चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, योगी-मायावती नहीं कर सकेंगे प्रचार

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चुनाव आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ और बसपा सुप्रीमो मायावती पर प्रचार पर रोक लगाने को कहा है. 16 अप्रैल को सुबह 6 बजे से शुरू होने वाली चुनाव आयोग ये रोक योगी आदित्यनाथ के लिए 72 घंटे और मायावती के लिए 48 घंटे के लिए लागू होगी. आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में चुनाव आयोग ने यह सख्त कदम उठाया है. इस दौरान योगी आदित्यनाथ और मायावती ना ही कोई रैली को संबोधित कर पाएंगे, ना ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर पाएंगे. इसके अलावा दोनों नेता किसी को इंटरव्यू भी नहीं दे पाएंगे. बता दें … Read more

लेखी की शिकायत पर राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने थमाया अवमानना नोटिस

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लोकसभा चुनाव अभी शुरू ही हुए हैं लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी​ फिर एक बार मुसीबत में फंसते नजर आ रहे हें. दरअसल, भारतीय जनता पार्टी की (बीजेपी) सांसद मीनाक्षी लेखी ने शुक्रवार को राफेल डील मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की अपील की थी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को अवमानना प्रकरण में नोटिस जारी किया है. मीनाक्षी लेखी ने अपनी याचिका में कहा, ‘राहुल गांधी ने अपनी निजी टिप्पणियों को शीर्ष न्यायालय द्वारा किया गया बताया और लोगों के मन में गलत धारणा पैदा करने की कोशिश की. मीनाक्षी … Read more

आज नामांकन दाखिल करेंगे भाजपा-कांग्रेस के कई दिग्गज

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दो दिन की छुट्टी के बाद सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी नामांकन दाखिल कराने की होड़ में लग गए हैं. राजस्थान में भी दिग्गजों के नामांकन दाखिल कराने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. इस सूची में जयपुर शहर से बीजेपी प्रत्याशी रामचरण बोहरा रामचरण बोहरा और कृष्णा पूनिया सहित कई दिग्गज शामिल हैं जो आज अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे. सबसे पहले बात करें बोहरा की तो नामांकन से पहले उनके समर्थन में बीजेपी मुख्यालय में एक जनसभा रखी गई है जिसे पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे सहित अन्य बीजेपी नेताओं ने सभा को संबोधित किया. यहां राजे ने कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा. सभा के बाद बोहरा अपना नामांकन … Read more

दौसा में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा दरकिनार, जसकौर मीणा को मिला टिकट

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दौसा लोकसभा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार को लेकर कई दिनों से जारी संस्पेंस खत्म हो गया है. पार्टी ने राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को दरकिनार करते हुए पूर्व मंत्री जसकौर मीणा को प्रत्याशी घोषित कर दिया है. आपको बता दें कि बीते बुधवार को मीडिया में यह खबर सामने आई थी कि पार्टी ने जसकौर मीणा को टिकट दे दिया है, लेकिन इसकी अधिकृत घोषणा नहीं हुई. हालांकि प्रदेश बीजेपी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर जसकौर मीणा को उम्मीदवार बनाने की सूचना साझा की गई, जिसे बाद में हटा लिया गया. इस बीच जसकौर ने दावा किया कि पार्टी ने उन्हें चुनाव की तैयारी करने की सूचना के … Read more

राजनीति के ‘जादूगर’ ने की मोदी के मंत्रियों की घेराबंदी

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की रणनीति के चलते गजेंद्र सिंह शेखावत, पीपी चौधरी, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और अर्जुनराम मेघवाल की घर में ही घिर गए हैं. मोदी के इन अप्रत्यक्ष चेहरों को घर में ही घेरने के लिए कांग्रेस के वार रूम में खास रणनीति बनी है और इस पूरी रणनीति के पीछे जादूगर कहे जाने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही है. यही कारण है कि स्टार प्रचारकों में शामिल ये पांचों मंत्री अभी तक अपने संसदीय क्षेत्र में ही अटके हुए हैं. पाली से पीपी चौधरी और बीकानेर से अर्जुन मेघवाल, जयपुर ग्रामीण से राज्यवर्धन और जोधपुर से गजेन्द्र सिंह मोदी की कैबिनेट के वो चेहरे हैं जो राजस्थान में चुनाव लड़ रहे हैं.

