गुजरात विधानसभा चुनाव का रण: कच्छ की 6 सीटों पर भाजपा-कांग्रेस में कांटे की टक्कर

गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान चरम पर, कच्छ की 6 सीटों पर होगा कड़ा मुकाबला, एक सीट पर हर बार बदल रहा है विजयी उम्मीदवार, आप पार्टी ला सकती है खेल में टविस्ट

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Gujarat Assembly Election/Kutch: गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 की तारीखों का ऐलान हो चुका है. चुनाव दो फेज में होने हैं तो वहीं चुनावी परिणाम 8 दिसम्बर को आएंगे. वैसे तो गुजरात भाजपा का गढ़ रहा है और कांग्रेस यहां पिछले 27 सालों से विपक्ष में बैठकर सत्ता वापसी का इंतजार कर रही है. इस बार उनका यह इंतजार समाप्त होगा या नहीं, ये तो बाद की बात है. फिलहाल गुजरात में सीटवाइज सियासी गणित का आंकलन कर लेते हैं.

गुजरात के 33 जिलों में 182 विधानसभा सीटें है. कच्छ गुजरात का सबसे बड़ा जिला है जिसका हैडक्वाटर भुज में है. कच्छ गुजरात के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में आता है. इस इलाके को ‘कच्छ का रण’ भी कहा जाता है. पिछले विधानसभा चुनाव में पूरे कच्छ जिले में कुल 14,28,006 योग्य मतदाता थे लेकिन वर्तमान मतदाता सूची के अनुसार, इस विधानसभा क्षेत्र में दो लाख से अधिक नए मतदाता हैं. इस बार 16,34,674 मतदाता बीजेपी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सहित अन्य पार्टियों के चुनावी उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे.

कच्छ में विधानसभा की 6 प्रमुख सीटें आती हैं:-

  • अबडासा
  • मांडवी (कच्छ)
  • भुज
  • अंजार
  • गांधीधाम (एससी)
  • रापार

इन सभी पर पिछले कई सालों से भाजपा बनाम कांग्रेस में कड़ी टक्कर चली आ रही है. इनमें से अधिकांश पर हर बार करीबी टक्कर रही है. वर्तमान में इन 6 में से 5 विस सीटें बीजेपी और रपार सीट कांग्रेस के कब्जे में है. आइए, जानते हैं इन सभी सीटों का सियासी गणित..

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अबडासा विस सीट
कच्छ जिले में आने वाली अबडासा विधानसभा सीट सामान्य वर्ग की एक महत्वपूर्ण सीट है. इस सीट पर कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस उम्मीदवार जीतते रहे हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में अबडासा सीट पर 5 निर्दलीयों सहित कुल 11 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे. अबडासा सीट पर 82 सर्विस वोटर्स के साथ यहां कुल 2,23,705 वोटर थे. इनमें से पुरुष 1,16,429 और महिला 1,07,358 वोटर थीं. इनमें से 67.15 फीसदी वोटर्स ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था.

2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी उम्मीदवार प्रद्युमन सिंह जडेजा ने यहां जीत दर्ज की थी. जडेजा ने बीजेपी के छबील पटेल को हराया था, लेकिन बाद में प्रद्युमनसिंह कांग्रेस को छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे. 2020 के उपचुनाव में प्रद्युमनसिंह यहां भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और फिर से जीत दर्ज की. उन्होंने कांग्रेस के डॉ.शांतिलाल सिंघानी को करीब 37 हजार वोटों से हरा एक तरफा मुकाबला अपने नाम किया. इससे पहले 2014 के उपचुनाव में कांग्रेस के शांतिसिह गोहिल और 2012 में छाबिलभाई पटेल ने बीजेपी उम्मीदवार को हराया था. 2007 व 2002 में बीजेपी और 1998 व 1995 में कांग्रेस का इस सीट पर कब्जा रहा. फिलहाल किसी भी पार्टी की ओर से उम्मीदवार की घोषणा नहीं हुई हे.

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मांडवी (कच्छ)
गुजरात के कच्छ जिले की मांडवी एक हाई प्रोफाइल विधानसभा सीट है. वर्तमान में यहां पर बीजेपी का कब्जा है. गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 में कुल 17 उम्मीदवार इस सीट से चुनाव लड़े जिनमें से 15 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई. मांडवी सीट पर 71.16 प्रतिशत वोटिंग हुई. यहां से भारतीय जनता पार्टी के जडेजा विरेंद्र सिंह बहादुर सिंह ने कांग्रेस के दिग्गज नेता शक्ति सिंह गोहिल को करीब 9 हजार मतों से शिकस्त दी थी. विजयी प्रत्याशी विरेंद्र सिंह जडेजा को कुल 79469 वोट मिले जबकि कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल 70423 वोटों से संतोष करना पड़ा. भाजपा, कांग्रेस के बीच फिर से घमासान होने की उम्मीद है. आम आदमी पार्टी ने इस सीट पर कैलाश गढवी को पार्टी उम्मीदवार बनाया है.

