



आगे सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि, “हाईकोर्ट के निर्णय को देखते हुए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के विधायक पुखराज गर्ग व विधायक इंदिरा देवी बावरी मौके पर बंजारा बस्ती के लोगो से समझाइश करने पहुंचे थे मगर पुलिस ने प्रशासन के दबाव में आकर विधायकों की गाड़ी पर पथराव किया जो कि विधायिका की गरिमा व प्रोटोकॉल का अपमान है जिसके लिए वो विधानसभा अध्यक्ष से बात करेंगे. इस घटनाक्रम में पत्रकारों के साथ हुई बदसलूकी पर सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और किसी भी घटना की जानकारी लेना और उसका कवरेज करना मीडिया का हक है मगर जिला प्रशासन ने मीडिया की स्वायत्तता पर भी लाठीचार्ज करने का काम किया जो कि निंदनीय है. दरअसल हाइकोर्ट के निर्णय के बाद रविवार सुबह नागौर जिला कलेक्टर पुलिस जाप्ते के साथ जिले के ताउसर गांव में स्थित बंजारा बस्ती को ध्वस्त करने पहुंचे इस दौरान अतिक्रमण हटाने आए प्रशासन और बस्तीवासियों के बीच जमकर झड़प हो गई थी. इस झड़प में कई लोग घायल हो गए थे तो वहीं अतिक्रमण हटाने आये जेसीबी चालक की मौत हो गई थी.गरीबी हटाने की बात थी साहब @ashokgehlot51 जी,आपने तो गरीबों को ही उजाड़ दिया ! pic.twitter.com/dzl7DbaU9P
— HANUMAN BENIWAL (@hanumanbeniwal) August 25, 2019
#मेहनत_से_उठा_हूँ, मेहनत का दर्द जानता हूँ!! आसमाँ से ज्यादा ज़मींन की कद्र जानता हूँ!!@hanumanbeniwal @Vijay_Beniwal @MahipalMahla @ChuttanYadav @UR_BeniwalRLP @URMeghwalRLP @OmBaytu @GD_Legha @raju_dogiwal pic.twitter.com/nKTgpEm0dg — sagta daukiya (@DaukiyaSagta) August 26, 2019इस घटना की जानकारी मिलते हि सांसद हनुमान बेनीवाल ने ताउसर गांव पहुंचकर प्रशासन द्वारा ध्वस्त कर गयी बंजारा बस्ती का जायजा लिया और पीडित परिवारों से मुलाकात की इस दौरान वहां मौजूद लोगो ने सांसद बेनीवाल को बताया कि, जब लोगों ने स्वेच्छा से घर खाली कर दिए थे तभी टांके पर रखे उनके सामान, नगदी तथा सोने चांदी के गहनों को नागौर एसडीएम के निर्देश पर उठा लिया जिसका कोई रिकॉर्ड अभी तक नहीं दर्शाया गया है. सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस पूरे मामले में गहलोत सरकार को आड़े हाथों लिया वही सोशियल मीडिया पर भी सरकार को घेरा, उन्होंने अपने ट्विट्टर हैंडल पर अशोक गहलोत को रसूखदारों का सीएम बताते हुए कहा कि एक तरफ जहां 5 हजार से ज्यादा न्यायालय की अवमानना के मामले लंबित पड़े है वहीं दूसरी तरफ सरकार गरीब लोगों से जुड़े मामलों में न्यायालय के निर्णय की आड़ में आशियाना उजाड़ने पर तुली हुई है!


