पीएम मोदी को वाराणसी में टक्कर देंगे कांग्रेस के अजय राय

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कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव को लेकर दो उम्मीदवारों की सूची जारी की है. वाराणसी से कांग्रेस ने अजय राय और गोरखपुर से मधुसूदन तिवारी को प्रत्याशी बनाया है. वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं. यहां से प्रियंका गांधी वाड्रा के चुनाव लड़ने की संभावना थी लेकिन पार्टी ने अब यहां से अजय राय को उम्मीदवार बनाया है. अजय राय 2014 में भी वाराणसी से कांग्रेस के प्रत्याशी थे. अजय राय पिंडरा विधानसभा से पांच बार विधायक रह चुके है. यहां सपा- बसपा गठबंधन ने शालिनी यादव को प्रत्याशी बनाया है. Congress Central Election Committee announces the next list of candidates for the ensuing elections to the … Read more

प्रधानमंत्री मोदी का वाराणसी में शक्ति प्रदर्शन, कल करेंगे नामांकन दाखिल

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज दोपहर 3 बजे से वाराणसी में रोड शो कर शक्ति प्रदर्शन करेंगे. रोड शो से पहले पीएम मोदी बनारस हिंदू विश्वविद्याल में पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे. इसके बाद बीएचयू के बाहर से रोड शो की शुरुआत करेंगे. मोदी ने पिछले लोकसभा चुनाव में वाराणसी के साथ गुजरात की वड़ोदरा सीट से चुनाव लड़ा था जहां दोनों सीटों से उन्हें विजयश्री हासिल हुई. बाद में उन्होंने वड़ोदरा सीट छोड़ दी थी. बात करें रोड शो की तो पांच किमी. लंबे इस रोड शो के दौरान एनडीए और बीजेपी के तमाम बड़े नेता मौजूद रहेंगे. इस मौके पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय … Read more

राजसमंद में जातीय समीकरणों को साधने में जुटे दीया-देवकी

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कहते हैं कि जिसने घर साधा, उसने सब साधा. राजसमंद लोकसभा सीट के सियासी संग्राम में यही बात चरितार्थ होती दिख रही है. इस सीट पर राजपूत और जाट कॉकटेल जीत की गारंटी होती है. ये बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि पिछले दो चुनावों के आंकड़े ये साबित करते हैं. चुनावी बिसात बिछने से पहले बड़े-बड़े मुद्दों पर जुबानी जंग छिड़ी हुई थी लेकिन बाद में विकास, रोजगार, रेल, पानी जैसे मुद्दे गौण हुए और फिर से राजनीति की गाड़ी जातिगत ट्रैक पर पहुंच गई.

राजनीति में जाति के ट्रैक पर चलकर देश की सबसे बड़ी पंचायत तक पहुंचने तक का सफर सबसे आसान माना जाता है. ऐसे में बड़े-बड़े दावे करने वाली विभिन्न राजनीतिक पार्टियां भी जाति को ही जहन में रखकर प्रत्याशियों पर दांव खेलती नजर आती हैं. राजसमंद संसदीय सीट पर गहन मंथन के बाद बीजेपी ने जयपुर की राजकुमारी दीया कुमारी पर दांव खेला हालांकि विपक्षी उन्हें बाहरी प्रत्याशी बताकर माइलेज लेने की कोशिश कर रहे हैं. अगर जातिगत आंकड़ों की बात करें तो पलड़ा दीया कुमारी के पक्ष में काफी हद तक झुकता दिख रहा है.

राजसमंद लोकसभा क्षेत्र में करीब 19 लाख मतदाता मतदाता है जिनमें करीब दो लाख से ज्यादा रावत, पौने दो लाख जाट, पौने दो लाख राजपूत, सवा लाख ब्राह्मण, ढाई लाख के करीब एससी-एसटी, करीब एक लाख महाजन, एक लाख मुस्लिम, 57 हजार कुमावत, 55 हजार गुर्जर, 60 हजार खरबड़, 29 हजार काठात के अलावा चार लाख अन्य मतदाता भी हैं. इस बार 39 हजार नए वोटर्स भी इस लिस्ट में शामिल हुए हैं.