दूसरी ओर, लोकसभा चुनाव में अपनी जीत को लेकर बीजेपी दावा कर रही है कि देशभर में पार्टी का एक ही प्रत्याशी चेहरा है नरेंद्र मोदी. वजह है – भाजपा को लगता है कि प्रत्याशी की बजाय नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ने से फायदा होगा ताकि अगर कहीं प्रत्याशी को लेकर कोई विरोध है तो उसे मोदी के नाम पर डायवर्ट कर संभावित नुकसान को भरा जा सकता है. इसको दूसरे लिहाज से देखा जाए तो मोदी की कैबिनेट के सदस्य जहां से चुनाव लड़ रहे हैं वो निश्चित रूप से नरेंद्र मोदी कहे जा सकते हैं

गजेंद्र सिंह शेखावत:
जोधपुर से कांग्रेस के पास ऐसा कोई चेहरा नहीं था जो गजेन्द्र सिंह का मुकाबला कर सके. इसी वजह से यहां खुद मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव गहलोत को मैदान में उतारा गया. इसका कारण था कि जोधपुर में अशोक गहलोत खुद का प्रभाव तो है ही, मुख्यमंत्री होने के चलते वोटों का ध्रुवीकरण करने में भी मदद मिलेगी. अब इस बात का कितना फायदा मिलेगा या नहीं यह तो परिणाम बताएगा, लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस ने अपनी पहली रणनीति जो कि गजेन्द्र सिंह को घर में ही घेरने की थी उसमें सफलता हासिल कर ली.

पीपी चौधरी:
साल 2009 के लोकसभा चुनावों में पाली से पहली बार सांसद चुने गए बद्रीराम जाखड़ ने पुष्प जैन को हराया था. तब उन्होंने 54 प्रतिशत से भी ज्यादा मत हासिल किए थे, लेकिन अगले चुनाव में कांग्रेस ने और भाजपा ने अपने प्रत्याशी क्रमश: बद्री जाखड़ की बेटी और पीपी चौधरी के रूप में बदले तो चौधरी ने 62 प्रतिशत मत हासिल करते हुए चार लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की। लेकिन इस बार खुद के घर में ही मोदी के मंत्री चौधरी घिर गए हैं.

टिकट वितरण से पहले जहां खुद की पार्टी के लोग ही उनकी टिकट कटवाने में लगे हुए थे. इसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने फिर एक बार बद्री जाखड़ पर दांव खेला है. पाली लोकसभा क्षेत्र के 8 विधानसभा क्षेत्र में तीन जोधपुर जिले में आते हैं. ओसियां, बिलाड़ा और भोपालगढ़ तीनों ही जाट बहुल क्षेत्र हैं. लेकिन भोपालगढ़ और बिलाड़ा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो जाने से वहां जाट चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं. लेकिन जाट समाज का दबदबा इन सीटों पर पहले से ही रहा है और इसी कारण पाली लोकसभा क्षेत्र से अपनी दावेदारी जता रहे है. यही कारण है कि सीरवी जाति से आने वाले पीपी चौधरी के सामने कांग्रेस ने जाट चेहरे को मैदान में उतारकर दांव खेलते हुए कहीं ना कही भाजपा की अंदरखाने के विरोध को हवा देते हुए चौधरी को घर में ही घेर लिया है.

