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'वोट बंदी' से लेकर राजस्थान के अकाल और पंजाब के नशे तक, सचिन पायलट ने सरकारों पर साधा निशाना

04 अक्टूबर 2026
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'वोट बंदी' से लेकर राजस्थान के अकाल और पंजाब के नशे तक, सचिन पायलट ने सरकारों पर साधा निशाना

जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान पायलट ने SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, राजस्थान सरकार पर अकाल प्रबंधन में विफल रहने का लगाया आरोप, पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था को लेकर भी घेरा

कांग्रेस महासचिव और पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों से जुड़े कई मुद्दों पर निशाना साधा. उन्होंने विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, राजस्थान में बारिश की कमी और राहत व्यवस्था तथा पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकारों पर सवाल खड़े किए. पायलट ने अपने बयान में निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाए.

पायलट ने हरियाणा, बिहार और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए पायलट ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया लक्षित तरीके से की गई. उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से ‘वोट बंदी’ बताते हुए कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार है और किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटना गंभीर विषय है.

13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटे

राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने SIR को लेकर कहा कि निर्वाचन आयोग तीन सदस्यों की संस्था है और निर्णय प्रक्रिया सामूहिक रूप से होनी चाहिए. पायलट ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों को अलग रखते हुए अपने स्तर पर कई प्रक्रियाएं शुरू कीं. उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारों का इस्तेमाल भी निर्धारित व्यवस्था से अलग तरीके से किया गया. पायलट ने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया के दौरान देशभर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. यह दावा वर्तमान में राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय है; इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दाखिल हुई हैं और आगामी 5 अक्टूबर को सुनवाई निर्धारित है. उन्होंने कहा कि आबादी बढ़ने के बावजूद मतदाताओं की संख्या कम होना चिंता का विषय है.

ईसी की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर उठाए सवाल

पायलट ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के प्रति लोगों का विश्वास बना रहना जरूरी है. उनके बयान के अनुसार, आयोग के भीतर भी निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं. SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के बीच निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर कानूनी चुनौती भी सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और SIR से संबंधित फैसलों को चुनौती दी गई है.

राजस्थान की स्थिति का जिक्र करते हुए पायलट ने प्रदेश में बारिश की कमी के कारण पैदा हुए संकट को लेकर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने समय रहते पर्याप्त योजना और तैयारी नहीं की. पायलट ने कहा कि यदि एक-दो महीने पहले संभावित संकट को देखते हुए व्यवस्थाएं की जातीं और प्रभावित लोगों के लिए राहत की योजना तैयार की जाती, तो स्थिति को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता था.

पुलिस का राजनीति इस्तेमाल के गंभीर आरोप

पायलट ने राजस्थान के निकाय चुनावों को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. पायलट के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया में देरी की गई और प्रशासन तथा पुलिस का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया. उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी दल के पक्ष में निर्वाचित सदस्यों को प्रभावित करने की कोशिशें की गईं और हरियाणा सीमा पर कांग्रेस के कुछ निर्वाचित प्रतिनिधियों को रोके जाने जैसी घटनाएं हुईं. इन आरोपों पर सरकार का पक्ष इस बयान में सामने नहीं आया है.

राजस्थान कांग्रेस के नेता विश्वेंद्र सिंह से जुड़े सवाल पर पायलट ने कहा कि वे अपनी बात सामने रखेंगे और उनकी इच्छा है कि कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़े. गौरतलब है कि विश्वेंद्र सिंह ने हाल ही में कांग्रेस से इस्तीफा दिया है और पार्टी नेतृत्व के प्रति असंतोष जाहिर किया था.

पंजाब के बहाने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

पंजाब को लेकर पायलट ने राज्य में बढ़ते नशे और कानून-व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बताया. उन्होंने कहा कि चिट्टा और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स की समस्या गंभीर है और इसका सबसे अधिक असर युवाओं पर पड़ रहा है. पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद का मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का भी प्रमुख हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है.

पायलट ने पंजाब में गैंगवार, गोलीबारी और फिरौती की घटनाओं का जिक्र करते हुए राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि जेलों से भी आपराधिक नेटवर्क संचालित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं. पायलट ने केंद्र की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सीमा पार से ड्रग्स की तस्करी रोकने की जिम्मेदारी केंद्रीय एजेंसियों की भी है. इससे पहले दिए गए एक इंटरव्यू में भी पायलट ने पंजाब में ड्रग्स, गैंग हिंसा और कानून-व्यवस्था को प्रमुख चिंता बताया था.

बीजेपी की नशा विरोधी यात्रा पर निशाना साधते हुए पायलट ने पूछा कि यदि पंजाब में ड्रग्स की समस्या रोकने की बात की जा रही है, तो अंतरराष्ट्रीय सीमा से होने वाली तस्करी पर प्रभावी कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है. उन्होंने केंद्र सरकार से पिछले वर्षों में ड्रग्स तस्करी रोकने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा.

पंजाब में कांग्रेस की संभावनाओं को लेकर पायलट ने दावा किया कि पार्टी के पक्ष में माहौल है और कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रदर्शन करेगी. हालांकि, पंजाब में चुनाव अभी भविष्य में हैं और किसी भी दल के चुनावी प्रदर्शन को लेकर अंतिम निष्कर्ष मतदान और परिणाम आने के बाद ही तय होगा. कांग्रेस की ओर से पंजाब में चुनावी तैयारियां तेज करने की बात पहले भी पायलट कह चुके हैं.

पायलट के बयान में केंद्र की चुनावी व्यवस्था से लेकर राजस्थान के प्रशासनिक मुद्दों और पंजाब की कानून-व्यवस्था तक कई राजनीतिक मुद्दे शामिल रहे. उनके आरोपों ने एक बार फिर SIR, निर्वाचन आयोग की भूमिका, राजस्थान में राहत प्रबंधन और पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है.

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