इन आंकड़ों पर गौर करें तो यहां रावत, राजपूत और खरबड़ वोटों को आंकड़ा साढे चार लाख के उपर है. इस लिहाज से, जिसने रावत-राजपूत वोटों को साध लिया, उसने मैदान मार लिया. आमतौर पर रावत समाज को बीजेपी का वोट बैंक माना जाता है. देवगढ़, भीम और ब्यावर में इनका बाहुल्य है जहां दोनों ही पार्टियां इन्हें अपने पक्ष में करने में जुटी हैं. लेकिन एससी और जाट समीकरण खेल बना और बिगाड़ सकता है.

बीजेपी से भीम-देवगढ़ के पूर्व विधायक हरिसिंह रावत टिकट मांग रहे थे लेकिन पार्टी ने दीया कुमारी को उनपर तरजीह दी. हालांकि हरिसिंह को इस बार विधानसभा चुनाव में सुदर्शन सिंह के हाथों शिकस्त खानी पड़ी थी. अब उन्होंने दीया कुमारी के समर्थन में चुनाव प्रचार का मोर्चा संभाल रखा है. कांग्रेस से वर्तमान विधायक सुदर्शन सिंह रावत के पिता लक्ष्मण सिंह रावत टिकट मांग रहे थे लेकिन पार्टी ने राजसमंद जिलाध्यक्ष देवकीनंदन गुर्जर पर दांव खेल दिया. वैसे भी माना जाता है कि देवकीनंदन गुर्जर सीपी जोशी के खेमे से आते हैं जिनकी लक्ष्मण सिंह से अदावत जग जाहिर है.

राजसमंद लोकसभा सीट राजसमंद, अजमेर, नागौर और पाली जिले के कई हिस्सों को मिलाकर बनी है. यह सीट मेवाड़ और मारवाड़ के मध्य की सीट है जिसके एक तरफ नागौर, दूसरी तरफ पाली और तीसरी तरफ अजमेर संसदीय सीट है. यहां 29 अप्रैल को मतदान होना है. यहां तीसरी बार चुनाव होने जा रहा है. पिछले दो चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने एक-एक बार इस सीट पर कब्जा जमाया है.

इस संसदीय सीट में आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिनमें नाथद्वारा, राजसमंद, कुंभलगढ़, भीम, ब्यावर, जैतारण, मेड़ता और डेगाना शामिल हैं. 467 किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में करीब 19 लाख मतदाता हैं जिनमें 81.94 फीसदी ग्रामीण और 18.06 फीसदी शहरी मतदाता शामिल है. कुल आबादी का 23 फीसदी हिस्सा एससी-एसटी का है. इसके बाद भी दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की नजरें रावत वोट बैंक पर ही गढ़ी हुई है जिसके जरिये देश की सबसे बड़ी पंचायत की सीढ़ी को लांघा जा सके.

‘मोदी बायोपिक’ रिलीज पर रोक बरकरार, चुनाव आयोग ने बताया ‘हैजियोग्राफी’

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लोकसभा चुनाव में आदर्श आचार संहिता की कड़ाई से पालना को लेकर निर्वाचन आयोग का कड़ा रूख देखा जा रहा है. नेताओं के विवादित बयानों पर सख्ती दिखाने के साथ-साथ पीएम नरेंद्र मोदी पर आधारित वेब सीरीज पर भी आयोग की गाज गिर चुकी है. इसके अलावा विवेक ओबरॉय स्टारर पीएम नरेंद्र मोदी की बायोपिक की रिलीज भी फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने बायोपिक देखकर इसे ‘हैजियोग्राफी’ दिया है और मतदान तक रिलीज पर रोक बरकरार रखी है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ पर आचार संहिता के उल्लंघन को देखते हुए रिलीज पर रोक बरकरार रखी गई … Read more

गुजरात में पीएम मोदी के रोड़ शो पर चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट

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अहमदाबाद में तीसरे चरण के मतदान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोड़ शो के मामले में चुनाव आयोग ने गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट तलब की है. कांग्रेस ने चुनाव आयोग में इस मामले को लेकर शिकायत की थी. साथ ही चुनाव आयोग से मांग की थी कि पीएम मोदी के चुनाव प्रचार पर 72 घंटे की रोक लगाई जाएं. बता दें कि तीसरे चरण में गुजरात की सभी सीटों के लिए वोट डाले गऐ थे. इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी वोट डालने अहमदाबाद पहुंचे थे. वोट देने के बाद पीएम मोदी ने यहां खुली जीप में यात्रा की थी और कुछ देर वो पैदल भी चले … Read more