राज्यवर्धन सिंह राठौड़:
पिछले लोकसभा चुनाव में निशानेबाज राज्यवर्धन ने जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता सीपी जोशी को बड़े अंतर से हराकर राजनीति का पहला मैच न केवल बड़ी आसानी से जीता, बल्कि मोदी के कैबिनेट में मंत्री भी बने. मूल रूप से बीकानेर के लूणकरनसर तहसील के गारबदेसर गांव के राज्यवर्धन पहली बार सांसद का चुनाव लड़े तो 62 फीसदी वोट हासिल किए. हालांकि मोदी लहर के साथ ही कहीं ना कहीं राज्यवर्धन की सेना के कर्नल से ज्यादा खिलाड़ी की छवि उनको जिताने में महत्वपूर्ण रही. यही वजह रही कि एक-एक सीट पर विचार मंथन कर टिकट बांटने वाली कांग्रेस का सबसे वाला चौंकाने वाला नाम जयपुर ग्रामीण पर रहा. राज्यवर्धन के मैडल जीतकर देश का नाम बढ़ाने वाली छवि का तोड़ भी कहीं न कहीं कांग्रेस ने उसी रूप में ढूंढ़ा और आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने को लेकर महिला के रूप में डिस्क्स थ्रोअर कृष्णा पूनियां को मैदान में उतारा।

राठौड़ और पूनियां दोनों ही कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने-अपने खेल में गोल्ड जीत चुके हैं. यहां से लालचंद कटारिया और रामेश्वर डूडी के नाम ज्यादा चर्चा में थे, लेकिन कटारिया चुनाव लडऩा नहीं चाहते थे और डूडी रणनीति के हिस्से में फिट नहीं बैठे. इसलिए कांग्रेस ने एनवक्त पर कृष्णा पूनियां का नाम घोषित कर सबको चकित कर दिया. बात दें, मीडिया की सुर्खियों से लेकर पैनल में कहीं भी कृष्णा पूनियां का नाम नहीं था.

अर्जुनराम मेघवाल:
बीकानेर में लगातार तीन बार जीतने का रिकॉर्ड भाजपा के पास रहा है. हालांकि पूर्व महाराजा करणीसिंह यहां से लगातार पांच बार जीते लेकिन कांग्रेस-भाजपा की बात करें तो कांग्रेस भी लगातार तीन बार यहां से जीत नहीं पाई. अलबत्ता कांग्रेस के मनफूल सिंह भादू तीन बार बीकानेर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. जाट और एससी बहुल मानी जाने वाली इस सीट पर परिसीमन से पहले जाट और राजपूत समाज का ही कब्जा रहा और दूसरी कोई जाति का यहां सांसद नहीं बना। लेकिन 2009 में सुरक्षित सीट होने के बाद आईएएस से राजनीति में आए अर्जुन मेघवाल जीते और अब तीसरी बार जीत की हैट्रिक की उम्मीद को लेकर मैदान में है।

इस बार एक रणनीति के तहत काम कर रही कांग्रेस ने यहां से अर्जुन के ही मौसेरे भाई और पूर्व आईपीएस मदन मेघवाल को मैदान में उतारा है. जाट नेता रामेश्वर डूडी की पसंद के रूप में मदन मेघवाल को उतारकर कांग्रेस ने जाट वोटों को ध्रुवीकरण करने की कोशिश तो की ही है. जिले के दो मंत्रियों डॉ. बीडी कल्ला के सहारे ब्राह्मण वोटों पर सेंध और भंवरसिंह भाटी के जरिये राजपूत वोटों में सेंध लगाने का भी प्रयास किया है. वहीं कद्दावर नेता देवीसिंह भाटी की अर्जुन मेघवाल को लेकर हुई नाराजगी को भी कांग्रेस इन्कैश करने में लगी हुई है.
बीकानेर लोकसभा सीट को लेकर कांग्रेस कितनी सक्रिय है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आचार संहिता लगने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट 5 विधानसभा सीटों पर दौरा कर सभाएं कर चुके हैं. वहीं अंदखाने में खुद कांग्रेस में हुए विरोध को अपने बीकानेर दौरे के दौरान रात्रि विश्राम बीकानेर में करते हुए गहलोत ने सैटल कर दिया है. उस दौरे के बाद विरोध के स्वर गायब हो गए हैं.

