खर्चे के खौफ से बीजेपी ने की राजस्थान में पीएम मोदी की सभाओं में कटौती!

आगामी लोकसभा चुनाव में राजस्थान बीजेपी नेतृत्व पिछली बार की तरह इस बार भी 25 सीटें जीतने का दावा कर रहा है, लेकिन इसके लिए तैयारी में कई झोल दिखाई दे रहे हैं. यह जानते हुए कि चुनाव में मोदी ही पार्टी का प्रमुख चेहरा हैं, स्थानीय नेता उनकी सभाओं से कतरा रहे हैं. गौरतलब है कि मोदी ने पिछले दिनों टोंक और चुरू में सभाएं की थीं. उनका तीन और सभाएं करने का कार्यक्रम तय था, लेकिन ये हो नहीं पाईं. पार्टी सूत्रों के अनुसार इसके पीछे सभाओं में होने वाले खर्च था. आमतौर पर इस प्रकार की सभाओं के खर्च की रकम का इंतजाम पार्टी फंड से होता … Read more

देश की संसद को सबसे ज्यादा हंसाने वाले सांसद के बारे में जानिए

राजनीति जहां नेता एक—दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ते वहां ऐसे नेता की कल्पना की जा सकती है जो सबको हंसाता था. वो भी खुद को मजाक का केंद्र बनाकर. संभवत: आपको कोई नाम याद नहीं आए, लेकिन एक ऐसा नेता हुए हैं जो सबको हंसाते थे. इनका नाम है पीलू मोदी. सत्तर के दशक में पीलू मोदी ने भारतीय संसद को जितना हंसाया है उतना शायद अब तक किसी ने नहीं हंसाया. उनकी खूबी ये थी कि वो अपना मजाक खुद बनाते थे. कहा भी जाता है कि असली हास्य वही होता है, जिसमें खुद को भी न बख्शा जाए. जब पीलू संसद में बोलते थे … Read more

गहलोत सरकार ने घटाया लोकायुक्त का कार्यकाल, कोठारी की छुट्टी तय

प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार ने लोकायुक्त के कार्यकाल को पांच से बढ़ाकर आठ साल करने के फैसले को पलट दिया है. सरकार ने अध्यादेश के जरिये लोकायुक्त के कार्यकाल को फिर से पांच साल कर दिया है. राज्यपाल कल्याण सिंह ने इसे मंजूरी दे दी है. इस बदलाव से लोकायुक्त एसएस कोठारी पर तलवार लटक गई है. सरकार उन्हें कभी भी हटा सकती है. बता दें कि पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार पिछले साल मार्च में कार्यकाल को आठ साल करने का अध्यादेश लेकर आई थी. विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद यह कानून बन गया. इसके खिलाफ हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई, जिसमें यह आरोप लगाया … Read more

अटल बिहारी वाजपेयी का 50 साल पहले संसद में दिया भाषण फिर चर्चा में क्यों है?

ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआईसी) के सालाना सम्मेलन में विशेष अतिथि के तौर पर भारत की शिरकत को मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है. ओआईसी के संस्थापक सदस्यों में शामिल पाकिस्तान के बहिष्कार के बावजूद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सम्मेलन में न केवल भाग लिया, ब​ल्कि मंच से आतंकवाद को पालने-पोसने वालों को भी कोसा. हालांकि उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया. अपने संबोधन में स्वराज ने कहा, ‘आतंकवाद के खतरे को सिर्फ सैन्य, खुफिया या कूटनीतिक तरीकों से नहीं हराया जा सकता, बल्कि इसे हमारे मूल्यों की मजबूती और धर्म के संदेश से जीता जा सकता है. यह सभ्यता और संस्कृति … Read more

‘इतना तो मजनू भी नहीं पिटा था लैला के प्यार में, जितना विधायक जी पिट गए अपनी सरकार में’

उत्तर प्रदेश की संतकबीर नगर सीट से सांसद शरद त्रिपाठी और इसी जिले के मेंहदावल विधानसभा क्षेत्र से विधायक राकेश बघेल के बीच हुई जूतमपैजार का वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है. सड़क निर्माण के शिलापट्ट पर अपना नाम देखकर भड़के सांसद त्रिपाठी ने जिस तरह से विधायक बघेल पर जूतों की बारिश की, उसे देखकर राम रतन नरवारिया का ट्वीट है, ‘इतना तो मजनू भी नहीं पिटा था लैला के प्यार में, जितना विधायक जी पिट गए अपनी सरकार में.’ सोशल मीडिया में ‘जूताकांड’ पर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं : गौरव यादव | @GauravY09592717 जूताकांड के बाद आदरणीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने जूते … Read more

जब कांग्रेस विधायकों ने राजस्थान की विधानसभा को बेडरूम बनाया

संसद और विधानसभा में हंगामे के सीन आम हैं. किसी मुद्दे पर सरकार को घेरने का यह सबसे प्रचलित जरिया है, लेकिन जब सदन में विपक्ष की बुलंद आवाज नक्कारखाने में तूती साबित होती है तो ऐसे रास्ते अपनाने से भी गुरेज नहीं होता जो ऐतिहासिक बन जाते हैं. कुछ ऐसा ही वाकया राजस्थान की विधानसभा में साल 2017 में हुआ. उस समय राजस्थान में 163 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली वसुंधरा सरकार थी और महज 21 सीटों पर सिमटी कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में थी. अक्टूबर के महीने में विधानसभा का सत्र चल रहा था और कांग्रेस विधायक किसानों की … Read more