चुनावी परिणाम खराब तो छिनेंगे पद, कटेंगे टिकट: कैप्टन अमरिंदर

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देश में लोकसभा चुनाव का रोमांच चरम पर है. हर दल अपने प्रदर्शन को लेकर चिंतित है. बीजेपी सत्ता में बरकरार रहना चाहती है वही कांग्रेस सत्ता में वापसी को बेकरार है. चुनाव जीतने की कोशिश में दोनों दल किसी भी प्रकार की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. कांग्रेस को पंजाब से सबसे ज्यादा उम्मीद है. यहां साल 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस भारी बहुमत के साथ प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई थी. अब पार्टी इन लोकसभा चुनाव में साल 2017 का प्रदर्शन दोहराना चाहती है. इसे लेकर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर ने खास रणनीति बनाई है. पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी सरकार के सभी मंत्रियों … Read more

साध्वी प्रज्ञा को राहत, कोर्ट ने खारिज की चुनाव लड़ने पर रोक की याचिका

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मालेगांव बम धमाकों की आरोपी और भोपाल से बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा को एनआईए कोर्ट ने राहत दी है. कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर चुनाव लड़ने से रोकने की याचिका को खारिज किया है. मुंबई की एनआईए कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने अपना हस्ताक्षर ही नहीं किया है. याचिकाकर्ता के वकील की ओर से कोर्ट में कहा गया कि साध्वी प्रज्ञा को स्वास्थ्य के आधार पर जमानत दी गई है. लेकिन वो आराम से चुनाव प्रचार कर रही है. साध्वी ने एक इंटरव्यू में भी अपने सेहत में सुधार होने की बात को स्वीकारा है. साध्वी के खिलाफ मालेगांव धमाकों के … Read more

ग्राउंड रिपोर्ट: उदयपुर सीट पर मोदी के शोर में दबे स्थानीय मुद्दे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात से सटी उदयपुर सीट पर लोगों की जुबान से स्थानीय मुद्दे गायब हैं और मोदी का शोर है. ‘पॉलिटॉक्स’ ने यहां के सैकड़ों लोगों से बात की और ज्यादातर ने मोदी को वोट देने की बात कही. इनमें से कई ने मौजूदा सांसद अर्जुनलाल मीणा के कामकाज को अच्छा नहीं बताया, फिर भी मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए उन्हें फिर से वोट देने की बात कही. 
 
जनता के इस रुख से बीजेपी उम्मीदवार अर्जुन मीणा का चेहरा चमका हुआ है और कांग्रेस प्रत्याशी रघुवीर मीणा मायूस हैं. एक दौर था जब यह सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी. अब तक हुए 16 चुनाव में कांग्रेस ने 10 बार जीत दर्ज की है लेकिन ये आंकड़े रघुवीर मीणा का हौसला नहीं बढ़ा रहे. कांग्रेस के कार्यकर्ता खुले मन से यह स्वीकार कर रहे हैं कि मुकाबले में पार्टी की स्थिति कमजोर है.
 
डॉ. सीपी जोशी और गिरिजा व्यास की नाराजगी के चलते रघुवीर मीणा अकेले ही चुनाव की कमान संभाले हुए हैं. रही-सही कसर विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर जीत दर्ज कर सबको चौंका देने वाली भारतीय ट्राइबल पार्टी यानी बीटीपी की सक्रियता ने पूरी कर रखी है. बीटीपी ने बिरधी लाल को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस को यह आशंका है कि बिरधी लाल आसपुर और खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्रों में रघुवीर मीणा के वोट बैंक में सेंध लगाएंगे.
 
