



दरअसल कांग्रेस ने शुक्रवार को जनता की अदालत में अपना चुनावी संकल्प पत्र 'संकल्प हमारा, खुशहाल हरियाणा' पेश किया. बीस पन्नों के संकल्प पत्र में 17 प्रमुख एजेंडे शामिल कर कांग्रेस ने दिल खोलकर वादे किए हैं जिसमें 24 घंटे में किसान कर्जमाफी, महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 33 फीसदी आरक्षण, पुरानी पेंशन नीति लागू करने, निजी संस्थानों में महिला आरक्षण और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष करने सहित कई बातों का जिक्र है. इसके साथ ही दो एकड़ तक के किसानों और 300 यूनिट तक घरेलू उपभोक्ताओं को फ्री बिजली, मॉब लिंचिंग कानून, पंचायती राज चुनाव लड़ने के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता खत्म करने और वृद्धावस्था पेंशन 5100 रुपये करने की बात भी कही गई है. इस संकल्प पत्र को हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद, सीएलपी लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा, घोषणा पत्र कमेटी चेयरमैन किरण चौधरी, सह चेयरमैन आफताब अहमद व सदस्य सुरेश गुप्ता ने जारी किया. यह भी पढ़ें: जहां BJP कभी खाता तक नहीं खोल पायी, क्या वहां गोल कर पाएंगे संदीप सिंह वैसे देखा जाए तो राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसान कर्जमाफी (Kisan Karjamafi) के सरकारी और वास्तविक आंकड़ों में रात दिन का फर्क है. तीनों राज्यों में सरकार बनते ही तीनों मुख्यमंत्रियों ने दिल खोलकर कर्जमाफी के प्रमाण पत्र किसानों को बांटे लेकिन सच पहले दिन से ही सामने आने लगा. पूर्ण कर्ज माफी की जगह राजस्थान में 50 हजार, मध्य प्रदेश में एक लाख और छत्तीसगढ़ में दो लाख रुपये का कर्जा माफ किया गया. बाद में पता चला कि बड़े-बड़े वायदे कर जो प्रमाण पत्र किसानों को बांटे गए वे रद्दी के भाव से बंटे और ऐसे बंटे कि अधिकांश बैंकों ने इसे मानने से इनकार कर दिया क्योंकि बैंकों को इस बारे में सरकार की ओर से कोई अपडेट नहीं आया. कर्जमाफी के वादे के बाद भी राजस्थान और मध्य प्रदेश में किसानों की वास्तविक स्थिति किसी से छिपी नहीं. विपक्ष आए दिन इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार को घेर रहे हैं. पार्टी के खुद के नेता भी इस बात पर कोई भी बयान देने से बचते फिर रहे हैं. ऐसे में हरियाणा में किसान कर्जमाफी (Kisan Karjamafi) का कार्ड कांग्रेस को कितना फलेगा और सत्ता पलट करेगा, ये देखना मजेदार रहेगा. खैर, कांग्रेस का ये दिव्यास्त्र कितना असरदायक होगा, ये तो आगामी 24 तारीख को पता चल ही जाएगा. साथ ही ये भी पता चल जाएगा कि कांग्रेस के थोथे वादों में हरियाणा के किसान फंसते हैं या फिर यहां की जनता कांग्रेस की सच्चाई से वाकिफ हो चुकी है.#IbbkeCongress का संकल्प है कि किसान की फसल का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदा जाएगा। फसल खराबी पर मुआवज़ा 12 हज़ार रूपए प्रति एकड़ के हिसाब से दिया जाएगा।
''संकल्प हमारा, समृद्ध किसान और खुशहाल हरियाणा।'' pic.twitter.com/eVumo0ymJA — Haryana Congress (@INCHaryana) October 11, 2019


