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100% सत्ता नीति बनकर रह गई राजनीति, पता नहीं कब छोड़ दूं- नितिन गडकरी के बयान से मचा हड़कंप

25 जुलाई 2022
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100% सत्ता नीति बनकर रह गई राजनीति, पता नहीं कब छोड़ दूं- नितिन गडकरी के बयान से मचा हड़कंप

Politalks.News/NitinGadkari. ‘राजनीति के अलावा भी जीवन में कई ऐसी चीजें हैं जो करने लायक हैं, कई बार मुझे लगता है कि मैं राजनीति कब छोड़ूं और कब नहीं, इसके लिए हमें ये समझना चाहिए कि राजनीति में आखिर है क्या…, यह बयान देकर बीजेपी के दिग्गज नेता एवं केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देश की राजनीति में सियासी भूचाल ला दिया. वहीं बीजेपी के इतने वरिष्ठ नेता के इस बयान के सामने आने के बाद से देश की सियासत में एक नए सवाल ने जन्म ले लिया है कि क्या नितिन गडकरी जल्द ही राजनीति से नाता तोड़ने वाले हैं? अक्सर अपने सधे हुए बयानों को लेकर … Read more

Politalks.News/NitinGadkari. ‘राजनीति के अलावा भी जीवन में कई ऐसी चीजें हैं जो करने लायक हैं, कई बार मुझे लगता है कि मैं राजनीति कब छोड़ूं और कब नहीं, इसके लिए हमें ये समझना चाहिए कि राजनीति में आखिर है क्या…, यह बयान देकर बीजेपी के दिग्गज नेता एवं केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देश की राजनीति में सियासी भूचाल ला दिया. वहीं बीजेपी के इतने वरिष्ठ नेता के इस बयान के सामने आने के बाद से देश की सियासत में एक नए सवाल ने जन्म ले लिया है कि क्या नितिन गडकरी जल्द ही राजनीति से नाता तोड़ने वाले हैं? अक्सर अपने सधे हुए बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले और सत्ता में रहने के बावजूद भी अपनी साफगोई के लिए मशहूर नितिन गडकरी हर विषय पर खुलकर अपनी राय रखते हैं. इसी तरह उन्होंने अब राजनीति को लेकर भी अपने विचार व्यक्त किए हैं. इतना ही नहीं, गडकरी ने राजनीति उद्देश्य पर भी अपने विचार रखे.

दरअसल, बीते रोज रविवार को सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश गांधी के सम्मान में आयोजित एक समारोह को सम्बोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने खुलकर मंच से अपनी ये बातें रखीं. नितिन गडकरी ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि, ‘हमें यह समझना होगा कि राजनीति का मतलब क्या है. क्या यह समाज, देश के कल्याण के लिए है या सरकार में बने रहने के लिए? महात्मा गांधी के दौर से राजनीति सामाजिक आंदोलन का हिस्सा रही है, लेकिन बाद में इसका फोकस राष्ट्र और विकास के लक्ष्य की तरफ बढ़ गया.’ वहीं मौजूदा सियासी हालात और माहौल को लेकर भी चिंता जाहिर करते हुए गडकरी ने कहा कि, ‘आज के राजनेताओं को शिक्षा, कला जैसी चीजों के विकास के लिए काम करना चाहिए, काम करोगे तो पहचान अपने आप मिलेगी, मुझे तो मेरे पोस्टर लगाया जाना भी पसंद नहीं है.’

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यहीं नहीं राजनीति छोड़ने के संकेत देते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि, ‘कई बार मुझे ऐसा लगता है कि मैं राजनीति कब छोड़ूं और कब नहीं, क्योंकि जीवन में राजनीति के अलावा भी कई ऐसी चीजें हैं जो कि करने लायक हैं. हमें ये समझना चाहिए कि राजनीति आखिर है क्या. अगर बारीकी से देखें तो राजनीति समाज के लिए है और समाज का विकास करने के लिए है. लेकिन वर्तमान में राजनीति 100 फीसदी सत्ता नीति (सत्ता के लिए) होकर रह गई है. मुझे कभी-कभी तो लगता है कि मैं राजनीति कब छोड़ दूं.’ वहीं गिरीश गांधी को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि, ‘जब गिरीश भाई राजनीति में थे, तो मैं उन्हें हतोत्साहित करता था, क्योंकि मैं भी कभी कभी राजनीति छोड़ने के बारे में सोचता हूं.

आपको बता दें कि गिरीश गांधी पूर्व एमएलसी के साथ साथ एक सामाजिक कार्यकर्ता थे. वे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल थे, लेकिन साल 2014 में उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली थी. वहीं नागपुर सांसद नितिन गडकरी ने इस मौके पर पूर्व समाजवादी राजनेता जॉर्ज फर्नांडीस की सादगीपूर्ण जीवन शैली के लिए उनकी प्रशंसा की. गडकरी ने कहा कि, ‘जॉर्ज फर्नांडीस से मैंने बहुत कुछ सीखा क्योंकि उन्होंने कभी भी सत्ता की भूख की परवाह नहीं की. उन्होंने ऐसा प्रेरणादायक जीवन जिया.’ आपको बता दें कि ये पहला मौका नहीं है जब नितिन गडकरी अपने बेबाक अंदाज और अपने बयानों को लेकर चर्चा में है.

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पिछले साल राजस्थान विधानसभा में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नितिन गड़करी में बड़ा बयान देते हुए कहा था कि, ‘जो सीएम बनते हैं वो इसलिए भी परेशान रहते हैं कि कब हटा दिया जाएगा पता नहीं. आज के समय सभी की परेशानियां है, सभी दुखी हैं. विधायक इसलिए दुखी है कि वह मंत्री नहीं बन पाया. मंत्री इसलिए दुखी है कि उसे अच्छा विभाग नहीं मिला. जबकि अच्छे विभाग वाले भी दुखी हैं कि वह सीएम नहीं बन पाए. जो मुख्यमंत्री बने हैं वो भी दुखी हैं कब रहेंगे और कब चले जाएंगे पता नहीं.’

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