यूपी: महागठबंधन की संयुक्त जनसभा रामपुर-फिरोजाबाद में, शिवपाल यादव होंगे निशाने पर

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उत्तरप्रदेश में बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव फिरोजाबाद और रामपुर में आज साझा रैली करेंगे. फिरोजाबाद में मायावती और अखिलेश बसपा-सपा गठबंधन प्रत्याशी अक्षय यादव के लिए वोट मागेंगे. अक्षय मुलायम के भाई रामगोपाल के पुत्र हैं जिनका मुकाबला उनके चाचा शिवपाल यादव से होगा. फिरोजाबाद जनसभा में सपा-बसपा के निशाने पर मुख्य तौर पर शिवपाल यादव ही होंगे. अखिलेश से अदावत के बाद शिवपाल ने चुनाव से पूर्व प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया है. शिवपाल ने प्रदेश की अन्य सीटों पर भी अपने प्रत्याशी खड़े किए है. बीजेपी ने यहां से चन्द्रसेन चादौन को अपना प्रत्याशी बनाया है. यह भी पढ़ें: 24 साल बाद चुनावी … Read more

क्या हुआ जब बैलगाड़ी में प्रचार करने पहुंची दीया कुमारी

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लोकसभा चुनाव शुरू हो चुके हैं और इस चुनावी भंवर में राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने के लिए अजीबोगरीब तरीके इस्तेमाल करने में भी पीछे नहीं रहते. ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला राजसमंद के को​ठारिया में जहां जयपुर राजघराने की राजकुमारी दीया कुमारी बैलगाड़ी में बैठकर जनसंपर्क कर रही थीं. करोड़ों की संपत्ति की मालकिन दीया कुमारी का इस तरह प्रचार करना अपने आप में एक रोचक एक्सपेरिमेंट था. हालांकि उन्होंने अपने हलफनामे में कोई वाहन न होने का जिक्र किया है. ऐसे में अगर वह बैलगाड़ी में बैठ प्रचार कर रही हैं तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए. गौरतलब है कि दीया कुमारी बीजेपी के टिकट पर राजसमंद से चुनावी मैदान में हैं. उनके सामने कांग्रेस के देवकीनंदन गुर्जर हैं.

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 66 फीसदी मतदान, जम्मू-कश्मीर में सबसे कम

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लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 11 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 95 संसदीय सीटों के हुए गुरूवार को केवल 66 फीसदी मतदाताओं ने अपने वोट का इस्तेमाल किया. हिंसा की छुटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्वक हुआ. सर्वाधिक मतदान पं.बंगाल में हुआ है. यहां 76.43 फीसदी मतदान हुआ है. सबसे कम जम्मू-कश्मीर में हुआ. यहां केवल 45.28 फीसदी वोटिंग हुई है. मणिपुर में 76.15 फीसदी और असम में 76.14 फीसदी मतदान हुआ है. इनके अलावा, पुडुचेरी में 75.15, छत्तीसगढ़ में 66.50, तमिलनाडू में 72 फीसदी, ओडिशा में 64, बिहार में 65.52, उत्तर प्रदेश में 62.3 और महाराष्ट्र में 62 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले. ​कर्नाटक में 61.80 … Read more

मुलायम सिंह ने खेला आखिरी चुनाव का कार्ड, कहा- भारी बहुमत से जिताना

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कहते हैं राजनीति में कोई किसी का परमानेंट दुश्मन या दोस्त नहीं होता है. यह बात आज उस समय बिल्कुल सटीक बैठी जब पिछले ढ़ाई दशक से धुर-विरोधी सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव व बसपा सुप्रीमो मायावती एक मंच पर साथ दिखे. यह घटना भारतीय सियासत की ऐतिहासिक तस्वीर बन गई जिसका गवाह बना उत्तरप्रदेश का मैनपुरी. यहां चुनावी महारैली के मंच पर सपा नेता पिता-पुत्र मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के बीच में बसपा सुप्रीमो मायावती बैठी थीं. दोनों दिग्गज नेता एक-दूसरे की ओर देख मुस्कुराए और एक-दूसरे के संबोधन पर तालियां भी बजाई. सपा और बसपा के बीच 1995 के बाद ऐसी तकरार हो गई थी कि उसे … Read more

