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काटें के समान चुभ रहे पायलट को निकालकर फेंकना चाहते हैं गहलोत ताकि कर सकें निरंकुश राज- कटारिया

28 जून 2022
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काटें के समान चुभ रहे पायलट को निकालकर फेंकना चाहते हैं गहलोत ताकि कर सकें निरंकुश राज- कटारिया

Politalks.News/Rajasthan. ‘सचिन पायलट के पास पब्लिक सपोर्ट है जबकि अशोक गहलोत और शांति धारीवाल में कोई दम नहीं, यही कारण है कि पायलट मुख्यमंत्री की नजरों में कांटे के समान चुभ रहे हैं, जिसे गहलोत निकालकर फेंकना चाहते हैं ताकि निरंकुश राज कर सकें….’ ये कहना है राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया का. सत्ता का संग्राम तो महाराष्ट्र में चल रहा है लेकिन राजस्थान में सियासी बयानबाजी अपने चरम पर है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा सचिन पायलट को लेकर दिए गए बयान को लेकर अब पायलट गुट ही नहीं विपक्षी दल भी मुखर हो चला है. उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बाद सोमवार को नेता … Read more

Politalks.News/Rajasthan. ‘सचिन पायलट के पास पब्लिक सपोर्ट है जबकि अशोक गहलोत और शांति धारीवाल में कोई दम नहीं, यही कारण है कि पायलट मुख्यमंत्री की नजरों में कांटे के समान चुभ रहे हैं, जिसे गहलोत निकालकर फेंकना चाहते हैं ताकि निरंकुश राज कर सकें….’ ये कहना है राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया का. सत्ता का संग्राम तो महाराष्ट्र में चल रहा है लेकिन राजस्थान में सियासी बयानबाजी अपने चरम पर है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा सचिन पायलट को लेकर दिए गए बयान को लेकर अब पायलट गुट ही नहीं विपक्षी दल भी मुखर हो चला है. उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बाद सोमवार को नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने भी सीएम गहलोत पर निशाना साधा है. बीजेपी नेता कटारिया ने सीएम गहलोत पर ही नहीं अपनी पार्टी में मुख्यमंत्री का ख्वाब सजाये बैठे कुछ दिग्गजों पर भी इशारों इशारों में तंज कसा है. कटारिया ने कहा कि, ‘मुख्यमंत्री की दावेदारी कोई भी कर सकता है लेकिन अंतिम फैसला केंद्रीय आलाकमान करेगा और उसमें जो भी बाधक बनेगा उसे मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया जाएगा.’

सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने सीएम गहलोत पर जमकर निशाना साधा और सचिन पायलट की तारीफ़ में कसीदे गड़े. दरअसल, सीएम गहलोत ने शनिवार को अपने सीकर दौरे के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि, ‘केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सचिन पायलट का नाम लेकर चूक कर दी अब तो और प्रूफ हो गया, ठप्पा लगा दिया आपने खुद ने कि आप उनके साथ हॉर्स ट्रेडिंग में शामिल थे.’ वहीं गहलोत के करीबी एवं कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल ने तो यहां तक कह दिया था कि, ‘मुख्यमंत्री ने सही कहा है और हमने तो देखा भी है.’ दोनों दिग्गजों के इस बयान पर गुलाब चंद कटारिया ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, ‘जिस प्रकार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके वफादार शांति धारीवाल सचिन पायलट को लेकर बयान दे रहे हैं, वह इस बात का संकेत है कि मुख्यमंत्री सचिन पायलट को बाहर निकाल कर फेंकना चाहते हैं.’

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भाजपा नेता गुलाब चंद कटारिया ने आगे कहा कि, ‘कांग्रेस आलाकमान को इस बात की जानकारी है कि राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के किसी नेता के पास यदि पब्लिकली सपोर्ट है तो वह सचिन पायलट ही है, जबकि गहलोत और धारीवाल समेत अन्य नेताओं में कोई दम नहीं है.’ वहीं पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली हार का जिक्र करते हुए कटारिया ने कहा कि, ‘सचिन पायलट के कारण ही दोबारा राजस्थान में हमारी सरकार नहीं बन पाई. पिछले चुनाव में पूरा समाज सचिन पायलट के साथ सपोर्ट में रहा था, जिसके चलते पूर्वी राजस्थान में भाजपा केवल एक ही सीट जीत पाई. यदि सचिन पायलट नहीं होते तो भाजपा वहां ज्यादा सीटें जीतकर अपनी सरकार बना लेती.’ कटारिया ने आगे कहा कि, ‘राजस्थान में कांग्रेस की सरकार सिर्फ इसलिए बनी क्यों उस समय कांग्रेस ने सचिन पायलट को बतौर मुख्यमंत्री की तरह प्रोजेक्ट किया, जिसके चलते जातिगत समीकरण बिगड़े और हमारी सीटें थोड़ी कम हो गई.’

जब कटारिया से सवाल पुछा गया कि क्या अगले चुनाव में भाजपा को सचिन पायलट की जरुरत है या फिर वे साथ आएंगे, तो कटारिया ने कहा कि, ‘भाजपा को सचिन पायलट को लाने की फिलहाल कोई आवश्यकता नहीं है. यह विचार जिसको आना होगा, वही करेगा.’ वहीं भाजपा में अंदरखाने चल रही गुटबाजी के बीच अब भाजपा नेता भी समझने लगे हैं पार्टी में एक नहीं कई मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं. जब पत्रकारों ने गुलाब चंद कटारिया से इससे जुड़ा सवाल पुछा तो उन्होंने कहा कि, ‘मुख्यमंत्री पद को लेकर दावेदारी तो कोई भी कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय केंद्रीय संसदीय बोर्ड और आलाकमान ही करते हैं लेकिन जो निर्णय केंद्र करता है, हम सब मिलकर उस पर काम करते हैं. आलाकमान के फैसले पर जो सवाल उठता है उसे दूध में से मक्खी की तरह निकालकर फेंक दिया जाता है.’

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सोमवार को जयपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कटारिया ने कहा कि ‘आज तक मुझे पार्टी ने जो भी काम दिया है, उसे माने सहर्ष स्वीकार किया है. मुझे नहीं लगता मुख्यमंत्री बनूंगा मैं 75 वर्ष अधिक का हो चूका हूं. पार्टी ने अब तक जो भी जिम्मेदारी उन्हें दी, उसे मैंने तन मन से निभाया है. भाजपा की कृपा और कार्यकर्ताओं के प्यार के कारण ही मैं आज यहां हूं लेकिन कुछ लोग अपने नशे में इस बात को भूल जाते हैं, ये उनका दुर्भाग्य है और पार्टी के लिए भी अच्छी बात नहीं है.’

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