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यूक्रेन संकट पर रूस को लेकर भारत की दुविधा! इधर कुआं-उधर खाई वाले हालात में चुप्पी पड़ ना जाए भारी!

28 फ़रवरी 2022
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यूक्रेन संकट पर रूस को लेकर भारत की दुविधा! इधर कुआं-उधर खाई वाले हालात में चुप्पी पड़ ना जाए भारी!

Politalks.News/RussiaUkraineWar.  रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine) के बीच जारी जंग की वजह से करीब 20 हजार भारतीय यूक्रेन में फंसे हुए हैं. भारत इस युद्ध में वैसे तो कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहा है, क्योंकि दोनों ही देश भारत के करीबी हैं. ऐसे में किसका समर्थन किया जाए, यही सबसे बड़ा सवाल है. अब भारत ने अभी तक इस मुद्दे पर न्यूट्रल स्टैंड ले रखा है, इस युद्ध और भारत के स्टेंड को लेकर कूटनीतिक जानकारों में चर्चा जारी है. चर्चा यह है कि रूस की इस आक्रामकता को लेकर भारत क्या करे (what should india do)? क्या भारत रूस की वैसे ही खुली आलोचना कर सकता है, … Read more

Politalks.News/RussiaUkraineWar.  रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine) के बीच जारी जंग की वजह से करीब 20 हजार भारतीय यूक्रेन में फंसे हुए हैं. भारत इस युद्ध में वैसे तो कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहा है, क्योंकि दोनों ही देश भारत के करीबी हैं. ऐसे में किसका समर्थन किया जाए, यही सबसे बड़ा सवाल है. अब भारत ने अभी तक इस मुद्दे पर न्यूट्रल स्टैंड ले रखा है, इस युद्ध और भारत के स्टेंड को लेकर कूटनीतिक जानकारों में चर्चा जारी है. चर्चा यह है कि रूस की इस आक्रामकता को लेकर भारत क्या करे (what should india do)? क्या भारत रूस की वैसे ही खुली आलोचना कर सकता है, जैसी अमेरिका या दूसरे यूरोपीय देश कर रहे हैं? अगर भारत ऐसी आलोचना करता है तो क्या होगा और अगर नहीं करता है तो क्या होगा? कुछ कूटनीति के जानकार तो यह भी बताते हैं कि भारत का आज का रूख आने वाले समय में खुद के लिए ही घातक साबित हो सकता है. बताया जा रहा है जिस तक आज रूस यूक्रेन पर मनमानी कर रहा है. ठीक वैसे ही अगर चीन भी भारत के कुछ हिस्सों पर अपना अधिकार बताता रहा है. ड्रेगन ने अगर मनमानी शुरू कर दी तो क्या करेगा भारत?

रूस और यूक्रेन युद्ध (RussiaUkraineWar) में सर्वाधिक दुविधा की स्थिति भारत की है. भारत ने UNSC की मीटिंग में रूस के निंदा प्रस्ताव की वोटिंग से ही हाथ खींच लिए. युद्ध को लेकर हुई संयुक्त राष्ट्र संघ की आपात बैठक में भारत के प्रतिनिधि टीएस तिरूमूर्ति ने कहा है कि, ‘इससे शांति व सुरक्षा भंग होने की आशंका पैदा हुई है’. साथ ही इस बात पर जोर दिया कि इसका हल कूटनीतिक बातचीत से ही हो सकता है. सियासी गलियारों में चर्चा है कि कूटनीतिक बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलना है. जैसे रूस ने क्रीमिया पर कब्जा किया उसी तरह वह डोनेट्स्क और लुहांस्क इलाके को अपने में मिला लेगा और दुनिया देखती रह जाएगी, रूस की नजर यूक्रेन की प्राकृतिक संपदा पर है और साथ ही सोवियत संघ के विखंडन के समय यूक्रेन के हिस्से में चले गए परमाणु हथियार और दूसरी एटॉमिक व साइंटिफिक्स फैसिलिटी पर है.

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देश की विदेश नीति को चर्चा है कि इस युद्ध में भारत करे तो क्या करे? भारत अगर रूस की खुली आलोचना करता है और अमेरिका व यूरोपीय देशों के सुर में सुर मिलाता है तो वह रूस के साथ दुश्मनी मोल लेने जैसा होगा. आपको बता दें कि रूस भारत का पुराना दोस्त है और हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच कई रक्षा समझौते हुए हैं. भारत उन्हें गंवाने की जोखिम नहीं ले सकता है.

दूसरी चर्चा यहा है कि भारत यह जोखिम भी नहीं ले सकता है भारत के मसले पर भी रूस चीन के साथ चला जाए. लेकिन अगर भारत चुप रह जाता है या विरोध की सिर्फ औपचारिकता निभाता है तो अमेरिका और यूरोपीय देशों में भारत के प्रति नाराजगी बढ़ेगी. अमेरिका और यूरोप के साथ भारत ने कई सामरिक और कारोबारी समझौते किए हैं. क्वाड में अमेरिका के साथ भारत का साझा बना है और तभी अमेरिका यूक्रेन के मसले पर भारत के सक्रिय समर्थन की उम्मीद कर रहा है.

माना जाता है कि दुनिया की बड़ी शक्तियां या महाशक्तियां वैश्विक घटनाक्रम के समय हाशिए पर खड़े रह कर तमाशा नहीं देखती हैं. उन्हें एक पक्ष चुनना होता है. यह भी कहा जाता है कि तटस्थ रहने वाले देश अपना नुकसान करते हैं और इतिहास के कूड़ेदान में डाले जाते हैं. अगर रूस की इस आक्रामकता का पर भारत जवाब नहीं देता है, आगे बढ़ कर उसकी गलती पर सवाल नहीं उठाता है और दुनिया की ओर से रूस पर लगाई जा रही पाबंदियों में शामिल नहीं होता है तो इसका मतलब होगा कि वह रूस की इस मनमानी में शामिल है.

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दूसरी तरफ चर्चा यह भी है कि अगर दुनिया ने रूस को सबक नहीं सिखाया तो हर ताकतवर देश की सीमा पर बसे छोटे या कमजोर राष्ट्र की एकता और अखंडता खतरे में पड़ेगी. भारत के लिहाज से तो ये चिंताजनक भी हो सकता है, अगर चीन की वजह से भारत की एकता और अखंडता खतरे में आती है तो क्या दुनिया हमारी मदद के लिए आएगी? जिस तरह से नस्ल, संस्कृति और इतिहास के बहाने रूस ने यूक्रेन के दो हिस्सों पर अपना दावा किया है उसी तरह से चीन भारत के कई हिस्सों पर अपना दावा कर रहा है. अगर रूस को सबक सिखाने के अभियान में दुनिया के साथ भारत नहीं शामिल होता है तो चीन की हिम्मत बढ़ेगी और भारत के लिए नई चुनौतियां पैदा होंगी.

 

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