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मोदी-शाह को जाना चाहिए पीओके, शिंदे को भी ले जाएं साथ- सामना के जरिए शिवसेना का केंद्र पर निशाना

05 अगस्त 2022
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मोदी-शाह को जाना चाहिए पीओके, शिंदे को भी ले जाएं साथ- सामना के जरिए शिवसेना का केंद्र पर निशाना

Politalks.News/MaharashtraPolitics. 40 से ऊपर विधायकों और अन्य सांसदों और नेताओं के विश्वासघात के बाद भी शिवसेना की आक्रमकता में कोई कमी नहीं आई है. शिवसेना ने चीन और पाकिस्तान के साथ चल रहे सीमा मुद्दे और कश्मीर में तनाव को लेकर अपने मुखपत्र सामना के जरिए मोदी सरकार की जबरदस्त भर्तसना की है. यही नहीं सामना के जरिए शिवसेना ने अपने बागी नेता और सूबे के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ विद्रोही गुट को भी निशाना बनाया है. शिवसेना का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को हमारे कश्मीर यानी पीओके में पैर रखना चाहिए था. आपको बता दें, कश्मीर में पीडीपी की अध्यक्षा और आजाद … Read more

Politalks.News/MaharashtraPolitics. 40 से ऊपर विधायकों और अन्य सांसदों और नेताओं के विश्वासघात के बाद भी शिवसेना की आक्रमकता में कोई कमी नहीं आई है. शिवसेना ने चीन और पाकिस्तान के साथ चल रहे सीमा मुद्दे और कश्मीर में तनाव को लेकर अपने मुखपत्र सामना के जरिए मोदी सरकार की जबरदस्त भर्तसना की है. यही नहीं सामना के जरिए शिवसेना ने अपने बागी नेता और सूबे के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ विद्रोही गुट को भी निशाना बनाया है. शिवसेना का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को हमारे कश्मीर यानी पीओके में पैर रखना चाहिए था.

आपको बता दें, कश्मीर में पीडीपी की अध्यक्षा और आजाद कश्मीर की समर्थक महबूबा मुफ्ती ने सीधे-सीधे भारत की संप्रभुता को चुनौती दी है. मुफ्ती ने उनके ‘ट्विटर’ अकाउंट पर कश्मीर का ध्वज लहराया है. यहां आपको बता दें, कश्मीर से अनुच्छेद-370 रद्द कर दिया गया तो उसी तरह से यहां का यह अलग ध्वज भी रद्द कर दिया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर के अब शत-प्रतिशत भारत का अविभाज्य अंग होने का एलान करके जश्न भी मनाया. लेकिन कश्मीरी पंडितों की अवस्था हो या अलगाववादियों का दुर्भाग्यपूर्ण खेल, कुछ भी बदला नजर नहीं आता. अलगाववादी संगठनों का जहरीला नाग फुंफकार मार ही रहा है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में इन शब्दों के जरिए भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोला है. साथ ही भगवा पार्टी ने एकनाथ शिंदे को लेकर भी तंज कसा है.

शिवसेना ने सामना के संपादकीय में आगे लिखा है, ”मोदी के राज में एक महिला नेता द्वारा अलगाववाद का ध्वज फहराए जाने के बाद भी मोदी-शाह चुप कैसे हैं? कानून का डंडा सिर्फ राजनीतिक विरोधियों की सांस नली बंद करने के लिए ही है क्या? यह एक बार स्पष्ट कहें.” शिवसेना ने आगे कहा कि एक देश, एक संविधान, एक निशान, यही आजादी के अमृत महोत्सव का मंत्र होना चाहिए. इसे नाकाम करने का काम कश्मीर में किया गया.

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कश्मीर में भाजपा को चलाती हैं महबूबा: शिवसेना
अपने मुखपत्र सामना में शिवसेना ने आरोप लगाया कि, ‘भारतीय जनता पार्टी को महबूबा आज भी चलाती हैं. परंतु हिंदुत्ववादी-राष्ट्रवादी शिवसेना खत्म हो जाए, ऐसा उनका प्रयास है. कश्मीर में भी अलगाववादियों को बल दे रहे हैं और महाराष्ट्र में भी अलगाववादियों को महाबल दे रहे हैं, वह भी हिंदुत्व के नाम पर. इससे बड़ा ढोंग क्या हो सकता है?’

मोदी-शाह को जाना चाहिए पीओके, शिंदे को भी ले जाएं साथ
सामना में शिवसेना ने जोरदार तंज कसते हुए लिखा कि, ‘आजादी के अमृत महोत्सव में प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को पाकिस्तान द्वारा हथियाए गए हमारे कश्मीर (पीओके) में कदम रखना चाहिए था. साथ में महाराष्ट्र के नवमर्द एकनाथ शिंदे, केसरकर, सामंत, भुसे को ले जाना चाहिए था. भाजपा के फेर में पड़कर शिवसेना में फूट डालने के बाद से ‘नवमर्दों’ के इस समूह में भी हिंदुत्व का बड़ा जोश आ रहा है. इसलिए आजादी के अमृत महोत्सव में इस उत्साहित अलगाववादी समूह के साथ पाकिस्थान अधिकृत कश्मीर में कदम रखकर देश के समक्ष आदर्श निर्माण करने की आवश्यकता है.’

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यही नहीं शिवसेना ने हाल ही में हुए नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे का उदाहरण भी दिया है. सामना ने लिखा कि, ‘ऐसा हम क्यों कह रहे हैं? क्योंकि चीन के विरोध के बाद भी अमेरिका की नैंसी पेलोसी ने ताइवान की जमीन पर कदम रखा. ताइवान चीन का हिस्सा है, इस मान्यता को खारिज कर दिया व अमेरिकी लोग ताइवान में घुस गए. चीन ने अमेरिका को चेतावनी देने के अलावा क्या किया? यहां हमारे देश के लद्दाख की जमीन पर चीनी सेना घुसकर बैठी है और 37 हजार वर्ग किमी की जमीन पर कब्जा कर लिया है.’

यहां आपको बता दें कि शिवसेना का कहना है कि कश्मीर में अलगाववादियों का झंडा लहराया और हम राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ छापेमारी और गिरफ्तारी करने में ही श्रेष्ठता मान रहे हैं. चीनी सेना यहीं है और महबूबा की ‘डीपी’ पर ‘कश्मीर’ का ध्वज भी वैसे ही है. देश में अलगाववादियों का इस तरह से ‘उत्सव’ चल रहा है. आजादी का अमृत महोत्सव केंद्र के सत्ताधारियों का ‘दलीय’ कार्यक्रम बन गया है. परंतु देश की आम जनता के लिए आजादी का अमृत कहां है? इस सवाल का जवाब ढूंढ़ रहे हैं.

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