960 करोड़ के टेंडर घोटाले में एसीबी की बड़ी कार्रवाई, SIT की जांच में 20 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स भी रडार पर, भगौड़े आरोपियों की संपत्ति अटैच करने की तैयारी
राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 16,000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट एसीबी विशेष न्यायालय में पेश की है. यह चार्जशीट 54 लाल रंग के बंडलों में भरकर कोर्ट पहुंचाई गई, जो इस घोटाले की व्यापकता और गंभीरता को दर्शाती है. इस चार्जशीट में 10 प्रमुख अधिकारियों और अन्य आरोपियों को नामजद किया गया है, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.
इन 10 आरोपियों के नाम शामिल
चार्जशीट में जलदाय एवं संबंधित विभागों के कई वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनमें प्रमुख नाम हैं:
- दिनेश गोयल – मुख्य अभियंता (प्रशासन)
- के.डी. गुप्ता – तत्कालीन मुख्य अभियंता (ग्रामीण)
- शुभांशु दीक्षित – अतिरिक्त मुख्य अभियंता (जयपुर द्वितीय)
- सुशील शर्मा – वित्तीय सलाहकार
- निरिल कुमार – मुख्य अभियंता
- विशाल सक्सेना – अधिशाषी अभियंता
- अरुण श्रीवास्तव – अतिरिक्त मुख्य अभियंता (सेवानिवृत्त)
- डी.के. गौड़ – मुख्य अभियंता व तकनीकी सदस्य (सेवानिवृत्त)
- महेंद्र प्रकाश सोनी – अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत्त)
- मुकेश पाठक – निजी व्यक्ति
एसीबी जल्द ही इन सभी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के लिए संबंधित विभागों को रिपोर्ट भेजेगी.
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सुबोध अग्रवाल फिर रिमांड पर
मामले में गिरफ्तार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एक बार फिर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है. जांच एजेंसी को उम्मीद है कि उनसे पूछताछ में उच्च स्तर के संपर्कों और नीतिगत गड़बड़ियों के अहम सुराग मिल सकते हैं.
फरार आरोपियों पर शिकंजा
कुछ आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनमें जितेंद्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता शामिल हैं. इनके खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी हो चुके हैं. एसीबी ने इनकी संपत्तियों का ब्यौरा कोर्ट में पेश कर कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
फर्जी सर्टिफिकेट और 960 करोड़ के टेंडर का खेल
जांच में सामने आया है कि घोटाले का मुख्य नेटवर्क दो फर्मों—श्रीगणपति ट्यूबवेल कंपनी और श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी के इर्द-गिर्द संचालित था. इन फर्मों ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार कर जलदाय विभाग (PHED) के अधिकारियों की मिलीभगत से करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए. इतना ही नहीं, बिना कार्य किए लगभग 55 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान भी किया गया. मामले के उजागर होने पर इसे छिपाने के प्रयास भी किए गए.
20 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स भी जांच के दायरे में
एसीबी की SIT फिलहाल करीब 20 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स की गहन जांच कर रही है. जांच में सामने आया है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर कुछ चुनिंदा फर्मों को लाभ पहुंचाया गया. साइट इंस्पेक्शन जैसी अनिवार्य शर्तों को हटाकर पारदर्शिता को कमजोर किया गया. इस मामले में 139 इंजीनियर (15 XEN, 40 AEN और 50 JEN) भी जांच के घेरे में हैं.
15 जगहों पर छापेमारी, कई सबूत बरामद
एसीबी ने जयपुर, बाड़मेर, सीकर सहित दिल्ली, बिहार और झारखंड में कुल 15 स्थानों पर छापेमारी की. इस दौरान फर्जी बिल, वित्तीय दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बड़ी मात्रा में जब्त किए गए.
आगे क्या?
इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर राजस्थान हाईकोर्ट में 21 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी. एसीबी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं.
16,000 पन्नों की यह चार्जशीट भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.