किसी जमाने में संसद के सेंट्रल हॉल में चलता था देश का सुप्रीम कोर्ट

कई ऐतिहासिक आयोजनों का गवाह रहा संसद का सेंट्रल हॉल किसी जमाने में देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट को ठिकाना भी रहा है. 26 जनवरी, 1950 को सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के बाद 28 जनवरी का विधिवत उद्घाटन सेंट्रल हॉल में ही हुआ. आठ साल तक कोर्ट सेंट्रल हॉल के ​एक हिस्से में चला. यहीं पर वकील जिरह करते थे और जज फैसले सुनाते थे. 1958 में सुप्रीम कोर्ट उस ​बिल्डिंग में शिफ्ट हो गया जहां अभी है. ससद के सेंट्रल हॉल में ही 1947 में अंग्रेजों ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु को सत्‍ता का हस्‍तांतरण किया था. कम ही लोगों को पता है … Read more

राजस्थान के पहले गौरक्षा सम्मेलन के पीछे गहलोत सरकार की क्या सियासत है?

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जादूगर कहा जाता है. राजनीति के जानकारों की मानें तो वे बड़ी सफाई से अपना एजेंडा लागू करते हैं, जिसकी विरोधियों को कानो-कान खबर नहीं होती है. बीते दो सालों में गहलोत ने अपना राजनीतिक कद और भी बड़ा कर लिया है. जिसके चलते वे पहले कांग्रेस के संगठन महासचिव के पद पर पहुंचे और विधानसभा चुनावों में मिली जीत के बाद अपनी राजनीतिक समझ के चलते तीसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. मुख्यमंत्री बनने के बाद गहलोत ने कई त्वरीत फैसले लिए और आम जन के बीच कांग्रेस की किसान और युवा हितैषी छवि गढ़ना शुरु कर दी. इन सभी के बीच मुख्यमंत्री … Read more

राजस्थान की विधानसभा पर भूत-प्रेतों का साया होने की चर्चा क्यों होती है?

जब राजस्थान की विधानसभा नए भवन में शिफ्ट होने के बाद कई विधायकों की मृत्यु और कई के जेल जाने के बाद यह चर्चा होती है कि इसमें भूत—प्रेतों का साया है. 14वीं विधानसभा अंतिम सत्र के अंतिम दिन बाकायदा इस पर लंबी चर्चा हुई. कुछ विधायकों ने गंभीर होकर इस मुद्दे का उठाया और कुछ ने मजाकिया लहजे में विधानसभा के भवन का शुद्धिकरण करने की मांग की. इस दौरान तत्कालीन मुख्य सचेतक कालू लाल गुर्जर ने दावा किया कि उन्होंने पंडितों और वास्तु विशेषज्ञों को विधानसभा भवन परिसर दिखाया था. उन्होंने कुछ उपाय बताए हैं, जिन्हें किया जाना चाहिए. हालां​​कि ऐसा कुछ किया नहीं गया. बता दें कि … Read more

कांग्रेस के किन दो नेताओं ने रची अशोक चांदना को मंत्री पद से हटाने की साजिश?

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में राज्यमंत्री अशोक चांदना की कुर्सी पर आया संकट टल गया है. जयपुर विद्युत वितरण निगम के अभियंता जेपी मीणा की शिकायत पर बूंदी जिले की नैनवां थाना पुलिस ने चांदना के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने करने का मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस के अनुसार चांदना के खिलाफ धारा 332, 353, 504 व एससी-एसटी एक्ट की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है. मामले की जांच सीआईडीसीबी जयपुर को भेजी गई है.

मामला दर्ज होने के बाद मंत्री चांदना के खिलाफ जयपुर विद्युत वितरण निगम के कर्मचारियों और मीणा समाज की ओर से जारी आंदोलन थम गया है. गौरतलब है कि युवा मामले एवं खेल राज्यमंत्री अशोक चांदना ने हिंडौली में जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों की शिकायत पर 5 फरवरी को काछौला फीडर के हेल्पर मुकेश सैनी को सस्पैंड करने को कहा था. मंत्री के कहने पर अभियंता जेपी मीणा ने सैनी को इसी दिन सस्पैंड कर दिया, लेकिन 12 फरवरी को मुख्य अभियंता क्षेमराज मीणा के आदेश के बाद अभियंता मीणा ने हेल्पर को काछौला के पास हरना फीडर पर लगा दिया.