मतदान से पहले ही खुद को मुकाबले से बाहर मान रही कांग्रेस संघर्ष की स्थिति तक पहुंचने के जतन कर रही है. पार्टी के उम्मीदवार रघुवीर मीणा को यह डर सता रहा है कि पिछले चुनाव की तरह मुकाबला एक तरफा नहीं हो जाए. आपको बता दें कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के अर्जुन मीणा ने कांग्रेस के रघुवीर मीणा को 2,36,762 मतों के भारी अंतर से पराजित किया था. अर्जुन को 6,60,373 वोट तो रघुवीर को 4,23,611 वोट मिले थे. 
 
अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित यह सीट आदिवासी बाहुल्य है. यहां लगभग 20 लाख मतदाता हैं. इनमें 55 से 60 प्रतिशत एसटी वर्ग, 10 प्रतिशत ओबीसी, 7 प्रतिशत ब्राह्मण, 6 प्रतिशत राजपूत और 5 प्रतिशत अल्पसंख्यक वर्ग के वोटर हैं. पहले के चुनावों के ट्रेंड पर नजर डालें तो राजपूत, ब्राह्मण, वैश्यों का झुकाव बीजेपी के पक्ष में और जाट, गुर्जर, मीणा और दलितों का झुकाव कांग्रेस के पक्ष में रहा है. वहीं अनुसूचित जनजाति और पिछड़ी जातियों का मत स्थानीय समीकरण के हिसाब से दोनों दलों में बंटता रहा है. 
 
उदयपुर लोकसभा की 8 विधानसभा सीटों में से 5 सीटों पर भी आदिवासी मीणा समुदाय के वोटर सर्वाधिक हैं. बीटीपी के मुकाबले में आने के बाद मीणा आदिवासी समाज के वोट तीन जगह बंटते हुए दिखाई दे रहे हैं. तीनों दल इसमें से ज्यादा संख्या अपने पक्ष में करने के लिए पसीना बहा रहे हैं. बीजेपी को उम्मीद है कि आदिवासी वोट बराबर बंटने पर भी उसका पलड़ा भारी रहेगा, क्योंकि बाकी जातियों के एकमुश्त वोट उसे मिलेंगे. 
 
बीजेपी उम्मीदवार अर्जुन मीणा की बात करें तो उनके चुनाव प्रचार की कमान पूरी तरह से नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के हाथों में है. वे ही अर्जुन के रणनीतिकार हैं. कटारिया का मेवाड़ में कितना प्रभाव है. इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सत्ता से बाहर होने के बावजूद इस क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन कांग्रेस से अच्छा रहा.  
 
मेवाड़ और वागड़ में दोनों दलों के दिग्गज सभाएं कर चुके हैं. पीएम नरेंद्र मोदी की उदयपुर में सभा से बीजेपी के पक्ष में माहौल और पुख्ता हुआ है. वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बेणेश्वर में सभा हो चुकी है. हालांकि इससे बाद भी कांग्रेस उत्साहित नहीं है. सत्ता होने के बावजूद राहुल की सभा में 30 हजार लोग बमुश्किल जुट पाए. 
 
ऐसे में यह देखना रोचक होगा कि मतदान के दिन लोगों का रुख क्या रहता है. उदयपुर में बीजेपी के अनुकूल दिख रहा माहौल बरकरार रहता है या कांग्रेस मुकाबले में आने में सफल होती है? फिलहाल तो इस सीट पर बीजेपी का पलड़ा भारी दिख रहा है. 

बीजेपी मंत्री ने पार्टी पर लगाया गौ हत्या करने का आरोप

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बीजेपी सरकार में एक मंत्री ने खुद अपनी ही पार्टी पर गौ हत्या करने के आरोप लगाएं हैं. मंत्री ने लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद अपने ट्वीटर हैंडल से पार्टी पर निशाना साधते हुए यह आरोप लगाया. नेता का नाम है केन्द्रीय मंत्री विजय सांपला. उन्होंने अपने ट्वीटर अकाउंट से ‘चौकीदार’ भी हटा लिया है. सांपला मोदी सरकार में सामाजिक न्याय अधिकारिता महकमें के मंत्री है. सांपला ने 2014 के चुनाव में पंजाब की होशियारपुर लोकसभा से चुनाव जीता था लेकिन पार्टी ने इस बार उनका टिकट काटकर फगवाड़ा के विधायक सोमप्रकाश को थमा दिया. सोमप्रकाश इस सीट से 2009 में भी चुनाव लड़ चुके है लेकिन तब … Read more