कुल मिलाकर ये सारे समीकरण बता रहे हैं कि प्रचार के मामले में भाजपा को पछाड़ते हुए मोदी के चारों मंत्रियों को कांग्रेस ने घर में ही उलझा कर रख दिया है. अब देखने वाली बात यह होगी कि सत्ता के इस खेल में राजनीति के जादूगर अशोक गहलोत के ये दांव निशाने पर लग पाते हैं या नहीं. लेकिन इतना जरूर है कि कांग्रेस की सक्रियता के बाद इन मंत्रियों का स्टार प्रचारक के रूप में अन्य सीटों पर निकलना संभव नहीं लग पा रहा है.

राहुल बाबा बताएं कि बिना MA कैसे कर ली M.Phil: जेटली

राजनीति में एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए बयानबाजी का दौर चलता रहता है. मौका पड़ने पर कोई भी इसमें पीछे नहीं रहना चाहता. अभी अमेठी से भाजपा प्रत्याशी और केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्री को लेकर बयानबाजी थमीं ही नहीं थी, एक और नेता ‘डिग्री दिखाओ’ के सवाल से घिर गए हैं. हम बात कर रहे हैं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अमेठी से ही कांग्रेस प्रत्याशी राहुल गांधी की. वरिष्ठ भाजपा नेता और केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली ने राहुल गांधी की एमफिल की डिग्री को लेकर सवाल खड़े किए हैं. भाजपा के वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली ने राहुल गांधी की डिग्री पर सवाल उठाते … Read more

बीकानेर में अर्जुन मेघवाल की तीसरी जीत में अपने ही लगा रहे अडंगा

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चुनाव सिर पर हैं तो राजनीतिक पार्टियों में आपसी फूट और आतंरिक नाराजगी कोई नई बात नहीं है. यही वजह है कि लोकसभा सीटों पर चुनावों में उतरे प्रत्याशियों को प्रतिद्वंद्वी से कम और अपने ही लोगों से अधिक खतरा है. बीकानेर सीट पर ही कुछ यही हाल है जहां बीजेपी के प्रत्याशी अर्जुनराम मेघवाल मछली की आंख पर सटीक निशाना लगाएं, उससे पहले खुद ही अपनों का निशाना बनते जा रहे हैं. यहां से दो बार के सांसद अर्जुनराम मेघवाल लाख विरोध के बावजूद फिर से तीसरी बार मैदान में हैं. वह एक दलित नेता हैं और बीजेपी ने फिर से उन पर दांव खेला है. वहीं तीन बार … Read more

यूपी में अधपके चावल दे रहे राजनीति के मंझे खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर

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इस बार का लोकसभा चुनाव कई मायनों में पिछले चुनावों के मुकाबले दिलचस्प होगा. इसकी वजह है कि उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में कई ऐसी सीटें हैं, जहां नए खिलाड़ी राजनीति में मंझे दिग्गजों को टक्कर देते नजर आ रहे हैं. सियासी दंगल के ये नए खिलाड़ी कहीं तो राजनीति की लंबी पारी खेल चुके खिलाड़ियों को चुनौती देंगे तो कहीं उनके आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. हालांकि चुनावी परिणाम में थोड़ा समय शेष है लेकिन मुकाबला कहीं मायनों में मजेदार हो गया है. आइए जानत हैं ऐसी ही कुछ लोकसभा सीटों के बारे में … आजमगढ़ मुलायम सिंह यादव की इस परम्परागत सीट पर फिर … Read more

शिवराज के तीन मंत्रियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में कमलनाथ सरकार

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मध्यप्रदेश के बहुचर्चित ई-टेंडर घोटाले में ओस्मो कंपनी के संचालकों की गिरफ्तारी के बाद और कई खुलासे होने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई नेता, अफसर और ठेकेदारों के नाम सामने आएंगे. सरकार ने इस मामले में 2014 से लेकर अब तक के साढ़े तीन लाख टेंडरों की जांच कराने का फैसला किया है. आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू 2015 से लेकर 2018 तक के टैंडर्स की जांच विशेष रूप से करेगी.