26/11 के शहीद हेमंत करकरे को लेकर साध्वी प्रज्ञा ने दिया ये विवादित बयान

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26/11 मुंबई हमले में शहीद एटीसी चीफ हेमंत करकरे को लेकर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने एक विवादित बयान दिया है. बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक के दौरान उन्होंने मीडिया को बताया, ‘मैंने हेमंत करकरे को कहा था कि तेरा सर्वनाश होगा और उसे आतंकियों ने मार डाला. उन्हें उनके कर्मों की सजा मिली है. उन्होंने मुझे गलत तरीके से फंसाया था. हेमंत करकरे मुझे किसी भी तरह से आतंकवादी घोषित करना चाहते थे.’ उन्होंने यह भी कहा कि उसने मुझे गालियां दी. मुझे रोकने के लिए षड्यंत्र किया और 9 साल जेल में बंद रखा. इस कारण मैं 20 साल पीछे चली गई. बता दें, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को … Read more

कांग्रेस से नहीं मिला ‘न्याय’ तो शिवसेना में शामिल हुई प्रियंका चतुर्वेदी

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अपने साथ पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा हुए दुर्व्यवहार के बाद कोई कार्रवाई नहीं होने से नाराज कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कांग्रेस छोड़ शिवसेना पार्टी का दामन थाम लिया. शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने उन्हें पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई. इस मौके पर प्रियंका ने कहा कि मैंने पार्टी की निस्वार्थ सेना की है लेकिन मैं अपने साथ हुए व्यवहार से दुखी हूं. साथ ही मैं खुद को मुंबई से कटा हुआ महसूस कर रही थी. शिवसेना में मुझे सम्मान मिला है. शिवसेना से टिकट मिलने की बात पर उन्होंने कहा कि मैंने किसी भी टिकट की कोई मांग नहीं की है. शिवसेना में शामिल होने के तुरंत बाद उन्होंने … Read more

कल जूता कांड, आज हार्दिक पटेल को पड़ा थप्पड़

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लगता है कि हार्दिक पटेल के सितारे इन दिनों गर्दिश में चल रहे हैं. पहलेे तो न्यायालय में चल रहे एक केस में दो साल की सजा के चलते उनके चुनाव लड़ने पर रोक लग गई. आज सुबह एक चुनावी रैली के दौरान एक शख्स ने उनका गाल लाल कर दिया. फिलहाल हमलावर की पहचान नहीं हो पाई है. मामला गुजरात के सुरेंद्र नगर का है. हुआ कुछ यूं कि हार्दिक कांग्रेस के समर्थन में सुरेंद्र नगर में एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे. इसी दौरान सभा से उठकर एक अनजान शख्स मंच पर आया और भाषण देते हुए हार्दिक पटेल के गाल पर थप्पड़ जड़ दिया. अचानक … Read more

जयपुर ग्रामीण सीट पर जातिगत समीकरणों में उलझे राठौड़-पूनिया

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लोकसभा चुनाव में राजस्थान की हॉट सीट में शुमार जयपुर ग्रामीण सीट से देश के दो दिग्गज खिलाड़ी राजनीति के मैदान में आमने-सामने हैं. बीजेपी ने यहां वर्तमान सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को फिर से मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने चूरू के सादुलपुर से विधायक कृष्णा पूनिया पर भरोसा जताया है. जयपुर ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र में कोटपूतली, बानसूर, विराटनगर, शाहपुरा, जमवारामगढ़, झोटवाड़ा, आमेर और फुलेरा विधानसभा क्षेत्र हैं.

यहां जातीय समीकरण चुनाव के नतीजों पर भारी रहते हैं. ऐसे में राठौड़ के लिए यहां फिर से कमल खिलाना आसान नहीं लग रहा है. जातीय गणित पर गौर करें तो जयपुर ग्रामीण सीट आमतौर पर जाट बाहुल्य मानी जाती है. यहां की जनसंख्या करीब 12 लाख के करीब है. यहां साढ़े 4 लाख जाट, 1 लाख 60 हजार गुर्जर, 1 लाख 50 हजार यादव, एक लाख मुस्लिम वोटर हैं. वहीं तीन लाख से अधिक एसटी-एससी मतदाता मौजूद हैं. जाट बाहुल्य सीट होने से यहां जाटों का प्रतिनिधित्व भी ज्यादा महत्व रखता है.

