विधानसभा में राज्यपाल का अभिभाषण झूठ का पुलिंदा- टीकाराम जूली

विपक्ष का आरोप- धरातल पर नजर नहीं आ रहा कोई भी काम, किसानों को खाद नहीं मिला,दिव्यांगजनों की, बुजुर्गों की, विधवा बहनों को पेंशन नहीं मिल रही, किसानों को पानी नहीं मिल रहा, दिन में बिजली देने के दावे भी फेल जयपुर । राज्यपाल के अभिभाषण के साथ राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र का आगाज हुआ. राज्यपाल के अभिभाषण के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्यपाल के अभिभाषण पर कहा कि ये अभिभाषण नहीं है, यह झूठ का पुलिंदा है. जो बातें राज्यपाल के अभिभाषण में कही है वे धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रही है. किसानों को खाद और डीएपी … Read more

विमान हादसे पर पायलट ने जताया दु:ख, ये कहा !

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार के निधन पर राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पालयट ने जताया शोक, कहा- विमान हादसे की अजीत पवार जी का निधन दु:खद, पायलट ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि,सचिन पायलट ने पवार परिवार के प्रति जताई गहरी संवेदनाएं, हादसे में मारे गए अन्य लोगों के प्रति भी जताई संवेदना, सचिन पायलट ने की ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना. महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे में हुई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और NCP प्रमुख अजित पवार की मौत. ये भी पढ़े : पीने के शोकीनों की बल्ले-बल्ले, शराब की दुकानें अब खुलेगी रात 10 बजे तक !

पीने के शोकीनों की बल्ले-बल्ले, शराब की दुकानें अब खुलेगी रात 10 बजे तक !

राजस्थान में आबकारी नीति 025-2029 में संशोधन, अब आबकारी आयुक्त को दिये शराब की दुकानों के खुलने का समय तय करने का अधिकार, आबकारी आयुक्त तय करेंगे कितने बजे तक खुलेगी शराब की दुकानें, राजस्व के नुकसान की आशंका की आशंका के चलते बढ़ाया जा सकता है शराब की दुकानों का समय, आबकारी विभाग में शराब की दुकानों का समय रात 10 बजे तक करने की चर्चा, अभी रात 8 बजे तक खुलती है शराब की दुकानें, रात 8 बजे बाद दूसरे राज्यों की शराब बिक्री की आशंका के चलते सरकार ने उठाया कदम, शराब की दुकानों का समय बढ़ाकर राजस्व बढ़ाने की भी कवायद ये भी पढ़े: जयपुर में … Read more

जयपुर में बारामती जैसा हादसा टला! प्लेन में सवार थे कांग्रेस के ये बड़े नेता

जयपुर एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की फ्लाइट की लैंडिंग फेल, रनवे को टच करते ही वापस उड़ा विमान, करीब 10 मिनट बाद दूसरे अटेंप्ट में हुई विमान की सफल लैंडिंग. एयर इंडिया की फ्लाइट में सवार थे कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, जयपुर एयरपोर्ट पर पहले भी हो चुकी लैंडिंग फेल की घटनाएं. दिल्ली से जयपुर पहुंची थी एयर इंडिया की फ्लाइट AI – 1719, पायलट ने सुरक्षा कारणों ने ऐनवक्त पर लिया लैंडिंग नहीं करने का फैसला, कुछ समय बाद दुबारा की विमान की सफल लैंडिंग ये भी पढ़े : अजित पवार की मौत हादसा या साजिश! ममता ने उठाये सवाल

अजित पवार की मौत हादसा या साजिश! ममता ने उठाये सवाल

लैंडिंग करते समय दूसरे अटेंप्ट में हुआ हादसा, ममता ने उठाये सवाल, कहा- शरद पवार की पार्टी में लौटने वाले थे अजित पवार, SC की निगरानी में हो जांच महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और NCP प्रमुख अजित पवार की मौत हो गई. DGCA ने इस विमान क्रैश में अजित पवार और पायलट समेत सभी 5 लोगों की मौत की पुष्टि की है. सूत्रों के मुताबिक अजित पवार के शव की पहचान उनकी घड़ी से हुई.अजित पवार के निधन पर सीएम फडणवीस ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया और महाराष्ट्र में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है. ममता बनर्जी ने … Read more

बड़ी खबर: अजीत पवार का विमान हुआ क्रैश, बड़ी अनहोनी की आशंका!

