सूत्रधार?

‘पॉलिटॉक्स’ के पुख्ता सूत्रों के अनुसार अशोक चांदना के खिलाफ साजिश के सूत्रधार कांग्रेस के दो कद्दावर नेता हैं. हाड़ौती से ताल्लुक रखने वाले इन नेताओं में से एक वर्तमान में विधायक हैं और दूसरे को विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था. जब अशोक चांदना का कथित गाली और थप्पड़ कांड सामने आया तो इन दोनों नेताओं की बांछे खिल गईं. असल में पिछली कांग्रेस सरकार में विधानसभा में ऊंचे ओहदे पर रह चुके इन आदिवासी नेता को इस बार मंत्री पद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन नंबर नहीं आया. इन्हें लगता है कि चांदना के मंत्री बनने की वजह से उनका पत्ता कट गया. य​​दि चांदना की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो जाए तो उनकी लॉटरी लग सकती है.

जबकि दूसरे नेता राज्यमंत्री रह चुके हैं और इस बार भी उन्होंने विधानसभा चुनाव मंत्री बनने के ख्वाब के साथ लड़ा, लेकिन नजदीकी मुकाबले में हारने की वजह से इनका सपना चकनाचूर हो गया. इस हार के पीछे वे खुद के लचर प्रबंधन और रणनीति को जिम्मेदार मानने की बजाय अशोक चांदना की कथित कारसेवा पर ठीकरा फोड़ते हैं. इन्हें चांदना के मंत्री पद से हटने से कोई पद तो नहीं मिलता, लेकिन विधानसभा चुनाव में मिली हार का हिसाब जरूर चुकता हो जाता. इन दोनों नेताओं में पहले ने चांदना-अभियंता विवाद को जाति का रंग दिया. इनके इशारे पर ही मीणा समाज के लोगों ने अशोक चांदना के खिलाफ धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन सिलसिला शुरू किया, जो दो दिन बाद ही हाड़ौती के बाहर तक पहुंच गया.

वहीं, दूसरे नेता ने जयपुर विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को चांदना के खिलाफ आंदोलन करने के लिए उकसाया. ये नेता अधिकारियों को यह कहते हुए सुने गए कि आज गाली और थप्पड़ एक को मिले हैं, यदि मंत्री को सबक नहीं सिखाया तो सबको पांच साल तक ऐसी ही गुंडागर्दी झेलनी पड़ेगी. दोनों ने चांदना के पिता की पृष्ठभूमि को भी अधिकारियों के सामने ताजा किया. इन दोनों नेताओं के इशारे पर चांदना के खिलाफ जोरदार आंदोलन हुआ. इससे उनकी कुर्सी हिली जरूर, लेकिन आंच नहीं आई. अक्सर ‘हर गलती हिसाब मांगती है’ कहने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चांदना को ‘पहली गलती’ पर चेतावनी देकर बख्श दिया. गहलोत की इस मेहरबानी से चांदना के खिलाफ साजिश रचने वाले दोनों नेता हलकान हैं. दोनों अगले मौके की तलाश में जुट गए हैं. चांदना को भी इनकी भनक है. उन्होंने इन पुराने चावलों से निपटने का इंतजाम कर लिया है.