देश में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और हमलों पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया बेहद सख्त रुख, कोर्ट ने राज्यों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा- उसके 7 नवंबर, 2025 के आदेश का सही से पालन नहीं किया गया, जिसे अब कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) के तौर पर देखा जाएगा, वही सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और इकोलॉजिकल बैलेंस का हवाला देते हुए शीर्षअदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों और बुजुर्गों को कुत्ते काट रहे हैं और ऐसी स्थिति से आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं, इसलिए गंभीर रूप से बीमार और खतरनाक हो चुके कुत्तों को मारने पर किया जाना चाहिए विचार, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा- खतरनाक और बीमार आवारा कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है, लोगों की जान की सुरक्षा बेहद जरूरी है, जो अफसर निर्देश न मानें, उन पर अवमानना का चलाया जाए केस, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा- गरिमा के साथ जीने के अधिकार में कुत्तों के खतरे से मुक्त होकर रहने का अधिकार भी है शामिल, इसके साथ ही अदालत ने आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी को लेकर नवंबर 2025 में दिए गए निर्देशों को वापस लेने की मांग वाली सभी याचिकाओं को किया है खारिज, वही राज्यों को 'एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स' का कड़ाई से पालन करने की हिदायत देते हुए कोर्ट ने अपने पुराने आदेशों को रखा है बरकरार, जिसके तहत हर सार्वजनिक परिसर से कुत्तों को बाहर करना है शामिल, फिलहाल इस मामले की सुनवाई बंद करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से आगामी 17 नवंबर तक कंप्लायंस (अनुपालन) रिपोर्ट की है तलब
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: खतरनाक कुत्तों को दिया जाए मौत का इंजेक्शन! इंसानी जान सबसे जरूरी

सुप्रीम कोर्ट की दोटूक: जानलेवा और बीमार कुत्तों को इंजेक्शन देकर मारें; लापरवाही पर नपेंगे अफसर