साल 2009 में परिसीमन के बाद बनी जयपुर ग्रामीण सीट से कांग्रेस प्रत्याशी लालचंद कटारिया से बीजेपी के राव राजेन्द्र सिंह का मुकाबला हुआ था जिसमे कटारिया ने लगभग 51 हजार मतों से जीत हासिल की थी और केंद्र में मंत्री बनाए गए थे. 2014 में हुए लोकसभा के चुनांव में मोदी लहर के चलते लालचंद कटारिया चुनावी मैदान में नहीं उतरे. उनकी जगह कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी जोशी को उतारा, जिन्हें भाजपा के प्रत्याशी राज्यवर्द्धन सिह राठौड़ से करीब सवा तीन लाख वोटों से करारी हार मिली. इस जीत ने राजनीति में नए नवेले राठौड़ को सीधे दिल्ली का टिकट दे दिया और केंद्र मंत्री की सीट भी संभला दी.

जातिगत समीकरणों का सीधा-सीधाअसर विधानसभा सीटों पर भी देखा जा सकता है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम पर एक नजर डाले तो वर्तमान में शाहपुरा से निर्दलीय आलोक बेनीवाल, आमेर से सतीश पूनिया और झोटवाड़ा से लालचन्द कटारिया सहित तीन जाट विधायक हैं. कांग्रेस से दो गुर्जर विधायक इंद्र राज गुर्जर, शकुंतला रावत और एक यादव विधायक है. अगर बात करें 2013 के विधानसभा चुनावों की तो कांग्रेस के टिकट पर कोटपूतली से राजेन्द्र यादव और बानसूर से शकुंतला रावत विजयी होकर विधानसभा पहुंचे जबकि शाहपुरा से राव राजेन्द्र, विराटनगर से फूलचंद भिंडा, जमवारामगढ़ से जगदीश नारायण मीणा, फुलेरा से निर्मल कुमावत, झोटवाड़ा से राजपाल सिंह बीजेपी खेमे से जीते. आमेर से किरोड़ी लाल मीणा की पार्टी से नवीन पिलानिया विजयी रहे थे.

अब बात करें वर्तमान लोकसभा चुनावों की तो पहली बार चुनाव लड़कर केंद्र सरकार में पहुंचे राज्यवर्धन सिंह के लगातार बढ़ रहे कद और पॉपुलर्टी को देखते हुए कांग्रेस ने जातिगत रणनीति के साथ मैडल खेल खेलना ही उचित समझा. इसलिए सोची समझी रणनीति के तहत जाट नेता और ओलंपिक मैडल विजेता कृष्णा पूनिया को इस सीट से उतारा. इसके बाद मुकाबला जितना लग रहा था, राठौड़ के लिए उससे कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है. विधानसभा चुनावों में विराटनगर सीट पर दूसरे व तीसरे नम्बर रहे कुलदीप धनकड़ और फूलचंद भिंडा जाट समाज से आते हैं. ऐसे में पूनिया का पलड़ा और भारी होते नजर आ रहा है.

स्थानीय राजनीतिक जानकारों का तो यहां तक मानना है कि गुर्जर नेता होने के कारण अगर खुद सचिन पायलट इस सीट पर आकर कृष्ण पूनिया का समर्थन करते हैं तो गुर्जर वोट बैंक भी पूनिया को मिल जाएगा और जीत निश्चित होती नजर आएगी. ग्रामीण क्षेत्र की इस सीट पर पेयजल की समस्या को देखते हुए वैसे भी इस क्षेत्र की जनता राठौड़ से थोड़ी नाराज है जिसका फायदा भी पूनिया को मिल सकता है. इन सबसे अलावा, कृष्णा पूनिया को एक महिला और स्थानीय होने का फायदा मिलेगा, इसमें तो कोई संशय नहीं होना चाहिए. क्षेत्र में सांसद कोष की पूरी राशि का इस्तेमाल न किए जाने की खबरों से भी राठौड़ को थोड़ी परेशानी हुई है. यही वजह है कि राज्यवर्धन ने अपने चुनावी प्रचार की शुरूआत कोटपुतली और विराटनगर से की है ताकि जनता का रूख जान सकें.

इन सब बातों को देखते हुए अब बीजेपी के पास दलित वोट बैंक हथियाने के अलावा कोई रास्ता शेष नहीं बचा है लेकिन यह आसान काम नहीं है. खैर, जो भी हो परिणाम अगले महीने में सामने आ ही जाएगा. उससे पहले तो चुनावी प्रचार और शक्ति प्रदर्शन के जरिए ही परिणाम सोचना जाना ठीक है. लेकिन फिर भी पिछले लोकसभा चुनावों में आशा के विपरित राठौड़ के सामने सीपी जोशी का जो हश्र हुआ था, उसे देखते हुए पूनिया के आने के बाद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में एक जोश का संचय तो हुआ ही है.