Ajit Pawar Plane Crash – इस वक्त की सबसे बड़ी खबर, महाराष्ट्र के बारामती में एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का प्लेन हूँ क्रैश, बारामती में लैंडिंग की कोशिश करते समय प्लेन हुआ क्रैश, बताया जा रहा है कि इस प्लेन में कई लोग सवार थे, मिली जानकारी के अनुसार अजीत पवार को आई है घम्भीर चीटें, अजीत पवार को करवाया गया अस्पताल में भर्ती Baramati Ajit Pawar Plane Crash – इस वक्त की बड़ी खबर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान के क्रैश होने की खबर सामने आई है. बुधवार 28 जनवरी की सुबह बारामती में लैंडिंग के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. शुरुआती रिपोर्ट की माने … Read more

SONIA GANDHI: A humble and gentle lady who mastered art of springing surprises in Indian politics

Sonia Gandhi

KUSHAL JEENA for POLITALKS BUREAU: SONIA GANDHI, a humble and gentle woman of a foreign origin, once reluctant to be a part of complicated politics has of late emerged as country most powerful politician who has not only mastered the art of springing surprises in Indian politics but also became first ever politician who showed the mantle of turning down the offer of top office of the Prime Minister. The Italian-born Sonia Gandhi, the longest ever serving President of the Indian National Congress, the left of the center grand old political party that ruled India for most of its post-independence history, could set this record because she has become a … Read more

महाराष्ट्र में बीजेपी का गेम ओवर हो गया ‘पवार’ गेम के आगे लेकिन चुनौतियां अभी बाकी

Pawar Game in Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. गेम ओवर हो गया ‘पवार‘ गेम (Pawar Game) के आगे, महाराष्ट्र के नंबर गेम में भाजपा की यह हालत होनी ही थी. जिस तरह सत्ता पर काबिज होने के लिए उसने हक़ीकत को नज़रअंदाज कर उतावलापन दिखाया, उससे इस खेल में उसकी हार सुनिश्चित थी. बावजूद इसके उसने हर जरिये से हर हथकंडे अपनाने की कोशिश की और, जब अंतत: कोई चारा नहीं बचा तो 80 घंटे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस्तीफा देकर शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार का रास्ता साफ करना ही पड़ा. अंतत: अब यह तय हो गया है कि महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन ‘महाविकास अघाड़ी‘ की सरकार बनने जा रही है और इस सरकार का नेतृत्व करेंगे शिवसेना के उद्धव ठाकरे, जो कि कल शाम 6.40 पर शिवाजी पार्क में मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे.

जाहिर है जब सरकार की सूरत साफ लग रही है, तो इस सरकार के भविष्य को लेकर बहस-मुबाहिसों का दौर भी शुरू हो गया है. बहुतों का मानना है कि बेमेल गठबंधन की यह सरकार ज्यादा दिनों तक चल नहीं पाएगी. कारण, एक तरफ शिवसेना जैसी कट्टर हिंदुत्वादी विचारधारा वाली पार्टी है तो दूसरी तरफ एकदम विपरीत विचारधारा वाली एनसीपी, कांग्रेस जैसी पार्टियां. वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन गडकरी समेत कई नेताओं ने कहा है कि यह अवसरवादी सरकार होगी और बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगी. वहीं कई तो अब भी इस खेल में भाजपा को ही विजेता बता रहे हैं, यह कहते हुए कि यह सरकार कुछ महीनों में जब गिर जाएगी, तो शिवसेना को अंतत: भाजपा के साथ आना ही होगा. तब उसकी अकड़ भी खत्म हो जाएगी और भाजपा का मुख्यमंत्री भी उसे स्वीकार करना पड़ेगा. इस प्रकार देर से ही सही भाजपा को अपने नेतृत्व में सरकार बनाने में भी कामयाबी मिल जाएगी और उसकी छवि भी ऐसी बनेगी कि सत्ता के लिए वह शिवसेना के आगे नहीं झुकी, समझौता नहीं किया, जबकि शिवसेना की छवि अवसरवादी की बनेगी कि सत्ता की खातिर इस हिंदुत्ववादी पार्टी ने उस विचारधारा वाली पार्टियों का हाथ थामा जो हिंदुत्व की विरोधी रही हैं.