अशोक चांदना जब 18 फरवरी को इलाके में पहुंचे तो ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि आपके कहने पर जो हेल्पर सस्पैंड हुआ उसे अभियंता जेपी मीणा ने आठ दिन बाद ही काछौला के पास हरना फीडर पर लगा दिया तो मंत्री भन्ना गए. उन्होंने तुरंत जयपुर विद्युत वितरण निगम के आला अधिकारियों और अभियंता मीणा को तलब किया. मीणा की मानें तो रात 9 बजे उनकी मंत्री से नैनवां हाईवे पर मुलाकात हुई जहां उन्होंने आते ही पूछा कि एसई कौन है‌? एक्सईएन कौन है? मैंने कहा कि मैं एक्सईएन हूं. इस पर मंत्री ने यह कहते हुए थप्पड़ जड़ दिया कि तूने उस कर्मचारी को वापस क्यों लगाया, गिरेबान पकड़कर जातिसूचक गालियां देने लगे.

इस घटना का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो बवाल मच गया. जयपुर विद्युत वितरण निगम के कर्मचारियों ने तो मंत्री चांदना के खिलाफ कार्रवाई करने और मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग को लेकर आंदोलन किया ही मीणा समाज भी लामबंद हो गया. शुरूआत में सरकार ने इस आंदोलन को दरकिनार किया, लेकिन तूल प​कड़ने पर कान खड़े हुए. सरकार के हरकत में आने की भनक लगते ही मंत्री चांदना अपनी कुर्सी बचाने के लिए सक्रिय हो गए. उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे से मिलकर अपना पक्ष रखा.

इस दौरान अशोक चांदना कई बार मीडिया के सामने आए. चांदना में हर बार यह दोहराया कि उन्होंने ना तो अभियंता जेपी मीणा के साथ मारपीट की और ना ही उन्हें गालियां दीं. वायरल ऑडियो में आवाज भी उनकी नहीं है. चांदना ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची जा रही है. उन्होंने अभियंता मीणा के साथ मारपीट और गालीबाजी की या नहीं, इसका खुलासा तो जांच में होगा, लेकिन यह रहस्य बरकरार है कि आखिरकार अशोक चांदना के खिलाफ साजिश रची किसने. कौन है इसका सूत्रधार?

‘पॉलिटॉक्स’ के पुख्ता सूत्रों के अनुसार अशोक चांदना के खिलाफ साजिश के सूत्रधार कांग्रेस के दो कद्दावर नेता हैं. हाड़ौती से ताल्लुक रखने वाले इन नेताओं में से एक वर्तमान में विधायक हैं और दूसरे को विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था. जब अशोक चांदना का कथित गाली और थप्पड़ कांड सामने आया तो इन दोनों नेताओं की बांछे खिल गईं. असल में पिछली कांग्रेस सरकार में विधानसभा में ऊंचे ओहदे पर रह चुके इन आदिवासी नेता को इस बार मंत्री पद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन नंबर नहीं आया. इन्हें लगता है कि चांदना के मंत्री बनने की वजह से उनका पत्ता कट गया. य​​दि चांदना की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो जाए तो उनकी लॉटरी लग सकती है.

जबकि दूसरे नेता राज्यमंत्री रह चुके हैं और इस बार भी उन्होंने विधानसभा चुनाव मंत्री बनने के ख्वाब के साथ लड़ा, लेकिन नजदीकी मुकाबले में हारने की वजह से इनका सपना चकनाचूर हो गया. इस हार के पीछे वे खुद के लचर प्रबंधन और रणनीति को जिम्मेदार मानने की बजाय अशोक चांदना की कथित कारसेवा पर ठीकरा फोड़ते हैं. इन्हें चांदना के मंत्री पद से हटने से कोई पद तो नहीं मिलता, लेकिन विधानसभा चुनाव में मिली हार का हिसाब जरूर चुकता हो जाता. इन दोनों नेताओं में पहले ने चांदना-अभियंता विवाद को जाति का रंग दिया. इनके इशारे पर ही मीणा समाज के लोगों ने अशोक चांदना के खिलाफ धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन सिलसिला शुरू किया, जो दो दिन बाद ही हाड़ौती के बाहर तक पहुंच गया.

वहीं, दूसरे नेता ने जयपुर विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को चांदना के खिलाफ आंदोलन करने के लिए उकसाया. ये नेता अधिकारियों को यह कहते हुए सुने गए कि आज गाली और थप्पड़ एक को मिले हैं, यदि मंत्री को सबक नहीं सिखाया तो सबको पांच साल तक ऐसी ही गुंडागर्दी झेलनी पड़ेगी. दोनों ने चांदना के पिता की पृष्ठभूमि को भी अधिकारियों के सामने ताजा किया. इन दोनों नेताओं के इशारे पर चांदना के खिलाफ जोरदार आंदोलन हुआ. इससे उनकी कुर्सी हिली जरूर, लेकिन आंच नहीं आई. अक्सर ‘हर गलती हिसाब मांगती है’ कहने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चांदना को ‘पहली गलती’ पर चेतावनी देकर बख्श दिया. गहलोत की इस मेहरबानी से चांदना के खिलाफ साजिश रचने वाले दोनों नेता हलकान हैं. दोनों अगले मौके की तलाश में जुट गए हैं. चांदना को भी इनकी भनक है. उन्होंने इन पुराने चावलों से निपटने का इंतजाम कर लिया है.