भाजपा का अंबेडकर प्रेम महज चुनावी ढोंग, संविधान बचाने की असली लड़ाई कांग्रेस लड़ रही: टीकाराम जूली

निकाय चुनाव टालना संविधान की हत्या, जनहित की योजनाएं बंद करना भाजपा का असली चेहरा, अंबेडकर जयंती पर टीकाराम जूली ने सरकार को घेरा: संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का लगाया आरोप

Rajasthan Politics: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मंगलवार को संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर की जयंती पर जयपुर स्थित अंबेडकर सर्किल पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए संविधान की अवहेलना और लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए. टीकाराम जूली ने कहा कि बाबासाहेब द्वारा रचित संविधान देश की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन वर्तमान समय में उसकी मूल भावना को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है.

श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मीडिया से बातचीत में कांग्रेस नेता जूली ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने अपने जीवन का हर पल दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के अधिकारों के लिए समर्पित किया. उन्होंने कहा कि भारत का संविधान दुनिया के सबसे मजबूत और प्रगतिशील संविधानों में से एक है, जिसकी वजह से देश में लोकतंत्र मजबूत बना हुआ है. जूली ने उदाहरण देते हुए कहा कि जहां अमेरिका जैसे विकसित देश में महिलाओं को समान अधिकार पाने में दशकों लग गए, वहीं भारत में संविधान लागू होते ही महिलाओं को कानूनी रूप से बराबरी का अधिकार मिल गया.

वही प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए टीकाराम जूली ने पंचायती राज और नगर निकाय चुनाव समय पर नहीं कराने को संविधान का सीधा उल्लंघन बताया. उन्होंने कहा कि सरकार इन चुनावों को टालने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा रही है और एक साल का समय मांग रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है. उन्होंने इसे संवैधानिक संस्थाओं का अपमान बताते हुए कहा कि कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सरकार का यह रवैया बेहद चिंताजनक है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

भाजपा पर निशाना साधते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि पार्टी का बाबासाहेब के प्रति सम्मान केवल चुनावी दिखावा है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नीतियां गरीबों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के हितों के विपरीत हैं. पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद या कमजोर किया जा रहा है. अन्नपूर्णा राशन किट, मनरेगा जैसी योजनाओं पर प्रहार, पेंशन में देरी और आरक्षण के सही क्रियान्वयन में लापरवाही जैसे मुद्दों को उठाते हुए उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए.

वही अंत में कांग्रेस नेता ने केंद्र और राज्य सरकारों पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग, सीबीआई और चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र एजेंसियों का राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आज देश में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जहां लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जो भविष्य के लिए गंभीर संकेत हैं.