दिल्ली में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन जारी, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल और प्रियंका गांधी ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन किया प्रदर्शन, इस बार दोनों जंतर-मंतर के 200 मीटर पहले सड़क पर बैठ गए, सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया तो प्रियंका संविधान की कॉपी लेकर सड़क पर लेट गईं, इसके बाद पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को लिया गया हिरासत में, वही अशोक गहलोत ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार पर बोला तीखा हमला, अशोक गहलोत ने कहा- पहले चुनाव आयोग जाने से रोका, फिर एफआईआर ठोकी, और आज जंतर-मंतर जाने से भी रोककर हिरासत में ले लिया। सांसदों की बस रोक दी गई, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया गया और सांसदों के साथ धक्का-मुक्की हुई, जंतर-मंतर वह जगह है जहां देश का आम नागरिक भी अपनी आवाज उठाने जाता है, अगर नेता प्रतिपक्ष और सांसद वहां भी नहीं जा सकते, तो यह लोकतंत्र नहीं, डरी हुई सत्ता की तानाशाही है, एफआईआर और हिरासत से रोक पाओगे गांधी परिवार को? 1977 में इंदिरा जी को भी गिरफ्तार कराया गया था, 1980 में जनता ने उन्हें प्रचंड बहुमत से सत्ता में लौटा दिया, और गिरफ्तार कराने वाली सरकार बिखरकर इतिहास बन गई, यह सब भागवत-मोदी-शाह की "खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे" वाली कार्रवाई है, ये भूल गए कि राहुल गांधी का मंत्र है: डरो मत, कांग्रेस का कार्यकर्ता हर एफआईआर और हर तानाशाही हथकंडे को लोकतंत्र बचाने की लड़ाई का तमगा मानता है, सत्ता जितना रोकेगी, आवाज उतनी ही बुलंद होगी