ईओडब्ल्यू ने मैप आईटी से सभी टेंडरों का ब्यौरा मांगा है. माना जा रहा है कि साढ़े तीन लाख टेंडरों में हजारों ऐसे टेंडर हैं, जिसमें इसी कंपनी के जरिए फर्जीवाड़ा किया गया है. उसे आशंका है कि ये घोटाला अरसे से चल रहा था. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और कई बड़े खुलासे होने के साथ शिवराज सरकार के तीन मंत्री जांच के दायरे मेें आ गए हैं. इसके साथ भाजपा के कई नेताओं, अफसरोंं और कई बड़े कांट्रेक्टर्स के नाम सामने आने के आसार हैं.

आपको बता दें कि शिवराज सरकार के दौरान 2014 में ई-टेंडरिंग व्यवस्था की शुरुआत हुई थीं. उस समय विधानसभा में कांग्रेस ने इस मामले को बड़े जोर-शोर उठाया था. जांच की मांग की थी. कमलनाथ द्वारा 14 जून 2018 को तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह को पत्र लिखकर इस घोटाले की जांच कराने व दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी, लेकिन जांच नहीं हो पाई.

सूबे में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद यह कयास लगाया जा रहा था कि इस मामले की जांच होगी. इसकी सुगबुगाहट कई दिनों से थी, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ और उनके पूर्व सलाहकार आरके मिगलानी के कई ठिकानों पर आयकर विभाग के छापों के बाद सब कुछ फटाफट हुआ. गुरुवार ईओडब्ल्यू की टीम ने भोपाल की सॉफ्टवेयर कंपनी ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड पर छापा मारा और उसके तीन डायरेक्टरों को गिरफ्तार किया.

ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड सरकार के ई-टेंडरिंग पोर्टल में ऑनलाइन टेंडरिंग प्रोसेस में तकनीकी और सॉफ्टवेयर के लिए मदद करती थी. ईओडब्ल्यू को शक है कि कंपनी ने पहले भी इसी तरीके से दूसरे टेंडरों में भी घोटाला किया होगा. एक-दो दिन में पुराने टेंडरों के खुलासे होने के आसार हैं.

शिवराज के तीन प्यादे घेरे में

घोटाले में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब शिवराज सरकार में मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा, कुसुम मेहदेले और रामपाल भी जांच के दायरे में आ गए हैं. जिन पांच विभागों के 9 टेंडरों में 3000 करोड़ का ई-टेंडरिंग घोटाला हुआ है, उन विभागों की जिम्मेदारी कुसुम मेहदेले, नरोत्तम मिश्रा और रामपाल पर थी. ईओडब्ल्यू ने मामले में अज्ञात राजनेताओं पर एफआईआर दर्ज की है. ईओडब्ल्यू के मुताबिक जल निगम और पीएचई में सबसे ज्यादा घोटाला हुआ है. पीएचई विभाग की तत्कालीन मंत्री कुसुम मेहदले ने इस मामले का ठीकरा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर फोड़ा है. मेहदले ने कहा कि पेयजल के लिए एक हजार करोड़ रुपए के ई-टेंडर पर उन्होंने नहीं बल्कि शिवराज सिंह चौहान ने हस्ताक्षर किए थे. मेहदले ने कहा कि यह टेंडर पीएचई से नहीं बल्कि जल निगम से जारी किए गए थे.

किस विभाग में कितने का घोटाला

जानकारी के मुताबिक जल निगम में 1800 करोड़, सडक़ विकास निगम में 8 करोड़, लोक निर्माण विभाग में 14 करोड़, जल संसाधन विभाग में 1135 करोड़ और पीआईयू में 15 करोड़ का ई-टेंडरिंग घोटाला हुआ है. इस मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद गुरुवार को मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने सुबह ही संबंधित विभागों के अफसरों को तलब किया और मामले से जुड़ी फाइलें बुलवाई. इसके साथ ही विभागों के प्रोजेक्ट संबंधित जानकारी भी अफसरों से मांगी गई है. कमलनाथ सरकार इस मामले में एक्शन में दिख रही है. सीएम अपने स्तर पर भी इस मामले की जांच करवा रहे हैं. एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद अफसरों को आरोप पत्र भी जारी करने की तैयारी है.