गुजरात के कच्छ जिले की मांडवी विधानसभा सीट को मुस्लिम बाहुल्य सीट माना जाता है. यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 50 हजार से ज्यादा है. इनके अलावा, दलितों का वोट 31 हजार, पाटीदारों का वोट 25 हजार और राजपूतों का वोट 21 हजार के करीब है. यहां 1985 से लेकर 1998 तक बीजेपी ने सुरेश मेहता का एक क्षत्र राज रहा. इसके बाद छाबिबाई पटेल ने बीजेपी के गढ़ को ढहाते हुए इस सीट को कांग्रेस के पाले में डाल दिया. 2007, 2012 और 2017 में ये सीट फिर से बीजेपी के पास रही है.

भुज
कच्छ की भुज विधानसभा बीजेपी का एक अभेद गढ़ है. पिछले 22 सालों में केवल एक बार साल 2002 में शिवाजीभाई अहीर ने इस सीट पर कांग्रेस की विजय पताका लहराई थी. इसके पहले 1990 से 1998 तक और 2007 से अब तक इस सीट पर बीजेपी का एकछत्र राज रहा. 2007 में बीजेपी के वसनभाई अहीर ने इस सीट पर फिर से बीजेपी की वापसी कराई. 2012 और 2017 में डॉ. निमाबेन आचार्य इस सीट पर विधायक हैं. इस बार बीजेपी वर्तमान विधायक से जीत की हैट्रिक लगाने को तैयार है. आप पार्टी की ओर से राजेश पंडोरिया को पार्टी उम्मीदवार बनाया गया है.

अंजार
गुजरात के कच्छ इलाके की अंजार विधानसभा सीट दूसरी सीटों से कई मायनों में अलग है. यह बीजेपी के लिहाज से एक महत्वपूर्ण सीट है. इस सीट पर पिछले 5 चुनावों से बीजेपी जीत दर्ज कर रही है. यहां पर कांग्रेस उम्मीदवार को 2002 में जीत मिली थी. इस बार भी भाजपा यहां जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रही है. इस सीट से बीजेपी के आहिर वासणभाई गोपाल भाई विधायक है. 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी आहिर वासणभाई गोपाल भाई ने 75331 मत प्राप्त किए थे, जो कुल वोटिंग का 48.24% था. वही दूसरे नंबर पर कांग्रेस के प्रत्याशी वीके हंगुल को 64018 मत मिले थे. वर्तमान विधायक पिछले दो चुनावो से जीत दर्ज कर रहे है और इस बार हैट्रिक लगाने को तैयार है.

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अंजार विधानसभा सीट में 2 लाख 70 हजार 813 वोटर्स हैं. जातिगत आंकड़ों के लिहाज से यहां 22 फीसदी अनुसूचित जाति के मतदाता हैं, जबकि अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 9 फीसदी है. इस विधानसभा में 80 फीसदी हिंदू आबादी है. 17 फीसदी मुस्लिम और ईसाइयों की संख्या एक फीसदी से भी कम है. यही वजह है कि यहां बीजेपी की पकड़ मजबूत रही है.

गांधीधाम (एससी)
गुजरात के कच्छ इलाके की गांधीधाम विधानसभा सबसे बड़ी और बीजेपी की हॉट सीट है. यहां पिछले दो बार से बीजेपी प्रत्याशी जीत दर्ज कर रहे हैं. इस सीट से 2017 में बीजेपी की माहेश्वरी मालती किशोर को विधायक चुना गया था. इससे पहले 2012 में बीजेपी के टिकट पर रमेश माहेश्वरी विधायक बने थे. मालती किशोर ने कांग्रेस के किशोर पिंगोल और रमेश माहेश्वरी ने कांग्रेस को जयश्रीबेन चावड़ा को हराया. अब यह एक आरक्षित सीट है. यहां सबसे ज्यादा वोटर्स हैं जिनकी संख्या 3 लाख 14 हजार 991 है. फिलहाल यहां से किसी भी पार्टी के उम्मीदवार की घोषणा नहीं हुई है.

रापार
रापार कच्छ क्षेत्र की सबसे छोटी विधानसभा सीट है. यहां 2 लाख 47 हजार 463 मतदाता हैं. वैसे इस सीट पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों में कांटे की टक्कर रहती है. वर्तमान में इस सीट से 2017 में कांग्रेस के टिकट पर आरेठिया संतोकबेन भचुभाई को विधायक चुना गया था. उन्होंने बीजेपी के पंकज मेहता को 5 हजार के करीबी वोट अंतर से हराया. इससे पहले 2014 के उप चुनाव में पंकज मेहता और 2012 के विस चुनावों में बीजेपी के वागाजीभाई पटेल ने जीत दर्ज की. 2007 और 2002 में कांग्रेस के बाबुभाई शाह ने यहां कांग्रेस का विजयी झंडा फहराया. इससे पहले भी कांग्रेस और बीजेपी के बीच इस सीट को लेकर जंग चलती रही है. इस बार भी टक्कर कांटे की रह सकती है. पहली बार गुजरात चुनावों में उतरी आम आदमी पार्टी ने इस सीट पर अंबाभाई पटेल पर दांव खेला है.

गुजरात के कच्छ क्षेत्र की सभी 6 सीटों में से अधिकांश पर बीजेपी का राज रहा है लेकिन हर बार टक्कर कांटे की रही. रापार सहित अन्य सीटों पर जीत का अंतर 5 से 10 हजार के बीच रहा. मुकाबले में बीजेपी और कांग्रेस ही रही हैं लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी की चुनावी तैयारियों को देखते हुए हर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को नजर आ सकता है.

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