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विधानसभा में हनुमान चालीसा की गूंज, राठौड़ ने भूपेश को बता दिया नास्तिक तो लगे जय सियाराम के नारे भी

17 फ़रवरी 2023
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विधानसभा में हनुमान चालीसा की गूंज, राठौड़ ने भूपेश को बता दिया नास्तिक तो लगे जय सियाराम के नारे भी

Rajendra Rathod v/s Mamta Bhupesh. राजस्थान की 15वीं विधानसभा के अंतिम बजट सत्र में बजट पर जारी बहस के बीच शुक्रवार को सदन में धर्म और हिंदू की परिभाषा को लेकर मंत्री बीडी कल्ला की बीजेपी विधायकों से जोरदार बहस हुई. इसी बीच मंदिरों के बिलों को लेकर गहलोत सरकार में मंत्री ममता भूपेश और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ के इसी बीच भी तीखी नोंकझोंक हुई, जिसमें राठौड़ ने भूपेश को नास्तिक बोलते हुए सदन में ही हनुमान चालीसा का पाठ तक शुरूकर दिया . इस दौरान राजस्व मंत्री रामलाल जाट ने भी हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया. तो वहीं मंत्री ममता भूपेश ने भी सदन में जमकर … Read more

Rajendra Rathod v/s Mamta Bhupesh. राजस्थान की 15वीं विधानसभा के अंतिम बजट सत्र में बजट पर जारी बहस के बीच शुक्रवार को सदन में धर्म और हिंदू की परिभाषा को लेकर मंत्री बीडी कल्ला की बीजेपी विधायकों से जोरदार बहस हुई. इसी बीच मंदिरों के बिलों को लेकर गहलोत सरकार में मंत्री ममता भूपेश और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ के इसी बीच भी तीखी नोंकझोंक हुई, जिसमें राठौड़ ने भूपेश को नास्तिक बोलते हुए सदन में ही हनुमान चालीसा का पाठ तक शुरूकर दिया . इस दौरान राजस्व मंत्री रामलाल जाट ने भी हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया. तो वहीं मंत्री ममता भूपेश ने भी सदन में जमकर जय सियाराम के नारे लगाए. पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी और मंत्री बीड़ी कल्ला के बीच हुई बहसबाजी.

आपको बता दें, राजस्थान विधानसभा में आज सांवलियाजी और नाथद्वारा मंदिर संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान हनुमान चालीसा की गूंज सुनाई दी. हिंदू धर्म की परिभाषा के लेकर मंत्री ममता भूपेश और पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ के बीच जमकर नोक-झोंक हुई. उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कांग्रेस की ओर से राम की आस्था पर सवाल उठाने का आरोप लगाया तो महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने सदन में जय सियाराम के नारे लगाए तो राजेन्द्र राठौ ने सदन में ही हनुमान चालीसा सुनाई.

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दरअसल, गहलोत सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश नेउपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ से कहा कि सांवलियाजी और नाथद्वारा मंदिर के दोनों बिलों पर तो बोलिए, दोनों बहुत महत्वपूर्ण बिल हैं. आप जैसे विद्वान व्यक्ति से ही उम्मीद करते हैं कि कम से कम इस पर तो बोलिए, आप तो उस बात को भूल ही गए. इस पर राठौड़ ने जवाब देते हुए कहा कि मैं हर साल सांवलिया सेठ के दर्शन करने जाता हूं, नाथद्वारा भी जाता हूं. मैं आपकी तरह नास्तिक नहीं हूं, आस्तिक हूं. बस फिर क्या था, ममता भूपेश ने नास्तिक करने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसे डिलीट किया जाना चाहिए, मुझे किस आधार पर आपने नास्तिक बोला, राठौड़ ने कहा कि आप नास्तिक हो.

इसका जवाब देते हुए मंत्री ममता भूपेश ने कहा कि मैं मेहंदीपुर बालाजी का तिलक माथे पर लगाकर आई हूं, मुझे नास्तिक कैसे बोला, मैं इनके जैसे दिखावे वाली आस्तिक नहीं हूं. बाद में सभापति ने सदन की कार्यवाही से इसे हटाने को कहा. इस पर राजेंद्र राठौड़ ने ममता भूपेश को चुनौती देते हुए कहा कि नास्तिक कहने पर माफी मांगता हूं, लेकिन आप ये हनुमान चालीसा पढ़ कर सुना दें, मैं मान जाऊंगा. इसके बाद राजेंद्र राठौड़ ने हनुमान चालीसा की कुछ लाइनें पढ़कर सुनाईं. इस पर शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने राठौड़ से कहा कि आप सुना दीजिए और मैं भी सुना देता हूं. फिर राठौड़ ने कल्ला से कहा कि आप तो सब जानते हैं. इसी बीच राजस्व मंत्री रामलाल जाट भी खड़े हुए और हनुमान चालीसा सुनाने लगे. तो वहीं मंत्री ममता भूपेश ने भी लगाए जय सियाराम के नारे.

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इस पर राजेंद्र राठौड़ ने तंज कसते हुए कहा कि मंदिर माफी की जमीन के बारे में बीजेपी राज में 12 सितंबर 2018 को सर्कुलर जारी किया था. जिसमें मंदिर की मूर्ति को माइनर माना और यह कहा था कि मंदिर का पुजारी सब टीनेंट हो सकता है. राठौड़ ने भूपेश को कहा कि देवस्थान के मंदिरों में पूजा पाठ करवाइए, केवल जय सियाराम करने से आप राम भक्त नहीं होंगे. आप रामसेतु तोड़ने वाले और राम की आस्था पर सवाल खड़े करने वाले लोग हैं. बिलों पर बहस के दौरान हिंदू और धर्म शब्द की परिभाषा को लेकर भी तनातनी हो गई. बीडी कल्ला ने कहा कि आप बताइए धर्म की परिभाषा क्या होती है, हिंदू की क्या परिभाषा है बता दीजिए.

इस पर बीड़ी कल्ला को जवाब देते हुए बीजेपी विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि जो जन्मभूमि कर्मभूमि में आस्था रखे वह हिंदू है, हिंदू एक जीवनशैली है. मंत्री बीडी कल्ला ने कहा यह परिभाषा गलत है. जिसका शास्त्र में विश्वास है, जो पुनर्जन्म में विश्वास रखता है, जो गोपूजक है वह हिंदू है, करपात्री महाराज ने यह कहा है, जीवनशैली सबकी अलग-अलग है.

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