‘गहलोत अगर इतने हैं आश्वस्त तो फिर क्यों नहीं करा लेते काउंटिंग, 80 फीसदी MLA हैं पायलट के साथ’

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कम से कम स्वर्गीय हो चुके भंवर लाल शर्मा का तो रखना चाहिए था ध्यान, जिनके निधन होने पर सरदार शहर सीट पर हो रहे हैं उपचुनाव, ऐसे आरोप लगाकर वह भंवर लाल शर्मा और गजेंद्र शक्तावत जैसे दिवंगत हो चुके विधायकों को भी कर रहे हैं कटघरे में खड़ा, इससे उनके परिवार पर क्या बीत रही होगी?- राजेंद्र गुढ़ा

‘80 फीसदी विधायक हैं पायलट के साथ’
‘80 फीसदी विधायक हैं पायलट के साथ’

Rajendra Gudha On Ashok Gehlot. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान के बाद से प्रदेश की सियासत गरमा गई है. सीएम गहलोत ने एक मीडिया चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में सचिन पायलट को गद्दार बताते हुए जमकर निशाना साधा तो वहीं सचिन पायलट की भी इस बयान पर प्रतिक्रिया सामने आ चुकी है. सचिन पायलट ने सीएम गहलोत को इस तरह के बयान देने से बचते हुए प्रदेश में सरकार किस तरफ रिपीट हो उस पर ध्यान देने की सलाह दी है और साथ ही कहा कि, ‘सीएम गहलोत क्यों खुद को इतना असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, पद तो आज है कल नहीं.’ वहीं गहलोत-पायलट के बीच जारी वाला पलटवार के बीच पायलट कैंप के राजेंद्र गुढ़ा का बड़ा बयान सामने आया है. राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि, ‘अगर आज आलाकमान विधायक दल की बैठक बुलाता है और उसमें पायलट के साथ 80 फीसदी विधायक नहीं होते हैं तो हम मुख्यमंत्री पद से अपना दावा छोड़ देंगे.’

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से सचिन पायलट को लेकर दिए बयान ने राजस्थान में सियासी उबाल चरम पर पहुंचा दिया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने NDTV को दिए अपने इंटरव्यू में कहा कि, ‘एक गद्दार प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बन सकता और हाईकमान सचिन पायलट को CM नहीं बना सकता. एक ऐसा शख्स, जिसके पास 10 विधायक भी नहीं हैं… ऐसा शख्स, जिसने विद्रोह किया… पार्टी को धोखा दिया, वह गद्दार हैं.’ सीएम गहलोत के इस बयान पर अब सचिन पायलट खेमे के माने जाने वाले सैनिक कल्याण एवं पंचायती राज मंत्री राजेंद्र गुढ़ा का बड़ा बयान सामने आया है. राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि, ‘मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विधायकों की वन टू वन मीटिंग और सीएलपी की बैठक से क्यों घबरा रहे हैं. आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जिन विधायकों पर 10-10 करोड़ रुपए लेने के आरोप लगा रहे हैं तो फिर उन्होंने क्या सोच कर उनमें से 5 विधायकों को अपनी कैबिनेट में मंत्री पद देकर बैठा रखा है.’

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राजेंद्र गुढ़ा ने आगे कहा कि, ‘मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कम से कम स्वर्गीय हो चुके भंवर लाल शर्मा का तो ध्यान रखना चाहिए था. जिनके निधन होने पर सरदार शहर सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं. ऐसे आरोप लगाकर वह भंवर लाल शर्मा और गजेंद्र शक्तावत जैसे दिवंगत हो चुके विधायकों को भी कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. इससे उनके परिवार पर क्या बीत रही होगी?.‘ गुढ़ा ने आगे कहा कि, ‘कांग्रेस आलाकमान को अब विधायक दल की बैठक करवानी चाहिए, क्योंकि न तो आलाकमान ने जो नोटिस दिए थे उन पर कार्रवाई हुई, उल्टा मुख्यमंत्री इस तरह से बयान दे रहे हैं.  मुख्यमंत्री भले ही यह दावा कर रहे हैं कि पायलट के पास 10 विधायक नहीं हैं लेकिन उन्हें मैं बता दूं कि उनके साथ होटल में रहे 102 विधायकों में से आज भी पायलट के साथ चार्टर प्लेन में चार विधायक मध्य प्रदेश गए हैं, एक मैं खड़ा हूं. ऐसे में मुख्यमंत्री गलत बोल रहे हैं.’

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पत्रकारों से बात करते हुए राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि, ‘मुख्यमंत्री अगर इतने आश्वस्त हैं तो फिर काउंटिंग क्यों नहीं करा लेते हैं. 80 फीसदी एमएलए सचिन पायलट के साथ नहीं हो तो हम मुख्यमंत्री पद की दावेदारी छोड़ देंगे. मुख्यमंत्री पैसे लेने वालों में जिसका नाम निकाल रहे हैं, उनमें से 5 लोग तो उनकी कैबिनेट में हैं. उनको क्यों बैठा रखा है, अब बार बार उनको गद्दार क्यों बोल रहे हो, क्या इन 19 लोगों को टिकट नहीं दोगे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत निकम्मा, नकारा ,गद्दार वह सब कुछ बोलते रहते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि सचिन पायलट से बेहतर राजस्थान की कांग्रेस पार्टी की सेहत के लिए कोई भी अच्छा नहीं हो सकता है. कांग्रेस विधायक कांग्रेस आलाकमान के साथ हैं. कांग्रेस आलाकमान के आशीर्वाद से सब एमएलए बने, उनके आशीर्वाद से ही मंत्री और मुख्यमंत्री हैं. अगर कांग्रेस छोड़ते हैं तो यह विधायक अपने दम पर गांव के सरपंच नहीं बन सकते, नगरपालिका और निगम में पार्षद भी नहीं बन सकते. यह नेता विधायक इसलिए बनकर बैठे हैं क्योंकि कांग्रेस हाईकमान का इन्हें आशीर्वाद है.’

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वहीं सचिन पायलट की भी इस पुरे विवाद पर प्रतिक्रिया सामने आई है. सचिन पायलट ने न्यूज़ एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि, ‘मैने सुना है जो गहलोत ने कहा है. वे पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी ने उन्हें कई मौके दिए हैं. आज वो राजस्थान में सीएम के पद पर काम कर रहे हैं. मैं नहीं जानता कि उन्हें कौन एडवाइज देता है, इससे पहले भी उन्होंने कई बातें कही हैं. इस प्रकार के झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाने की जरूरत नहीं है. आज जरूरत है तो पार्टी के साथ खड़े होने की. इससे पहले भी गहलोत ने नकारा, निकम्मा और गद्दार कहा था. साथ ही कई आरोप भी लगाए. लेकिन इस प्रकार के झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाने की जरूरत नहीं है. गहलोत जैसे वरिष्ठ नेता इस प्रकार के बयान दें, यह उनको शोभा नहीं देता है.

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