विशेष रिपोर्ट : आखिर उद्वव ने पूरा किया बाला साहेब ठाकरे को दिया ‘शिवसैनिक को सूबे का मुख्यमंत्री’ बनाने का वचन

यहां यह बात उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में नई सरकार ही नहीं बन रही, बल्कि नई परंपरा भी शुरू हो रही है और यह परंपरा इस सरकार को स्थायित्व देती नजर आ रही है. जिस प्रकार नरेंद्र मोदी और अमित शाह की छत्रछाया में भाजपा का सफर चल रहा है, उससे विपक्ष ही नहीं उसके सहयोगी दलों में भी बेचैनी है. यह अलग बात कि उस बेचैनी को पहले ये न जाहिर कर रहे थे और न उससे बाहर निकलने की कोशिश. लेकिन पहले मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे सूबों में आए नतीजों और फिर हरियाणा, महाराष्ट्र के परिणाम ने उन्हें इस दिशा में बढ़ने की खुराक दी है. झारखंड में आजसू ने यूं ही गर्दन ऊंची कर भाजपा से अलग होने का फैसला नहीं कर लिया. पासवान की पार्टी भी वहां 50 सीटों पर भाजपा से अलग ही चुनाव लड़ रही है, जबकि केंद्र में वह भाजपा के साथ सरकार में शामिल है. यानी सत्ता के साथ रहकर भी एनडीए के सहयोगी दल अब अपने भविष्य को लेकर गंभीर हैं.

इसी गंभीरता ने महाराष्ट्र में शिवसेना को उस मोड़ पर ला खड़ा किया कि उसे भाजपा के मुकाबले एनसीपी और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने से गुरेज न हुआ. शिवसेना को इसके लिए कदम बढ़ाने में एनसीपी छत्रप शरद पवार ने उत्प्रेरक की भूमिका निभाई, हौसला देकर और रास्ता सुझाकर. यानी पर्दे के पीछे आज की स्थिति के लिए पवार ही मुख्य सूत्रधार हैं (Pawar Game). चिंगारी को हवा देकर उन्होंने महाराष्ट्र की सियासत को उस ओर मोड़ दिया, जहां भाजपा अब बिल्कुल अकेली पड़ गई और शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस विजेता के रूप में खड़ी हैं और विजेता कभी नहीं चाहेंगे कि आगे उनकी हार हो. वे पूरी कोशिश करेंगे कि उनकी साझा सरकार पूरे पांच साल चले. वैसे भी शिवसेना तो अब नहीं ही चाहेगी कि उसके नेतृत्व वाली सरकार अस्थिर हो जिसकी कमान उद्धव ठाकरे के हाथों में होगी. भाजपा के साथ लाभ का भ्रम तो उसका पहले ही टूट चुका है. गौरतलब है कि 2014 में जब शिवसेना अकेली लड़ी थी तो उसकी 68 सीटें आई थीं, जो इस बार साथ लड़ने पर 56 हो गईं.

बताया जाता है कि चुनाव से पहले भी शरद पावर ने भाजपा से परेशान शिवसेना को उसके पाले से बाहर रखने की प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष कोशिशें की थी, लेकिन यह परवान नहीं चढ़ पाया तब, हालांकि पवार अपने प्रयास में लगे रहे. प्रयास ही थे कि नतीजों के बाद अचानक ही शिवसेना के सुर बदल गए, प्रयास ही थे कि अब तक बाहर बैठकर ठकुराई करने वाले ठाकरे परिवार का सदस्य पहली बार चुनाव मैदान में उतरा. भविष्य के किन्तु-परन्तु के दृष्टिगत ही आदित्य ठाकरे को चुनाव मैदान में उतारा गया. दरअसल पवार ने उद्धव के दिमाग में यह बात डाल दी थी कि भाजपा के साथ रहने के कारण ही शिवसेना 68 से 56 पर आ गई और अगर साथ बना रहा तो अगले चुनाव में 26 पर आ जाए, इसमें संदेह नहीं होना चाहिए. पहले से किंकर्तव्यविमूढ़ अवस्था में चल रहे उद्धव की आंखें पूरी तरह खुल गईं और उन्होंने खुल कर खेलना शुरू कर दिया. मोदी-शाह की भाजपा को लगा कि ऐसी घुड़की तो शिवसेना पहले भी देती रही है, झुकना क्या, हार कर उसे भाजपा के आगे झुकना ही होगा. वैसे भी मोदी शाह की जोड़ी अपने सामने वालों के आगे झुकना नहीं, उसे झुकाना पसंद करती है. लेकिन इस बार यह जोड़ी अपने खेल में मात खा गई और पवार अपने खेल में कामयाब हो गए.

वैसे भी पवार राजनीति के घाघ खिलाड़ी हैं. सरकार गठन को लंबा खींचना भी उनकी चाल थी ताकि शिवसेना और भाजपा के बीच तल्खियां इतनी बढ़ जाए कि फिर वापस कदम खींचना दोनों के वश में न रह पाए (Pawar Game). इस बीच उन्होंने कांग्रेस को भी यह समझाने में कामयाबी हासिल कर ली कि महाराष्ट्र जैसे कॉरपोरेट बहुल राज्य में अगर वे सत्ता से दूर रही, तो इसका राजनीतिक नुकसान होगा. यह सच है कि कांग्रेस कदापि इस दिशा में विचार नहीं कर रही थी, लेकिन पवार ने सोनिया को अंतत: इसके लिए मना लिया. उद्धव ठाकरे को मनाने में उन्हें इस लिहाज से भी कामयाबी मिली कि दोनों के परिवार में रिश्तेदारी है. शरद पवार की सुपुत्री सुप्रिया सुले का उद्धव ठाकरे की मां के घर से रिश्ता है. यानी ईडी भेज कर पवार के पावर को काबू करने की कोशिश करने वाली भाजपा आखिरकार पवार के चक्रव्यूह में फंस गई.

इस पूरे प्रकरण में पवार योद्धा बनकर उभरे हैं (Pawar Game), इसमें कोई दो राय नहीं है. शिवसेना की तरफ से किसी अन्य को मुख्यमंत्री बनाने की जगह उद्धव ठाकरे को सरकार का नेतृत्व करने को राजी कर भी पवार ने सरकार के स्थायित्व को सुनिश्चित करने का प्रयास किया है. कांग्रेस को भी सरकार में शामिल कराकर उन्होंने कोई कसर न छोड़ने का ही इंतजाम किया है ताकि सरकार भी चले और हर पक्ष लाभान्वित हो. यह अलग बात कि सबसे ज्यादा लाभ में पवार ही होंगे, सरकार पर उनकी पकड़ इस लिहाज से भी ज्यादा होगी कि उद्धव के पास सरकार चलाने का तजुर्बा नहीं है. जाहिर है उन्हें दिशा-निर्देश पवार से ही मिलेगा और जब सरकार पर पकड़ पवार की होगी तो आर्थिक राजधानी मुंबई से मजबूत होने वाली उनकी सियासत भी और मजबूत ही होती जाएगी.

यानी मराठा छत्रप शरद पवार ने सरकार का इंतजाम भी कर दिया और मराठा राजनीति का खुद को सिरमौर भी साबित कर दिया (Pawar Game). भूलें नहीं कि ब्राह्मण मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को लेकर कहा गया था कि अपने शासनकाल में उन्होंने मराठा नेताओं को पार्टी के भीतर किनारे लगाने का काम किया और यह जाहिर भी हो चुका है अब. तो क्या भाजपा के लिए नई परिस्थितियों में चुनौती बढ़ेगी? आसार ऐसे हैं. बहरहाल, महाराष्ट्र में नई सरकार का इंतजार खत्म हो चुका है. हनीमून कब खत्म होगा, दावे के साथ इस वक़्त कोई कुछ नहीं कह सकता. जहांपनाह, सियासत के मंच पर हम तो सिर्फ दर्शक हैं, पट के पीछे हमेशा कुछ न कुछ तो चलता ही रहेगा.

महाराष्ट्र की ‘केकड़ा पॉलिटिक्स’

सुनने में बेशक अजीब लगे लेकिन कुछ ऐसे बयान अक्सर हमारे नेता दे जाते हैं जिन्हें बेतुके ही कहा जा सकता है. हाल में महाराष्ट्र के रत्नागिरी में बांध के ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया. कई लोगों की जिंदगी चली गई. इसी बीच महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री तानाजी सावंत ने एक ऐसा अजीबोगरीब बयान दे दिया कि सबका गुस्सा 7वें आसमान पर पहुंच गया. बांध के ढह जाने  को लेकर जब सवालों की बौझार हुई तो मंत्री ने कहा, ‘इस हादसे के लिए केकड़े जिम्मेदार है. केंकडों ने इस बांध को कमजोर कर दिया जिसकी वजह से ये हादसा पेश आया है.’ अब मंत्रीजी के इस बयान … Read more

मोदी 2.0 की पूर्णकालिक महिला वित्तमंत्री के पहले बजट को कितने नंबर देंगीं देश की महिलाएं

महिला वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश किया. इस बजट के खास सेंगमेट महिला शक्ति की शुरूआत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि नारी तू नारायणी. यानी कि नारी को सर्वोपरी बताते हुए उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं की स्थिती में सुधार नहीं होगा तब तक दुनिया बेहतरी की और नहीं बढ़ सकती है. जब तक महिलाएं आत्मनिर्भर नहीं होंगी तब तक देश आत्मनिर्भर नहीं हो सकता.

बजट का इंतजार हर वर्ग को होता है हर किसी का आत्मविश्वास बजट पर टिका रहता है लेकिन आज की महिला ना केवल किचन में रियायत चाहती है बल्कि आत्मनिर्भर है तो आगे बढ़ने का विश्वास भी चाहती है. अपने कंधों पर घर और देश दोनों की जिम्मेदारियां लेकर चल रही है इसका उदाहरण सबके सामने है.

आज किसी भी कारोबार को शुरू करने के लिए आर्थिक मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है बजट में स्कीम के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को कारोबार शुरू करने में मदद करने की बात कही गई .महिलाओं के स्वयंसेवी समूहों को बढ़ावा देने के लिए हर ज़िले में उनके लिए फ़ंड का ऐलान किया गया है. जिसके पास भी जन धन खाता होगा उसको ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी दी जाएगी.
मुद्रा, स्टार्टअप और स्टैंडअप स्कीम के तहत महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर बनाने की बात भी बजट में कही गई. स्टार्ट अप ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है लेकिन स्किल प्रोग्राम ज्यादा से ज्यादा चलाए जाने की आज भी जरूरत है ताकि दूर दराज की ग्रामीण महिलाएं जुड़ सके. हालांकि बजट में एक ऐसी समिति के गठन करने की बात कही गई जो महिलाओं को देश के विकास में योगदान के लिए प्रेरित कर सुझाव देने का काम करेगी.

उज्ज्वला योजना का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इस योजना से देश की महिलाओं को धुएं से छुटकारा मिला है लेकिन सिलेंडर की आसमान छूती कीमतें क्या उस सपने को पूरी तरह से साकार होने दे रही हैं. इसके अलावा महिलाओं के सम्मान के लिए शौचालय बनवाने की बात कही लेकिन आज भी बेटी घर हो या बाहर कहीं महफूज महसूस नहीं कर पा रही है, सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाए जाने की आज भी जरूरत है ताकि एक भय से मुक्त वातावरण में महिलाएं आराम से काम कर सके. अपने सपने साकार कर सकें.

छोटे उद्योग लगाकर या घर से काम करने वाली महिलाओँ के लिए जरूर बजट में ध्यान दिया गया है लेकिन ऑफिस में काम करने वाली महिलाओं पर ध्यान देने की जरूरत है. क्योंकि अधिकतर कामकाजी महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से अपने पेशे से दूर हो जाती है ऐसे में इस ओर ध्यान देने की जरूरत है. कामकाजी महिलाएं, स्वास्थ्य नीति, शिक्षा नीति में भी बहुत कुछ अलग से किए जाने की जरूरत है ताकि हर महिला आत्मनिर्भर बन सके.

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इस बजट में आम गृहणी को उसकी रसोई या घर के लिए कुछ खास नहीं मिला है. स्व-सहायता समूह या अपना रोजगार स्थापित करने वाली महिलाओं के लिए यह बजट बहुत उम्मीदों वाला कहा जा सकता है।